हिमाचल प्रदेश में कांग्रेस संगठन में महिलाओं की राजनीतिक भागीदारी को लेकर नई बहस छिड़ गई है। दरअसल, कांग्रेस ने 71 ब्लॉक में अध्यक्षों की नियुक्ति की है। इनमें में एक भी महिला को जगह नहीं मिली, जबकि राज्य में महिलाओं की आबादी लगभग 50 प्रतिशत है। वहीं अनुसूचित जाति (SC) वर्ग की आबादी करीब 25-27 प्रतिशत है, इस वर्ग से 17 ब्लॉक अध्यक्ष (लगभग 24%) तैनात किए गए, जबकि 5-6 प्रतिशत आबादी वाले अनुसूचित जनजाति (ST) वर्ग से 8 अध्यक्ष (लगभग 11%) लगाए गए। ऐसे में बड़ा सवाल यही उठ रहा है कि क्या कांग्रेस संगठन में एक भी महिला ऐसी नहीं थी, जिसे नेतृत्व की जिम्मेदारी सौंपी जा सके, या फिर यह सीधी अनदेखी का मामला है। विधायकों की सिफारिश पर नियुक्तियां: विप्लव ब्लॉक अध्यक्षों की नियुक्ति के बाद संगठन के भीतर ही विरोध के स्वर उठने लगे हैं। प्रदेश कांग्रेस की पूर्व अध्यक्ष विप्लव ठाकुर ने कहा कि अध्यक्ष बनाने का फैसला जल्दबाजी में लिया गया और इनकी तैनाती से पहले संगठन को मजबूत करने के पहलुओं पर गंभीरता से विचार नहीं किया गया। उन्होंने कहा कि ये नियुक्तियां विधायकों और बड़े नेताओं की सिफारिश पर की गई हैं, जिससे जमीनी स्तर का संतुलन प्रभावित हुआ है। प्रदेश प्रभारी की कार्यशैली पर उठाए सवाल विप्लव ठाकुर ने प्रदेश प्रभारी रजनी पाटिल की कार्यशैली पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि प्रभारी केवल शिमला में बैठक कर लौट जाती हैं, जबकि प्रदेश के 11 अन्य जिलों में जाकर जमीनी फीडबैक लेना चाहिए। उनका कहना है कि शिमला में केवल पहुंच वाले लोग ही अपनी बात रख पाते हैं, जिससे वास्तविक स्थिति सामने नहीं आ पाती। विप्लव ठाकुर की तरह अन्य महिला नेत्रियों ने भी नाम न छापने की शर्त पर सवाल उठाए और कहा कि यह सूची प्रदेश कांग्रेस प्रभारी रजनी पाटिल की मंजूरी से जारी की गई है। उन्हें इस बात का ध्यान रखना चाहिए था। आशा कुमारी बोलीं- महिला कांग्रेस में मिलेगा स्थान वहीं, पूर्व मंत्री आशा कुमारी ने कहा कि भले ही महिलाओं को ब्लॉक अध्यक्ष नहीं बनाया गया, लेकिन उन्हें महिला कांग्रेस कमेटी में प्रतिनिधित्व दिया जाएगा। 33% आरक्षण की चर्चा के बीच बढ़ी बहस कांग्रेस संगठन में इसे लेकर असंतोष है। प्रदेश कांग्रेस के नेतृत्व पर भी सवाल उठ रहे हैं क्योंकि यह नियुक्तियां ऐसे समय में हुई हैं, जब राष्ट्रीय स्तर पर महिलाओं को राजनीति में आगे लाने के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण देने को लेकर चर्चा हो रही है। पंचायतों में 52 फीसदी से ज्यादा महिलाएं जीतकर आती है हिमाचल की पंचायतों में महिलाओं को 50 फीसदी आरक्षण है। इस वजह से पंचयातों में लगभग 52 फीसदी से अधिक महिलाएं चुनाव जीतकर आती है क्योंकि कुछ महिलाएं एससी, कुछ एसटी, कुछ ओबीसी कोटे तो कई ओपन सीट से भी चुनाव जीतकर आती है। इसी तरह, मौजूदा विधानसभा में भी कांग्रेस की दो महिला विधायक है।














































