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USS George Bush Africa Circumnavigate Gulf

USS George Bush Africa Circumnavigate Gulf

वॉशिंगटन डीसी3 मिनट पहले

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समुद्र में दुनिया के सबसे ताकतवर जंगी जहाजों में शामिल अमेरिका का विशाल एयरक्राफ्ट कैरियर USS जॉर्ज एचडब्ल्यू बुश सीधा रास्ता छोड़कर लंबा चक्कर लगा रहा है।

यह जहाज अब डेढ़ गुना ज्यादा दूरी तय करते हुए अफ्रीका का पूरा चक्कर लगाकर ईरान के करीब पहुंच रहा है। रिपोर्ट्स के मुताबिक रेड सी का रास्ता हूती विद्रोहियोंं क खतरे से भरा है। जिससे ही बचने के लिए यह अमेरिकी सुपरकैरियर लंबा रास्ता लेने को मजबूर है।

फोर्ब्स की रिपोर्ट के मुताबिक अमेरिकी कैरियर जिब्राल्टर, भूमध्य सागर और स्वेज नहर होते हुए रेड सी से गुजरते हैं। लेकिन इस बार अमेरिकी नौसेना ने यह रास्ता नहीं चुना है।

इस कैरियर के साथ तीन डेस्ट्रॉयर और करीब 6,000 नाविक हैं। दो अमेरिकी अधिकारियों ने AP को बताया कि यह स्ट्राइक ग्रुप मिडिल ईस्ट तैनाती के लिए रवाना हुआ है।

यमन के हूती विद्रोहियों से डरा अमेरिका

इस सबसे ताकतवर माने जाने अमेरिकी जहाज का इतना लंबा रूट लेना कोई आम बात नहीं है। पेंटागन ने आधिकारिक तौर पर वजह नहीं बताई है, लेकिन संकेत साफ हैं कि अफ्रीका का रास्ता लेने से यह जहाज लाल सागर और बाब-अल-मंदेब स्ट्रेट से बच रहा है।

हाल के सालों में इस इलाके को यमन के हूती विद्रोही ने असुरक्षित बना दिया है। इन हूती विद्रोहियों को ईरान का समर्थन है और पहले भी वे लाल सागर और बाब-अल-मंदेब स्ट्रेट जैसे अहम समुद्री रास्तों पर ड्रोन और मिसाइल हमले कर चुके हैं। यही वजह है कि दुनिया की सबसे ताकतवर नौसेना भी अब उस रास्ते से जाने से बच रही है।

2024 और 2025 में हूती हमलों में अमेरिकी और व्यापारिक जहाजों को निशाना बनाया गया था। हाल के महीनों में भी उन्होंने हमले फिर शुरू करने की धमकी दी है, जिससे यह इलाका असुरक्षित बना हुआ है।

बाब-अल-मंदेब स्ट्रेट से बच रहा है अमेरिकी जहाज

बाब-अल-मंदेब स्ट्रेट दुनिया के सबसे अहम समुद्री रास्तों में गिना जाता है। यह रेड सी को अदन की खाड़ी से जोड़ता है और हर साल करीब 20 हजार जहाज यहां से गुजरते हैं।

वैश्विक व्यापार का लगभग 10% इसी रास्ते से होता है, खासकर तेल और गैस की सप्लाई के लिए यह बेहद जरूरी है। यह रास्ता भौगोलिक रूप से भी चुनौतीपूर्ण है। इसकी सबसे संकरी जगह करीब 32 किलोमीटर चौड़ी है और यह दो हिस्सों में बंटा है।

एक गहरा और चौड़ा रास्ता, पश्चिमी डक्ट-एल-मयून चैनल करीब 16 मील चौड़ा है जहां बड़े जहाज चलते हैं। दूसरा संकरा रास्ता पूर्वी चैनल बाब इस्कंदर करीब दो मील चौड़ा है जिसका इस्तेमाल छोटे जहाज करते हैं।

