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नो शुगर ड्रिंक में जब नहीं होती चीनी तो मीठा करने के लिए क्या डाला जाता है? क्या यह फायदेमंद!

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नो शुगर ड्रिंक्स में चीनी की जगह अलग-अलग तरह के स्वीटनर, प्राकृतिक मिठास देने वाले तत्व या फ्लेवर टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल किया जाता है. ये सामान्य चीनी का विकल्प हो सकते हैं, लेकिन इन्हें भी समझदारी से लेना चाहिए. सबसे अच्छा विकल्प हमेशा सादा पानी, नारियल पानी या घर के हेल्दी ड्रिंक्स ही माने जाते हैं.

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आर्टिफिशियल स्वीटनर सेहत के लिए फायदेमंद या नुकसानदायक.

आजकल बाजार में नो शुगर, जीरो शुगर और शुगर फ्री ड्रिंक्स तेजी से लोकप्रिय हो रही हैं. कई लोग वजन कम करने, डायबिटीज कंट्रोल करने या कम कैलोरी लेने के लिए इन्हें चुनते हैं. लेकिन जब बोतल पर साफ लिखा होता है कि इसमें चीनी नहीं है, तब सबसे बड़ा सवाल यही उठता है कि फिर इसका स्वाद मीठा कैसे होता है? आखिर बिना चीनी के कोई ड्रिंक मीठी कैसे लग सकती है. इसका जवाब स्वाद बढ़ाने वाले खास तत्वों में छिपा होता है, जिन्हें कम मात्रा में मिलाकर मीठापन दिया जाता है.

असल में इन ड्रिंक्स में साधारण चीनी की जगह ऐसे पदार्थ डाले जाते हैं, जो जीभ के स्वाद रिसेप्टर्स को मीठा महसूस कराते हैं. यानी शरीर को मीठा स्वाद मिलता है, लेकिन उसमें सामान्य चीनी जैसी कैलोरी या ब्लड शुगर बढ़ाने वाला असर कम या बिल्कुल नहीं होता. यही वजह है कि ये ड्रिंक्स उन लोगों के बीच लोकप्रिय हैं जो मीठा स्वाद चाहते हैं, लेकिन चीनी से बचना चाहते हैं.

आर्टिफिशियल स्वीटनर क्या होते हैं
कई नो शुगर ड्रिंक्स में आर्टिफिशियल स्वीटनर देने वाले तत्व मिलाए जाते हैं. इनमें एस्पार्टेम, सुक्रालोज और एसेसल्फेम पोटैशियम जैसे नाम शामिल हैं. ये सामान्य चीनी से कई गुना ज्यादा मीठे होते हैं, इसलिए बहुत कम मात्रा में ही इस्तेमाल किए जाते हैं. थोड़ी सी मात्रा में भी ये ड्रिंक को मीठा स्वाद दे देते हैं. इसी वजह से कैलोरी भी काफी कम रहती है.

नेचुरल विकल्प भी होते हैं
कुछ कंपनियां प्राकृतिक स्रोतों से मिलने वाली मिठास का इस्तेमाल करती हैं. जैसे स्टीविया और मोंक फ्रूट एक्सट्रैक्ट. स्टीविया एक पौधे की पत्तियों से मिलता है और यह बिना चीनी के मीठा स्वाद देता है. इसी तरह मोंक फ्रूट भी प्राकृतिक विकल्प माना जाता है. ये दोनों आमतौर पर उन लोगों को पसंद आते हैं जो आर्टिफिशियल चीजों से बचना चाहते हैं.

शुगर अल्कोहल क्या है
कई जीरो शुगर या लो कार्ब ड्रिंक्स और प्रोडक्ट्स में एरिथ्रिटॉल, जाइलिटॉल जैसे तत्व मिलाए जाते हैं. इन्हें शुगर अल्कोहल कहा जाता है. ये स्वाद में मीठे होते हैं, लेकिन सामान्य चीनी की तुलना में कम कैलोरी देते हैं. हालांकि कुछ लोगों को ज्यादा मात्रा में लेने पर पेट फूलना या गैस जैसी परेशानी हो सकती है.

