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बाइक पर सवार युवा, असाधारण सुरक्षा संतुलन, वोट के लिए किले में वोट डालने वाले डुबा के चेहरे का बंगाल

बाइक पर सवार युवा, असाधारण सुरक्षा संतुलन, वोट के लिए किले में वोट डालने वाले डुबा के चेहरे का बंगाल

बंगाल विधानसभा चुनाव 2026: पश्चिम बंगाल चुनाव के दूसरे चरण से ठीक पहले चुनाव आयोग ने साफ कर दिया है कि इस बार किसी भी तरह की गड़बड़ी नहीं होगी। 29 अप्रैल को वाले मतदान के लिए 142 को आपत्तिजनक सुरक्षा के आधार पर नियुक्त किया गया, ताकि बिना किसी डर के अपने अधिकार का इस्तेमाल किया जा सके।

पहले चरण की तरह ही इस बार भी सागर और पोल्स मतदान हर हाल में सुनिश्चित किया जाएगा। अधिकारियों के अनुसार, आयोग ने स्पष्ट निर्देश दिया है कि प्रत्येक विधानसभा क्षेत्र में अलग-अलग स्मारकों की जाए और ज्वालामुखीय क्षेत्रों में ‘एरिया डोमिनेशन’ का निर्माण किया जाए। यानी सुरक्षा बल केवल मौजूद ही नहीं है, बल्कि सक्रिय रूप से नामांकन कर केंद्रीय नियंत्रण है।

इस रणनीति के तहत 160 मोटरसाइकिलों पर सवार केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल (CAPF) के युवा कॉन्स्टेबल पेट्रोलिंग करेंगे। हर बाइक पर दो युवा होंगे, ताकि किसी भी तरह की प्रतिस्पर्धा स्थिति में तुरंत प्रतिक्रिया दी जा सके। इसका उद्देश्य है- तेज प्रतिक्रिया, मजबूत उपस्थिति और मजबूत स्थिति।

यह भी पढ़ें- पश्चिम बंगाल चुनाव 2026: बंगाल की बंपर वोट पर अमित शाह की खुशी से फूले नहीं समाए, कर्सल्ट्स की भविष्यवाणी, बताएं कौन होगा सीएम

हर मतदान केंद्र पर सीसीटीवी कैमरे लगेंगे और सेंट्रल विधानमंडल की जांच की जाएगी। साथ ही, मतदान केन्द्र के 100 मीटर के दस्तावेज में किसी भी अनधिकृत व्यक्ति को प्रवेश की अनुमति नहीं होगी।

मुख्य निर्वाचन अधिकारी मनोज कुमार अग्रवाल ने साफा ने कहा, “हम सभी को पेट्रोलियम और सामान्य मतदान गारंटी देने की पेशकश की गई है। मजबूत मतदान या बूथ कब्जे की अनुमति नहीं दी जाएगी। लोगों को बिना किसी डार के अपने लोकतांत्रिक अधिकार का इस्तेमाल करना चाहिए। जो भी इसे रोकने की कोशिश करेगा, उसके खिलाफ कार्रवाई होगी।”

क्यों खास है ये फेस

142 पर होने वाला यह चेहरा इसलिए खास है क्योंकि ये इलाका मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली इमारतों का कोर गढ़ माने जाते हैं- दक्षिण बंगाल और कोलकाता का शहरी बेल्ट, जहां पार्टी की पकड़ लंबे समय से मजबूत बनी हुई है। वहीं पहले चरण में रिकॉर्ड करीब 93% मतदान ने यह संकेत दिया है कि इस बार लोकतंत्र बेहद सक्रिय हैं। यही वजह है कि दूसरे चरण में मुकाबला और तीखा हो गया है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह और बीजेपी के शीर्ष नेता इन दिनों लगातार चुनावी प्रचार कर रहे हैं. बीजेपी की रणनीति साफ है—दक्षिण बंगाल में सेंध लगाए 2021 में मिली 77 पार्टी के आंकड़ों को पार करना और सत्ता की दौड़ में खुद को मजबूत करना। इस चरण के घटकों में भी वृद्धि होती है क्योंकि कई हाई-प्रोफाइल गियरबॉक्स पर मतदान होता है। सबसे ज्यादा देखी जाने वाली भवानीपुर सीट है, जहां मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की सीधी टक्कर वाली विधानसभा में नामांकन के नेता सुवेंदु अधिकारी हैं।