पहले यहां खतरा प्राकृतिक कारणों जैसे चट्टानों और तेज हवाओं से था, लेकिन अब सबसे बड़ा खतरा बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव से बन गया है।

मिडिल ईस्ट जा रहा अमेरिकी वॉरशिप

USS जॉर्ज एचडब्ल्यू बुश अमेरिका का 10वां और आखिरी निमिट्ज क्लास न्यूक्लियर पावर्ड सुपरकैरियर है। निमिट्ज अमेरिका के सबसे बड़े और सबसे ताकतवर युद्धपोतों की एक खास श्रेणी (क्लास) है, जो परमाणु ऊर्जा से चलते हैं और जिन पर लड़ाकू विमान तैनात होते हैं।

यह जहाज करीब 6000 नाविकों और एयरक्रू के साथ तैनात है और इसके साथ तीन डेस्ट्रॉयर भी चल रहे हैं। मार्च के आखिर में यह अमेरिका के नॉरफोक बेस से रवाना हुआ था और हाल ही में नामीबिया के तट के पास देखा गया।

रिपोर्ट्स के मुताबिक यह मिडिल ईस्ट की ओर जा रहा है। जहां यह USS अब्राहम लिंकन के साथ जुड़ सकता है, जो फरवरी से ही उस इलाके में ऑपरेशन कर रहा है।

एक और सुपरकैरियर की मौजूदगी

इसी बीच अमेरिका का सबसे नया और सबसे बड़ा सुपरकैरियर USS जेराल्ड आर फोर्ड भी इस क्षेत्र के पास तैनात है।

यह हाल ही में क्रोएशिया के स्प्लिट से निकलकर पूर्वी भूमध्य सागर में ऑपरेशन चला रहा है। हालांकि यह साफ नहीं है कि यह स्वेज नहर पार करके रेड सी में जाएगा या नहीं, क्योंकि वहां का खतरा अभी भी बना हुआ है।

इस जहाज में मार्च में आग लगने की घटना हुई थी, जिसके बाद मरम्मत के लिए इसे क्रेट और फिर स्प्लिट ले जाया गया था। अब यह दोबारा एक्टिव हो चुका है।

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समुद्र में दुनिया के सबसे ताकतवर जंगी जहाजों में शामिल अमेरिका का विशाल एयरक्राफ्ट कैरियर USS जॉर्ज एचडब्ल्यू बुश सीधा रास्ता छोड़कर लंबा चक्कर लगा रहा है।

यह जहाज अब डेढ़ गुना ज्यादा दूरी तय करते हुए अफ्रीका का पूरा चक्कर लगाकर ईरान के करीब पहुंच रहा है। रिपोर्ट्स के मुताबिक रेड सी का रास्ता हूती विद्रोहियोंं क खतरे से भरा है। जिससे ही बचने के लिए यह अमेरिकी सुपरकैरियर लंबा रास्ता लेने को मजबूर है।

फोर्ब्स की रिपोर्ट के मुताबिक अमेरिकी कैरियर जिब्राल्टर, भूमध्य सागर और स्वेज नहर होते हुए रेड सी से गुजरते हैं। लेकिन इस बार अमेरिकी नौसेना ने यह रास्ता नहीं चुना है।

इस कैरियर के साथ तीन डेस्ट्रॉयर और करीब 6,000 नाविक हैं। दो अमेरिकी अधिकारियों ने AP को बताया कि यह स्ट्राइक ग्रुप मिडिल ईस्ट तैनाती के लिए रवाना हुआ है।

यमन के हूती विद्रोहियों से डरा अमेरिका

इस सबसे ताकतवर माने जाने अमेरिकी जहाज का इतना लंबा रूट लेना कोई आम बात नहीं है। पेंटागन ने आधिकारिक तौर पर वजह नहीं बताई है, लेकिन संकेत साफ हैं कि अफ्रीका का रास्ता लेने से यह जहाज लाल सागर और बाब-अल-मंदेब स्ट्रेट से बच रहा है।

