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pregnancy mistakes: प्रेग्नेंसी की गलतियां जो बढ़ा सकती हैं बच्चे में ऑटिज्म का खतरा

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Pregnancy Mistakes Causes Autism: बच्चों में ऑटिज्म का खतरा प्रेग्नेंसी के दौरान लापरवाही का भी नतीजा होता है. ये एक मनोवैज्ञानिक समस्या है. एक्सपर्ट बताती हैं कि गर्भावस्था में जेस्टेशनल डायबिटीज को नजरअंदाज करना एक बड़ी गलती हो सकती है. यदि ब्लड शुगर कंट्रोल नहीं रहती, तो इसका असर बच्चे के ब्रेन के विकास पर पड़ सकता है.

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Pregnancy Mistakes Causes Autism: ऑटिज्म स्पेक्ट्रम डिसऑर्डर (एएसडी) बच्चों में होने वाली एक साइकोलॉजिकल बीमारी है, जो जन्मजात बच्चों में होते हैं. इसके लक्षण बच्चों में 3 साल की उम्र से पहले नजर आते हैं. माना जाता है कि ये बीमारी बच्चों में गर्भ में विकास के दौरान, जन्म से काफी पहले शुरू हो जाता है. यह एक न्यूरो डेवलपमेंट संबंधी कंडीशन है जो जेनेटिक बदलावों और पर्यावरणीय कारकों के कारण बनती है जो ब्रेन की परतों और तंत्रिका मार्गों के निर्माण को प्रभावित करते हैं, विशेष रूप से गर्भावस्था की दूसरी और तीसरी तिमाही के दौरान. इसलिए प्रेग्नेंसी के दौरान की जाने वाली लापरवाही इसके खतरे को बढ़ाने में अहम रोल निभाते हैं.

मां का तनाव में रहना बढ़ाता है खतरा
डॉ. भास्कर शुक्ला, वरिष्ठ सलाहकार, न्यूरोलॉजी डिपार्टमेंट, पीएसआरआई अस्पताल, दिल्ली बताते हैं कि गर्भावस्था के दौरान मां की मानसिक स्थिति, भावनात्मक संतुलन और जीवनशैली भी इसमें महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं. सबसे बड़ी समस्या होती है लगातार तनाव में रहना. जब कोई महिला लंबे समय तक तनाव झेलती है, तो उसके शरीर में तनाव से जुड़े हार्मोन बढ़ जाते हैं. ये हार्मोन भ्रूण के मस्तिष्क के विकास को प्रभावित कर सकते हैं.जिस वातावरण में मां रह रही है, उसका भी असर पड़ता है. प्रदूषण, शोर और जहरीले तत्वों के संपर्क में रहना शरीर में सूजन और असंतुलन पैदा कर सकता है, जो बच्चे के विकास को प्रभावित कर सकता है.

डायबिटीज- बीपी को नजरअंदाज करना
डॉ. नीलम कुमारी एला, वरिष्ठ सलाहकार – प्रसूति एवं स्त्रीरोग विशेषज्ञ, मैक्योर अस्पताल, दिल्ली बताती हैं कि गर्भावस्था एक ऐसा समय होता है जब मां की सेहत और उसकी दिनचर्या सीधे बच्चे के मस्तिष्क के विकास को प्रभावित करती है. हालांकि ऑटिज्म किसी एक कारण से नहीं होता, लेकिन गर्भावस्था के दौरान की गई कुछ लापरवाहियां जोखिम को बढ़ा सकती हैं, जिनसे बचाव करना संभव है. सबसे पहले, गर्भावस्था में मधुमेह यानी जेस्टेशनल डायबिटीज को नजरअंदाज करना एक बड़ी गलती हो सकती है. यदि ब्लड शुगर नियंत्रित नहीं रहती, तो इसका असर बच्चे के मस्तिष्क के विकास पर पड़ सकता है. इसी तरह गर्भावस्था के दौरान होने वाले संक्रमणों को हल्के में लेना भी नुकसानदायक हो सकता है. शरीर में संक्रमण होने से सूजन बढ़ती है, जो भ्रूण के न्यूरोलॉजिकल विकास को प्रभावित कर सकती है.

