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अमेरिकी सेना ने 12 साल बाद सीरिया छोड़ा:जॉर्डन लौट रहे सैनिक, सरकार बोली- अब देश में एक ही प्रशासन चलेगा

अमेरिकी सेना ने 12 साल बाद सीरिया छोड़ा:जॉर्डन लौट रहे सैनिक, सरकार बोली- अब देश में एक ही प्रशासन चलेगा

करीब 12 साल की सैन्य मौजूदगी के बाद अमेरिका ने सीरिया से अपने सभी सैनिक और ठिकाने खाली कर दिए। अप्रैल 2026 में हसाका के कसराक एयरबेस से आखिरी अमेरिकी काफिला निकल गया। इसके बाद सीरियाई सरकार ने सभी बेस अपने कब्जे में ले लिए। सीरियाई विदेश मंत्रालय के मुताबिक, यह कदम देश को एकजुट करने और पूरे इलाके पर सरकार का नियंत्रण स्थापित करने की दिशा में बड़ा मोड़ है। अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने पुष्टि की कि करीब 2000 सैनिक जॉर्डन जा रहे है। अमेरिका ने हसाका, रुमैलान और देइर एज-जोर में मौजूद कम से कम सात बड़े ठिकाने खाली किए। आखिरी ठिकाना कसराक एयरबेस था। अब इस पर सीरियाई सेना का नियंत्रण है। सीरियाई सरकार और SDF के बीच समझौता इस बीच, सीरिया सरकार और SDF के बीच हुए समझौते के बाद कुर्द लड़ाकों को राष्ट्रीय सेना में शामिल किया जा रहा है। हसाका और क़ामिशली जैसे शहरों में सरकारी बल तैनात हो चुके हैं और सीमाई इलाकों पर भी दमिश्क का नियंत्रण बढ़ा है। इसी साल दोनों पक्षों के बीच झड़पें भी हुई थीं, जिसके बाद मार्च में एक नया समझौता हुआ। इसके तहत SDF और कुर्द प्रशासनिक ढांचे को धीरे-धीरे राज्य में शामिल करने की प्रक्रिया शुरू हुई। सीरिया ने हाल ही में अंतरराष्ट्रीय एंटी-ISIL गठबंधन में शामिल होकर अपनी भूमिका बदली है। इससे अमेरिका के लिए सीरिया में सैन्य मौजूदगी का आधार कमजोर हुआ और अब वह क्षेत्र में अपनी रणनीति को नए सिरे से तय कर रहा है। SDF एक कुर्द-नेतृत्व वाला गठबंधन है, जिसे 2015 में बनाया गया था और इसमें कुर्द, अरब और दूसरे स्थानीय समूह शामिल हैं। सीरिया के गृहयुद्ध के दौरान जब सरकार कमजोर हुई, तब कुर्द लड़ाकों ने उत्तर-पूर्वी इलाकों पर कब्जा कर लिया। बाद में यही SDF के रूप में मजबूत ताकत बन गया। अमेरिका की वापसी से SDF पर असर अमेरिका के हटने के बाद सबसे बड़ा असर सीरियन डेमोक्रेटिक फोर्सेस (SDF) पर पड़ा है। पिछले एक दशक में उत्तर-पूर्वी सीरिया के बड़े हिस्से पर इसी संगठन का नियंत्रण रहा था। यह पूरी तरह अमेरिकी समर्थन पर टिका हुआ था। हालांकि SDF और सीरियाई सरकार के बीच रिश्ते बेहतर हो रहे हैं। सीरियाई राष्ट्रपति अहमद अल-शारा ने दमिश्क में SDF के कमांडर मजलूम अब्दी और राजनीतिक प्रमुख इलहम अहमद से मुलाकात की है। विदेश मंत्री असाद हसन अल-शैबानी भी मौजूद थे। यह बैठक SDF को राष्ट्रीय ढांचे में शामिल करने की प्रक्रिया का हिस्सा थी। इससे पहले जनवरी 2025 में दमिश्क और SDF के बीच समझौता हुआ था। इसके तहत कुर्द लड़ाकों को सीरियाई सेना में शामिल किया जा रहा है। सीमा