राजस्थान की पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे के नाम से फर्जी पत्र वायरल करने के मामले में गिरफ्तार कांग्रेस आईटी सेल के तीन कार्यकर्ताओं को बुधवार को मध्यप्रदेश हाईकोर्ट में पेश किया गया। मामले में परिजनों द्वारा दायर बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने तीनों के बयान दर्ज कराने के निर्देश दिए हैं। साथ ही जयपुर के डीआईजी क्राइम और भोपाल डीसीपी क्राइम से जवाब तलब किया है। मामले की सुनवाई चीफ जस्टिस संजीव सचदेवा और जस्टिस विनय सराफ की खंडपीठ में हुई। राजस्थान पुलिस ने निखिल, बिलाल और इनाम नाम के तीनों कार्यकर्ताओं को अदालत के समक्ष पेश किया। गिरफ्तारी तारीख पर पुलिस की सफाई सुनवाई के दौरान राजस्थान पुलिस ने कहा कि कानूनी दस्तावेजों में गिरफ्तारी 22 अप्रैल दर्शाई गई है, क्योंकि तीनों कार्यकर्ता 20 अप्रैल को स्वयं उनके साथ भोपाल से जयपुर गए थे। जांच के बाद 22 अप्रैल को औपचारिक गिरफ्तारी दिखाई गई। पुलिस ने यह भी बताया कि जयपुर कोर्ट से तीनों को जमानत मिल चुकी है और बेल बॉन्ड भरने के बाद उन्हें रिहा कर दिया जाएगा। कार्यकर्ताओं ने पुलिस का दावा नकारा जब हाईकोर्ट ने तीनों कार्यकर्ताओं से पूछताछ की तो उन्होंने राजस्थान पुलिस के दावे को गलत बताया। उनका कहना था कि वे अपनी मर्जी से नहीं गए थे, बल्कि उन्हें गिरफ्तार कर जयपुर ले जाया गया था। साथ ही, उन्हें ले जाने से पहले आवश्यक कानूनी प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया। दो राज्यों के अफसरों से जवाब तलब अदालत ने जब पुलिस अधिकारियों से इस पर सवाल किया तो बताया गया कि जयपुर पुलिस के डीआईजी क्राइम ब्रांच और भोपाल पुलिस के डीसीपी क्राइम के बीच हुई टेलीफोनिक बातचीत के बाद यह कार्रवाई की गई थी। इस पर हाईकोर्ट ने दोनों अधिकारियों से शपथपत्र पर पूरे मामले की सच्चाई बताने को कहा है। साथ ही अगली सुनवाई में दोनों अधिकारियों को उपस्थित रहने के निर्देश दिए हैं। सीजेएम जबलपुर को बयान दर्ज करने के निर्देश हाईकोर्ट ने कांग्रेस आईटी सेल के तीनों कार्यकर्ताओं के बयान दर्ज करने के लिए जबलपुर सीजेएम को निर्देश दिए हैं, ताकि मामले में आगे की कार्रवाई की जा सके। मामले की अगली सुनवाई 12 मई को निर्धारित की गई है।
















