किन सबसे अहम वोटिंग पर

पश्चिम बंगाल चुनाव के दूसरे चरण में जिन 142 वें सीज़न में मतदान हो रहा है, वे राज्य के सबसे अहम राजनीतिक क्षेत्र को कवर करते हैं। ये मूर्ति आठ आकर्षक स्मारक—कोलकाता उत्तर, कोलकाता दक्षिण, हावड़ा, नादिया, उत्तर 24 परगना, दक्षिण 24 परगना, हुगली और पूर्व बर्दवान—में तस्वीरें हुई हैं। यही कारण है कि इस चरण को ‘नर्व सेंटर’ का चुनाव करने पर विचार किया जा रहा है।

आंकड़ों पर नजर तो 2021 के चुनाव में इन डायनासोर कांग्रेस (टीएमसी) का नजरिया साफ था। बीजेपी के आक्रामक प्रचार के बावजूद टीएमसी ने 142 में से 123 सीटों पर जीत हासिल की. बीजेपी सिर्फ 18 वें सीट पर पहुंची थी, जबकि लेफ्ट के सहयोगी इंडियन सेक यूनिवर्सल फ्रंट (आईएसएफ) को एक सीट मिल गई थी। क्वेश्चन का डिस्ट्रीब्यूशन भी इस चरण के कॉम्बिनेशन में शामिल है। कोलकाता उत्तर और दक्षिण में 11, हाथी में 16, नादिया में 17, उत्तर 24 परगना में सबसे ज्यादा 33, दक्षिण 24 परगना में 31, हुगली में 18 और पूर्व बर्दवान में 16 तीर्थ शामिल हैं।

बड़े की किस्मत का होगा फैसला

दूसरे चरण की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यहां कई बड़े और प्रभावशाली समुदाय के मैदान हैं, जो कि हार-जीत पूरे राजनीतिक पहलू को प्रभावित कर सकते हैं। ऑर्थोडॉक्स कांग्रेस (टीएमसी) के लिए यह चरण खास तौर पर अहम है, क्योंकि पार्टी के कई दिग्गज नेता अपनी साख पर दांव लगा रहे हैं।

मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की सीट पर स्वामित्व नजर आता है, लेकिन इसके अलावा कोलकाता पोर्ट से मेयर फिरहाद हकीम, दमदम उत्तर से वित्त राज्य मंत्री चंद्रिमा भट्टाचार्य, श्यामपुकुर से उद्योग मंत्री शशि पांजा, टॉलीगंज से बिजली मंत्री अरूप बिस्वास, दमदम से मंत्री ब्रत्य बसु और विधाननगर से फायर राज्य मंत्री सुजीत बसु जैसे बड़े नाम भी मैदान में हैं। इन नेताओं का प्रदर्शन यह तय करना है कि अपने शहरी गढ़ को क्वेंटी प्लॉट से बचाकर रखें।

दूसरी ओर बीजेपी ने भी इस चरण में प्रतिष्ठा की लड़ाई लड़ी है। पार्टी ने पनिहाटी से उस जूनियर डॉक्टर की मां को उम्मीदवार बनाया है, जिसके साथ अक्टूबर 2024 में कोलकाता के आरजी कर अस्पताल में दोस्ती और हत्या की वारदात हुई थी- यह निर्णय चुनाव को उलटफेर देता है। इसके अलावा बीजेपी ने पूर्व समाजवादी कम्युनिस्ट पार्टी के नेता स्वपन दासगुप्ता को राशबिहारी और अभिनेत्री-राजनेता रूपा सुजुकी को सोनारपुर के दक्षिण मैदान में उतारा है, जो प्रतिस्पर्धा और दिलचस्प हो गई है।

भवानीपुर काम्बैट: प्रतिष्ठा, गणित और दबाव की लड़ाई

दक्षिण कोलकाता की भवानीपुर सीट इस चुनाव की सबसे हाई-प्रोफाइल जंग बन गई है। यहां मुख्यमंत्री ममता बनर्जी का सीधा मुकाबला उनके पूर्व सहयोगी और अब बीजेपी नेता सुवेंदु अधिकारी से है। अधिकारी नंदीग्राम से भी चुनाव लड़ रहे हैं—वही सीट जहां 2021 में उन्होंने ममता को करीब 1,900 सीटों से हराया था. इस पृष्ठभूमि ने भवानीपुर की लड़ाई को और ऐतिहासिक बनाया है।

यह भी पढ़ें- एग्जिट पोल 2026 तारीख: पश्चिम बंगाल में पहला चरण खत्म, असम-केरल-तमिलनाडु में वोट पूरा, कब आएगा चुनावी पोल?

