Tuesday, 03 Nov 2026 | 06:32 PM

Trending :

परेश रावल के विचारों से प्रेरित फिल्म ‘मर्सी’:सिनेमाघरों में रिलीज हुई, यूथेनेशिया के जटिल सवालों को उठाकर दर्शकों के बीच बहस छेड़ती है

परेश रावल के विचारों से प्रेरित फिल्म ‘मर्सी’:सिनेमाघरों में रिलीज हुई, यूथेनेशिया के जटिल सवालों को उठाकर दर्शकों के बीच बहस छेड़ती है

हाल ही में रिलीज हुई फिल्म मर्सी 24 अप्रैल 2026 को सिनेमाघरों में आई है और अपने संवेदनशील विषय के चलते चर्चा में बनी हुई है। मितुल पटेल के निर्देशन में बनी इस फिल्म में राज वासुदेवा, निहारिका रायजादा, कुणाल भान और अपर्णा घोषाल अहम भूमिकाओं में नजर आए हैं। दैनिक भास्कर से खास बातचीत में डायरेक्टर और कास्ट ने अपनी जर्नी, किरदारों और फिल्म के इमोशनल पहलुओं पर खुलकर बात की है। मितुल पटेल ने बताया कि इस कहानी की प्रेरणा उन्हें परेश रावल के एक इंटरव्यू से मिली, जिसमें जीवन और मृत्यु से जुड़े एक कठिन फैसले का जिक्र था। उनका कहना है कि यह फिल्म एक ऐसे विषय को सामने लाती है, जिस पर आमतौर पर लोग बात करने से बचते हैं। आपकी फिल्म अब सिनेमाघरों में रिलीज हो चुकी है और आप सबसे युवा डायरेक्टर के तौर पर सामने आए हैं इस पूरे सफर और रिलीज के बाद दर्शकों के रिस्पॉन्स को आप कैसे देखते हैं? मितुल पटेल- यह मेरे लिए अभी भी थोड़ा अवास्तविक सा महसूस होता है। तीन साल की मेहनत के बाद जब फिल्म रिलीज हुई और लोगों तक पहुंची, तो एक अलग ही सुकून मिला। इस पूरी जर्नी ने मुझे बहुत ग्राउंडेड और हंबल बना दिया है। फेस्टिवल्स में हमें पहले ही अच्छा रिस्पॉन्स मिल चुका था, लेकिन थिएटर में जब दर्शक फिल्म से जुड़ते हैं और इमोशनली रिएक्ट करते हैं, तो वो और भी खास होता है।
मैं बस यही उम्मीद करता हूं कि ज्यादा से ज्यादा लोग फिल्म देखें और इससे कनेक्ट करें क्योंकि यही इस कहानी की सबसे बड़ी जीत होगी। इस फिल्म का विषय काफी संवेदनशील और ‘ग्रे’ एरिया वाला है आपको इस कहानी का विचार कहां से आया और आपने इसे फिल्म में बदलने का फैसला क्यों किया? मितुल पटेल- करीब साढ़े तीन साल पहले मैंने परेश रावल का एक इंटरव्यू देखा था। उसमें उन्होंने अपनी मां के कोमा में होने और उस मुश्किल फैसले के बारे में बात की थी कि क्या हम किसी की जिंदगी बढ़ा रहे हैं या उसकी मौत को लंबा कर रहे हैं। उनकी एक बात मेरे अंदर रह गई कि उनकी मां ने शायद खुद अपनी जिंदगी कुर्बान कर दी ताकि उन्हें गिल्ट न रहे।
मुझे लगा कि यह एक ऐसा विषय है जिसमें कोई एक सही जवाब नहीं है। हर इंसान अपने नजरिए से सही है। इसलिए मैंने सोचा कि इस फिल्म के जरिए अलग-अलग दृष्टिकोण दिखाए जाएं, ताकि दर्शक खुद को इन किरदारों में देखें और अपने जवाब खोजें। अपर्णा जी, आपने इस फिल्म में मां का किरदार निभाया है जो काफी इमोशनल और चुनौतीपूर्ण है इस रोल को निभाने का अनुभव कैसा रहा और इस विषय पर आपकी अपनी सोच क्या है? अपर्णा घोषाल- यह रोल सच में बहुत इमोशनल और अप-डाउन से भरा हुआ था। खासकर जब किरदार बेड पर है और उस स्थिति में है, तो उसमें खुद को डालना आसान नहीं था। यह एक ट्रॉमेटिक स्थिति है, और उसमें ढलने में थोड़ा समय लगा।
