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20 MPs, MLAs Exit; 1 Remains Raghav Chadha Controversy

20 MPs, MLAs Exit; 1 Remains Raghav Chadha Controversy

राज्यसभा सांसद राघव चड्‌ढा आज (24 अप्रैल को) 2 सांसदों के साथ BJP में शामिल हो गए। उन्होंने कहा कि हमारे साथ 7 सांसद हैं, जिन्होंने पार्टी छोड़ दी है। इनमें 6 पंजाब से राज्यसभा सांसद हैं। हालांकि ये अकेले ऐसे नेता नहीं हैं, जो विवाद के बाद AAP से किना

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AAP की स्थापना से लेकर अब तक 35 बड़े नेता पार्टी से किनारा कर चुके हैं। जिसमें सबसे ज्यादा 20 नेता पंजाब से हैं। पूर्व में पंजाब से पार्टी को अलविदा करने वाले नेताओं में सुच्चा सिंह छोटेपुर, एडवोकेट एचएस फूलका और गुरप्रीत घुग्गी जैसे दिग्गज नाम शामिल हैं।

AAP ने पंजाब के सिटिंग सांसदों धर्मवीर गांधी व हरजीत सिंह खालसा को भी पार्टी से निष्काषित कर दिया था। धर्मवीर गांधी कांग्रेस में शामिल होकर दोबारा सांसद चुने गए। यही नहीं AAP ने पंजाब में सिटिंग एमएलए को भी पार्टी से बाहर का रास्ता दिखाया या विधायकों ने खुद पार्टी छोड़ दी।

सुखपाल सिंह खैहरा पार्टी विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष थे, जब उन्हें पार्टी से निकाल दिया था। वहीं एडवोकेट एचएस फूलका ने भी LOP रहते हुए पार्टी छोड़ दी थी। कुछ दिन पहले वह BJP में शामिल हो गए। हालांकि कुमार विश्वास अकेले नेता हैं, जिन्होंने न इस्तीफा दिया और न पार्टी ने उन्हें निकाला है।

26 नवंबर 2012 को पार्टी के गठन से लेकर 2026 तक नेताओं को आम आदमी पार्टी से क्यों निकाला गया या फिर नेताओं ने पार्टी से दूरी क्यों बनाई, इसके बारे में जानने के लिए पढ़ें पूरी रिपोर्ट…

भाजपा अध्यक्ष नितिन नवीन ने राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा, संदीप पाठक और अशोक मित्तल को शुक्रवार शाम को भाजपा कार्यालय में पार्टी की सदस्यता दिलाई।

1. शाजिया इल्मी

पद: संस्थापक सदस्य, राष्ट्रीय स्तर की प्रमुख नेता, 2014 लोकसभा उम्मीदवार।

कारण: शाजिया इल्मी ने मई 2014 में आंतरिक लोकतंत्र की कमी, कुछ लोगों द्वारा पार्टी चलाने और मूल मूल्यों से भटकना का आरोप पार्टी नेताओं पर लगाया। उसके बाद उन्होंने आम आदमी पार्टी छोड़ दी।

2. कैप्टन जी.आर. गोपीनाथ

पद: संस्थापक सदस्य, प्रमुख राष्ट्रीय नेता।

कारण: कैप्टन जीआर गोपीनाथ ने मई 2014 में आम आदमी पार्टी से किनारा कर दिया। उन्होंने पार्टी नेताओं पर आरोप लगाया कि पार्टी की रणनीति और कोर लीडरशिप द्वारा अनदेखी कार्यकर्ताओं की अनदेखी की जा रही है। उन्होंने पार्टी छोड़ने का ऐलान कर दिया।

3. योगेंद्र यादव पद: संस्थापक सदस्य, पॉलिटिकल अफेयर्स कमिटी (PAC) सदस्य, राष्ट्रीय कार्यकारिणी सदस्य।

कारण: योगेंद्र यादव को आम आदमी पार्टी ने पार्टी विरोधी गतिविधियों के कारण 21 अप्रैल 2015 को पार्टी से निष्काषित कर दिया। योगेंद्र यादव ने अनुशासन भंग, केजरीवाल की तानाशाही और टिकट वितरण में अनियमितताओं का आरोप लगाया। जिसकी वजह से उन्हें पार्टी से निकाला गया।

4.प्रशांत भूषण

पद: संस्थापक सदस्य, PAC सदस्य, वरिष्ठ वकील।

कारण: प्रशांत भूषण को भी योगेंद्र यादव के साथ ही पार्टी से बाहर निकाला गया। प्रशांत भूषण ने भी तानाशाही और टिकट वितरण में भ्रष्टाचार का आरोप पार्टी नेताओं पर लगाया था। अनुशासनात्मक कार्रवाई करते हुए उन्हें भी अप्रैल 2015 में बाहर का रास्ता दिखा दिया गया।

5. आनंद कुमार

पद: राष्ट्रीय कार्यकारिणी सदस्य, संस्थापक सदस्य।

कारण: पार्टी विरोधी गतिविधियां चलाने के आरोप में पार्टी ने योगेंद्र यादव, प्रशांत भूषण के साथ आनंद कुमार को भी बाहर का रास्ता दिखा। आनंद कुमार ने भी खुलकर AAP सुप्रीमो अरविंद केजरीवाल की खिलाफत की थी।