इस बार गुणांक परिवर्तन हुए हैं. चुनाव आयोग के विशेष सूचना आयोग (एसआईआर) के बाद भवानीपुर में करीब 51,000 लोहिया के नाम की सूची से निकाली गई, जो कुल वोटरों का करीब 21% है। यह ममता बनर्जी के लिए चुनौती बनी हुई है, खासकर इसलिए क्योंकि 2021 के विधानसभा चुनाव में उनकी जीत का अंतर करीब 58,800 वोट था।

चुनाव के आखिरी दौर में ममता ने भवानीपुर पर फोकस तेज कर दिया है. वह न सिर्फ पार्टी के साथ मिलकर लगातार बैठकें कर रही हैं, बल्कि पहली बार ग्राउंड लेवल पर व्यापक स्तर पर भी कर रही हैं। यहां गैर-बंगाली झील की बड़ी संख्या को साधने के लिए ममता जैन नामी और गुरुद्वारों में पहुंच बनी हुई हैं। साथ ही, हाई-राइज सोसाइटी में रहने वाले हांगकांग के साथ कोल्ड-डोर सोलोम्स और पदयात्राओं के माध्यम से सीधा संवाद स्थापित किया जा रहा है।

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राजनीति

बाइक पर सवार युवा, असाधारण सुरक्षा संतुलन, वोट के लिए किले में वोट डालने वाले डुबा के चेहरे का बंगाल

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बंगाल विधानसभा चुनाव 2026: पश्चिम बंगाल चुनाव के दूसरे चरण से ठीक पहले चुनाव आयोग ने साफ कर दिया है कि इस बार किसी भी तरह की गड़बड़ी नहीं होगी। 29 अप्रैल को वाले मतदान के लिए 142 को आपत्तिजनक सुरक्षा के आधार पर नियुक्त किया गया, ताकि बिना किसी डर के अपने अधिकार का इस्तेमाल किया जा सके।

पहले चरण की तरह ही इस बार भी सागर और पोल्स मतदान हर हाल में सुनिश्चित किया जाएगा। अधिकारियों के अनुसार, आयोग ने स्पष्ट निर्देश दिया है कि प्रत्येक विधानसभा क्षेत्र में अलग-अलग स्मारकों की जाए और ज्वालामुखीय क्षेत्रों में ‘एरिया डोमिनेशन’ का निर्माण किया जाए। यानी सुरक्षा बल केवल मौजूद ही नहीं है, बल्कि सक्रिय रूप से नामांकन कर केंद्रीय नियंत्रण है।

इस रणनीति के तहत 160 मोटरसाइकिलों पर सवार केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल (CAPF) के युवा कॉन्स्टेबल पेट्रोलिंग करेंगे। हर बाइक पर दो युवा होंगे, ताकि किसी भी तरह की प्रतिस्पर्धा स्थिति में तुरंत प्रतिक्रिया दी जा सके। इसका उद्देश्य है- तेज प्रतिक्रिया, मजबूत उपस्थिति और मजबूत स्थिति।

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मुख्य निर्वाचन अधिकारी मनोज कुमार अग्रवाल ने साफा ने कहा, “हम सभी को पेट्रोलियम और सामान्य मतदान गारंटी देने की पेशकश की गई है। मजबूत मतदान या बूथ कब्जे की अनुमति नहीं दी जाएगी। लोगों को बिना किसी डार के अपने लोकतांत्रिक अधिकार का इस्तेमाल करना चाहिए। जो भी इसे रोकने की कोशिश करेगा, उसके खिलाफ कार्रवाई होगी।”

क्यों खास है ये फेस

142 पर होने वाला यह चेहरा इसलिए खास है क्योंकि ये इलाका मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली इमारतों का कोर गढ़ माने जाते हैं- दक्षिण बंगाल और कोलकाता का शहरी बेल्ट, जहां पार्टी की पकड़ लंबे समय से मजबूत बनी हुई है। वहीं पहले चरण में रिकॉर्ड करीब 93% मतदान ने यह संकेत दिया है कि इस बार लोकतंत्र बेहद सक्रिय हैं। यही वजह है कि दूसरे चरण में मुकाबला और तीखा हो गया है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह और बीजेपी के शीर्ष नेता इन दिनों लगातार चुनावी प्रचार कर रहे हैं. बीजेपी की रणनीति साफ है—दक्षिण बंगाल में सेंध लगाए 2021 में मिली 77 पार्टी के आंकड़ों को पार करना और सत्ता की दौड़ में खुद को मजबूत करना। इस चरण के घटकों में भी वृद्धि होती है क्योंकि कई हाई-प्रोफाइल गियरबॉक्स पर मतदान होता है। सबसे ज्यादा देखी जाने वाली भवानीपुर सीट है, जहां मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की सीधी टक्कर वाली विधानसभा में नामांकन के नेता सुवेंदु अधिकारी हैं।

