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Jaskeerat Singh Humboldt Crash Driver Deportation Stayed

Jaskeerat Singh Humboldt Crash Driver Deportation Stayed

जसकीरत सिंह सिद्धू को ले जाते हुए पुलिस। फाइल फोटो

कनाडा के मशहूर हंबोल्ट ब्रोंकोस बस हादसे के गुनहगार पंजाब मूल के ट्रक ड्राइवर जसकीरत सिंह सिद्धू को कोर्ट से बड़ी राहत मिली है। सोमवार सुबह उन्हें भारत डिपोर्ट किया जाना था, लेकिन रवानगी से 2 दिन पहले फेडरल कोर्ट ने इस पर इमरजेंसी रोक लगा दी है।

.

कनाडा की मीडिया रिपोट्स के अनुसार जस्टिस जोसलिन गाग्ने ने यह आदेश तब दिया जब जसकीरत सिंह सिद्धू के वकील ने कनाडा बॉर्डर सर्विस एजेंसी के फैसले को कोर्ट में चुनौती दी। कोर्ट ने अगले आदेशों तक जसकीरत सिंह की डिपोर्टेशन पर रोक लगा दी।

दरअसल मूल रूप से संगरूर के रहने वाले ट्रक ड्राइवर के कारण कनाडा के हंबोल्ट ब्रोंकेस में एक रोड एक्सीडेंट हुआ, जिसमें 16 लोगों की मौत हो गई थी और 13 गंभीर रूप से घायल हुए थे। इस मामले में जसकीरत सिंह को 8 साल की सजा हुई, जिसके बाद कनाडा बॉर्डर सर्विस एजेंसी ने उसे डिपोर्ट करने का आदेश जारी किया था।

आरोपी को कोर्ट से लाते हुए कनाडा पुलिस।

फेडरल कोर्ट में जसकीरत सिंह सिद्धू की याचिका पर दी गई दलीलें…

जसकीरत के वकील (माइकल ग्रीन) की दलीलें

25 अप्रैल को फेडरल कोर्ट में हुई सुनवाई में दोनों पक्षों के बीच बहस हुई। कोर्ट इस बात की समीक्षा कर रहा है कि क्या जसकीरत को ‘मानवीय आधार’ पर रुकने का मौका दिया जाना चाहिए। दरअसल सिद्धू के वकील माइकल ग्रीन ने कोर्ट में सबसे बड़ी दलील उनके एक साल के बेटे की सेहत को लेकर दी। बच्चे को दिल और फेफड़ों की गंभीर बीमारी है। वकील ने कहा कि भारत की खराब हवा बच्चे के स्वास्थ्य के लिए जानलेवा हो सकती है। वकील ने तर्क दिया कि हादसे से पहले जसकीरत का रिकॉर्ड एकदम बेदाग था और उन्होंने जेल में अपने किए का गहरा पश्चाताप किया है।

सरकारी पक्ष और कानून की दलील:

सरकारी वकील ने कोर्कट में दलील दी है कि कि कनाडा के कानून के मुताबिक, अगर किसी पीआर (PR) होल्डर को 6 महीने से ज्यादा की जेल होती है, तो वह देश में रहने का हक खो देता है। जसकीरत को 8 साल की सजा हुई है, इसलिए उन्हें डिपोर्ट करना अनिवार्य है। सरकारी वकील ने दलील दी है कि जिसकी लापरवाही से 16 लोगों की जान चली गई और 13 लोग गंभीर रूप से घायल हुए। उसे कनाडा में रहने का कोई हक नहीं है। यहीं नहीं सरकारी वकील ने ये भी दलील दी है कि अगर जसकीरत सिंह सिद्धू को अपने बच्चों से अलग नहीं होना तो वो उन्हें लेकर भी जा सकता है। अगर भारत में उन्हें परेशानी है तो वो यहां रह सकते हैं।

कनाडा में 2018 में हुए सड़क हादसे की तस्वीर। फाइल फोटो

कनाडा में 2018 में हुए सड़क हादसे की तस्वीर। फाइल फोटो

मृतकों के परिजनों की कोर्ट से गुहार…

टोबी बाउलेट (मृतक खिलाड़ी लोगन बाउलेट के पिता):

टोबी बाउलेट ने कोर्ट में स्पष्ट कहा— “जसकीरत सिंह सिद्धू को डिपोर्ट करना कोई अतिरिक्त सजा नहीं है, बल्कि यह कनाडा के कानून का हिस्सा है। कानून स्पष्ट है कि यदि आप अपराधी हैं, तो आप इस देश में रहने का हक खो देते हैं। हर बार नई अपील और नई तारीख हमारे जख्मों को फिर से कुरेद देती है।”