6. अजीत झा

पद: राष्ट्रीय कार्यकारिणी सदस्य।

कारण: अप्रैल 2015 में इन्हें भी पार्टी विरोधी गतिविधियों के कारण पार्टी ने बाहर का रास्ता दिखाया। इन्होंने भी पार्टी में चल रही तानाशाही का विरोध किया था और कहा था कि पार्टी अपने मूल सिद्धांतों से भटक रही है।

7. मयंक गांधी

पद: संस्थापक सदस्य, राष्ट्रीय कार्यकारिणी सदस्य, महाराष्ट्र यूनिट प्रमुख।

कारण: मयंक गांधी को महाराष्ट्र यूनिट का प्रमुख नियुक्त किया गया था। 2015 में केजरीवाल ने महाराष्ट्र यूनिट भंग की। जिससे नाराज होकर मयंक गांधी ने पार्टी छोड़ दी।

8. अंजलि दामनिया

पद: महाराष्ट्र यूनिट प्रमुख, राष्ट्रीय स्तर की नेता।

कारण: अंजलि दामनिया के केजरीवाल से मतभेद हो गए थे। उन्होंने केजरीवाल पर हॉर्स ट्रेडिंग यानि कांग्रेस विधायकों को अपने साथ मिलाने के आरोप लगाए। जिसके बाद उनके केजरीवाल से मतभेद बढ़ गए और मार्च 2015 में में उन्होंने पार्टी से इस्तीफा दे दिया।

9. कपिल मिश्रा

पद: दिल्ली की AAP सरकार में मंत्री, करावल नगर से MLA, राष्ट्रीय स्तर पर चर्चित नेता।

कारण: कपिल मिश्रा के सत्येंद्र जैन के साथ मदभेद हो गए थे जिसके बाद केजरीवाल ने उन्हें कैबिनेट से हटा दिया। उन्होंने केजरीवाल व सत्येंद्र जैन पर भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लगाए और पार्टी ने उन्हें निष्काषित कर दिया।

10. अलका लांबा

पद: चांदनी चौक से MLA (2015 दिल्ली चुनाव), दिल्ली यूनिट की प्रमुख महिला नेता।

कारण: अलका लांबा ने पार्टी की कार्यशैली पर असहमति, राजीव गांधी पर AAP के प्रस्ताव का विरोध और “खास आदमी पार्टी” बनने का आरोप लगाया। पार्टी विरोधी गतिविधियों में शामिल रहने के आरोप लगे। उन्होंने सितंबर 2019 में पार्टी से इस्तीफा दे दिया और कांग्रेस जॉइन कर ली।

11. आशुतोष

पद: प्रमुख प्रवक्ता, पत्रकार-से-राजनेता, केजरीवाल के करीबी।

कारण: आशुतोष राज्यसभा जाना चाहते थे लेकिन पार्टी ने उन्हें राज्यसभा नहीं भेजा। जिसके बाद 2018 में उन्होंने पार्टी छोड़ दी। इसमें उन्होंने व्यक्तिगत कारणों का हवाला दिया। हालांकि बाद में उन्होंने पार्टी लीडरशिप से मतभेद होने की बात भी कही।

12. अशोक अग्रवाल

पद: राष्ट्रीय कार्यकारिणी सदस्य।

कारण: अशोक अग्रवाल पार्टी के संस्थापक सदस्यों में से एक थे। 2014 में उन्होंने पार्टी नेतृत्व की मनमानी पर सवाल उठाए और आम आदमी पार्टी को प्राइवेट लिमिटेड कंपनी का दर्जा दे दिया। जिसके बाद उन्होंने खुद पार्टी से इस्तीफा दे दिया।

13. इलियास आजमी

पद: संस्थापक सदस्य, पूर्व सांसद।

कारण: इलियास आजमी ने पार्टी में केजरीवाल की तानाशाही और आंतरिक लोकतंत्र की कमी पर सवाल खड़े किए। वो बार-बार कहते रहे कि पार्टी अपने सिद्धांतों से भटक रही हे। जिसके बाद उन्होंने 2016 में इस्तीफा दे दिया।

14. स्वाति मालीवाल

पद: राज्यसभा सांसद (AAP कोटे से), दिल्ली महिला आयोग पूर्व अध्यक्ष, राष्ट्रीय स्तर की नेता।

कारण: स्वाति मालीवाल ने अब राघव चड्‌ढा व अन्य के साथ पार्टी छोड़ दी। वो लगातार पार्टी पर हमले कर रही है। 2024 में केजरीवाल के सहयोगी वैभव कुमार पर हमले का आरोप, फिर आतिशी को डमी सीएम बताया टिप्पणी।

15. कुमार विश्वास

पद: संस्थापक सदस्य, राष्ट्रीय कार्यकारिणी सदस्य, प्रमुख प्रवक्ता और कवि।

कारण: कुमार विश्वास पार्टी के वरिष्ठ नेता रहे हैं। वो केजरीवाल के सबसे नजदीकियों में से एक रहे। राज्यसभा के लिए भी उनका नाम नहीं आया। उन्होंने केजरीवाल का विरोध करना शुरू किया। उन्होंने आंतरिक कलह, राजस्थान इंचार्ज पद पर असहमति और केजरीवाल की कार्यशैली पर सवाल उठाए। उन्होंने खुद कहा कि न इस्तीफा दिया, न निकाले गए। वे पार्टी से दूर हो गए।

