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एबीपी ग्राउंड रिपोर्ट: दक्षिण दिनाजपुर में बंद पड़ी लाइब्रेरी बनी बेरोजगारी, शिक्षा संकट पर किससे आम जनता का साथ?

एबीपी ग्राउंड रिपोर्ट: दक्षिण दिनाजपुर में बंद पड़ी लाइब्रेरी बनी बेरोजगारी, शिक्षा संकट पर किससे आम जनता का साथ?

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एआई द्वारा उत्पन्न मुख्य बिंदु, न्यूज़ रूम द्वारा सत्यापित

  • शिक्षा, रोजगार की कमी से लोग नाराज, दिशाहीन।

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026: पहले चरण का नामांकन शोर शांत हो चुका है और अब 23 तारीख को पहले चरण का मतदान होना है। पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 की हलचल के बीच, बिजला जिला दक्षिण दिनाजपुर एक अलग तरह की हलचल से गुजर रहा है। यहां ऑक्सफोर्ड शोर के पीछे एक मानवीय संकट गहराता दिख रहा है, पुरानी और पारंपरिक लाइब्रेरी का बंद होना। शिक्षा का यह ढाँचागत ढाँचा धीरे-धीरे ख़त्म होता जा रहा है और स्थानीय लोग इसे सिर्फ तीन साल के लिए नहीं, बल्कि भविष्य के साथ-साथ पढ़ते हुए मान रहे हैं।

बालुराघाट से लेकर हिली तक का रास्ता इस संकट की गवाही देता है। सड़क किनारे लगे कई सरकारी पुस्तकालय अब बंद शटर और जंग किनारे के पीछे स्थित हैं। कभी जहां छात्र-छात्रा स्कायर में डूबे रहते थे, वहीं अब छात्रा पसरा है। एक स्थानीय यात्री छात्र हैं, ‘यह लाइब्रेरी सालभर बंद रहती है। पहले हम ‘नोटबुक’ लेकर अध्ययन करते थे।’ वहीं एक युवा छात्र ने कहा, ‘मुझे तो पता ही नहीं था कि यह लाइब्रेरी है।’

यह सिर्फ एक या दो जगह की कहानी नहीं है. जिले भर में 57 पुस्तकालयों में से अधिकांश या तो बंद हैं या बेहद खराब स्थिति में चल रहे हैं। स्थानीय सामाजिक कार्यकर्ता सूरज दास कर्मचारी हैं, ‘पिछले 10-15 वर्षों से पुस्तकालय बंद होने का डर था। अब हालात ये हैं कि लाइब्रेरी में करीब 90 प्रतिशत स्टाफ की भारी कमी है। कई जगह प्रोटोटाइप कर्मचारी ही काम कर रहे हैं।’

शिक्षा से गहरा संकट

स्थानीय शिक्षण वर्ग का मानना ​​है कि यह केवल वास्तुशिल्प का विनाश नहीं है, बल्कि सामाजिक-सांस्कृतिक पतन की शुरुआत है। यह लाइब्रेरी कभी सिर्फ कथावाचक का केंद्र नहीं रही, यह संवाद, विचार और समाज के निर्माण की जगह थी। अब उनका समापन एक पूरी पीढ़ी के उत्कृष्ट विकास पर प्रभाव डाल सकता है। दक्षिण दिनाजपुर जैसे पुरातात्विक जिले में, जहां पहले से ही पुस्तकालय की कमी है, वहां पुस्तकालय का महत्व और विकास हो रहा है, लेकिन स्थिर असमानताओं में यह पुरातात्विक संरचना ही दम तोड़ती नजर आ रही है।

यह भी पढ़ें: तमिलनाडु विधानसभा चुनाव 2026: पीएम मोदी पर बड़ा बयान, फिर दी सफाई, भड़की बीजेपी बोली- मांगो मार्जिन

झील क्षेत्र: प्रतिस्पर्धी प्रतिस्पर्धा, कई परतें

राजनीतिक रूप से यह जिला इस बार बेहद दिलचस्प ग्राहकों का गवाह है। मुख्य लड़ाई कैथोलिक कांग्रेस और भाजपा के बीच मनी जा रही है, लेकिन कांग्रेस और वाम दल भी अपना खोया आधार वापस पाने की कोशिश में हैं।

2021 विधानसभा चुनाव में कुल 6 मंजिलों में से 3 मंजिलें और 3 मंजिलें भाजपा में शामिल हुईं। कश्मीरी ने कुशमंडी, कुमारगंज और हरिरामपुर पर कब्जा कर लिया, जबकि बीजेपी ने बालुरघाट, तपन और गंगारामपुर पर कब्जा कर लिया। 2024 के चुनाव में दोनों दल अपने-अपने गढ़ से बाहर निकलने में सफल रहे, लेकिन इस बार अलग-अलग दिख रहे हैं।

बीजेपी का हमला: ‘पूरी तरह विफल सरकार’