क्रिस जोसेफ (मृतक खिलाड़ी जेसन जोसेफ के पिता):

क्रिस जोसेफ ने भावुक होते हुए कोर्ट से पूछा— “अदालत में बार-बार सिद्धू के परिवार और उनके बच्चों की दुहाई दी जा रही है। लेकिन उन 16 पिताओं के बारे में किसने सोचा जिन्होंने अपने जवान बेटों के जनाजे उठाए? मेरे बेटे का भविष्य छीन लिया गया। सिद्धू का परिवार उनके साथ है, लेकिन हमारे बच्चे कभी वापस नहीं आएंगे। हम सिर्फ यह चाहते हैं कि कानून अपना काम करे।”

लापरवाही ने ले ली थी रोड एक्सीडेंट में 16 लोगों की जान

ट्रक ड्राइवर जसकीरत सिंह की लापरवाही के कारण 6 अप्रैल 2018 को रोड एक्सीडेंट हुआ। जसकीरत सिंह ने ‘स्टॉप साइन’ को नजरअंदाज किया और ट्रक की रफ्तार कम नहीं की। ट्रक सीधे ‘हंबोल्ट ब्रोंकोस’ जूनियर हॉकी टीम की बस से टकरा गया। टक्कर इतनी जबरदस्त थी कि बस के तीन टुकड़े हो गए। इस हादसे में 16 लोगों की मौत हो गई और 13 लोग घायल हुए। पूरे कनाडा में शोक की लहर दौड़ गई थी। जसकीरत ने अपना गुनाह कबूल किया और उसे 8 साल जेल की सजा सुनाई गई। 2023 में उन्हें जेल से पैरोल मिली।

जसकीरत का पंजाब से कनाडा तक का सफर

जसकीरत मूल रूप से पंजाब के संगरूर जिले के रहने वाला है। उसके पिता पंजाब में किसान हैं और परिवार के पास करीब 50 एकड़ खेती की जमीन है। जसकीरत ने पंजाब से बी.कॉम की डिग्री ली और साल 2014 में अपनी पत्नी के साथ स्थायी निवासी (PR) के तौर पर कनाडा शिफ्ट हुए थे। जसकीरत सिंह ट्रक चलाता था।

केस की टाइम लाइन

6 अप्रैल 2018: भीषण बस हादसा हुआ। 16 घरों के चिराग बुझ गए।

22 मार्च 2019: कोर्ट ने जसकीरत को 8 साल जेल की सजा सुनाई।

जनवरी 2023: अच्छे बर्ताव के कारण उन्हें जेल से पैरोल पर रिहा किया गया।

24 मई 2024: इमिग्रेशन बोर्ड ने उनका पीआर स्टेटस रद्द कर डिपोर्ट करने का आदेश दिया।

4 फरवरी 2026: सरकार ने उनकी अंतिम अपील ठुकरा दी और 27 अप्रैल का दिन रवानगी के लिए तय किया।

25 अप्रैल 2026: रवानगी से दो दिन पहले फेडरल कोर्ट ने डिपोर्टेशन पर ‘स्टे’ (रोक) लगा दिया।

अब आगे क्या?

जसकीरत के वकील के मुताबिक, यह रोक 1 से 8 महीने तक रह सकती है। अब फेडरल कोर्ट विस्तार से इस बात की जांच करेगा कि क्या मानवीय आधार पर उनके निर्वासन को टाला जा सकता है। फिलहाल, जसकीरत की भारत रवानगी पर ब्रेक लग गया है।

एक संघीय न्यायाधीश ने हंबोल्ट ब्रोंकोस (Humboldt Broncos) बस दुर्घटना के लिए जिम्मेदार ट्रक ड्राइवर को आखिरी क्षणों में बड़ी राहत दी है, जिससे उनकी भारत वापसी पर फिलहाल रोक लग गई है।

जसकीरत सिंह सिद्धू के वकीलों ने शुक्रवार को फेडरल कोर्ट में अपील की थी ताकि सोमवार सुबह होने वाले उनके निर्वासन (deportation) को रोका जा सके।

मामले का विवरण

दुर्घटना: अप्रैल 2018 में, कैलगरी के नौसिखिया ट्रक ड्राइवर सिद्धू ने सास्काचेवान के टिस्डेल के पास एक ग्रामीण चौराहे पर स्टॉप साइन की अनदेखी की थी। उनका ट्रक जूनियर हॉकी टीम को ले जा रही बस के रास्ते में आ गया था।