16. नवीन जयहिंद

पद: आम आदमी पार्टी (AAP) के पूर्व हरियाणा प्रदेश अध्यक्ष।

कारण : आंतरिक कलह, पार्टी की कार्यशैली और नेतृत्व से मतभेद। जयहिंद ने आरोप लगाया था कि AAP अब आम आदमी की पार्टी नहीं रही, बल्कि एक परिवार या छोटे गिरोह की एकाधिकार वाली पार्टी बन गई है। केजरीवाल की कार्यशैली पर असहमति थी। उन्होंने 2022 में पार्टी छोड़ दी।

17. डॉ. धरमवीर गांधी

पद: 2014 लोकसभा चुनाव में पटियाला से AAP के सांसद (MP) चुने गए। पार्टी में संसदीय दल के नेता रहे।

कारण: योगेंद्र यादव और प्रशांत भूषण जैसे असंतुष्ट नेताओं का समर्थन, पार्टी की राष्ट्रीय कार्यकारिणी से उनकी बर्खास्तगी पर विरोध, राष्ट्रीय परिषद बैठक से वॉकआउट और स्वराज संवाद सम्मेलन में संदेश भेजना। AAP ने उन्हें पार्टी विरोधी गतिविधियों, पार्टी में समानांतर संगठन बनाने और BJP-SAD से हाथ मिलाने का आरोप लगाया। अप्रैल 2015 में संसदीय दल के नेता पद से बर्खास्त किया। 29 अगस्त 2015 को प्राथमिक सदस्यता से सस्पेंड किया। बाद में उन्होंने कांग्रेस जॉइन की।

18. प्रणब राय

पद : पंजाब यूनिट के पूर्व स्टेट डिसिप्लिनरी कमिटी सदस्य, एडवोकेट और पार्टी के संस्थापक सदस्यों में से एक।

कारण: प्रणब राय पर एंटी पार्टी गतिविधियों और अनुशासनहीनता का आरोप लगा। पार्टी ने उन्हें बार बार चेतावनी दी फिर भी वो नहीं हटे तो उन्होंने बाद में उन्होंने AAP से इस्तीफा देकर ‘आम आदमी पार्टी वॉलंटियर्स फ्रंट’ नामक नया मोर्चा बनाया, जिसमें पार्टी की मूल विचारधारा से भटकने का आरोप लगाया। सितंबर 2015 में सस्पेंड किया और अक्टूबर 2015 में औपचारिक रूप से पार्टी छोड़ी और नया फ्रंट बनाया।

19. हरिंदर सिंह खालसा

पद: 2014 लोकसभा चुनाव में फतेहगढ़ साहिब से AAP के सांसद।

कारण: डॉ. धरमवीर गांधी के साथ मिलकर पार्टी विरोधी गतिविधियां, समानांतर संगठन बनाने और BJP-SAD से हाथ मिलाने का आरोप लगा। पार्टी ने उन्हें पंजाब में AAP की संभावनाओं को नुकसान पहुंचाने का दोषी ठहराया। 29 अगस्त 2015 को डॉ. गांधी के साथ ही प्राथमिक सदस्यता से सस्पेंड किया गया।

20. सुच्चा सिंह छोटेपुर

पद: AAP पंजाब यूनिट के कन्वीनर (स्टेट चीफ)।

कारण: टिकट बांटने के बदले रिश्वत लेने का आरोप लगा। एक स्टिंग ऑपरेशन का वीडियो सामने आया, जिसमें 60 लाख की मांग और 26 लाख पर सेटलमेंट का जिक्र हुआ। पार्टी की PAC ने उन्हें कन्वीनर पद से हटाया और जांच कमेटी बनाई। अगस्त 2016 को पंजाब कन्वीनर पद से हटाए गए और उसके बाद उन्होंने पार्टी छोड़ दी।

21. गुरप्रीत घुग्गी

पद: AAP पंजाब यूनिट के कन्वीनर, पार्टी के प्रमुख पदाधिकारी और लोकप्रिय हस्ती (कॉमेडियन-एक्टर)।

कारण: भगवंत मान को पंजाब यूनिट चीफ बनाने का विरोध किया। पार्टी पर “पिक एंड चूज” नीति और मूल सिद्धांतों से भटकने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि पार्टी अब पंजाबियत और मूल विचारधारा से दूर हो गई है। 10 मई 2017 को प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा दिया। अब पॉलिटिक्स छोड़ दी।

22. जस्सी जसराज

पद: पंजाबी सिंगर और पार्टी नेता; 2014 लोकसभा चुनाव में बठिंडा से AAP उम्मीदवार।

कारण: पार्टी विरोधी गतिविधियां और YouTube वीडियो में AAP नेतृत्व पर BJP, SAD और कांग्रेस के पूर्व सदस्यों को शामिल करने का आरोप लगाया। पार्टी ने अनुशासन भंग के आरोप में उन्हें अप्रैल 2016 को 6 साल के लिए पार्टी से निकाल दिया गया।

23. एचएस फूलका

पद: लुधियाना के मुल्लापुर दाखा से MLA; पंजाब विधानसभा में एलओपी। 1984 सिख दंगों के मामलों के प्रमुख वकील।

