मध्यप्रदेश ने जल संरक्षण और प्रबंधन के क्षेत्र में एक अभूतपूर्व उपलब्धि हासिल की है। भारत सरकार के ‘जल संचय भागीदारी’ (JSJB) अभियान के तहत मध्यप्रदेश अब पूरे देश में पहले नंबर पर पहुंच गया है। बीते 5 मार्च तक मध्यप्रदेश इस सूची में छठे स्थान पर था, लेकिन मुख्यमंत्री द्वारा ‘जल गंगा संवर्धन अभियान’ की निरंतर समीक्षा और जन-भागीदारी को प्रोत्साहित करने के परिणामस्वरूप प्रदेश ने रैंकिंग में यह लंबी छलांग लगाई है। डिंडौरी नेशनल रैंकिंग में पहले नंबर पर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि सामुदायिक सहभागिता पर आधारित जल प्रबंधन के मामले में मध्यप्रदेश पूरे देश के सामने एक श्रेष्ठ उदाहरण प्रस्तुत कर रहा है । इस अभियान की सफलता में जिलों का योगदान भी सराहनीय रहा है, जहां राष्ट्रीय स्तर की रैंकिंग में डिंडौरी जिला पहले और खंडवा जिला दूसरे स्थान पर रहा है। प्रदेश में इस महाअभियान के तहत 16 सरकारी विभागों की 82 प्रमुख गतिविधियों को चिन्हित किया गया है, जिसके माध्यम से जल संरचनाओं के पुनर्जीवन और नए जल स्रोतों के निर्माण पर युद्ध स्तर पर कार्य किया जा रहा है। अभियान के तहत न केवल ग्रामीण बल्कि शहरी क्षेत्रों में भी बडे़ स्तर पर काम किए जा रहे हैं। वन भूमि पर होने वाले जल संरक्षण कार्यों को गति देने के लिए एक विशेष ‘ऑनलाइन ऐप’ भी विकसित किया गया है, जिससे अनुमति की प्रक्रिया सुगम और पारदर्शी हो गई है। अभियान से जुड़े आंकड़े फॉर्म पॉन्ड, अमृत सरोवर बनाए जा रहे पूरे अभियान के लिए 6,630 करोड़ रुपए का वित्तीय लक्ष्य निर्धारित किया गया है। पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के अंतर्गत खंडवा जिला प्रदेश में पहले, खरगोन दूसरे और डिंडौरी तीसरे स्थान पर है।अभियान में फार्म पॉन्ड, अमृत सरोवर और पुराने मनरेगा कार्यों को पूर्ण करने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।















