परिणाम: इस भीषण हादसे में 16 लोगों की मौत हुई और 13 अन्य घायल हुए, जिससे पूरे कनाडा में शोक की लहर दौड़ गई थी।

सजा: सिद्धू ने खतरनाक ड्राइविंग के अपराधों के लिए अपना गुनाह कबूल कर लिया था और उन्हें आठ साल जेल की सजा सुनाई गई थी।

कानूनी पेच

कनाडा के कानून के अनुसार, यदि किसी स्थायी निवासी (Permanent Resident) को 6 महीने से अधिक की सजा होती है, तो वह देश में रहने का हक खो देता है। सिद्धू को 2023 में पूर्ण पैरोल दे दी गई थी।

उनके वकील माइकल ग्रीन ने ‘कनाडा बॉर्डर सर्विसेज एजेंसी’ (CBSA) से अनुरोध किया था कि उनके निर्वासन को 17 महीनों के लिए टाल दिया जाए, ताकि ‘मानवीय और करुणामय’ आधार पर उनकी स्थायी निवास स्थिति बहाल करने की याचिका पर विचार किया जा सके।

अदालत का ताजा फैसला

वकील माइकल ग्रीन ने शुक्रवार शाम एक इंटरव्यू में बताया:

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“एजेंसी ने हमारे अनुरोध को खारिज कर दिया था, जिसे हमने संघीय अदालत में चुनौती दी। अदालत ने अब हमारे मुख्य मामले पर फैसला आने तक निर्वासन पर रोक लगा दी है। न्यायाधीश हमारी दलीलों से सहमत हुए, जो कि एक बहुत ही दुर्लभ फैसला है।”

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राहत के मुख्य बिंदु:

समय सीमा: यह स्थगन (Stay) एक से आठ महीने तक का हो सकता है।

पारिवारिक स्थिति: सिद्धू के दो बच्चे हैं, जिनमें से एक को गंभीर स्वास्थ्य समस्याएं हैं। खुद सिद्धू को भी स्वास्थ्य संबंधी दिक्कतें हैं।

महत्व: वर्षों से चल रही इस कानूनी लड़ाई में यह पहली बार है जब कोई फैसला सिद्धू के पक्ष में आया है।

जसकीरत सिंह सिद्धू मूल रूप से पंजाब के संगरूर जिले के रहने वाले हैं।

उनके बारे में कुछ और जानकारी:

शिक्षा: जसकीरत ने भारत (पंजाब) में ही अपनी पढ़ाई पूरी की और कॉमर्स में ग्रेजुएशन (B.Com) की डिग्री हासिल की।

कनाडा आगमन: वे 2014 में अपनी पत्नी (जो उस समय उनकी मंगेतर थीं) के साथ स्थायी निवासी (Permanent Resident) के रूप में कनाडा गए थे।

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जसकीरत सिंह सिद्धू को ले जाते हुए पुलिस। फाइल फोटो

कनाडा के मशहूर हंबोल्ट ब्रोंकोस बस हादसे के गुनहगार पंजाब मूल के ट्रक ड्राइवर जसकीरत सिंह सिद्धू को कोर्ट से बड़ी राहत मिली है। सोमवार सुबह उन्हें भारत डिपोर्ट किया जाना था, लेकिन रवानगी से 2 दिन पहले फेडरल कोर्ट ने इस पर इमरजेंसी रोक लगा दी है।

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कनाडा की मीडिया रिपोट्स के अनुसार जस्टिस जोसलिन गाग्ने ने यह आदेश तब दिया जब जसकीरत सिंह सिद्धू के वकील ने कनाडा बॉर्डर सर्विस एजेंसी के फैसले को कोर्ट में चुनौती दी। कोर्ट ने अगले आदेशों तक जसकीरत सिंह की डिपोर्टेशन पर रोक लगा दी।

दरअसल मूल रूप से संगरूर के रहने वाले ट्रक ड्राइवर के कारण कनाडा के हंबोल्ट ब्रोंकेस में एक रोड एक्सीडेंट हुआ, जिसमें 16 लोगों की मौत हो गई थी और 13 गंभीर रूप से घायल हुए थे। इस मामले में जसकीरत सिंह को 8 साल की सजा हुई, जिसके बाद कनाडा बॉर्डर सर्विस एजेंसी ने उसे डिपोर्ट करने का आदेश जारी किया था।