कारण: पार्टी की कार्यशैली, पंजाब यूनिट में दिल्ली का दखल, बेअदबी मामलों में कार्रवाई न करने और 1984 दंगों पर पार्टी का समर्थन न मिलने से नाराज रहे। उन्होंने कहा कि पार्टी मूल सिद्धांतों से भटक गई। पहले LOP पद से जून 2017 में इस्तीफा; अक्टूबर 2018 में MLA पद से इस्तीफा, 3 जनवरी 2019 को AAP से पूर्ण इस्तीफा दिया। कुछ दिन पहले BJP में शामिल हो गए।

24. सुखपाल सिंह खैहरा

पद: भुल्लथ से MLA; पंजाब विधानसभा में LOP

कारण: केंद्रीय और राज्य नेतृत्व पर हमले, पंजाब यूनिट को स्वायत्तता न देने और पार्टी को मूल विचारधारा (अन्ना हजारे आंदोलन) से भटकने का आरोप लगाया। जुलाई 2018 में LOP पद से हटाए गए; नवंबर 2018 में पार्टी विरोधी गतिविधियों के लिए सस्पेंड किए गए। 5 जनवरी 2019 को प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा दिया। खैहरा अब कांग्रेस में हैं।

25. कंवर संधू

पद: खरड़ से MLA; पत्रकार पृष्ठभूमि से राजनीति में आए।

कारण: सुखपाल सिंह खैहरा के साथ विद्रोही गुट में शामिल, केंद्रीय और राज्य नेतृत्व पर हमले तथा पार्टी विरोधी गतिविधियों में शामिल होने का आरोप लगा और 3 नवंबर 2018 को सुखपाल खैहरा के साथ सस्पेंड किए गए।

26. बलदेव सिंह

पद: जैतों से MLA।

कारण: पार्टी पर “तानाशाही” और “दोगली नीति” का आरोप लगाते हुए AAP को पारंपरिक पार्टियों जैसा व्यवहार करने और मूल सिद्धांतों को छोड़ने का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि फैसले सहमति से नहीं, बल्कि तानाशाही से लिए जा रहे हैं। ऐसे आरोप लगाने के बाद उन्होंने जनवरी 2019 में प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा दिया।

27. पिरमल सिंह

पद: भदौड़ से एमएलए

कारण: सुखपाल सिंह खैहरा के विद्रोही गुट से जुड़े रहे। 2018 में खैहरा को एलओपी पद से हटाए जाने के विरोध में कई MLAs के साथ उन्होंने भी असहमति जताई थी। जनवरी 2019 में AAP की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा दिया। बाद में जून 2021 में उन्होंने विधानसभा सीट से भी इस्तीफा दिया और औपचारिक रूप से कांग्रेस में शामिल हो गए।

28. नवजोत ग्रोवर

पद: अमृतसर में पार्टी के प्रमुख नेता

कारण: पार्टी विरोधी गतिविधियों में शामिल होने होने के आरोप लगे। उन पर भी संगठनात्मक अनुशासन भंग करने का आरोप भी लगाया गया। जिसके बाद उन्हें 29 मार्च को पार्टी की प्राथमिक सदस्य से सस्पेंड कर दिया गया।

29: बलजीत सिंह चन्नी

पद: मोगा के मेयर

कारण: चन्नी पर नशा तस्करों का साथ देने का आरोप लगा। जिसके बाद पार्टी ने उन्हें 27 नवंबर 2025 को मेयर पद से हटाने के साथ साथ पार्टी से भी निकाल दिया।

30: राघव चड्‌ढा

पद: राज्य सभा सदस्य, डिप्टी लीडर

कारण: राघव चड्‌ढा पर पार्टी लाइन से हटकर काम करने का आरोप लगाया गया। पार्टी ने उन्हें राज्य सभा में डिप्टी लीडर के पद से हटाया और साथ ही उन्हें राज्य सभा में पार्टी की तरफ से बोलने न देने को कहा। जो पार्टी करप्शन खत्म करने के लिए बनी थी। लेकिन यह पार्टी अब अपना लक्ष्य भूल चुकी है।

31. अशोक मित्तल:

पद: राज्य सभा सदस्य, डिप्टी लीडर

कारण: राघव चड्‌ढा के साथ उन्होंने भी आज पार्टी छोड़ दी और पार्टी में भ्रष्टाचार का आरोप लगाया।

32. हरभजन सिंह

पद: राज्य सभा सदस्य

कारण: राघव चड्‌ढा व अनय साथियों के साथ मिलकर पार्टी छोड़ी।

33. राजिंदर गुप्ता

पद: राज्य सभा सदस्य

कारण: राघव चड्‌ढा व अन्य के साथ पार्टी छोड़ी।

34. संदीप पाठक

पद: राज्य सभा सदस्य, राष्ट्रीय महासचिव संगठन

कारण: राघव चड्‌ढा और अन्य के साथ पार्टी छोड़ी।

35. विक्रमजीत सिंह साहनी

पद: राज्य सभा सदस्य

कारण: राघव चड्‌ढा व अन्य साथियों के साथ पार्टी छोड़कर गए।

***************

AAP के राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा भाजपा में: कहा- 10 में से 7 सांसद साथ, अशोक मित्तल ने ED छापे के 10वें दिन भाजपा जॉइन की

