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सुबह के वक्त अच्छी नींद क्यों आती है? अलार्म बजने के बाद भी नहीं खुलती आंख, जान लीजिए इसकी वजह

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Morning Sleep Causes: अक्सर आपने महसूस किया होगा कि सुबह के वक्त बहुत अच्छी नींद आती है और लोगों की आंख नहीं खुलती है. एक्सपर्ट्स की मानें तो इसकी वजह हमारे शरीर की सर्कैडियन रिदम, REM नींद की वृद्धि और हार्मोनल बदलाव होते हैं. सुबह के वक्त नींद हल्की, लेकिन आरामदायक होती है, जिससे व्यक्ति को ज्यादा संतुष्टि महसूस होती है.

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सुबह के वक्त अच्छी नींद आने के पीछे कई वजह होती हैं.

Deep Morning Sleep: हर मौसम में लोगों को सुबह के वक्त सोना सबसे अच्छा लगता है. अलार्म बजने के बावजूद सुबह-सुबह आंख नहीं खुलती है और सोने का मन करता है. खासतौर पर छोटे बच्चे सुबह उठने में सबसे ज्यादा नखरे करते हैं. लगभग हर उम्र के लोगों के साथ ऐसा होता है. कई बार ऐसा लगता है कि ऑफिस न जाकर नींद पूरी कर ली जाए. अधिकतर लोगों को लगता है कि अगर नींद पूरी नहीं होती है, तब ऐसा होता है. हालांकि सुबह के वक्त अच्छी नींद के पीछे शरीर की बायोलॉजिकल क्लॉक और हार्मोनल एक्टिविटीज का पूरा खेल है. चलिए जानते हैं कि सुबह-सुबह सुकूनभरी नींद क्यों आती है.

स्लीप फाउंडेशन की रिपोर्ट के मुताबिक सुबह के वक्त अच्छी नींद आने का सबसे पहला कारण हमारे शरीर की सर्कैडियन रिदम है. यह बॉडी की बायोलॉजिकल क्लॉक है, जो हमारे सोने-जागने के पैटर्न को कंट्रोल करती है. रात के समय यह हमें सोने के लिए तैयार करती है, जबकि सुबह के समय जागने के संकेत देती है. हालांकि दिलचस्प बात यह है कि सुबह के अंतिम घंटों में यह क्लॉक धीरे-धीरे नींद को हल्का करती है, जिससे हम रेपिड आई मूवमेंट (REM) स्लीप स्टेज में ज्यादा समय बिताते हैं. यही वह स्टेज है, जिसमें सपने आते हैं और नींद ज्यादा आरामदायक महसूस होती है.
सेहत, रिलेशनशिप, लाइफ या धर्म-ज्योतिष से जुड़ी है कोई निजी उलझन तो हमें करें WhatsApp, आपका नाम गोपनीय रखकर देंगे जानकारी.

REM स्लीप के बढ़ने से सुबह-सुबह सुकूनभरी नींद आती है. रात के पहले हिस्से में गहरी नींद ज्यादा होती है, जबकि सुबह के समय REM नींद का प्रतिशत बढ़ जाता है. REM नींद मानसिक रूप से ज्यादा सक्रिय होती है और इसमें व्यक्ति को आरामदायक व सुखद अनुभव होता है. इसी वजह से सुबह की नींद अधिक मीठी और सुकूनभरी लगती है. सुबह-सुबह अच्छी नींद आने का तीसरा सबसे बड़ा कारण हार्मोन का असर है. मेलाटोनिन और कोर्टिसोल हार्मोन्स इसकी बड़ी वजह हैं. रात में मेलाटोनिन हार्मोन का स्तर अधिक होता है, जो नींद को बढ़ावा देता है. सुबह होते-होते इसका स्तर घटने लगता है, जबकि कोर्टिसोल का स्तर बढ़ने लगता है, जो शरीर को जगाने में मदद करता है. हालांकि इस बदलाव के दौरान एक छोटा सा समय ऐसा होता है, जब दोनों हार्मोन संतुलन में होते हैं, जिससे नींद का अनुभव बहुत सुखद हो जाता है.

अगर कोई व्यक्ति रात में पर्याप्त नींद नहीं लेता है, तो उसका शरीर सुबह के समय अतिरिक्त नींद लेने की कोशिश करता है. यही वजह है कि छुट्टी वाले दिन या जब हमें देर तक सोने का मौका मिलता है, तब सुबह की नींद और भी ज्यादा गहरी और आरामदायक महसूस होती है. यह शरीर की एक तरह की रिकवरी प्रक्रिया होती है. इसके अलावा सुबह के समय आमतौर पर शांति, कम शोर और ठंडा मौसम होता है, जो नींद के लिए अनुकूल परिस्थितियां बनाता है. सूरज की हल्की रोशनी धीरे-धीरे शरीर को जगाने की प्रक्रिया शुरू करती है, जिससे नींद का अनुभव अचानक टूटने के बजाय धीरे-धीरे खत्म होता है और यह प्रक्रिया अधिक सुखद लगती है.

