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मंदसौर की महिलाओं ने 5 लाख से बनाया आत्मनिर्भरता मॉडल:लोन से शुरू किया लेमन, कच्ची केरी, आंवला जूस का बिजनेस, नोएडा, सूरत, बड़ौदा तक सप्लाई

मंदसौर की महिलाओं ने 5 लाख से बनाया आत्मनिर्भरता मॉडल:लोन से शुरू किया लेमन, कच्ची केरी, आंवला जूस का बिजनेस, नोएडा, सूरत, बड़ौदा तक सप्लाई

मंदसौर जिले के ग्राम पिपलिया कराडिया की महिलाओं ने ग्रामीण आजीविका मिशन की पहल से आत्मनिर्भरता की एक मिसाल पेश की है। ‘महाराणा स्वसहायता समूह’ ने 5 लाख रुपये के बैंक ऋण और अन्य सरकारी सहयोग से अपना व्यवसाय स्थापित किया है। यह समूह न केवल अपनी आर्थिक स्थिति मजबूत कर रहा है, बल्कि 10 अन्य लोगों के लिए भी रोजगार के अवसर सृजित कर रहा है। समूह को ग्रामीण आजीविका मिशन के तहत 5 लाख रुपये का बैंक ऋण, 1.5 लाख रुपये की सामुदायिक निवेश निधि और 10 हजार रुपये की चक्रीय राशि प्रदान की गई। इस वित्तीय सहायता ने समूह को व्यवसाय शुरू करने और उसका विस्तार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। समूह की महिलाएं प्राकृतिक और स्वादिष्ट जूस एवं शेक तैयार करती हैं। इनके उत्पादों में लेमन, जीरा, जिंजर लेमन, कच्ची केरी और आंवला जूस शामिल हैं। इसके अतिरिक्त, मिल्क शेक, बादाम शेक, राजभोग और शाही गुलाब शेक जैसे उत्पाद भी ग्राहकों के बीच लोकप्रिय हैं। आजीविका मिशन के मार्गदर्शन में, समूह ने स्थानीय बाजार से आगे बढ़कर राष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बनाई है। उज्जैन, भोपाल, दिल्ली, नोएडा, सूरत, बड़ौदा, चंडीगढ़ और गुरुग्राम जैसे शहरों में आयोजित मेलों में भाग लेकर समूह ने अपने उत्पादों को व्यापक पहचान दिलाई। वर्तमान में, समूह प्रति माह 25 से 30 हजार रुपये तक की शुद्ध अर्जित कर रहा है, जिससे इसकी वार्षिक आय लगभग 3 लाख रुपये तक पहुंच रही है। इस सफलता से समूह की 10 महिला सदस्य आर्थिक रूप से सशक्त हुई हैं, और 10 अन्य लोगों को प्रत्यक्ष रोजगार भी मिला है। ‘महाराणा स्वसहायता समूह’ की यह सफलता दर्शाती है कि सही मार्गदर्शन, सरकारी सहयोग और कड़ी मेहनत से ग्रामीण महिलाएं भी आत्मनिर्भर बन सकती हैं। यह समूह आज अन्य महिलाओं के लिए एक प्रेरणा स्रोत बनकर उभरा है और स्वरोजगार की दिशा में नई राह दिखा रहा है।

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मंदसौर जिले के ग्राम पिपलिया कराडिया की महिलाओं ने ग्रामीण आजीविका मिशन की पहल से आत्मनिर्भरता की एक मिसाल पेश की है। ‘महाराणा स्वसहायता समूह’ ने 5 लाख रुपये के बैंक ऋण और अन्य सरकारी सहयोग से अपना व्यवसाय स्थापित किया है। यह समूह न केवल अपनी आर्थिक स्थिति मजबूत कर रहा है, बल्कि 10 अन्य लोगों के लिए भी रोजगार के अवसर सृजित कर रहा है। समूह को ग्रामीण आजीविका मिशन के तहत 5 लाख रुपये का बैंक ऋण, 1.5 लाख रुपये की सामुदायिक निवेश निधि और 10 हजार रुपये की चक्रीय राशि प्रदान की गई। इस वित्तीय सहायता ने समूह को व्यवसाय शुरू करने और उसका विस्तार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। समूह की महिलाएं प्राकृतिक और स्वादिष्ट जूस एवं शेक तैयार करती हैं। इनके उत्पादों में लेमन, जीरा, जिंजर लेमन, कच्ची केरी और आंवला जूस शामिल हैं। इसके अतिरिक्त, मिल्क शेक, बादाम शेक, राजभोग और शाही गुलाब शेक जैसे उत्पाद भी ग्राहकों के बीच लोकप्रिय हैं। आजीविका मिशन के मार्गदर्शन में, समूह ने स्थानीय बाजार से आगे बढ़कर राष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बनाई है। उज्जैन, भोपाल, दिल्ली, नोएडा, सूरत, बड़ौदा, चंडीगढ़ और गुरुग्राम जैसे शहरों में आयोजित मेलों में भाग लेकर समूह ने अपने उत्पादों को व्यापक पहचान दिलाई। वर्तमान में, समूह प्रति माह 25 से 30 हजार रुपये तक की शुद्ध अर्जित कर रहा है, जिससे इसकी वार्षिक आय लगभग 3 लाख रुपये तक पहुंच रही है। इस सफलता से समूह की 10 महिला सदस्य आर्थिक रूप से सशक्त हुई हैं, और 10 अन्य लोगों को प्रत्यक्ष रोजगार भी मिला है। ‘महाराणा स्वसहायता समूह’ की यह सफलता दर्शाती है कि सही मार्गदर्शन, सरकारी सहयोग और कड़ी मेहनत से ग्रामीण महिलाएं भी आत्मनिर्भर बन सकती हैं। यह समूह आज अन्य महिलाओं के लिए एक प्रेरणा स्रोत बनकर उभरा है और स्वरोजगार की दिशा में नई राह दिखा रहा है।

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