आम आदमी पार्टी के 10 राज्यसभा सांसदों में से 7 सांसद भाजपा में शामिल होंगे। इसका ऐलान पंजाब से राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा ने शुक्रवार शाम को 4 बजे प्रेस कॉन्फ्रेंस में किया। (पढ़ें पूरी खबर)

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AAP की स्थापना से लेकर अब तक 35 बड़े नेता पार्टी से किनारा कर चुके हैं। जिसमें सबसे ज्यादा 20 नेता पंजाब से हैं। पूर्व में पंजाब से पार्टी को अलविदा करने वाले नेताओं में सुच्चा सिंह छोटेपुर, एडवोकेट एचएस फूलका और गुरप्रीत घुग्गी जैसे दिग्गज नाम शामिल हैं।

AAP ने पंजाब के सिटिंग सांसदों धर्मवीर गांधी व हरजीत सिंह खालसा को भी पार्टी से निष्काषित कर दिया था। धर्मवीर गांधी कांग्रेस में शामिल होकर दोबारा सांसद चुने गए। यही नहीं AAP ने पंजाब में सिटिंग एमएलए को भी पार्टी से बाहर का रास्ता दिखाया या विधायकों ने खुद पार्टी छोड़ दी।

सुखपाल सिंह खैहरा पार्टी विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष थे, जब उन्हें पार्टी से निकाल दिया था। वहीं एडवोकेट एचएस फूलका ने भी LOP रहते हुए पार्टी छोड़ दी थी। कुछ दिन पहले वह BJP में शामिल हो गए। हालांकि कुमार विश्वास अकेले नेता हैं, जिन्होंने न इस्तीफा दिया और न पार्टी ने उन्हें निकाला है।

26 नवंबर 2012 को पार्टी के गठन से लेकर 2026 तक नेताओं को आम आदमी पार्टी से क्यों निकाला गया या फिर नेताओं ने पार्टी से दूरी क्यों बनाई, इसके बारे में जानने के लिए पढ़ें पूरी रिपोर्ट…

भाजपा अध्यक्ष नितिन नवीन ने राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा, संदीप पाठक और अशोक मित्तल को शुक्रवार शाम को भाजपा कार्यालय में पार्टी की सदस्यता दिलाई।

1. शाजिया इल्मी

पद: संस्थापक सदस्य, राष्ट्रीय स्तर की प्रमुख नेता, 2014 लोकसभा उम्मीदवार।

कारण: शाजिया इल्मी ने मई 2014 में आंतरिक लोकतंत्र की कमी, कुछ लोगों द्वारा पार्टी चलाने और मूल मूल्यों से भटकना का आरोप पार्टी नेताओं पर लगाया। उसके बाद उन्होंने आम आदमी पार्टी छोड़ दी।

2. कैप्टन जी.आर. गोपीनाथ

पद: संस्थापक सदस्य, प्रमुख राष्ट्रीय नेता।

कारण: कैप्टन जीआर गोपीनाथ ने मई 2014 में आम आदमी पार्टी से किनारा कर दिया। उन्होंने पार्टी नेताओं पर आरोप लगाया कि पार्टी की रणनीति और कोर लीडरशिप द्वारा अनदेखी कार्यकर्ताओं की अनदेखी की जा रही है। उन्होंने पार्टी छोड़ने का ऐलान कर दिया।

3. योगेंद्र यादव पद: संस्थापक सदस्य, पॉलिटिकल अफेयर्स कमिटी (PAC) सदस्य, राष्ट्रीय कार्यकारिणी सदस्य।

कारण: योगेंद्र यादव को आम आदमी पार्टी ने पार्टी विरोधी गतिविधियों के कारण 21 अप्रैल 2015 को पार्टी से निष्काषित कर दिया। योगेंद्र यादव ने अनुशासन भंग, केजरीवाल की तानाशाही और टिकट वितरण में अनियमितताओं का आरोप लगाया। जिसकी वजह से उन्हें पार्टी से निकाला गया।

4.प्रशांत भूषण

पद: संस्थापक सदस्य, PAC सदस्य, वरिष्ठ वकील।

कारण: प्रशांत भूषण को भी योगेंद्र यादव के साथ ही पार्टी से बाहर निकाला गया। प्रशांत भूषण ने भी तानाशाही और टिकट वितरण में भ्रष्टाचार का आरोप पार्टी नेताओं पर लगाया था। अनुशासनात्मक कार्रवाई करते हुए उन्हें भी अप्रैल 2015 में बाहर का रास्ता दिखा दिया गया।

5. आनंद कुमार

पद: राष्ट्रीय कार्यकारिणी सदस्य, संस्थापक सदस्य।

कारण: पार्टी विरोधी गतिविधियां चलाने के आरोप में पार्टी ने योगेंद्र यादव, प्रशांत भूषण के साथ आनंद कुमार को भी बाहर का रास्ता दिखा। आनंद कुमार ने भी खुलकर AAP सुप्रीमो अरविंद केजरीवाल की खिलाफत की थी।

6. अजीत झा

पद: राष्ट्रीय कार्यकारिणी सदस्य।

कारण: अप्रैल 2015 में इन्हें भी पार्टी विरोधी गतिविधियों के कारण पार्टी ने बाहर का रास्ता दिखाया। इन्होंने भी पार्टी में चल रही तानाशाही का विरोध किया था और कहा था कि पार्टी अपने मूल सिद्धांतों से भटक रही है।