जिले के भाजपा अध्यक्ष सुरजीत चौधरी का सरकार पर आरोप है कि स्वास्थ्य सेवाओं की हालत खराब है, राजमार्ग परियोजना भूमि अधिग्रहण के कारण रुकी हुई है और शिक्षा व्यवस्था खराब हो रही है। दक्षिण दिनाजपुर में वर्जिन पूरी तरह से विफल रही है। लाइब्रेरी की समस्या खुद बताएं कि सरकार की प्राथमिकताएं क्या हैं। बीजेपी का दावा है कि वह 2021 और 2024 के गठबंधन में इस बार बेहतर प्रदर्शन करेगी और जिलों में अपनी पकड़ मजबूत बनाएगी।

यह भी पढ़ें: ‘बंगाल-तमिलनाडु’ में ‘प्रमोशन का शोर’, अब 23 अप्रैल को अचानक आया फैसला

वैज्ञानिक का उत्तर: ‘राजनीतिक सिद्धांत’

वैश्विक इस मुद्दे को स्वीकार तो किया जाता है, लेकिन इसे चुनावी हथियार के रूप में पेश किये जाने का विरोध किया जाता है। बालुराघाट से प्रत्याशित अल्पास्था घोषा को सभी लोगों द्वारा नामांकित किया जाता है, लेकिन इसे दूर करने के लिए भविष्य में कदम रखा जाएगा। उन्होंने कहा, ‘भाजपा जब से बंगाल में दूसरे स्थान पर है, वह यहां की मजबूती की कोशिश कर रही है। ये खतरनाक है. बालुराघाट की अपनी एक पहचान थी, जो अब बदल रही है।’

निर्भय घोष का दावा है कि जातीय विभाजन और बाहरी हस्तक्षेप जैसे सामाजिक आंदोलन को लेकर जनता में असंतोष है, जो भाजपा के खिलाफ हो सकता है।

जमीनी हकीकत: नामांकित है, लेकिन दिशा अज्ञात है

जमीनी स्तर पर बात करने पर साफ होता है कि लोगों में पेपर-पिलिटरी शिक्षा, रोजगार और फुटपाथ-बिस्तरों को लेकर आती है, लेकिन यह पेपर किस राजनीतिक दिशा में जाएगा, यह अभी स्पष्ट नहीं है। एक कॉलेज के छात्र कहते हैं, ‘हमें लाइब्रेरी चाहिए, नौकरी चाहिए। नेता आते हैं, वादे करते हैं, लेकिन कुछ नहीं बदलते।’ एक स्थानीय व्यापारी का कहना है, ‘यहां निवेश नहीं हो रहा है।’ युवा बाहर जा रहे हैं. चुनाव में हम उसी को वोट देंगे जो कुछ ठोस होगा.’

दक्षिण दिनाजपुर का बड़ा सवाल

दक्षिण दिनाजपुर में इस बार का चुनाव सिर्फ नामांकन की लड़ाई नहीं है। यह विकास मॉडल, शिक्षा व्यवस्था और सामाजिक वर्गीकरण की दिशा तय करने वाला चुनाव बनाया जा रहा है। पश्चिम बंगाल के दक्षिण दिनाजपुर जिले में कुल छह विधानसभा क्षेत्र आते हैं और ये सभी बालुरघाट भी आंध्र प्रदेश में आते हैं। इनमें कुशमंडी (एससी), कुमारगंज, बालूरघाट, तपन (एसटी), गंगारामपुर (एससी) और हरिरामपुर शामिल हैं। ये सभी क्षेत्रीय क्षेत्र आगामी 2026 के पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के लिए अहम माने जा रहे हैं।

(रिपोर्टः दीपक घोष)

यह भी पढ़ें: एक्सक्लूसिव: ‘भ्रष्ट है टीएमसी, सुरक्षित नहीं है बंगाल’, ममता के नारे पर शिक्षा मंत्री, प्रधान मंत्री ने बताया बीजेपी के लिए क्या है मुद्दा

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एबीपी ग्राउंड रिपोर्ट: दक्षिण दिनाजपुर में बंद पड़ी लाइब्रेरी बनी बेरोजगारी, शिक्षा संकट पर किससे आम जनता का साथ?

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  • शिक्षा, रोजगार की कमी से लोग नाराज, दिशाहीन।

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बालुराघाट से लेकर हिली तक का रास्ता इस संकट की गवाही देता है। सड़क किनारे लगे कई सरकारी पुस्तकालय अब बंद शटर और जंग किनारे के पीछे स्थित हैं। कभी जहां छात्र-छात्रा स्कायर में डूबे रहते थे, वहीं अब छात्रा पसरा है। एक स्थानीय यात्री छात्र हैं, ‘यह लाइब्रेरी सालभर बंद रहती है। पहले हम ‘नोटबुक’ लेकर अध्ययन करते थे।’ वहीं एक युवा छात्र ने कहा, ‘मुझे तो पता ही नहीं था कि यह लाइब्रेरी है।’