चौकियों और सरकारी संस्थानों का नियंत्रण दमिश्क को सौंपा जाएगा। अमेरिका की वापसी टर्निग पॉइंट साबित हुई अमेरिका की वापसी इस पूरे घटनाक्रम की सबसे बड़ी टर्निंग पॉइंट साबित हुई। जब तक अमेरिकी सैन्य ठिकाने मौजूद थे, SDF खुद को सुरक्षित मानता था। वह एक तरह से स्वतंत्र ताकत की तरह काम कर रहा था। जैसे ही अमेरिका ने अपने बेस खाली किए, SDF अकेला पड़ गया और उसे सीरियाई सरकार की शर्तें माननी पड़ीं। इसका सीधा असर संसाधनों पर पड़ा। सीरिया के बड़े तेल और गैस क्षेत्र, जैसे अल-उमर और कोनिको, जो पहले SDF के नियंत्रण में थे, अब सरकार के हाथ में आने लगे। इससे उसकी आर्थिक स्थिति मजबूत हुई। तुर्किये का दबाव भी एक बड़ा फैक्टर रहा, क्योंकि तुर्किये SDF को आतंकवादी संगठन मानता है।। अमेरिका की मौजूदगी में तुर्किये खुलकर कार्रवाई नहीं कर पा रहा था। उसके हटते ही SDF को संभावित हमले का खतरा बढ़ गया। इसी दबाव और बदलते हालात ने SDF को सरकार के साथ समझौते की राह पर ला दिया। अमेरिका के जाने के बाद सीरिया में सुरक्षा की पूरी जिम्मेदारी सरकार पर है। ISIS के बचे हुए नेटवर्क अब भी सक्रिय हैं और खतरा पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है। अमेरिका और सीरिया के संबंध में सुधार हो रहे अमेरिका और सीरिया के संबंध दशकों तक तनावपूर्ण रहे, लेकिन दिसंबर 2024 में बशर अल-असद की सत्ता गिरने के बाद इनमें तेजी से सुधार हुआ। मई 2025 में सऊदी अरब में ट्रम्प और शरा की पहली मुलाकात हुई, जिसके बाद अमेरिका ने सीरिया पर लगे अधिकांश प्रतिबंध हटाने की घोषणा की। अमेरिका और सीरिया के राजनयिक संबंधों की शुरुआत 1835 में हुई थी। हालांकि, 2011 में शुरू हुए सीरियाई गृहयुद्ध के बाद हालात बदले। 2012 में अमेरिका ने दमिश्क से अपने राजनयिक संबंध तोड़ लिए और सीरिया को आतंकवाद प्रायोजक राज्य घोषित किया। असद सरकार पर मानवाधिकार उल्लंघन, रासायनिक हथियारों के इस्तेमाल और ईरान और हिजबुल्लाह को समर्थन देने के आरोप लगे। अमेरिका ने सीरियाई विपक्ष का समर्थन किया और 2014 से इस्लामिक स्टेट (ISIS) के खिलाफ सैन्य अभियान शुरू किया। इसके तहत पूर्वी सीरिया में सैकड़ों अमेरिकी सैनिक तैनात किए गए। —————————- ये खबर भी पढ़ें… अमेरिका में परमाणु-स्पेस पर रिसर्च करने वाले 5 वैज्ञानिक गायब:5 की रहस्यमय हालत में मौत, ट्रम्प सरकार बोली- मामले की जांच करेंगे अमेरिका में न्यूक्लियर और स्पेस रिसर्च से जुड़े वैज्ञानिकों की मौत और गुमशुदगी के मामलों पर अब व्हाइट हाउस सवालों के घेरे में है। 2023 से अब तक ऐसे 10 मामले सामने आए हैं, जिनमें वैज्ञानिक या अधिकारी या तो लापता हो गए या संदिग्ध हालात में मरे। बुधवार को व्हाइट हाउस ब्रीफिंग में पहली बार प्रेस सचिव कैरोलिन लेविट से इन घटनाओं पर सवाल पूछा गया। जवाब में उन्होंने कहा, “मैंने अभी संबंधित एजेंसियों से इस बारे में बात नहीं की है। मैं ऐसा करूंगी और आपको जवाब दूंगी।” पूरी खबर पढ़ें…

