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biryani-tarbooj| ayurveda aahar| कभी तरबूज-बिरयानी तो कभी आम-कोल्ड ड्रिंक से मौत! आयुर्वेद में कुछ कॉम्बो कहलाते हैं जहर, क्या ये इन्हीं में से हैं?

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मुंबई में हाल ही में तरबूज-बिरयानी खाने से एक पर‍िवार के 4 सदस्‍यों की मौत का मामला सामने आया है. इससे पहले आम के साथ कोल्ड ड्रिंक और पंजाब में मोमोज- सोया चाप खाने के बाद भी मौतों की खबरें आई थीं, आख‍िर क्‍या सच में ये फूड कॉम्‍बो खतरनाक होते हैं और जान ले लेते हैं? आयुर्वेद में विरुद्धाहार से जुड़ा खतरा क्‍या कहता है?

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क्‍या सच में तरबूज और ब‍िरयानी खाने से जान जा सकती है? आयुर्वेद क्‍या कहता है?

हाल ही में मुंबई में तरबूज-बिरयानी खाने से हुई मौतों ने झकझोर दिया है. 4 सदस्यों की रहस्यमयी मौत के पीछे रात में तरबूज और बिरयानी का कॉम्बो बताया जा रहा है.कुछ दिन पहले भी एक ऐसी ही खबर आई थी जब आम और उसके ऊपर से कोल्ड ड्रिंक पीने के बाद कुछ लोगों की मौत हो गई थी.इसके बाद एक और खबर पंजाब से आई जहां रात में मोमोज और सोया चाप खाने के बाद दो बहनों की सुबह तक मौत हो गई थी. ऐसे में हर किसी के मन में सवाल है कि क्या बिरयानी के बाद तरबूज या आम के बाद कोल्ड ड्रिंक या मोमोज खाने से किसी की मौत हो सकती है? क्या खाने के ऐसे कॉम्बो हैं जो वाकई शरीर में पहुंचकर जहर बन जाते हैं?

इस सवाल पर मॉडर्न साइंस भले ही सबूतों और वैज्ञानिक शोधों का हवाला देकर जवाब दे लेकिन आयुर्वेद में कई ऐसे भोजन हैं जिन्हें प्रतिकूल या विरुद्ध आहार या निषेध बताया गया है. इस बारे में राष्ट्रीय आयुर्वेद विद्यापीठ के सदस्य जाने-माने आयुर्वेदाचार्य डॉ. अच्युत त्रिपाठी ने यहां आयुर्वेद के अनुसार आहार पर विस्तार से जानकारी दी है.

वैद्य त्रिपाठी कहते हैं कि आयुर्वेद में एक पूरा अध्याय है विधि विरुद्ध आहार का. जैसा कि बताया जा रहा है कि भोजन नुकसान कर गया तो संभव है कि इन लोगों ने भी जो भोजन किया है वो इसी के अंतर्गत आता हो. ‘जब हम कोई फल खाते हैं तरबूज आदि तो इसमें पानी की मात्रा ज्यादा होती है, इसमें इतना ज्यादा पानी होता है कि लिवर उसका संश्लेषण नहीं कर पाता है.जब उसके साथ कोई ऐसा खाद्य पदार्थ लेते हैं जो एल्कोहॉलिक या एसिडिक हो तो यह उस भोजन की विषाक्तता को दोगुना कर देता है और इससे दो बड़े नुकसान होते हैं. पहला इम्यून सिस्टम कमजोर होता है और रोग होते हैं दूसरा ओज यानि कांति और चमक फीकी होती. लिहाजा खाना फायदे के बजाय शरीर को नुकसान पहुंचाने लगता है.

विरुद्धाहार 9 तरह का होता है
वैद्य त्रिपाठी कहते हैं कि आयुर्वेद में विरुद्धाहार 9 तरह का होता है और इसे काफी विस्तार से बताया गया है लेकिन इसमें से कुछ चीजों को यहां उहाहरण के रूप में समझ सकते हैं. जैसे..

  1. . दूध के साथ नमक या अचार का प्रयोग
  2. . चने भुने या तले के साथ मीट के टुकड़े या सलाद और साथ में अल्कोहल
  3. . मछली के साथ दूध का प्रयोग
  4. . दही के साथ मछली का उपयोग
  5. . ठंडा भोजन करने के बाद गर्म और गर्म के बाद ठंडा भोजन
  6. . फ्रिज में रखे भोजन को बार-बार गर्म करना
  7. . ऋतु विरुद्ध भोजन करना, जैसे सर्दी में कुल्फी का प्रयोग आदि
  8. . दही के साथ चावल और उड़द की दाल
  9. . तरबूज या फलों के ऊपर से पानी पी लेना

किन अंगों को होता है नुकसान
खराब या विधि विरुद्ध आहार लेने से किडनी, हार्ट, लिवर और लंग्स जैसे प्रमुख अंगों पर असर पड़ सकता है. किडनी शरीर में एक तरह की चलनी है और छानने का काम करती है. कई बार ऐसी कठोर चीजें जो हम खा लेते हैं जो मौसम के विरुद्ध होती हैं और प्रोटीन या उन टॉक्सिन्स और टॉक्सिकैंट्स को जिन्हें किडनी छान नहीं पाती तो ये ब्लड के माध्यम से हार्ट या फेंफड़ों में पहुंच जाते है.