7. मयंक गांधी

पद: संस्थापक सदस्य, राष्ट्रीय कार्यकारिणी सदस्य, महाराष्ट्र यूनिट प्रमुख।

कारण: मयंक गांधी को महाराष्ट्र यूनिट का प्रमुख नियुक्त किया गया था। 2015 में केजरीवाल ने महाराष्ट्र यूनिट भंग की। जिससे नाराज होकर मयंक गांधी ने पार्टी छोड़ दी।

8. अंजलि दामनिया

पद: महाराष्ट्र यूनिट प्रमुख, राष्ट्रीय स्तर की नेता।

कारण: अंजलि दामनिया के केजरीवाल से मतभेद हो गए थे। उन्होंने केजरीवाल पर हॉर्स ट्रेडिंग यानि कांग्रेस विधायकों को अपने साथ मिलाने के आरोप लगाए। जिसके बाद उनके केजरीवाल से मतभेद बढ़ गए और मार्च 2015 में में उन्होंने पार्टी से इस्तीफा दे दिया।

9. कपिल मिश्रा

पद: दिल्ली की AAP सरकार में मंत्री, करावल नगर से MLA, राष्ट्रीय स्तर पर चर्चित नेता।

कारण: कपिल मिश्रा के सत्येंद्र जैन के साथ मदभेद हो गए थे जिसके बाद केजरीवाल ने उन्हें कैबिनेट से हटा दिया। उन्होंने केजरीवाल व सत्येंद्र जैन पर भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लगाए और पार्टी ने उन्हें निष्काषित कर दिया।

10. अलका लांबा

पद: चांदनी चौक से MLA (2015 दिल्ली चुनाव), दिल्ली यूनिट की प्रमुख महिला नेता।

कारण: अलका लांबा ने पार्टी की कार्यशैली पर असहमति, राजीव गांधी पर AAP के प्रस्ताव का विरोध और “खास आदमी पार्टी” बनने का आरोप लगाया। पार्टी विरोधी गतिविधियों में शामिल रहने के आरोप लगे। उन्होंने सितंबर 2019 में पार्टी से इस्तीफा दे दिया और कांग्रेस जॉइन कर ली।

11. आशुतोष

पद: प्रमुख प्रवक्ता, पत्रकार-से-राजनेता, केजरीवाल के करीबी।

कारण: आशुतोष राज्यसभा जाना चाहते थे लेकिन पार्टी ने उन्हें राज्यसभा नहीं भेजा। जिसके बाद 2018 में उन्होंने पार्टी छोड़ दी। इसमें उन्होंने व्यक्तिगत कारणों का हवाला दिया। हालांकि बाद में उन्होंने पार्टी लीडरशिप से मतभेद होने की बात भी कही।

12. अशोक अग्रवाल

पद: राष्ट्रीय कार्यकारिणी सदस्य।

कारण: अशोक अग्रवाल पार्टी के संस्थापक सदस्यों में से एक थे। 2014 में उन्होंने पार्टी नेतृत्व की मनमानी पर सवाल उठाए और आम आदमी पार्टी को प्राइवेट लिमिटेड कंपनी का दर्जा दे दिया। जिसके बाद उन्होंने खुद पार्टी से इस्तीफा दे दिया।

13. इलियास आजमी

पद: संस्थापक सदस्य, पूर्व सांसद।

कारण: इलियास आजमी ने पार्टी में केजरीवाल की तानाशाही और आंतरिक लोकतंत्र की कमी पर सवाल खड़े किए। वो बार-बार कहते रहे कि पार्टी अपने सिद्धांतों से भटक रही हे। जिसके बाद उन्होंने 2016 में इस्तीफा दे दिया।

14. स्वाति मालीवाल

पद: राज्यसभा सांसद (AAP कोटे से), दिल्ली महिला आयोग पूर्व अध्यक्ष, राष्ट्रीय स्तर की नेता।

कारण: स्वाति मालीवाल ने अब राघव चड्‌ढा व अन्य के साथ पार्टी छोड़ दी। वो लगातार पार्टी पर हमले कर रही है। 2024 में केजरीवाल के सहयोगी वैभव कुमार पर हमले का आरोप, फिर आतिशी को डमी सीएम बताया टिप्पणी।

15. कुमार विश्वास

पद: संस्थापक सदस्य, राष्ट्रीय कार्यकारिणी सदस्य, प्रमुख प्रवक्ता और कवि।

कारण: कुमार विश्वास पार्टी के वरिष्ठ नेता रहे हैं। वो केजरीवाल के सबसे नजदीकियों में से एक रहे। राज्यसभा के लिए भी उनका नाम नहीं आया। उन्होंने केजरीवाल का विरोध करना शुरू किया। उन्होंने आंतरिक कलह, राजस्थान इंचार्ज पद पर असहमति और केजरीवाल की कार्यशैली पर सवाल उठाए। उन्होंने खुद कहा कि न इस्तीफा दिया, न निकाले गए। वे पार्टी से दूर हो गए।