जहां तक विषय की बात है, यह आज के समय में बहुत प्रासंगिक है। ‘मौत’ एक सार्वभौमिक सच है, लेकिन हम उसे कैसे फेस करते हैं या कब स्वीकार करते हैं यह बहुत बड़ा सवाल है। यूथेनेशिया जैसा विषय आज भी पूरी तरह स्पष्ट नहीं है, और यही इस फिल्म की खूबसूरती है कि यह लोगों को सोचने पर मजबूर करती है। राज वासुदेवा, इस फिल्म से जुड़ने की आपकी यात्रा कैसे शुरू हुई और एक्टर व प्रोड्यूसर के तौर पर आपका अनुभव कैसा रहा? राज वासुदेवा- उस समय मैं हॉलैंड में था और मेरे परिवार में एक ऐसी घटना हुई थी जिससे मैं इस विषय से जुड़ पाया। मैं अच्छी स्क्रिप्ट्स की तलाश में था और तभी अजय ने मुझे इस फिल्म की एक लाइन भेजी।
वह तुरंत मेरे दिल को छू गई क्योंकि मैं खुद उस स्थिति से जुड़ा हुआ था। फिर हम मिले और पहले इसे शॉर्ट फिल्म बनाने का सोचा, लेकिन कहानी इतनी बड़ी थी कि हमने इसे फीचर फिल्म में बदल दिया।
एक्टर के तौर पर मेरे लिए सबसे बड़ा चैलेंज इमोशनल सीन थे उनमें घुसना आसान था क्योंकि माहौल बहुत रियल था, लेकिन बाहर निकलना मुश्किल हो जाता था। निहारिका रायजादा, आपका किरदार ‘जिया’ कई रिश्तों और भावनाओं के बीच फंसा हुआ है इस किरदार को निभाने की प्रक्रिया कैसी रही और क्या आप इस कहानी से पर्सनली जुड़ पाईं? निहारिका रायजादा- मुझे इस फिल्म के लिए ऑडिशन के जरिए चुना गया था। पर्सनल लेवल पर मैं इस विषय से जुड़ी हूं क्योंकि कोविड के दौरान मेरी नानी के साथ ऐसा अनुभव हुआ था। जब भी मैं इस फिल्म के बारे में बात करती हूं, वो यादें वापस आ जाती हैं। इसलिए यह फिल्म मेरे लिए सिर्फ एक प्रोजेक्ट नहीं, बल्कि एक भावनात्मक अनुभव भी है। कुणाल भान, आपके किरदार में एक हल्की-फुल्की शरारत के साथ गहराई भी दिखाई देती है इस रोल को निभाने का अनुभव कैसा रहा और आप इससे कितना रिलेट कर पाए? कुणाल भान- जब मुझे इस फिल्म का ऑडिशन मिला, तभी मुझे लगा कि मुझे इसका हिस्सा बनना है क्योंकि यह एक बहुत जरूरी कहानी है, जिस पर लोग खुलकर बात नहीं करते। मेरा किरदार बाहर से थोड़ा शरारती और नटखट है, जैसा अक्सर छोटे भाई होते हैं, लेकिन उसके अंदर एक प्रैक्टिकल और इमोशनल साइड भी है। उसकी जर्नी काफी साइलेंट है, वो अपने भाव गानों और अपने तरीके से व्यक्त करता है।
मैं पूरी तरह से इस स्थिति से रिलेट नहीं कर पाया, लेकिन भाई-बहन के रिश्ते, मजाक और गलतफहमियां ये सब मेरे असली जीवन से काफी मिलती-जुलती हैं। हाल ही में देश में यूथेनेशिया से जुड़े फैसलों पर चर्चा बढ़ी है ऐसे समय में आपकी फिल्म का आना कितना मायने रखता है? मितुल पटेल- हमारी फिल्म तो पहले ही बन चुकी थी, लेकिन यह एक दिलचस्प संयोग है कि हाल ही में इस विषय पर चर्चा बढ़ी है। मुझे लगता है कि इससे लोगों में जिज्ञासा बढ़ेगी और वे इस विषय पर बात करने के लिए तैयार होंगे। हमारी कोशिश यही है कि लोग ‘डिग्निटी इन डाइंग’ और ‘एंड-ऑफ-लाइफ केयर’ जैसे मुद्दों पर खुलकर बातचीत करें।