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अमेरिकी सेना ने 12 साल बाद सीरिया छोड़ा:जॉर्डन लौट रहे सैनिक, सरकार बोली- अब देश में एक ही प्रशासन चलेगा

करीब 12 साल की सैन्य मौजूदगी के बाद अमेरिका ने सीरिया से अपने सभी सैनिक और ठिकाने खाली कर दिए। अप्रैल 2026 में हसाका के कसराक एयरबेस से आखिरी अमेरिकी काफिला निकल गया। इसके बाद सीरियाई सरकार ने सभी बेस अपने कब्जे में ले लिए। सीरियाई विदेश मंत्रालय के मुताबिक, यह कदम देश को एकजुट करने और पूरे इलाके पर सरकार का नियंत्रण स्थापित करने की दिशा में बड़ा मोड़ है। अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने पुष्टि की कि करीब 2000 सैनिक जॉर्डन जा रहे है। अमेरिका ने हसाका, रुमैलान और देइर एज-जोर में मौजूद कम से कम सात बड़े ठिकाने खाली किए। आखिरी ठिकाना कसराक एयरबेस था। अब इस पर सीरियाई सेना का नियंत्रण है। सीरियाई सरकार और SDF के बीच समझौता इस बीच, सीरिया सरकार और SDF के बीच हुए समझौते के बाद कुर्द लड़ाकों को राष्ट्रीय सेना में शामिल किया जा रहा है। हसाका और क़ामिशली जैसे शहरों में सरकारी बल तैनात हो चुके हैं और सीमाई इलाकों पर भी दमिश्क का नियंत्रण बढ़ा है। इसी साल दोनों पक्षों के बीच झड़पें भी हुई थीं, जिसके बाद मार्च में एक नया समझौता हुआ। इसके तहत SDF और कुर्द प्रशासनिक ढांचे को धीरे-धीरे राज्य में शामिल करने की प्रक्रिया शुरू हुई। सीरिया ने हाल ही में अंतरराष्ट्रीय एंटी-ISIL गठबंधन में शामिल होकर अपनी भूमिका बदली है। इससे अमेरिका के लिए सीरिया में सैन्य मौजूदगी का आधार कमजोर हुआ और अब वह क्षेत्र में अपनी रणनीति को नए सिरे से तय कर रहा है। SDF एक कुर्द-नेतृत्व वाला गठबंधन है, जिसे 2015 में बनाया गया था और इसमें कुर्द, अरब और दूसरे स्थानीय समूह शामिल हैं। सीरिया के गृहयुद्ध के दौरान जब सरकार कमजोर हुई, तब कुर्द लड़ाकों ने उत्तर-पूर्वी इलाकों पर कब्जा कर लिया। बाद में यही SDF के रूप में मजबूत ताकत बन गया। अमेरिका की वापसी से SDF पर असर अमेरिका के हटने के बाद सबसे बड़ा असर सीरियन डेमोक्रेटिक फोर्सेस (SDF) पर पड़ा है। पिछले एक दशक में उत्तर-पूर्वी सीरिया के बड़े हिस्से पर इसी संगठन का नियंत्रण रहा था। यह पूरी तरह अमेरिकी समर्थन पर टिका हुआ था। हालांकि SDF और सीरियाई सरकार के बीच रिश्ते बेहतर हो रहे हैं। सीरियाई राष्ट्रपति अहमद अल-शारा ने दमिश्क में SDF के कमांडर मजलूम अब्दी और राजनीतिक प्रमुख इलहम अहमद से मुलाकात की है। विदेश मंत्री असाद हसन अल-शैबानी भी मौजूद थे। यह बैठक SDF को राष्ट्रीय ढांचे में शामिल करने की प्रक्रिया का हिस्सा थी। इससे पहले जनवरी 2025 में दमिश्क और SDF के बीच समझौता हुआ था। इसके तहत कुर्द लड़ाकों को सीरियाई सेना में शामिल किया जा रहा है। सीमा चौकियों और सरकारी संस्थानों का नियंत्रण दमिश्क को सौंपा जाएगा। अमेरिका की वापसी