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परमवीर ने ‘मर्दानी3’ और ‘धुरंधर’ का ऑफर ठुकरा दिया था:बोले- सही वक्त नहीं था, सीरीज की स्टारकास्ट बोली- सपना टूटना मरने जैसा है

परमवीर ने ‘मर्दानी3’ और ‘धुरंधर’ का ऑफर ठुकरा दिया था:बोले- सही वक्त नहीं था, सीरीज की स्टारकास्ट बोली- सपना टूटना मरने जैसा है

सीरीज ‘सपने वर्सेस एवरीवन’ का दूसरा सीजन सिर्फ एक कहानी नहीं, बल्कि संघर्ष, टूटने और फिर खड़े होने की असली जर्नी है। दैनिक भास्कर से बातचीत में लेखक- निर्देशक-एक्टर अंबरीश वर्मा, एक्टर परमवीर सिंह चीमा और विजयंत कोहली ने खुलकर बताया कि कैसे यह शो उनकी जिंदगी के बेहद करीब है। जहां अंबरीश इसे जिम्मेदारी मानते हैं, वहीं परमवीर मानते हैं कि इस शो ने उन्हें अंदर से बदला। बातचीत में रिजेक्शन, बर्नआउट, और सपनों के टूटने का दर्द भी सामने आया, साथ ही ‘धुरंधर’ और ‘मर्दानी 3’ जैसे बड़े प्रोजेक्ट छोड़ने के फैसले पर भी साफ जवाब मिले। पेश है कुछ प्रमुख अंश.. सवाल ‘सपने वर्सेस एवरीवन’ आपके लिए क्या मायने रखता है? सीजन 2 कितना खास है? जवाब/अंबरीश वर्मा: ये मेरे जीवन का सबसे क्लोज शो है। इसकी कहानियां बहुत पर्सनल हैं और ऐसी कहानियां बार-बार नहीं मिलतीं, जो किसी की सोच या जिंदगी बदल सकें। सीजन 2 मेरे लिए सिर्फ करियर का मौका नहीं, एक जिम्मेदारी है- कुछ ऐसा कहने की, जो लोगों पर असर डाले। विजयंत कोहली: सीजन 1 एक हैप्पी एंडिंग पर खत्म हुआ था, इसलिए लोगों के मन में सवाल था कि सीजन 2 आएगा या नहीं। लेकिन जब पहला सीजन इतना पसंद किया गया, तो दूसरा बनाना एक जिम्मेदारी बन गया। इस बार एक्सपेक्टेशन भी ज्यादा है। परमवीर सिंह चीमा: ये शो सिर्फ अच्छा नहीं है, लोगों को मोटिवेट करता है। इसने मुझे भी अंदर से बदला है। मैं आज भी इसे देखकर खुद को याद दिलाता हूं कि अपने असली स्वभाव से मत भटक। सवाल : क्या इस शो ने आपकी सोच बदली? जवाब/परमवीर सिंह चीमा: हां, बहुत। इंडस्ट्री में धीरे-धीरे इंसान थोड़ा शातिर हो जाता है, लेकिन इस शो ने मुझे खुद के मूल्यों पर टिके रहने की याद दिलाई। जब भी नेगेटिव सोच आती है, मैं खुद से कहता हूं- “डर छोड़, आगे बढ़।” सवाल: सपना टूटना मरने जैसा है, क्या आपने ऐसा महसूस किया है? जवाब/परमवीर सिंह चीमा: हर इंसान इस फेज से गुजरता है। कोविड के दौरान मैंने सपने छोड़ भी दिए थे और घर लौट गया था। कई बार इतना बर्नआउट हो जाता है कि लगता है सब खत्म हो गया। लेकिन फिर खुद को टाइम देकर, थोड़ा रुककर, फिर से उठना पड़ता है, यही असली जंग है। सवाल: क्या कभी लगा कि ये जंग छोड़ दें? जवाब/परमवीर सिंह चीमा: हां, कोविड के समय छोड़ दिया था। पैसों की दिक्कत थी, सर्वाइवल मुश्किल था। मैं किसान परिवार से हूं, जानता था घर से पैसे कैसे आ रहे हैं। लेकिन मेरे पिता ने कहा- “मैं तेरे साथ हूं, तू क्यों हार मान रहा है?” वही बात मेरे लिए टर्निंग पॉइंट बनी। सवाल: अंबरीश, आपकी कहानी इतनी रिलेटेबल कैसे बनी? क्या आप खुद टूटे हैं? जवाब/अंबरीश वर्मा: टूटना हर किसी की जिंदगी का हिस्सा है। पहले ये चीजें मुझे बहुत ज्यादा हिट करती थीं और लंबे समय तक असर रहता था। फिर समझ आया कि हम चीजों को जरूरत से ज्यादा महत्व दे देते हैं, इसलिए दर्द ज्यादा होता है। जब पर्सपेक्टिव बदलता है, तो वही चीजें उतनी भारी नहीं लगतीं। सवाल: लाइफ में मंजिल ज्यादा जरूरी है या सफर? जवाब/अंबरीश