WhatsApp
Facebook
Twitter
LinkedIn

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

सच्चाई की दहाड़

ब्रेकिंग खबरें सीधे अपने ईमेल पर पाने के लिए रजिस्टर करें।

You have been successfully Subscribed! Ops! Something went wrong, please try again.

ग्लोबल करेंसी अपडेट

Provided by IFC Markets
authorimg

February 13, 2026/
6:31 pm

होमताजा खबरक्राइम प्रेमी मिलने खुशी-खुशी होटल पहुंची युवती, कमरे में हुआ कुछ ऐसा, कूद गई नीचे और Last Updated:February 13,...

पंजाब के टूरिस्टों ने हिमाचल में तलवारें चलाईं:एक लोकल का हाथ, दूसरे का गाल काटा; लोग बोले- चिट्‌टे के नशे में थे

May 13, 2026/
6:06 am

हिमाचल प्रदेश के कुल्लू जिले के बंजार में पंजाब से आए टूरिस्टों ने कथित तौर पर तलवारें लहराईं और स्थानीय...

Janhvi Kapoor Slams Deepfake Video

October 5, 2026/
8:44 am

34 मिनट पहले कॉपी लिंक अभिनेत्री जान्हवी कपूर ने अपनी फिल्म ‘देवरा: पार्ट 1’ के गाने ‘चुट्टामल्ले’ पर बने AI...

खरबूजे की चटनी: घर पर खास खरबूजे की चटनी, मुंह का स्वाद होगा चटपटा; नोट कर लें विधि

March 24, 2026/
9:15 am

खरबूजे की चटनी कैसे बनाएं: गर्मियों में खरबूजा खाना सभी को पसंद होता है, लेकिन अक्सर हम उसके छिलकों को...

जॉब - शिक्षा

राजनीति

परेश रावल के विचारों से प्रेरित फिल्म ‘मर्सी’:सिनेमाघरों में रिलीज हुई, यूथेनेशिया के जटिल सवालों को उठाकर दर्शकों के बीच बहस छेड़ती है

परेश रावल के विचारों से प्रेरित फिल्म ‘मर्सी’:सिनेमाघरों में रिलीज हुई, यूथेनेशिया के जटिल सवालों को उठाकर दर्शकों के बीच बहस छेड़ती है

