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Shant Man Safal Jeevan Book Review; Calm Your Emotions

Shant Man Safal Jeevan Book Review; Calm Your Emotions

1 घंटे पहलेलेखक: गौरव तिवारी

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किताब- शांत मन, सफल जीवन

(बेस्टसेलर किताब ‘काम योर इमोशंस’ का हिंदी अनुवाद)

लेखक- निक ट्रेंटन

अनुवाद- डॉ. रोहिणी

प्रकाशक- पेंगुइन

मूल्य- 299 रुपए

अमेरिकी लेखक निक ट्रेंटन की किताब ‘शांत मन सफल जीवन’ भावनाओं को समझने, उन्हें नियंत्रित करने और जीवन में बैलेंस लाने पर केंद्रित है। यह किताब बताती है कि भावनाएं हमारी दुश्मन नहीं हैं। इन्हें समझकर हम मानसिक शांति और मजबूती पा सकते हैं। बिहेवियरल साइकोलॉजी में मास्टर निक ट्रेंटन एक मशहूर एक्सपर्ट हैं। वे जटिल भावनाओं को बहुत आसान भाषा में समझाते हैं ताकि हर व्यक्ति इन्हें अपनी लाइफ में लागू कर सके।

किताब क्या कहती है?

मुश्किलें हर किसी के जीवन में आती हैं, लेकिन हार माननी है या दोबारा उठना है, यह चुनाव हमारा होता है। किताब ‘शांत मन, सफल जीवन’ आपकी तकलीफों को समझती है और आपको अपनी जिंदगी पर पूरा कंट्रोल पाने में मदद करती है। यह किताब हमारे इमोशनल ट्रिगर्स और गलत फैसलों के पीछे की वजहों को पहचानने में मदद करती है। खास बात यह है कि लेखक ‘शांति से सोचो’ जैसी किताबी बातें नहीं करते। वह साइकोलॉजी, बिहेवियर साइंस और बौद्ध दर्शन पर आधारित असली टूल्स देते हैं।

ये किताब क्यों है इतनी खास?

अक्सर गुस्सा, चिंता या उदासी हम पर हावी हो जाती है। हम बिना सोचे रिएक्ट करते हैं और बाद में पछताते हैं। निक ट्रेंटन के अनुसार, भावनाएं हर मिनट बदलती हैं। अगर हम इन्हें मैनेज करना सीख लें, तो हमारी मेंटल हेल्थ, रिश्ते और फैसले बेहतर होंगे। किताब में दी गई 23 प्रैक्टिकल टेक्नीक्स तनाव घटाने और ओवरथिंकिंग रोकने में मददगार हैं। ग्राफिक में किताब से मिले 8 बड़े सबक देखिए-

अब इन सबको थोड़ा विस्तार से समझिए, क्योंकि ये किताबी बातें नहीं, जिंदगी की सच्चाई हैं।

भावनाओं को रेगुलेट करना सीखें

कभी-कभी ऐसा लगता है कि भावनाएं हमें कंट्रोल कर रही हैं। हम गुस्सा आने पर चिल्ला पड़ते हैं, फिक्र सिर पर इस कद्र हावी होती है कि रात भर सो नहीं पाते हैं। किताब कहती है कि भावनाएं हर मिनट बदलती हैं। इन्हें कंट्रोल करना प्रैक्टिस से आता है, जैसे मसल्स ट्रेन करते हैं।

क्या करें?

गुस्सा आने पर रुकें, सांस लें और सोचें कि रिएक्शन के नतीजे क्या होंगे। धीरे-धीरे आदत बन जाएगी।

चिंता को इंगेज मत करो, वो खुद चली जाएगी

चिंता का गोला तब बड़ा होता है, जब हम उसे बार-बार सोचते हैं। किताब कहती है कि चिंता को टाइम दो, एक फिक्स ‘वरी टाइम’ सेट करें। ज्यादातर चिंताएं उस टाइम तक भूल जाती हैं।

क्या करें?

रोज 15 मिनट का वरी टाइम रखें। बाकी समय चिंता आए तो कहो, “बाद में सोचूंगा।”

सिर्फ खुद से कंपटीशन करो

सोशल मीडिया पर दूसरों को देखकर लगता है हम पीछे रह गए। किताब कहती है कि कंपेयर करने का गेम कभी जीत नहीं सकते। खुद के पुराने वर्जन से कंपेयर करें।

क्या करें?