लेट प्रेग्नेंसी से भी बढ़ता है खतरा
एक्सपर्ट बताती हैं कि ज्यादा उम्र में कंसीव करना भी बच्चों में ऑटिज्म से जुड़ा एक कारक है.अधिक उम्र में गर्भधारण करने पर कुछ जैविक बदलावों का खतरा बढ़ सकता है, जो बच्चे के विकास को प्रभावित कर सकते हैं. इसके अलावा, मोटापा और असंतुलित आहार भी जोखिम को बढ़ाने वाले कारक हैं. गर्भावस्था में पोषण की कमी, खासकर जरूरी विटामिन और मिनरल्स की कमी, बच्चे के ब्रेन डेवलपमेंट को प्रभावित कर सकती है. इसके साथ ही कई बार महिलाएं सामान्य दवाइयों को भी सुरक्षित मानकर ले लेती हैं, जबकि कुछ दवाएं भ्रूण के विकास पर असर डाल सकती हैं. इसलिए गर्भावस्था में किसी भी दवा का उपयोग केवल विशेषज्ञ की सलाह से ही करना चाहिए.

इस बात का रखें ध्यान
यह समझना जरूरी है कि ऑटिज्म केवल इन कारणों से नहीं होता. अक्सर यह जेनेटिक प्रवृत्ति और बाहरी कारकों के मिले जुले प्रभाव से विकसित होता है. इसलिए किसी एक कारण को जिम्मेदार ठहराना सही नहीं है. गर्भावस्था के दौरान मानसिक रूप से स्वस्थ रहना बेहद जरूरी है. इसके लिए योग, मेडिटेशन, रिलैक्सेशन तकनीक और सकारात्मक वातावरण मददगार हो सकते हैं. जरूरत पड़ने पर काउंसलिंग लेना भी फायदेमंद होता है.

About the Author

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शारदा सिंहSenior Sub Editor

शारदा सिंह बतौर सीनियर सब एडिटर News18 Hindi से जुड़ी हैं. वे हेल्थ, वेलनेस और लाइफस्टाइल से जुड़ी रिसर्च-बेस्ड और डॉक्टर्स के इंटरव्यू पर आधारित रिपोर्ट्स बनाने में एक्सपर्ट हैं. शारदा पिछले 5 सालों से मीडिया …और पढ़ें

Disclaimer: इस खबर में दी गई दवा/औषधि और स्वास्थ्य से जुड़ी सलाह, एक्सपर्ट्स से की गई बातचीत के आधार पर है. यह सामान्य जानकारी है, व्यक्तिगत सलाह नहीं. इसलिए डॉक्टर्स से परामर्श के बाद ही कोई चीज उपयोग करें. Local-18 किसी भी उपयोग से होने वाले नुकसान के लिए जिम्मेदार नहीं होगा.

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मां का तनाव में रहना बढ़ाता है खतरा
डॉ. भास्कर शुक्ला, वरिष्ठ सलाहकार, न्यूरोलॉजी डिपार्टमेंट, पीएसआरआई अस्पताल, दिल्ली बताते हैं कि गर्भावस्था के दौरान मां की मानसिक स्थिति, भावनात्मक संतुलन और जीवनशैली भी इसमें महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं. सबसे बड़ी समस्या होती है लगातार तनाव में रहना. जब कोई महिला लंबे समय तक तनाव झेलती है, तो उसके शरीर में तनाव से जुड़े हार्मोन बढ़ जाते हैं. ये हार्मोन भ्रूण के मस्तिष्क के विकास को प्रभावित कर सकते हैं.जिस वातावरण में मां रह रही है, उसका भी असर पड़ता है. प्रदूषण, शोर और जहरीले तत्वों के संपर्क में रहना शरीर में सूजन और असंतुलन पैदा कर सकता है, जो बच्चे के विकास को प्रभावित कर सकता है.