हाल ही में रिलीज हुई फिल्म मर्सी 24 अप्रैल 2026 को सिनेमाघरों में आई है और अपने संवेदनशील विषय के चलते चर्चा में बनी हुई है। मितुल पटेल के निर्देशन में बनी इस फिल्म में राज वासुदेवा, निहारिका रायजादा, कुणाल भान और अपर्णा घोषाल अहम भूमिकाओं में नजर आए हैं। दैनिक भास्कर से खास बातचीत में डायरेक्टर और कास्ट ने अपनी जर्नी, किरदारों और फिल्म के इमोशनल पहलुओं पर खुलकर बात की है। मितुल पटेल ने बताया कि इस कहानी की प्रेरणा उन्हें परेश रावल के एक इंटरव्यू से मिली, जिसमें जीवन और मृत्यु से जुड़े एक कठिन फैसले का जिक्र था। उनका कहना है कि यह फिल्म एक ऐसे विषय को सामने लाती है, जिस पर आमतौर पर लोग बात करने से बचते हैं। आपकी फिल्म अब सिनेमाघरों में रिलीज हो चुकी है और आप सबसे युवा डायरेक्टर के तौर पर सामने आए हैं इस पूरे सफर और रिलीज के बाद दर्शकों के रिस्पॉन्स को आप कैसे देखते हैं? मितुल पटेल- यह मेरे लिए अभी भी थोड़ा अवास्तविक सा महसूस होता है। तीन साल की मेहनत के बाद जब फिल्म रिलीज हुई और लोगों तक पहुंची, तो एक अलग ही सुकून मिला। इस पूरी जर्नी ने मुझे बहुत ग्राउंडेड और हंबल बना दिया है। फेस्टिवल्स में हमें पहले ही अच्छा रिस्पॉन्स मिल चुका था, लेकिन थिएटर में जब दर्शक फिल्म से जुड़ते हैं और इमोशनली रिएक्ट करते हैं, तो वो और भी खास होता है।
मैं बस यही उम्मीद करता हूं कि ज्यादा से ज्यादा लोग फिल्म देखें और इससे कनेक्ट करें क्योंकि यही इस कहानी की सबसे बड़ी जीत होगी। इस फिल्म का विषय काफी संवेदनशील और ‘ग्रे’ एरिया वाला है आपको इस कहानी का विचार कहां से आया और आपने इसे फिल्म में बदलने का फैसला क्यों किया? मितुल पटेल- करीब साढ़े तीन साल पहले मैंने परेश रावल का एक इंटरव्यू देखा था। उसमें उन्होंने अपनी मां के कोमा में होने और उस मुश्किल फैसले के बारे में बात की थी कि क्या हम किसी की जिंदगी बढ़ा रहे हैं या उसकी मौत को लंबा कर रहे हैं। उनकी एक बात मेरे अंदर रह गई कि उनकी मां ने शायद खुद अपनी जिंदगी कुर्बान कर दी ताकि उन्हें गिल्ट न रहे।
मुझे लगा कि यह एक ऐसा विषय है जिसमें कोई एक सही जवाब नहीं है। हर इंसान अपने नजरिए से सही है। इसलिए मैंने सोचा कि इस फिल्म के जरिए अलग-अलग दृष्टिकोण दिखाए जाएं, ताकि दर्शक खुद को इन किरदारों में देखें और अपने जवाब खोजें। अपर्णा जी, आपने इस फिल्म में मां का किरदार निभाया है जो काफी इमोशनल और चुनौतीपूर्ण है इस रोल को निभाने का अनुभव कैसा रहा और इस विषय पर आपकी अपनी सोच क्या है? अपर्णा घोषाल- यह रोल सच में बहुत इमोशनल और अप-डाउन से भरा हुआ था। खासकर जब किरदार बेड पर है और उस स्थिति में है, तो उसमें खुद को डालना आसान नहीं था। यह एक ट्रॉमेटिक स्थिति है, और उसमें ढलने में थोड़ा समय लगा।