हाल के सालों में इस इलाके को यमन के हूती विद्रोही ने असुरक्षित बना दिया है। इन हूती विद्रोहियों को ईरान का समर्थन है और पहले भी वे लाल सागर और बाब-अल-मंदेब स्ट्रेट जैसे अहम समुद्री रास्तों पर ड्रोन और मिसाइल हमले कर चुके हैं। यही वजह है कि दुनिया की सबसे ताकतवर नौसेना भी अब उस रास्ते से जाने से बच रही है।

2024 और 2025 में हूती हमलों में अमेरिकी और व्यापारिक जहाजों को निशाना बनाया गया था। हाल के महीनों में भी उन्होंने हमले फिर शुरू करने की धमकी दी है, जिससे यह इलाका असुरक्षित बना हुआ है।

बाब-अल-मंदेब स्ट्रेट से बच रहा है अमेरिकी जहाज

बाब-अल-मंदेब स्ट्रेट दुनिया के सबसे अहम समुद्री रास्तों में गिना जाता है। यह रेड सी को अदन की खाड़ी से जोड़ता है और हर साल करीब 20 हजार जहाज यहां से गुजरते हैं।

वैश्विक व्यापार का लगभग 10% इसी रास्ते से होता है, खासकर तेल और गैस की सप्लाई के लिए यह बेहद जरूरी है। यह रास्ता भौगोलिक रूप से भी चुनौतीपूर्ण है। इसकी सबसे संकरी जगह करीब 32 किलोमीटर चौड़ी है और यह दो हिस्सों में बंटा है।

एक गहरा और चौड़ा रास्ता, पश्चिमी डक्ट-एल-मयून चैनल करीब 16 मील चौड़ा है जहां बड़े जहाज चलते हैं। दूसरा संकरा रास्ता पूर्वी चैनल बाब इस्कंदर करीब दो मील चौड़ा है जिसका इस्तेमाल छोटे जहाज करते हैं।

पहले यहां खतरा प्राकृतिक कारणों जैसे चट्टानों और तेज हवाओं से था, लेकिन अब सबसे बड़ा खतरा बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव से बन गया है।

मिडिल ईस्ट जा रहा अमेरिकी वॉरशिप

USS जॉर्ज एचडब्ल्यू बुश अमेरिका का 10वां और आखिरी निमिट्ज क्लास न्यूक्लियर पावर्ड सुपरकैरियर है। निमिट्ज अमेरिका के सबसे बड़े और सबसे ताकतवर युद्धपोतों की एक खास श्रेणी (क्लास) है, जो परमाणु ऊर्जा से चलते हैं और जिन पर लड़ाकू विमान तैनात होते हैं।

यह जहाज करीब 6000 नाविकों और एयरक्रू के साथ तैनात है और इसके साथ तीन डेस्ट्रॉयर भी चल रहे हैं। मार्च के आखिर में यह अमेरिका के नॉरफोक बेस से रवाना हुआ था और हाल ही में नामीबिया के तट के पास देखा गया।

रिपोर्ट्स के मुताबिक यह मिडिल ईस्ट की ओर जा रहा है। जहां यह USS अब्राहम लिंकन के साथ जुड़ सकता है, जो फरवरी से ही उस इलाके में ऑपरेशन कर रहा है।

एक और सुपरकैरियर की मौजूदगी

इसी बीच अमेरिका का सबसे नया और सबसे बड़ा सुपरकैरियर USS जेराल्ड आर फोर्ड भी इस क्षेत्र के पास तैनात है।

यह हाल ही में क्रोएशिया के स्प्लिट से निकलकर पूर्वी भूमध्य सागर में ऑपरेशन चला रहा है। हालांकि यह साफ नहीं है कि यह स्वेज नहर पार करके रेड सी में जाएगा या नहीं, क्योंकि वहां का खतरा अभी भी बना हुआ है।

इस जहाज में मार्च में आग लगने की घटना हुई थी, जिसके बाद मरम्मत के लिए इसे क्रेट और फिर स्प्लिट ले जाया गया था। अब यह दोबारा एक्टिव हो चुका है।

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