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अमित उपाध्याय

अमित उपाध्याय News18 Hindi की लाइफस्टाइल टीम के अनुभवी पत्रकार हैं, जिनके पास प्रिंट और डिजिटल मीडिया में 9 वर्षों से अधिक का अनुभव है। वे हेल्थ, वेलनेस और लाइफस्टाइल से जुड़ी रिसर्च-बेस्ड और डॉक्टर्स के इंटरव्…और पढ़ें

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सुबह के वक्त अच्छी नींद आने के पीछे कई वजह होती हैं.

Deep Morning Sleep: हर मौसम में लोगों को सुबह के वक्त सोना सबसे अच्छा लगता है. अलार्म बजने के बावजूद सुबह-सुबह आंख नहीं खुलती है और सोने का मन करता है. खासतौर पर छोटे बच्चे सुबह उठने में सबसे ज्यादा नखरे करते हैं. लगभग हर उम्र के लोगों के साथ ऐसा होता है. कई बार ऐसा लगता है कि ऑफिस न जाकर नींद पूरी कर ली जाए. अधिकतर लोगों को लगता है कि अगर नींद पूरी नहीं होती है, तब ऐसा होता है. हालांकि सुबह के वक्त अच्छी नींद के पीछे शरीर की बायोलॉजिकल क्लॉक और हार्मोनल एक्टिविटीज का पूरा खेल है. चलिए जानते हैं कि सुबह-सुबह सुकूनभरी नींद क्यों आती है.

स्लीप फाउंडेशन की रिपोर्ट के मुताबिक सुबह के वक्त अच्छी नींद आने का सबसे पहला कारण हमारे शरीर की सर्कैडियन रिदम है. यह बॉडी की बायोलॉजिकल क्लॉक है, जो हमारे सोने-जागने के पैटर्न को कंट्रोल करती है. रात के समय यह हमें सोने के लिए तैयार करती है, जबकि सुबह के समय जागने के संकेत देती है. हालांकि दिलचस्प बात यह है कि सुबह के अंतिम घंटों में यह क्लॉक धीरे-धीरे नींद को हल्का करती है, जिससे हम रेपिड आई मूवमेंट (REM) स्लीप स्टेज में ज्यादा समय बिताते हैं. यही वह स्टेज है, जिसमें सपने आते हैं और नींद ज्यादा आरामदायक महसूस होती है.
सेहत, रिलेशनशिप, लाइफ या धर्म-ज्योतिष से जुड़ी है कोई निजी उलझन तो हमें करें WhatsApp, आपका नाम गोपनीय रखकर देंगे जानकारी.

REM स्लीप के बढ़ने से सुबह-सुबह सुकूनभरी नींद आती है. रात के पहले हिस्से में गहरी नींद ज्यादा होती है, जबकि सुबह के समय REM नींद का प्रतिशत बढ़ जाता है. REM नींद मानसिक रूप से ज्यादा सक्रिय होती है और इसमें व्यक्ति को आरामदायक व सुखद अनुभव होता है. इसी वजह से सुबह की नींद अधिक मीठी और सुकूनभरी लगती है. सुबह-सुबह अच्छी नींद आने का तीसरा सबसे बड़ा कारण हार्मोन का असर है. मेलाटोनिन और कोर्टिसोल हार्मोन्स इसकी बड़ी वजह हैं. रात में मेलाटोनिन हार्मोन का स्तर अधिक होता है, जो नींद को बढ़ावा देता है. सुबह होते-होते इसका स्तर घटने लगता है, जबकि कोर्टिसोल का स्तर बढ़ने लगता है, जो शरीर को जगाने में मदद करता है. हालांकि इस बदलाव के दौरान एक छोटा सा समय ऐसा होता है, जब दोनों हार्मोन संतुलन में होते हैं, जिससे नींद का अनुभव बहुत सुखद हो जाता है.

अगर कोई व्यक्ति रात में पर्याप्त नींद नहीं लेता है, तो उसका शरीर सुबह के समय अतिरिक्त नींद लेने की कोशिश करता है. यही वजह है कि छुट्टी वाले दिन या जब हमें देर तक सोने का मौका मिलता है, तब सुबह की नींद और भी ज्यादा गहरी और आरामदायक महसूस होती है. यह शरीर की एक तरह की रिकवरी प्रक्रिया होती है. इसके अलावा सुबह के समय आमतौर पर शांति, कम शोर और ठंडा मौसम होता है, जो नींद के लिए अनुकूल परिस्थितियां बनाता है. सूरज की हल्की रोशनी धीरे-धीरे शरीर को जगाने की प्रक्रिया शुरू करती है, जिससे नींद का अनुभव अचानक टूटने के बजाय धीरे-धीरे खत्म होता है और यह प्रक्रिया अधिक सुखद लगती है.

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अमित उपाध्याय

अमित उपाध्याय News18 Hindi की लाइफस्टाइल टीम के अनुभवी पत्रकार हैं, जिनके पास प्रिंट और डिजिटल मीडिया में 9 वर्षों से अधिक का अनुभव है। वे हेल्थ, वेलनेस और लाइफस्टाइल से जुड़ी रिसर्च-बेस्ड और डॉक्टर्स के इंटरव्…और पढ़ें

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