हर दिन एक छोटा इम्प्रूवमेंट टारगेट सेट करें। ये ‘कान्ट लूज’ सिचुएशन है।

इमोशंस को सही नाम दें

ज्यादातर लोग कहते हैं मूड खराब है। किताब कहती है इमोशंस को सही तरीके से पहचानना सीखें। ये फ्रस्ट्रेशन है या डिसअपॉइंट? सटीक तरीके से समझने से कारण पता चलता है।

क्या करें?

जब भी मन परेशान हो, खुद से पूछें कि यह असल में कैसी फीलिंग है।

जर्नलिंग से प्रॉब्लम सॉल्व करें

दिमाग में उलझन हो तो लिख डालें। किताब कहती है जर्नलिंग से प्रॉब्लम क्लियर होती है और एक्शन स्टेप्स दिखते हैं।

क्या करें?

समस्या लिखें और उसके संभावित समाधानों की एक लिस्ट बनाएं।

असफलता से खुद को न जोड़ें

अगर कुछ गलत हो जाए, तो खुद को “फेलियर” न मानें। असफलता एक घटना है, आपकी पहचान नहीं।

क्या करें?

खुद से कहें, “यह परिस्थिति खराब थी, मैं नहीं। मैं अगली बार बेहतर कोशिश करूंगा।”

रिएक्ट न करें, रिस्पॉन्ड करें

रिएक्शन बिना सोचे होता है, जबकि रिस्पॉन्स सोच-समझकर दिया जाता है। अपने ट्रिगर्स को पहचानें और जागरूक बनें।

क्या करें?

कोई बात चुभे, तो फौरन जवाब देने के बजाय रुकें और विचार करें।

इस किताब को क्यों पढ़ें?

यह किताब एक सच्चे दोस्त की तरह है। यह सरल उदाहरणों के जरिए छात्रों, प्रोफेशनल्स की मदद करती है। ग्राफिक में देखिए ये किताब किसे पढ़नी चाहिए-

किताब के बारे में मेरी राय

यह किताब इमोशनल सक्सेस का एक बेहतरीन नक्शा है। निक ट्रेंटन की कहानियां इसे बहुत प्रभावी बनाती हैं। 5-4-3-2-1 जैसी तकनीकें बहुत आसान हैं और तुरंत असर दिखाती हैं। अगर आप चिंता और नेगेटिविटी के जाल से निकलना चाहते हैं, तो यह किताब आपके लिए ही है। जर्नलिंग जैसी आदतें शुरू में कठिन लग सकती हैं, पर ये आपकी जिंदगी बदल देंगी। यह किताब आपको भावनाओं का गुलाम नहीं, बल्कि मालिक बनाती है।

……………… ये खबर भी पढ़िए बुक रिव्यू- जिंदगी सिर्फ 4000 हफ्तों की कहानी है: जिस चीज पर वश नहीं, उसे नियति पर छोड़ दो, सब जाने दो, बस खुशी और सुकून रख लो

इंसान की औसत उम्र लगभग 80 वर्ष होती है। अगर हम इसे हफ्तों में गिनें तो हमारे पास केवल 4,000 हफ्ते होते हैं। सुनने में यह संख्या बहुत बड़ी लग सकती है, लेकिन ये हफ्ते कब बीत जाते हैं, पता ही नहीं चलता है। आगे पढ़िए…

खबरें और भी हैं…
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लेखक- निक ट्रेंटन

अनुवाद- डॉ. रोहिणी

प्रकाशक- पेंगुइन

मूल्य- 299 रुपए

अमेरिकी लेखक निक ट्रेंटन की किताब ‘शांत मन सफल जीवन’ भावनाओं को समझने, उन्हें नियंत्रित करने और जीवन में बैलेंस लाने पर केंद्रित है। यह किताब बताती है कि भावनाएं हमारी दुश्मन नहीं हैं। इन्हें समझकर हम मानसिक शांति और मजबूती पा सकते हैं। बिहेवियरल साइकोलॉजी में मास्टर निक ट्रेंटन एक मशहूर एक्सपर्ट हैं। वे जटिल भावनाओं को बहुत आसान भाषा में समझाते हैं ताकि हर व्यक्ति इन्हें अपनी लाइफ में लागू कर सके।

किताब क्या कहती है?