टर्निग पॉइंट साबित हुई अमेरिका की वापसी इस पूरे घटनाक्रम की सबसे बड़ी टर्निंग पॉइंट साबित हुई। जब तक अमेरिकी सैन्य ठिकाने मौजूद थे, SDF खुद को सुरक्षित मानता था। वह एक तरह से स्वतंत्र ताकत की तरह काम कर रहा था। जैसे ही अमेरिका ने अपने बेस खाली किए, SDF अकेला पड़ गया और उसे सीरियाई सरकार की शर्तें माननी पड़ीं। इसका सीधा असर संसाधनों पर पड़ा। सीरिया के बड़े तेल और गैस क्षेत्र, जैसे अल-उमर और कोनिको, जो पहले SDF के नियंत्रण में थे, अब सरकार के हाथ में आने लगे। इससे उसकी आर्थिक स्थिति मजबूत हुई। तुर्किये का दबाव भी एक बड़ा फैक्टर रहा, क्योंकि तुर्किये SDF को आतंकवादी संगठन मानता है।। अमेरिका की मौजूदगी में तुर्किये खुलकर कार्रवाई नहीं कर पा रहा था। उसके हटते ही SDF को संभावित हमले का खतरा बढ़ गया। इसी दबाव और बदलते हालात ने SDF को सरकार के साथ समझौते की राह पर ला दिया। अमेरिका के जाने के बाद सीरिया में सुरक्षा की पूरी जिम्मेदारी सरकार पर है। ISIS के बचे हुए नेटवर्क अब भी सक्रिय हैं और खतरा पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है। अमेरिका और सीरिया के संबंध में सुधार हो रहे अमेरिका और सीरिया के संबंध दशकों तक तनावपूर्ण रहे, लेकिन दिसंबर 2024 में बशर अल-असद की सत्ता गिरने के बाद इनमें तेजी से सुधार हुआ। मई 2025 में सऊदी अरब में ट्रम्प और शरा की पहली मुलाकात हुई, जिसके बाद अमेरिका ने सीरिया पर लगे अधिकांश प्रतिबंध हटाने की घोषणा की। अमेरिका और सीरिया के राजनयिक संबंधों की शुरुआत 1835 में हुई थी। हालांकि, 2011 में शुरू हुए सीरियाई गृहयुद्ध के बाद हालात बदले। 2012 में अमेरिका ने दमिश्क से अपने राजनयिक संबंध तोड़ लिए और सीरिया को आतंकवाद प्रायोजक राज्य घोषित किया। असद सरकार पर मानवाधिकार उल्लंघन, रासायनिक हथियारों के इस्तेमाल और ईरान और हिजबुल्लाह को समर्थन देने के आरोप लगे। अमेरिका ने सीरियाई विपक्ष का समर्थन किया और 2014 से इस्लामिक स्टेट (ISIS) के खिलाफ सैन्य अभियान शुरू किया। इसके तहत पूर्वी सीरिया में सैकड़ों अमेरिकी सैनिक तैनात किए गए। —————————- ये खबर भी पढ़ें… अमेरिका में परमाणु-स्पेस पर रिसर्च करने वाले 5 वैज्ञानिक गायब:5 की रहस्यमय हालत में मौत, ट्रम्प सरकार बोली- मामले की जांच करेंगे अमेरिका में न्यूक्लियर और स्पेस रिसर्च से जुड़े वैज्ञानिकों की मौत और गुमशुदगी के मामलों पर अब व्हाइट हाउस सवालों के घेरे में है। 2023 से अब तक ऐसे 10 मामले सामने आए हैं, जिनमें वैज्ञानिक या अधिकारी या तो लापता हो गए या संदिग्ध हालात में मरे। बुधवार को व्हाइट हाउस ब्रीफिंग में पहली बार प्रेस सचिव कैरोलिन लेविट से इन घटनाओं पर सवाल पूछा गया। जवाब में उन्होंने कहा, “मैंने अभी संबंधित एजेंसियों से इस बारे में बात नहीं की है। मैं ऐसा करूंगी और आपको जवाब दूंगी।” पूरी खबर पढ़ें…

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