जहां तक विषय की बात है, यह आज के समय में बहुत प्रासंगिक है। ‘मौत’ एक सार्वभौमिक सच है, लेकिन हम उसे कैसे फेस करते हैं या कब स्वीकार करते हैं यह बहुत बड़ा सवाल है। यूथेनेशिया जैसा विषय आज भी पूरी तरह स्पष्ट नहीं है, और यही इस फिल्म की खूबसूरती है कि यह लोगों को सोचने पर मजबूर करती है। राज वासुदेवा, इस फिल्म से जुड़ने की आपकी यात्रा कैसे शुरू हुई और एक्टर व प्रोड्यूसर के तौर पर आपका अनुभव कैसा रहा? राज वासुदेवा- उस समय मैं हॉलैंड में था और मेरे परिवार में एक ऐसी घटना हुई थी जिससे मैं इस विषय से जुड़ पाया। मैं अच्छी स्क्रिप्ट्स की तलाश में था और तभी अजय ने मुझे इस फिल्म की एक लाइन भेजी।
वह तुरंत मेरे दिल को छू गई क्योंकि मैं खुद उस स्थिति से जुड़ा हुआ था। फिर हम मिले और पहले इसे शॉर्ट फिल्म बनाने का सोचा, लेकिन कहानी इतनी बड़ी थी कि हमने इसे फीचर फिल्म में बदल दिया।
एक्टर के तौर पर मेरे लिए सबसे बड़ा चैलेंज इमोशनल सीन थे उनमें घुसना आसान था क्योंकि माहौल बहुत रियल था, लेकिन बाहर निकलना मुश्किल हो जाता था। निहारिका रायजादा, आपका किरदार ‘जिया’ कई रिश्तों और भावनाओं के बीच फंसा हुआ है इस किरदार को निभाने की प्रक्रिया कैसी रही और क्या आप इस कहानी से पर्सनली जुड़ पाईं? निहारिका रायजादा- मुझे इस फिल्म के लिए ऑडिशन के जरिए चुना गया था। पर्सनल लेवल पर मैं इस विषय से जुड़ी हूं क्योंकि कोविड के दौरान मेरी नानी के साथ ऐसा अनुभव हुआ था। जब भी मैं इस फिल्म के बारे में बात करती हूं, वो यादें वापस आ जाती हैं। इसलिए यह फिल्म मेरे लिए सिर्फ एक प्रोजेक्ट नहीं, बल्कि एक भावनात्मक अनुभव भी है। कुणाल भान, आपके किरदार में एक हल्की-फुल्की शरारत के साथ गहराई भी दिखाई देती है इस रोल को निभाने का अनुभव कैसा रहा और आप इससे कितना रिलेट कर पाए? कुणाल भान- जब मुझे इस फिल्म का ऑडिशन मिला, तभी मुझे लगा कि मुझे इसका हिस्सा बनना है क्योंकि यह एक बहुत जरूरी कहानी है, जिस पर लोग खुलकर बात नहीं करते। मेरा किरदार बाहर से थोड़ा शरारती और नटखट है, जैसा अक्सर छोटे भाई होते हैं, लेकिन उसके अंदर एक प्रैक्टिकल और इमोशनल साइड भी है। उसकी जर्नी काफी साइलेंट है, वो अपने भाव गानों और अपने तरीके से व्यक्त करता है।
मैं पूरी तरह से इस स्थिति से रिलेट नहीं कर पाया, लेकिन भाई-बहन के रिश्ते, मजाक और गलतफहमियां ये सब मेरे असली जीवन से काफी मिलती-जुलती हैं। हाल ही में देश में यूथेनेशिया से जुड़े फैसलों पर चर्चा बढ़ी है ऐसे समय में आपकी फिल्म का आना कितना मायने रखता है? मितुल पटेल- हमारी फिल्म तो पहले ही बन चुकी थी, लेकिन यह एक दिलचस्प संयोग है कि हाल ही में इस विषय पर चर्चा बढ़ी है। मुझे लगता है कि इससे लोगों में जिज्ञासा बढ़ेगी और वे इस विषय पर बात करने के लिए तैयार होंगे। हमारी कोशिश यही है कि लोग ‘डिग्निटी इन डाइंग’ और ‘एंड-ऑफ-लाइफ केयर’ जैसे मुद्दों पर खुलकर बातचीत करें।

WhatsApp
Facebook
Twitter
LinkedIn

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

हेल्थ & फिटनेस

विज्ञापन

राजनीति

ग्लोबल करेंसी अपडेट

Provided by IFC Markets

Live Cricket

सच्चाई की दहाड़

ब्रेकिंग खबरें सीधे अपने ईमेल पर पाने के लिए रजिस्टर करें।

You have been successfully Subscribed! Ops! Something went wrong, please try again.