आरोपी को कोर्ट से लाते हुए कनाडा पुलिस।

फेडरल कोर्ट में जसकीरत सिंह सिद्धू की याचिका पर दी गई दलीलें…

जसकीरत के वकील (माइकल ग्रीन) की दलीलें

25 अप्रैल को फेडरल कोर्ट में हुई सुनवाई में दोनों पक्षों के बीच बहस हुई। कोर्ट इस बात की समीक्षा कर रहा है कि क्या जसकीरत को ‘मानवीय आधार’ पर रुकने का मौका दिया जाना चाहिए। दरअसल सिद्धू के वकील माइकल ग्रीन ने कोर्ट में सबसे बड़ी दलील उनके एक साल के बेटे की सेहत को लेकर दी। बच्चे को दिल और फेफड़ों की गंभीर बीमारी है। वकील ने कहा कि भारत की खराब हवा बच्चे के स्वास्थ्य के लिए जानलेवा हो सकती है। वकील ने तर्क दिया कि हादसे से पहले जसकीरत का रिकॉर्ड एकदम बेदाग था और उन्होंने जेल में अपने किए का गहरा पश्चाताप किया है।

सरकारी पक्ष और कानून की दलील:

सरकारी वकील ने कोर्कट में दलील दी है कि कि कनाडा के कानून के मुताबिक, अगर किसी पीआर (PR) होल्डर को 6 महीने से ज्यादा की जेल होती है, तो वह देश में रहने का हक खो देता है। जसकीरत को 8 साल की सजा हुई है, इसलिए उन्हें डिपोर्ट करना अनिवार्य है। सरकारी वकील ने दलील दी है कि जिसकी लापरवाही से 16 लोगों की जान चली गई और 13 लोग गंभीर रूप से घायल हुए। उसे कनाडा में रहने का कोई हक नहीं है। यहीं नहीं सरकारी वकील ने ये भी दलील दी है कि अगर जसकीरत सिंह सिद्धू को अपने बच्चों से अलग नहीं होना तो वो उन्हें लेकर भी जा सकता है। अगर भारत में उन्हें परेशानी है तो वो यहां रह सकते हैं।

कनाडा में 2018 में हुए सड़क हादसे की तस्वीर। फाइल फोटो

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क्रिस जोसेफ (मृतक खिलाड़ी जेसन जोसेफ के पिता):

क्रिस जोसेफ ने भावुक होते हुए कोर्ट से पूछा— “अदालत में बार-बार सिद्धू के परिवार और उनके बच्चों की दुहाई दी जा रही है। लेकिन उन 16 पिताओं के बारे में किसने सोचा जिन्होंने अपने जवान बेटों के जनाजे उठाए? मेरे बेटे का भविष्य छीन लिया गया। सिद्धू का परिवार उनके साथ है, लेकिन हमारे बच्चे कभी वापस नहीं आएंगे। हम सिर्फ यह चाहते हैं कि कानून अपना काम करे।”

लापरवाही ने ले ली थी रोड एक्सीडेंट में 16 लोगों की जान

ट्रक ड्राइवर जसकीरत सिंह की लापरवाही के कारण 6 अप्रैल 2018 को रोड एक्सीडेंट हुआ। जसकीरत सिंह ने ‘स्टॉप साइन’ को नजरअंदाज किया और ट्रक की रफ्तार कम नहीं की। ट्रक सीधे ‘हंबोल्ट ब्रोंकोस’ जूनियर हॉकी टीम की बस से टकरा गया। टक्कर इतनी जबरदस्त थी कि बस के तीन टुकड़े हो गए। इस हादसे में 16 लोगों की मौत हो गई और 13 लोग घायल हुए। पूरे कनाडा में शोक की लहर दौड़ गई थी। जसकीरत ने अपना गुनाह कबूल किया और उसे 8 साल जेल की सजा सुनाई गई। 2023 में उन्हें जेल से पैरोल मिली।

जसकीरत का पंजाब से कनाडा तक का सफर

जसकीरत मूल रूप से पंजाब के संगरूर जिले के रहने वाला है। उसके पिता पंजाब में किसान हैं और परिवार के पास करीब 50 एकड़ खेती की जमीन है। जसकीरत ने पंजाब से बी.कॉम की डिग्री ली और साल 2014 में अपनी पत्नी के साथ स्थायी निवासी (PR) के तौर पर कनाडा शिफ्ट हुए थे। जसकीरत सिंह ट्रक चलाता था।

केस की टाइम लाइन

6 अप्रैल 2018: भीषण बस हादसा हुआ। 16 घरों के चिराग बुझ गए।

22 मार्च 2019: कोर्ट ने जसकीरत को 8 साल जेल की सजा सुनाई।

जनवरी 2023: अच्छे बर्ताव के कारण उन्हें जेल से पैरोल पर रिहा किया गया।

24 मई 2024: इमिग्रेशन बोर्ड ने उनका पीआर स्टेटस रद्द कर डिपोर्ट करने का आदेश दिया।

4 फरवरी 2026: सरकार ने उनकी अंतिम अपील ठुकरा दी और 27 अप्रैल का दिन रवानगी के लिए तय किया।

25 अप्रैल 2026: रवानगी से दो दिन पहले फेडरल कोर्ट ने डिपोर्टेशन पर ‘स्टे’ (रोक) लगा दिया।

अब आगे क्या?

