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HCL प्रदूषण पर ग्रामीणों ने सांसद से लगाई गुहार:बोले-धूल और जहरीली हवा से बढ़ रही बीमारियां; मुद्दे को उच्च स्तर पर उठाने का आश्वासन

HCL प्रदूषण पर ग्रामीणों ने सांसद से लगाई गुहार:बोले-धूल और जहरीली हवा से बढ़ रही बीमारियां; मुद्दे को उच्च स्तर पर उठाने का आश्वासन

बालाघाट में सांसद भारती पारधी ने रविवार को मलाजखंड में हिंदुस्तान कॉपर लिमिटेड (एचसीएल) से प्रभावित ग्रामीणों की समस्याओं को सुना। ग्रामीणों ने एचसीएल के संचालन से उत्पन्न गंभीर प्रदूषण और उसके जनजीवन व पर्यावरण पर पड़ रहे नकारात्मक प्रभावों पर चिंता व्यक्त की। ग्रामीणों ने सांसद को बताया कि एचसीएल की खनन गतिविधियों से उड़ने वाली धूल और जहरीले तत्वों के कारण मलाजखंड में सांस लेना दूर्लभ हो गया है। वायु प्रदूषण के चलते हर घर में लोग श्वसन और त्वचा संबंधी बीमारियों से पीड़ित हैं। एचसीएल प्रदूषण से पानी संकट, सड़कें जर्जर हुई उन्होंने आरोप लगाया कि एचसीएल के कारण उन्हें बुनियादी सुविधाओं का अभाव, खराब सड़कें और दूषित वातावरण मिल रहा है। कंपनी से निकलने वाले प्रदूषित तत्वों ने जलस्रोतों को दूषित कर दिया है, जिससे पेयजल का गंभीर संकट पैदा हो गया है। भारी वाहनों की आवाजाही से सड़कें जर्जर हो गई हैं, जिससे दुर्घटनाओं का खतरा बना रहता है। ग्रामीणों ने यह भी उल्लेख किया कि एचसीएल के प्रदूषित तत्वों और दूषित हवा के कारण बुजुर्गों और बच्चों में गंभीर बीमारियों का प्रकोप लगातार बढ़ रहा है। सांसद बोलीं-जनस्वास्थ्य-पर्यावरण से समझौता नहीं सांसद भारती पारधी ने इस गंभीर स्थिति पर गहरी चिंता व्यक्त की। उन्होंने स्पष्ट किया कि कोई भी कंपनी प्रबंधन जनमानस के स्वास्थ्य और पर्यावरण की कीमत पर कार्य नहीं कर सकता। उन्होंने ग्रामीणों को आश्वासन दिया कि पर्यावरण सुरक्षा और जनता का स्वास्थ्य उनकी सर्वोच्च प्राथमिकता है। प्रदूषण पर केंद्र तक मुद्दा उठाने की चेतावनी सांसद ने कहा कि इस मुद्दे को केवल स्थानीय स्तर पर ही नहीं, बल्कि प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और एचसीएल के उच्च प्रबंधन के समक्ष भी मजबूती से उठाया जाएगा। उन्होंने आवश्यकता पड़ने पर केंद्र स्तर पर भी इस समस्या के ठोस समाधान के लिए हस्तक्षेप करने की बात कही। सांसद पारधी ने इस मामले को अब केवल एक क्षेत्रीय शिकायत नहीं, बल्कि पर्यावरण संरक्षण और सामाजिक न्याय की लड़ाई बताया। विशेषज्ञों का भी मानना है कि यदि समय रहते कड़े कदम नहीं उठाए गए, तो मलाजखंड एक बड़े मानवीय और पर्यावरणीय संकट की चपेट में आ सकता है।

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