16. नवीन जयहिंद

पद: आम आदमी पार्टी (AAP) के पूर्व हरियाणा प्रदेश अध्यक्ष।

कारण : आंतरिक कलह, पार्टी की कार्यशैली और नेतृत्व से मतभेद। जयहिंद ने आरोप लगाया था कि AAP अब आम आदमी की पार्टी नहीं रही, बल्कि एक परिवार या छोटे गिरोह की एकाधिकार वाली पार्टी बन गई है। केजरीवाल की कार्यशैली पर असहमति थी। उन्होंने 2022 में पार्टी छोड़ दी।

17. डॉ. धरमवीर गांधी

पद: 2014 लोकसभा चुनाव में पटियाला से AAP के सांसद (MP) चुने गए। पार्टी में संसदीय दल के नेता रहे।

कारण: योगेंद्र यादव और प्रशांत भूषण जैसे असंतुष्ट नेताओं का समर्थन, पार्टी की राष्ट्रीय कार्यकारिणी से उनकी बर्खास्तगी पर विरोध, राष्ट्रीय परिषद बैठक से वॉकआउट और स्वराज संवाद सम्मेलन में संदेश भेजना। AAP ने उन्हें पार्टी विरोधी गतिविधियों, पार्टी में समानांतर संगठन बनाने और BJP-SAD से हाथ मिलाने का आरोप लगाया। अप्रैल 2015 में संसदीय दल के नेता पद से बर्खास्त किया। 29 अगस्त 2015 को प्राथमिक सदस्यता से सस्पेंड किया। बाद में उन्होंने कांग्रेस जॉइन की।

18. प्रणब राय

पद : पंजाब यूनिट के पूर्व स्टेट डिसिप्लिनरी कमिटी सदस्य, एडवोकेट और पार्टी के संस्थापक सदस्यों में से एक।

कारण: प्रणब राय पर एंटी पार्टी गतिविधियों और अनुशासनहीनता का आरोप लगा। पार्टी ने उन्हें बार बार चेतावनी दी फिर भी वो नहीं हटे तो उन्होंने बाद में उन्होंने AAP से इस्तीफा देकर ‘आम आदमी पार्टी वॉलंटियर्स फ्रंट’ नामक नया मोर्चा बनाया, जिसमें पार्टी की मूल विचारधारा से भटकने का आरोप लगाया। सितंबर 2015 में सस्पेंड किया और अक्टूबर 2015 में औपचारिक रूप से पार्टी छोड़ी और नया फ्रंट बनाया।

19. हरिंदर सिंह खालसा

पद: 2014 लोकसभा चुनाव में फतेहगढ़ साहिब से AAP के सांसद।

कारण: डॉ. धरमवीर गांधी के साथ मिलकर पार्टी विरोधी गतिविधियां, समानांतर संगठन बनाने और BJP-SAD से हाथ मिलाने का आरोप लगा। पार्टी ने उन्हें पंजाब में AAP की संभावनाओं को नुकसान पहुंचाने का दोषी ठहराया। 29 अगस्त 2015 को डॉ. गांधी के साथ ही प्राथमिक सदस्यता से सस्पेंड किया गया।

20. सुच्चा सिंह छोटेपुर

पद: AAP पंजाब यूनिट के कन्वीनर (स्टेट चीफ)।

कारण: टिकट बांटने के बदले रिश्वत लेने का आरोप लगा। एक स्टिंग ऑपरेशन का वीडियो सामने आया, जिसमें 60 लाख की मांग और 26 लाख पर सेटलमेंट का जिक्र हुआ। पार्टी की PAC ने उन्हें कन्वीनर पद से हटाया और जांच कमेटी बनाई। अगस्त 2016 को पंजाब कन्वीनर पद से हटाए गए और उसके बाद उन्होंने पार्टी छोड़ दी।

21. गुरप्रीत घुग्गी

पद: AAP पंजाब यूनिट के कन्वीनर, पार्टी के प्रमुख पदाधिकारी और लोकप्रिय हस्ती (कॉमेडियन-एक्टर)।

कारण: भगवंत मान को पंजाब यूनिट चीफ बनाने का विरोध किया। पार्टी पर “पिक एंड चूज” नीति और मूल सिद्धांतों से भटकने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि पार्टी अब पंजाबियत और मूल विचारधारा से दूर हो गई है। 10 मई 2017 को प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा दिया। अब पॉलिटिक्स छोड़ दी।

22. जस्सी जसराज

पद: पंजाबी सिंगर और पार्टी नेता; 2014 लोकसभा चुनाव में बठिंडा से AAP उम्मीदवार।

कारण: पार्टी विरोधी गतिविधियां और YouTube वीडियो में AAP नेतृत्व पर BJP, SAD और कांग्रेस के पूर्व सदस्यों को शामिल करने का आरोप लगाया। पार्टी ने अनुशासन भंग के आरोप में उन्हें अप्रैल 2016 को 6 साल के लिए पार्टी से निकाल दिया गया।

23. एचएस फूलका

पद: लुधियाना के मुल्लापुर दाखा से MLA; पंजाब विधानसभा में एलओपी। 1984 सिख दंगों के मामलों के प्रमुख वकील।

कारण: पार्टी की कार्यशैली, पंजाब यूनिट में दिल्ली का दखल, बेअदबी मामलों में कार्रवाई न करने और 1984 दंगों पर पार्टी का समर्थन न मिलने से नाराज रहे। उन्होंने कहा कि पार्टी मूल सिद्धांतों से भटक गई। पहले LOP पद से जून 2017 में इस्तीफा; अक्टूबर 2018 में MLA पद से इस्तीफा, 3 जनवरी 2019 को AAP से पूर्ण इस्तीफा दिया। कुछ दिन पहले BJP में शामिल हो गए।