वर्मा: हम लाइफ को माइलस्टोन्स से जोड़ देते हैं- जैसे प्रमोशन, पैसा, शादी। लेकिन असल लाइफ वो है जो इनके बीच में होती है। जब ये समझ आता है, तो चीजों का असर कम हो जाता है। विजयंत कोहली: हम भागते रहते हैं, लेकिन रुककर जीना भूल जाते हैं। अगर छोटी खुशियां एन्जॉय नहीं कीं, तो ये दौड़ कभी खत्म नहीं होगी। सवाल : सबसे बड़ा चांस क्या मिला जिंदगी में? जवाब/परमवीर सिंह चीमा: इस शो में मुझे नॉन-पंजाबी किरदार मिला, यही मेरे लिए लाइफ-चेंजिंग मौका था। इससे लोगों ने मुझे एक अलग नजर से देखना शुरू किया। अंबरीश वर्मा: नौकरी छोड़कर लिखना शुरू करना सबसे बड़ा चांस था। कुछ भी नहीं था, लेकिन वही रिस्क मेरी जिंदगी बदल गया। विजयंत कोहली: इस शो ने मेरी “सॉफ्ट” इमेज तोड़ी और मुझे एक अलग तरह का किरदार निभाने का मौका दिया। सवाल: सबसे मुश्किल दौर या रिजेक्शन? जवाब/अंबरीश वर्मा: 2019 में नौकरी छोड़ने के बाद कोई काम नहीं था। गिल्ट और डर दोनों थे- क्या कर रहा हूं मैं? वो फेज बहुत भारी था, लेकिन वहीं से रास्ता बना। विजयंत कोहली: एक्टर की जिंदगी में रिजेक्शन रोज होता है। इसे स्वीकार करना ही सबसे बड़ी सीख है। सवाल : क्या कभी लगा कि फैसला गलत था? जवाब/अंबरीश वर्मा: अगर आप किसी से पूछ रहे हो कि छोड़ूं या नहीं , तो आप तैयार नहीं हो। जब आप अंदर से कन्विंस्ड होते हो, तो खुद ही कदम उठाते हो। मैंने भी बिना पूछे नौकरी छोड़ी थी। सवाल: ‘मर्दानी 3’ और ‘धुरंधर’ जैसे बड़े प्रोजेक्ट्स छोड़ने की खबरें आईं, सच क्या है? जवाब/परमवीर सिंह चीमा: ‘मर्दानी 3’ का मामला सीधा था, उस समय मैं एक ही फिल्म कर सकता था। मेरे पास ऑप्शन था ‘तेरे इश्क में’ और ‘मर्दानी 3’ का। मैंने ‘तेरे इश्क में’ चुनी, क्योंकि मैं आनंद सर के साथ काम करना चाहता था और उस वक्त वही सही लगा। जहां तक ‘धुरंधर’ जैसे रोल की बात है तो हर रोल की एक टाइमिंग होती है। अगर वही रोल मुझे 2 साल पहले मिलता, तो शायद मैं कर लेता। लेकिन अब लगा कि वो मेरे लिए सही फिट नहीं है। मैं मानता हूं कि हर इंसान की अपनी किस्मत और अपनी यात्रा होती है। और एक बात, अगर मैं हर रोल खुद ही करता रहूंगा, तो बाकी लोग क्या करेंगे? सवाल: क्या अब आपको सपने जैसे ही रोल ऑफर होते हैं? जवाब/परमवीर सिंह चीमा: हां, कई बार कॉल आते हैं कि “सपने वाला ही किरदार करना है।” लेकिन मैं साफ कहता हूं, अगर वही करना है, तो किसी और को ले लो। मैं खुद को रिपीट नहीं करना चाहता। विजयंत कोहली: मेरे साथ भी ऐसा होता है। लोग उसी तरह का रोल ऑफर करते हैं। तब हमें कहना पड़ता है,थोड़ा अलग लिखो, कुछ नया दो, तभी मजा आएगा। सवाल : सबसे यादगार मौका या चांस? जवाब/परमवीर सिंह चीमा: जब अंबरीश भाई ने मुझे इस किरदार के लिए चुना, वो मेरे लिए लाइफ-चेंजिंग था। मैं आज भी उन्हें मैसेज करके कहता हूं, आपने मुझे मेरी जिंदगी का बेस्ट किरदार दिया। अंबरीश वर्मा: मेरे लिए भी ये लकी था कि मुझे ऐसे एक्टर्स मिले, जो किरदार में फिट बैठते हैं। इससे मेरा काम आसान हुआ। सवाल: इस शो का असली मैसेज क्या है? जवाब/अंबरीश वर्मा: अगर आपका काम किसी की जिंदगी में थोड़ा भी बदलाव ला सके, तो वही सबसे बड़ी सफलता है। परमवीर सिंह चीमा: ये शो सिखाता है- डर होगा, गिरोगे, लेकिन खुद को मत छोड़ो। विजयंत कोहली: और सबसे जरूरी- सफर को जीना सीखो, सिर्फ मंजिल के पीछे मत भागो।

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