यह सिर्फ एक या दो जगह की कहानी नहीं है. जिले भर में 57 पुस्तकालयों में से अधिकांश या तो बंद हैं या बेहद खराब स्थिति में चल रहे हैं। स्थानीय सामाजिक कार्यकर्ता सूरज दास कर्मचारी हैं, ‘पिछले 10-15 वर्षों से पुस्तकालय बंद होने का डर था। अब हालात ये हैं कि लाइब्रेरी में करीब 90 प्रतिशत स्टाफ की भारी कमी है। कई जगह प्रोटोटाइप कर्मचारी ही काम कर रहे हैं।’

शिक्षा से गहरा संकट

स्थानीय शिक्षण वर्ग का मानना ​​है कि यह केवल वास्तुशिल्प का विनाश नहीं है, बल्कि सामाजिक-सांस्कृतिक पतन की शुरुआत है। यह लाइब्रेरी कभी सिर्फ कथावाचक का केंद्र नहीं रही, यह संवाद, विचार और समाज के निर्माण की जगह थी। अब उनका समापन एक पूरी पीढ़ी के उत्कृष्ट विकास पर प्रभाव डाल सकता है। दक्षिण दिनाजपुर जैसे पुरातात्विक जिले में, जहां पहले से ही पुस्तकालय की कमी है, वहां पुस्तकालय का महत्व और विकास हो रहा है, लेकिन स्थिर असमानताओं में यह पुरातात्विक संरचना ही दम तोड़ती नजर आ रही है।

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बीजेपी का हमला: ‘पूरी तरह विफल सरकार’

जिले के भाजपा अध्यक्ष सुरजीत चौधरी का सरकार पर आरोप है कि स्वास्थ्य सेवाओं की हालत खराब है, राजमार्ग परियोजना भूमि अधिग्रहण के कारण रुकी हुई है और शिक्षा व्यवस्था खराब हो रही है। दक्षिण दिनाजपुर में वर्जिन पूरी तरह से विफल रही है। लाइब्रेरी की समस्या खुद बताएं कि सरकार की प्राथमिकताएं क्या हैं। बीजेपी का दावा है कि वह 2021 और 2024 के गठबंधन में इस बार बेहतर प्रदर्शन करेगी और जिलों में अपनी पकड़ मजबूत बनाएगी।

यह भी पढ़ें: ‘बंगाल-तमिलनाडु’ में ‘प्रमोशन का शोर’, अब 23 अप्रैल को अचानक आया फैसला

वैज्ञानिक का उत्तर: ‘राजनीतिक सिद्धांत’

वैश्विक इस मुद्दे को स्वीकार तो किया जाता है, लेकिन इसे चुनावी हथियार के रूप में पेश किये जाने का विरोध किया जाता है। बालुराघाट से प्रत्याशित अल्पास्था घोषा को सभी लोगों द्वारा नामांकित किया जाता है, लेकिन इसे दूर करने के लिए भविष्य में कदम रखा जाएगा। उन्होंने कहा, ‘भाजपा जब से बंगाल में दूसरे स्थान पर है, वह यहां की मजबूती की कोशिश कर रही है। ये खतरनाक है. बालुराघाट की अपनी एक पहचान थी, जो अब बदल रही है।’

निर्भय घोष का दावा है कि जातीय विभाजन और बाहरी हस्तक्षेप जैसे सामाजिक आंदोलन को लेकर जनता में असंतोष है, जो भाजपा के खिलाफ हो सकता है।

जमीनी हकीकत: नामांकित है, लेकिन दिशा अज्ञात है

जमीनी स्तर पर बात करने पर साफ होता है कि लोगों में पेपर-पिलिटरी शिक्षा, रोजगार और फुटपाथ-बिस्तरों को लेकर आती है, लेकिन यह पेपर किस राजनीतिक दिशा में जाएगा, यह अभी स्पष्ट नहीं है। एक कॉलेज के छात्र कहते हैं, ‘हमें लाइब्रेरी चाहिए, नौकरी चाहिए। नेता आते हैं, वादे करते हैं, लेकिन कुछ नहीं बदलते।’ एक स्थानीय व्यापारी का कहना है, ‘यहां निवेश नहीं हो रहा है।’ युवा बाहर जा रहे हैं. चुनाव में हम उसी को वोट देंगे जो कुछ ठोस होगा.’

दक्षिण दिनाजपुर का बड़ा सवाल

दक्षिण दिनाजपुर में इस बार का चुनाव सिर्फ नामांकन की लड़ाई नहीं है। यह विकास मॉडल, शिक्षा व्यवस्था और सामाजिक वर्गीकरण की दिशा तय करने वाला चुनाव बनाया जा रहा है। पश्चिम बंगाल के दक्षिण दिनाजपुर जिले में कुल छह विधानसभा क्षेत्र आते हैं और ये सभी बालुरघाट भी आंध्र प्रदेश में आते हैं। इनमें कुशमंडी (एससी), कुमारगंज, बालूरघाट, तपन (एसटी), गंगारामपुर (एससी) और हरिरामपुर शामिल हैं। ये सभी क्षेत्रीय क्षेत्र आगामी 2026 के पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के लिए अहम माने जा रहे हैं।

(रिपोर्टः दीपक घोष)

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