जसकीरत के वकील के मुताबिक, यह रोक 1 से 8 महीने तक रह सकती है। अब फेडरल कोर्ट विस्तार से इस बात की जांच करेगा कि क्या मानवीय आधार पर उनके निर्वासन को टाला जा सकता है। फिलहाल, जसकीरत की भारत रवानगी पर ब्रेक लग गया है।

एक संघीय न्यायाधीश ने हंबोल्ट ब्रोंकोस (Humboldt Broncos) बस दुर्घटना के लिए जिम्मेदार ट्रक ड्राइवर को आखिरी क्षणों में बड़ी राहत दी है, जिससे उनकी भारत वापसी पर फिलहाल रोक लग गई है।

जसकीरत सिंह सिद्धू के वकीलों ने शुक्रवार को फेडरल कोर्ट में अपील की थी ताकि सोमवार सुबह होने वाले उनके निर्वासन (deportation) को रोका जा सके।

मामले का विवरण

दुर्घटना: अप्रैल 2018 में, कैलगरी के नौसिखिया ट्रक ड्राइवर सिद्धू ने सास्काचेवान के टिस्डेल के पास एक ग्रामीण चौराहे पर स्टॉप साइन की अनदेखी की थी। उनका ट्रक जूनियर हॉकी टीम को ले जा रही बस के रास्ते में आ गया था।

परिणाम: इस भीषण हादसे में 16 लोगों की मौत हुई और 13 अन्य घायल हुए, जिससे पूरे कनाडा में शोक की लहर दौड़ गई थी।

सजा: सिद्धू ने खतरनाक ड्राइविंग के अपराधों के लिए अपना गुनाह कबूल कर लिया था और उन्हें आठ साल जेल की सजा सुनाई गई थी।

कानूनी पेच

कनाडा के कानून के अनुसार, यदि किसी स्थायी निवासी (Permanent Resident) को 6 महीने से अधिक की सजा होती है, तो वह देश में रहने का हक खो देता है। सिद्धू को 2023 में पूर्ण पैरोल दे दी गई थी।

उनके वकील माइकल ग्रीन ने ‘कनाडा बॉर्डर सर्विसेज एजेंसी’ (CBSA) से अनुरोध किया था कि उनके निर्वासन को 17 महीनों के लिए टाल दिया जाए, ताकि ‘मानवीय और करुणामय’ आधार पर उनकी स्थायी निवास स्थिति बहाल करने की याचिका पर विचार किया जा सके।

अदालत का ताजा फैसला

वकील माइकल ग्रीन ने शुक्रवार शाम एक इंटरव्यू में बताया:

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“एजेंसी ने हमारे अनुरोध को खारिज कर दिया था, जिसे हमने संघीय अदालत में चुनौती दी। अदालत ने अब हमारे मुख्य मामले पर फैसला आने तक निर्वासन पर रोक लगा दी है। न्यायाधीश हमारी दलीलों से सहमत हुए, जो कि एक बहुत ही दुर्लभ फैसला है।”

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राहत के मुख्य बिंदु:

समय सीमा: यह स्थगन (Stay) एक से आठ महीने तक का हो सकता है।

पारिवारिक स्थिति: सिद्धू के दो बच्चे हैं, जिनमें से एक को गंभीर स्वास्थ्य समस्याएं हैं। खुद सिद्धू को भी स्वास्थ्य संबंधी दिक्कतें हैं।

महत्व: वर्षों से चल रही इस कानूनी लड़ाई में यह पहली बार है जब कोई फैसला सिद्धू के पक्ष में आया है।

जसकीरत सिंह सिद्धू मूल रूप से पंजाब के संगरूर जिले के रहने वाले हैं।

उनके बारे में कुछ और जानकारी:

शिक्षा: जसकीरत ने भारत (पंजाब) में ही अपनी पढ़ाई पूरी की और कॉमर्स में ग्रेजुएशन (B.Com) की डिग्री हासिल की।

कनाडा आगमन: वे 2014 में अपनी पत्नी (जो उस समय उनकी मंगेतर थीं) के साथ स्थायी निवासी (Permanent Resident) के रूप में कनाडा गए थे।

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