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DJ की आवाज से मर गईं मुर्गियां…क्या इंसानों के लिए भी है खतरा? डॉक्टर के जवाब से चौंक जाएंगे

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Loud Sound Effect on Humans: उत्तर प्रदेश के सुल्तानपुर में एक शादी में बजने वाले डीजे की तेज आवाज से 140 मुर्गियों के मरने का सनसनीखेज मामला सामने आया है. पोल्ट्री फार्म संचालक साबिर अली ने तेज संगीत और शोर का आरोप लगाते हुए एफआईआर भी दर्ज करा दी है और कहा है कि शोर के कारण मुर्गियों को कार्डियक अरेस्ट हुआ और उनकी मौत हो गई. विशेषज्ञों की मानें तो तेज आवाज पक्षी सहन नहीं कर पाते और उनकी मौत हो सकती है. हालांकि मुर्गियों को लेकर हुई इस घटना के बाद एक सबसे बड़ा सवाल इंसानों की सेहत को लेकर भी पैदा हो गया है.

लोगों के मन में ये सवाल आ रहा है कि जब भी बहुत तेज साउंड में डीजे बजता है तो एक धमक जैसी महसूस होती है और कभी-कभी लगता है कि दिल की धड़कन बढ़ गई है. यहां तक कि कुछ लोगों को तेज आवाज में बजते संगीत से उलझन भी होती है, तो क्या डीजे की तेज आवाज इंसानों के लिए भी खतरा है? और क्या डीजे की आवाज से इंसानों की भी जान जा सकती है?

इन तमाम सवालों पर डॉक्टर राम मनोहर लोहिया अस्पताल नई दिल्ली के प्रोफेसर ईएनटी डॉ. सुधीर माझी ने विस्तार से जानकारी दी है.

डॉ. माझी कहते हैं कि मानव शरीर पर तेज आवाज का कई तरह से असर होता है. सबसे पहला असर कानों पर पड़ता है और बहरापन होता है जो आमतौर पर सभी जानते हैं. इसके अलावा ईयर टेनाइटस भी होता है, जिसमें कानों में अजीब सी आवाज आती है, सीटी बजती है या भिनभिनाने की आवाज आती है. तीसरा जो सबसे गंभीर असर पड़ता है वह शरीर के अन्य अंगों पर पड़ता है. तेज आवाज से आर्टरीज सिकुड़ जाती हैं और ब्लड प्रेशर हाई हो जाता है. ऐसे में बीपी बढ़ने से हार्ट अटैक या सडन कार्डियक अरेस्ट हो सकता है.

डॉ. माझी कहते हैं कि तेज आवाज से हार्ट अटैक बहुत कॉमन नहीं है लेकिन अगर 120 डेसीबल से ज्यादा साउंड में रहा जाए तो ये संभावना मजबूत हो जाती है. डीजे में तो इससे भी ज्यादा डेसीबल होता है, जो नुकसान पहुंचा सकता है.

हाई साउंड से तनाव भी बढ़ता है. अगर आप सामान्य साउंड से एकाएक डीजे की तेज साउंड में रह गए तो कान के अंदर की नर्व भी डैमेज हो जाती है और स्थाई रूप से बहरापन आ जाता है. कई बार इसे वापस ठीक कर पाना भी संभव नहीं होता.

तेज आवाज का शरीर पर क्या असर पड़ता है?
तेज आवाज शरीर पर गहरा असर डालती है. कानों से लेकर हार्ट और ब्रेन को भी तेज साउंड से नुकसान होता है. यहां तक कि ज्यादा देर तक हाई साउंड में रहने से जान भी जा सकती है.

डीजे जब बजता है तो धड़कन क्यों बढ़ती है?
यह स्ट्रैस की वजह से होता है. डीजे की तेज आवाज में आर्टरीज सिकुड़ती हैं, बीपी बहुत बढ़ जाता है. तनाव बढ़ता है और दिल की धड़कन बढ़ जाती है. अगर पहले से कोई हार्ट की बीमारी है तो उस स्थिति में डेथ भी हो सकती है.

क्या ब्रेन हेमरेज भी हो सकता है?
हां, हो सकता है. आर्टरीज पूरे शरीर में ब्लड की सप्लाई करती हैं और अगर ब्रेन की आर्टरी सिकुड़ जाती है तो ब्लीडिंग हो सकती है, ब्रेन स्ट्रोक या ब्रेन हेमरेज होना संभव है.

क्या शरीर के अन्य अंगों पर भी असर पड़ता है?
आर्टरी की वजह से सभी अंगों पर असर पड़ सकता है लेकिन ब्रेन और हार्ट में खासतौर पर असर पड़ सकता है और यह घातक हो सकता है.