डायबिटीज- बीपी को नजरअंदाज करना
डॉ. नीलम कुमारी एला, वरिष्ठ सलाहकार – प्रसूति एवं स्त्रीरोग विशेषज्ञ, मैक्योर अस्पताल, दिल्ली बताती हैं कि गर्भावस्था एक ऐसा समय होता है जब मां की सेहत और उसकी दिनचर्या सीधे बच्चे के मस्तिष्क के विकास को प्रभावित करती है. हालांकि ऑटिज्म किसी एक कारण से नहीं होता, लेकिन गर्भावस्था के दौरान की गई कुछ लापरवाहियां जोखिम को बढ़ा सकती हैं, जिनसे बचाव करना संभव है. सबसे पहले, गर्भावस्था में मधुमेह यानी जेस्टेशनल डायबिटीज को नजरअंदाज करना एक बड़ी गलती हो सकती है. यदि ब्लड शुगर नियंत्रित नहीं रहती, तो इसका असर बच्चे के मस्तिष्क के विकास पर पड़ सकता है. इसी तरह गर्भावस्था के दौरान होने वाले संक्रमणों को हल्के में लेना भी नुकसानदायक हो सकता है. शरीर में संक्रमण होने से सूजन बढ़ती है, जो भ्रूण के न्यूरोलॉजिकल विकास को प्रभावित कर सकती है.

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एक्सपर्ट बताती हैं कि ज्यादा उम्र में कंसीव करना भी बच्चों में ऑटिज्म से जुड़ा एक कारक है.अधिक उम्र में गर्भधारण करने पर कुछ जैविक बदलावों का खतरा बढ़ सकता है, जो बच्चे के विकास को प्रभावित कर सकते हैं. इसके अलावा, मोटापा और असंतुलित आहार भी जोखिम को बढ़ाने वाले कारक हैं. गर्भावस्था में पोषण की कमी, खासकर जरूरी विटामिन और मिनरल्स की कमी, बच्चे के ब्रेन डेवलपमेंट को प्रभावित कर सकती है. इसके साथ ही कई बार महिलाएं सामान्य दवाइयों को भी सुरक्षित मानकर ले लेती हैं, जबकि कुछ दवाएं भ्रूण के विकास पर असर डाल सकती हैं. इसलिए गर्भावस्था में किसी भी दवा का उपयोग केवल विशेषज्ञ की सलाह से ही करना चाहिए.

इस बात का रखें ध्यान
यह समझना जरूरी है कि ऑटिज्म केवल इन कारणों से नहीं होता. अक्सर यह जेनेटिक प्रवृत्ति और बाहरी कारकों के मिले जुले प्रभाव से विकसित होता है. इसलिए किसी एक कारण को जिम्मेदार ठहराना सही नहीं है. गर्भावस्था के दौरान मानसिक रूप से स्वस्थ रहना बेहद जरूरी है. इसके लिए योग, मेडिटेशन, रिलैक्सेशन तकनीक और सकारात्मक वातावरण मददगार हो सकते हैं. जरूरत पड़ने पर काउंसलिंग लेना भी फायदेमंद होता है.

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Disclaimer: इस खबर में दी गई दवा/औषधि और स्वास्थ्य से जुड़ी सलाह, एक्सपर्ट्स से की गई बातचीत के आधार पर है. यह सामान्य जानकारी है, व्यक्तिगत सलाह नहीं. इसलिए डॉक्टर्स से परामर्श के बाद ही कोई चीज उपयोग करें. Local-18 किसी भी उपयोग से होने वाले नुकसान के लिए जिम्मेदार नहीं होगा.

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