वे कहते हैं कि लिवर टॉक्सिन्स को दूर करने की अद्भुत क्षमता रखता है. यहां तक कि यह गांजा, एल्कोहॉल की विषाक्तता को काफी हद तक खत्म कर देता हैं. लिवर में हेपेरिन नाम का एल्केलाइड होता है जो टॉक्सिंस को खत्म करता है, अगर ये उन्हें खत्म नहीं कर पाता तो व्यक्ति की हेल्थ पर खराब असर पड़ता है.

क्या विधि विरुद्धाहार लेने से मौत संभव है?
वैद्य त्रिपाठी कहते हैं कि विधि विरुद्धाहार लेने से मौत भी हो जाती है. ऐसी कई घटनाएं हुई भी हैं. आमतौर पर लोग इसे समझ भी नहीं पाते हैं. कई बार यह क्रॉनिक तो कई बार एक्यूट असर भी देखने को मिलता है. सबसे बड़ी बात है कि उस व्यक्ति का इम्यून सिस्टम अगर खराब है तो कोई भी प्रतिकूल ये चीजें उसे नुकसान पहुंचा सकती हैं. जिस ऋतु में जो चीज होती है वह उस मौसम में अमृत तुल्य होती है लेकिन उसे दूसरी ऋतु में लेंगे तो वह नुकसान पहुंचाती है और वह प्रतिकूल आहार बन जाता है.

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प्रिया गौतमSenior Correspondent

Priya Gautam is an accomplished journalist currently working with Hindi.News18.com with over 14 years of extensive field reporting experience. Previously worked with Hindustan times group (Hindustan Hindi) and …और पढ़ें

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इस सवाल पर मॉडर्न साइंस भले ही सबूतों और वैज्ञानिक शोधों का हवाला देकर जवाब दे लेकिन आयुर्वेद में कई ऐसे भोजन हैं जिन्हें प्रतिकूल या विरुद्ध आहार या निषेध बताया गया है. इस बारे में राष्ट्रीय आयुर्वेद विद्यापीठ के सदस्य जाने-माने आयुर्वेदाचार्य डॉ. अच्युत त्रिपाठी ने यहां आयुर्वेद के अनुसार आहार पर विस्तार से जानकारी दी है.

वैद्य त्रिपाठी कहते हैं कि आयुर्वेद में एक पूरा अध्याय है विधि विरुद्ध आहार का. जैसा कि बताया जा रहा है कि भोजन नुकसान कर गया तो संभव है कि इन लोगों ने भी जो भोजन किया है वो इसी के अंतर्गत आता हो. ‘जब हम कोई फल खाते हैं तरबूज आदि तो इसमें पानी की मात्रा ज्यादा होती है, इसमें इतना ज्यादा पानी होता है कि लिवर उसका संश्लेषण नहीं कर पाता है.जब उसके साथ कोई ऐसा खाद्य पदार्थ लेते हैं जो एल्कोहॉलिक या एसिडिक हो तो यह उस भोजन की विषाक्तता को दोगुना कर देता है और इससे दो बड़े नुकसान होते हैं. पहला इम्यून सिस्टम कमजोर होता है और रोग होते हैं दूसरा ओज यानि कांति और चमक फीकी होती. लिहाजा खाना फायदे के बजाय शरीर को नुकसान पहुंचाने लगता है.

विरुद्धाहार 9 तरह का होता है
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  1. . दूध के साथ नमक या अचार का प्रयोग
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  8. . दही के साथ चावल और उड़द की दाल
  9. . तरबूज या फलों के ऊपर से पानी पी लेना

किन अंगों को होता है नुकसान
खराब या विधि विरुद्ध आहार लेने से किडनी, हार्ट, लिवर और लंग्स जैसे प्रमुख अंगों पर असर पड़ सकता है. किडनी शरीर में एक तरह की चलनी है और छानने का काम करती है. कई बार ऐसी कठोर चीजें जो हम खा लेते हैं जो मौसम के विरुद्ध होती हैं और प्रोटीन या उन टॉक्सिन्स और टॉक्सिकैंट्स को जिन्हें किडनी छान नहीं पाती तो ये ब्लड के माध्यम से हार्ट या फेंफड़ों में पहुंच जाते है.

वे कहते हैं कि लिवर टॉक्सिन्स को दूर करने की अद्भुत क्षमता रखता है. यहां तक कि यह गांजा, एल्कोहॉल की विषाक्तता को काफी हद तक खत्म कर देता हैं. लिवर में हेपेरिन नाम का एल्केलाइड होता है जो टॉक्सिंस को खत्म करता है, अगर ये उन्हें खत्म नहीं कर पाता तो व्यक्ति की हेल्थ पर खराब असर पड़ता है.

क्या विधि विरुद्धाहार लेने से मौत संभव है?
वैद्य त्रिपाठी कहते हैं कि विधि विरुद्धाहार लेने से मौत भी हो जाती है. ऐसी कई घटनाएं हुई भी हैं. आमतौर पर लोग इसे समझ भी नहीं पाते हैं. कई बार यह क्रॉनिक तो कई बार एक्यूट असर भी देखने को मिलता है. सबसे बड़ी बात है कि उस व्यक्ति का इम्यून सिस्टम अगर खराब है तो कोई भी प्रतिकूल ये चीजें उसे नुकसान पहुंचा सकती हैं. जिस ऋतु में जो चीज होती है वह उस मौसम में अमृत तुल्य होती है लेकिन उसे दूसरी ऋतु में लेंगे तो वह नुकसान पहुंचाती है और वह प्रतिकूल आहार बन जाता है.

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