कितनी देर तक आवाज में रहना खतरनाक है?
अगर दो-तीन घंटे का बहुत ज्यादा तेज साउंड का एक्सपोजर है तो यह हार्ट या ब्रेन को नुकसान पहुंचा सकता है.

हार्ट का मरीज भी दो घंटे झेल सकता है?
अगर कोई पहले से बीमार है और उसकी आर्टरी कमजोर हैं या हार्ट की बीमारी है तो ऐसा व्यक्ति हो सकता है कि तेज आवाज को पांच मिनट भी न सहन कर पाए और उसे कार्डियक अरेस्ट आ जाए.

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लोगों के मन में ये सवाल आ रहा है कि जब भी बहुत तेज साउंड में डीजे बजता है तो एक धमक जैसी महसूस होती है और कभी-कभी लगता है कि दिल की धड़कन बढ़ गई है. यहां तक कि कुछ लोगों को तेज आवाज में बजते संगीत से उलझन भी होती है, तो क्या डीजे की तेज आवाज इंसानों के लिए भी खतरा है? और क्या डीजे की आवाज से इंसानों की भी जान जा सकती है?

इन तमाम सवालों पर डॉक्टर राम मनोहर लोहिया अस्पताल नई दिल्ली के प्रोफेसर ईएनटी डॉ. सुधीर माझी ने विस्तार से जानकारी दी है.

डॉ. माझी कहते हैं कि मानव शरीर पर तेज आवाज का कई तरह से असर होता है. सबसे पहला असर कानों पर पड़ता है और बहरापन होता है जो आमतौर पर सभी जानते हैं. इसके अलावा ईयर टेनाइटस भी होता है, जिसमें कानों में अजीब सी आवाज आती है, सीटी बजती है या भिनभिनाने की आवाज आती है. तीसरा जो सबसे गंभीर असर पड़ता है वह शरीर के अन्य अंगों पर पड़ता है. तेज आवाज से आर्टरीज सिकुड़ जाती हैं और ब्लड प्रेशर हाई हो जाता है. ऐसे में बीपी बढ़ने से हार्ट अटैक या सडन कार्डियक अरेस्ट हो सकता है.

डॉ. माझी कहते हैं कि तेज आवाज से हार्ट अटैक बहुत कॉमन नहीं है लेकिन अगर 120 डेसीबल से ज्यादा साउंड में रहा जाए तो ये संभावना मजबूत हो जाती है. डीजे में तो इससे भी ज्यादा डेसीबल होता है, जो नुकसान पहुंचा सकता है.

हाई साउंड से तनाव भी बढ़ता है. अगर आप सामान्य साउंड से एकाएक डीजे की तेज साउंड में रह गए तो कान के अंदर की नर्व भी डैमेज हो जाती है और स्थाई रूप से बहरापन आ जाता है. कई बार इसे वापस ठीक कर पाना भी संभव नहीं होता.

तेज आवाज का शरीर पर क्या असर पड़ता है?
तेज आवाज शरीर पर गहरा असर डालती है. कानों से लेकर हार्ट और ब्रेन को भी तेज साउंड से नुकसान होता है. यहां तक कि ज्यादा देर तक हाई साउंड में रहने से जान भी जा सकती है.

डीजे जब बजता है तो धड़कन क्यों बढ़ती है?
यह स्ट्रैस की वजह से होता है. डीजे की तेज आवाज में आर्टरीज सिकुड़ती हैं, बीपी बहुत बढ़ जाता है. तनाव बढ़ता है और दिल की धड़कन बढ़ जाती है. अगर पहले से कोई हार्ट की बीमारी है तो उस स्थिति में डेथ भी हो सकती है.

क्या ब्रेन हेमरेज भी हो सकता है?
हां, हो सकता है. आर्टरीज पूरे शरीर में ब्लड की सप्लाई करती हैं और अगर ब्रेन की आर्टरी सिकुड़ जाती है तो ब्लीडिंग हो सकती है, ब्रेन स्ट्रोक या ब्रेन हेमरेज होना संभव है.

क्या शरीर के अन्य अंगों पर भी असर पड़ता है?
आर्टरी की वजह से सभी अंगों पर असर पड़ सकता है लेकिन ब्रेन और हार्ट में खासतौर पर असर पड़ सकता है और यह घातक हो सकता है.

कितनी देर तक आवाज में रहना खतरनाक है?
अगर दो-तीन घंटे का बहुत ज्यादा तेज साउंड का एक्सपोजर है तो यह हार्ट या ब्रेन को नुकसान पहुंचा सकता है.

हार्ट का मरीज भी दो घंटे झेल सकता है?
अगर कोई पहले से बीमार है और उसकी आर्टरी कमजोर हैं या हार्ट की बीमारी है तो ऐसा व्यक्ति हो सकता है कि तेज आवाज को पांच मिनट भी न सहन कर पाए और उसे कार्डियक अरेस्ट आ जाए.

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