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बड़े की किस्मत का होगा फैसला

दूसरे चरण की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यहां कई बड़े और प्रभावशाली समुदाय के मैदान हैं, जो कि हार-जीत पूरे राजनीतिक पहलू को प्रभावित कर सकते हैं। ऑर्थोडॉक्स कांग्रेस (टीएमसी) के लिए यह चरण खास तौर पर अहम है, क्योंकि पार्टी के कई दिग्गज नेता अपनी साख पर दांव लगा रहे हैं।

मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की सीट पर स्वामित्व नजर आता है, लेकिन इसके अलावा कोलकाता पोर्ट से मेयर फिरहाद हकीम, दमदम उत्तर से वित्त राज्य मंत्री चंद्रिमा भट्टाचार्य, श्यामपुकुर से उद्योग मंत्री शशि पांजा, टॉलीगंज से बिजली मंत्री अरूप बिस्वास, दमदम से मंत्री ब्रत्य बसु और विधाननगर से फायर राज्य मंत्री सुजीत बसु जैसे बड़े नाम भी मैदान में हैं। इन नेताओं का प्रदर्शन यह तय करना है कि अपने शहरी गढ़ को क्वेंटी प्लॉट से बचाकर रखें।

दूसरी ओर बीजेपी ने भी इस चरण में प्रतिष्ठा की लड़ाई लड़ी है। पार्टी ने पनिहाटी से उस जूनियर डॉक्टर की मां को उम्मीदवार बनाया है, जिसके साथ अक्टूबर 2024 में कोलकाता के आरजी कर अस्पताल में दोस्ती और हत्या की वारदात हुई थी- यह निर्णय चुनाव को उलटफेर देता है। इसके अलावा बीजेपी ने पूर्व समाजवादी कम्युनिस्ट पार्टी के नेता स्वपन दासगुप्ता को राशबिहारी और अभिनेत्री-राजनेता रूपा सुजुकी को सोनारपुर के दक्षिण मैदान में उतारा है, जो प्रतिस्पर्धा और दिलचस्प हो गई है।

भवानीपुर काम्बैट: प्रतिष्ठा, गणित और दबाव की लड़ाई

दक्षिण कोलकाता की भवानीपुर सीट इस चुनाव की सबसे हाई-प्रोफाइल जंग बन गई है। यहां मुख्यमंत्री ममता बनर्जी का सीधा मुकाबला उनके पूर्व सहयोगी और अब बीजेपी नेता सुवेंदु अधिकारी से है। अधिकारी नंदीग्राम से भी चुनाव लड़ रहे हैं—वही सीट जहां 2021 में उन्होंने ममता को करीब 1,900 सीटों से हराया था. इस पृष्ठभूमि ने भवानीपुर की लड़ाई को और ऐतिहासिक बनाया है।

यह भी पढ़ें- एग्जिट पोल 2026 तारीख: पश्चिम बंगाल में पहला चरण खत्म, असम-केरल-तमिलनाडु में वोट पूरा, कब आएगा चुनावी पोल?

इस बार गुणांक परिवर्तन हुए हैं. चुनाव आयोग के विशेष सूचना आयोग (एसआईआर) के बाद भवानीपुर में करीब 51,000 लोहिया के नाम की सूची से निकाली गई, जो कुल वोटरों का करीब 21% है। यह ममता बनर्जी के लिए चुनौती बनी हुई है, खासकर इसलिए क्योंकि 2021 के विधानसभा चुनाव में उनकी जीत का अंतर करीब 58,800 वोट था।

चुनाव के आखिरी दौर में ममता ने भवानीपुर पर फोकस तेज कर दिया है. वह न सिर्फ पार्टी के साथ मिलकर लगातार बैठकें कर रही हैं, बल्कि पहली बार ग्राउंड लेवल पर व्यापक स्तर पर भी कर रही हैं। यहां गैर-बंगाली झील की बड़ी संख्या को साधने के लिए ममता जैन नामी और गुरुद्वारों में पहुंच बनी हुई हैं। साथ ही, हाई-राइज सोसाइटी में रहने वाले हांगकांग के साथ कोल्ड-डोर सोलोम्स और पदयात्राओं के माध्यम से सीधा संवाद स्थापित किया जा रहा है।

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