24. सुखपाल सिंह खैहरा

पद: भुल्लथ से MLA; पंजाब विधानसभा में LOP

कारण: केंद्रीय और राज्य नेतृत्व पर हमले, पंजाब यूनिट को स्वायत्तता न देने और पार्टी को मूल विचारधारा (अन्ना हजारे आंदोलन) से भटकने का आरोप लगाया। जुलाई 2018 में LOP पद से हटाए गए; नवंबर 2018 में पार्टी विरोधी गतिविधियों के लिए सस्पेंड किए गए। 5 जनवरी 2019 को प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा दिया। खैहरा अब कांग्रेस में हैं।

25. कंवर संधू

पद: खरड़ से MLA; पत्रकार पृष्ठभूमि से राजनीति में आए।

कारण: सुखपाल सिंह खैहरा के साथ विद्रोही गुट में शामिल, केंद्रीय और राज्य नेतृत्व पर हमले तथा पार्टी विरोधी गतिविधियों में शामिल होने का आरोप लगा और 3 नवंबर 2018 को सुखपाल खैहरा के साथ सस्पेंड किए गए।

26. बलदेव सिंह

पद: जैतों से MLA।

कारण: पार्टी पर “तानाशाही” और “दोगली नीति” का आरोप लगाते हुए AAP को पारंपरिक पार्टियों जैसा व्यवहार करने और मूल सिद्धांतों को छोड़ने का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि फैसले सहमति से नहीं, बल्कि तानाशाही से लिए जा रहे हैं। ऐसे आरोप लगाने के बाद उन्होंने जनवरी 2019 में प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा दिया।

27. पिरमल सिंह

पद: भदौड़ से एमएलए

कारण: सुखपाल सिंह खैहरा के विद्रोही गुट से जुड़े रहे। 2018 में खैहरा को एलओपी पद से हटाए जाने के विरोध में कई MLAs के साथ उन्होंने भी असहमति जताई थी। जनवरी 2019 में AAP की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा दिया। बाद में जून 2021 में उन्होंने विधानसभा सीट से भी इस्तीफा दिया और औपचारिक रूप से कांग्रेस में शामिल हो गए।

28. नवजोत ग्रोवर

पद: अमृतसर में पार्टी के प्रमुख नेता

कारण: पार्टी विरोधी गतिविधियों में शामिल होने होने के आरोप लगे। उन पर भी संगठनात्मक अनुशासन भंग करने का आरोप भी लगाया गया। जिसके बाद उन्हें 29 मार्च को पार्टी की प्राथमिक सदस्य से सस्पेंड कर दिया गया।

29: बलजीत सिंह चन्नी

पद: मोगा के मेयर

कारण: चन्नी पर नशा तस्करों का साथ देने का आरोप लगा। जिसके बाद पार्टी ने उन्हें 27 नवंबर 2025 को मेयर पद से हटाने के साथ साथ पार्टी से भी निकाल दिया।

30: राघव चड्‌ढा

पद: राज्य सभा सदस्य, डिप्टी लीडर

कारण: राघव चड्‌ढा पर पार्टी लाइन से हटकर काम करने का आरोप लगाया गया। पार्टी ने उन्हें राज्य सभा में डिप्टी लीडर के पद से हटाया और साथ ही उन्हें राज्य सभा में पार्टी की तरफ से बोलने न देने को कहा। जो पार्टी करप्शन खत्म करने के लिए बनी थी। लेकिन यह पार्टी अब अपना लक्ष्य भूल चुकी है।

31. अशोक मित्तल:

पद: राज्य सभा सदस्य, डिप्टी लीडर

कारण: राघव चड्‌ढा के साथ उन्होंने भी आज पार्टी छोड़ दी और पार्टी में भ्रष्टाचार का आरोप लगाया।

32. हरभजन सिंह

पद: राज्य सभा सदस्य

कारण: राघव चड्‌ढा व अनय साथियों के साथ मिलकर पार्टी छोड़ी।

33. राजिंदर गुप्ता

पद: राज्य सभा सदस्य

कारण: राघव चड्‌ढा व अन्य के साथ पार्टी छोड़ी।

34. संदीप पाठक

पद: राज्य सभा सदस्य, राष्ट्रीय महासचिव संगठन

कारण: राघव चड्‌ढा और अन्य के साथ पार्टी छोड़ी।

35. विक्रमजीत सिंह साहनी

पद: राज्य सभा सदस्य

कारण: राघव चड्‌ढा व अन्य साथियों के साथ पार्टी छोड़कर गए।

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AAP के राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा भाजपा में: कहा- 10 में से 7 सांसद साथ, अशोक मित्तल ने ED छापे के 10वें दिन भाजपा जॉइन की

आम आदमी पार्टी के 10 राज्यसभा सांसदों में से 7 सांसद भाजपा में शामिल होंगे। इसका ऐलान पंजाब से राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा ने शुक्रवार शाम को 4 बजे प्रेस कॉन्फ्रेंस में किया। (पढ़ें पूरी खबर)

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