मुश्किलें हर किसी के जीवन में आती हैं, लेकिन हार माननी है या दोबारा उठना है, यह चुनाव हमारा होता है। किताब ‘शांत मन, सफल जीवन’ आपकी तकलीफों को समझती है और आपको अपनी जिंदगी पर पूरा कंट्रोल पाने में मदद करती है। यह किताब हमारे इमोशनल ट्रिगर्स और गलत फैसलों के पीछे की वजहों को पहचानने में मदद करती है। खास बात यह है कि लेखक ‘शांति से सोचो’ जैसी किताबी बातें नहीं करते। वह साइकोलॉजी, बिहेवियर साइंस और बौद्ध दर्शन पर आधारित असली टूल्स देते हैं।

ये किताब क्यों है इतनी खास?

अक्सर गुस्सा, चिंता या उदासी हम पर हावी हो जाती है। हम बिना सोचे रिएक्ट करते हैं और बाद में पछताते हैं। निक ट्रेंटन के अनुसार, भावनाएं हर मिनट बदलती हैं। अगर हम इन्हें मैनेज करना सीख लें, तो हमारी मेंटल हेल्थ, रिश्ते और फैसले बेहतर होंगे। किताब में दी गई 23 प्रैक्टिकल टेक्नीक्स तनाव घटाने और ओवरथिंकिंग रोकने में मददगार हैं। ग्राफिक में किताब से मिले 8 बड़े सबक देखिए-

अब इन सबको थोड़ा विस्तार से समझिए, क्योंकि ये किताबी बातें नहीं, जिंदगी की सच्चाई हैं।

भावनाओं को रेगुलेट करना सीखें

कभी-कभी ऐसा लगता है कि भावनाएं हमें कंट्रोल कर रही हैं। हम गुस्सा आने पर चिल्ला पड़ते हैं, फिक्र सिर पर इस कद्र हावी होती है कि रात भर सो नहीं पाते हैं। किताब कहती है कि भावनाएं हर मिनट बदलती हैं। इन्हें कंट्रोल करना प्रैक्टिस से आता है, जैसे मसल्स ट्रेन करते हैं।

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गुस्सा आने पर रुकें, सांस लें और सोचें कि रिएक्शन के नतीजे क्या होंगे। धीरे-धीरे आदत बन जाएगी।

चिंता को इंगेज मत करो, वो खुद चली जाएगी

चिंता का गोला तब बड़ा होता है, जब हम उसे बार-बार सोचते हैं। किताब कहती है कि चिंता को टाइम दो, एक फिक्स ‘वरी टाइम’ सेट करें। ज्यादातर चिंताएं उस टाइम तक भूल जाती हैं।

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ज्यादातर लोग कहते हैं मूड खराब है। किताब कहती है इमोशंस को सही तरीके से पहचानना सीखें। ये फ्रस्ट्रेशन है या डिसअपॉइंट? सटीक तरीके से समझने से कारण पता चलता है।

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जर्नलिंग से प्रॉब्लम सॉल्व करें

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क्या करें?

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रिएक्शन बिना सोचे होता है, जबकि रिस्पॉन्स सोच-समझकर दिया जाता है। अपने ट्रिगर्स को पहचानें और जागरूक बनें।

क्या करें?

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यह किताब एक सच्चे दोस्त की तरह है। यह सरल उदाहरणों के जरिए छात्रों, प्रोफेशनल्स की मदद करती है। ग्राफिक में देखिए ये किताब किसे पढ़नी चाहिए-

किताब के बारे में मेरी राय

यह किताब इमोशनल सक्सेस का एक बेहतरीन नक्शा है। निक ट्रेंटन की कहानियां इसे बहुत प्रभावी बनाती हैं। 5-4-3-2-1 जैसी तकनीकें बहुत आसान हैं और तुरंत असर दिखाती हैं। अगर आप चिंता और नेगेटिविटी के जाल से निकलना चाहते हैं, तो यह किताब आपके लिए ही है। जर्नलिंग जैसी आदतें शुरू में कठिन लग सकती हैं, पर ये आपकी जिंदगी बदल देंगी। यह किताब आपको भावनाओं का गुलाम नहीं, बल्कि मालिक बनाती है।

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इंसान की औसत उम्र लगभग 80 वर्ष होती है। अगर हम इसे हफ्तों में गिनें तो हमारे पास केवल 4,000 हफ्ते होते हैं। सुनने में यह संख्या बहुत बड़ी लग सकती है, लेकिन ये हफ्ते कब बीत जाते हैं, पता ही नहीं चलता है। आगे पढ़िए…

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