बिना मीठा डाले भी मीठा स्वाद कैसे बढ़ता है
कुछ ड्रिंक्स में फ्लेवर एन्हांसर, एसिड्स और खुशबू वाले तत्व भी डाले जाते हैं. ये दिमाग को मीठा स्वाद ज्यादा महसूस कराने में मदद करते हैं. यानी कभी-कभी वास्तविक मिठास कम होने पर भी स्वाद मीठा लग सकता है. यह स्वाद विज्ञान का हिस्सा है.

क्या ये फायदेमंद हैं
अगर कोई व्यक्ति बहुत ज्यादा चीनी वाले ड्रिंक्स पीता है और उसकी जगह सीमित मात्रा में नो शुगर ड्रिंक चुनता है, तो यह बेहतर विकल्प हो सकता है. इससे कैलोरी कम हो सकती है और शुगर इनटेक भी घट सकता है. खासकर वजन कंट्रोल या डायबिटीज मैनेजमेंट में कुछ लोगों को फायदा मिल सकता है. नो शुगर का मतलब यह नहीं कि आप इसे जितना चाहें उतना पी सकते हैं. ज्यादा मात्रा में लेने से मीठे स्वाद की आदत बनी रह सकती है. कुछ लोगों को कुछ स्वीटनर सूट नहीं करते. इसलिए लेबल पढ़ना जरूरी है और सीमित मात्रा में सेवन करना बेहतर है.

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Vividha SinghSub Editor

विविधा सिंह इस समय News18 हिंदी के डिजिटल मीडिया में सब एडिटर के तौर पर काम कर रही हैं. वह लाइफस्टाइल बीट में हेल्थ, फूड, ट्रैवल, फैशन और टिप्स एंड ट्रिक्स जैसी स्टोरीज कवर करती हैं. कंटेंट लिखने और उसे आसान व …और पढ़ें

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आर्टिफिशियल स्वीटनर सेहत के लिए फायदेमंद या नुकसानदायक.

आजकल बाजार में नो शुगर, जीरो शुगर और शुगर फ्री ड्रिंक्स तेजी से लोकप्रिय हो रही हैं. कई लोग वजन कम करने, डायबिटीज कंट्रोल करने या कम कैलोरी लेने के लिए इन्हें चुनते हैं. लेकिन जब बोतल पर साफ लिखा होता है कि इसमें चीनी नहीं है, तब सबसे बड़ा सवाल यही उठता है कि फिर इसका स्वाद मीठा कैसे होता है? आखिर बिना चीनी के कोई ड्रिंक मीठी कैसे लग सकती है. इसका जवाब स्वाद बढ़ाने वाले खास तत्वों में छिपा होता है, जिन्हें कम मात्रा में मिलाकर मीठापन दिया जाता है.

असल में इन ड्रिंक्स में साधारण चीनी की जगह ऐसे पदार्थ डाले जाते हैं, जो जीभ के स्वाद रिसेप्टर्स को मीठा महसूस कराते हैं. यानी शरीर को मीठा स्वाद मिलता है, लेकिन उसमें सामान्य चीनी जैसी कैलोरी या ब्लड शुगर बढ़ाने वाला असर कम या बिल्कुल नहीं होता. यही वजह है कि ये ड्रिंक्स उन लोगों के बीच लोकप्रिय हैं जो मीठा स्वाद चाहते हैं, लेकिन चीनी से बचना चाहते हैं.

आर्टिफिशियल स्वीटनर क्या होते हैं
कई नो शुगर ड्रिंक्स में आर्टिफिशियल स्वीटनर देने वाले तत्व मिलाए जाते हैं. इनमें एस्पार्टेम, सुक्रालोज और एसेसल्फेम पोटैशियम जैसे नाम शामिल हैं. ये सामान्य चीनी से कई गुना ज्यादा मीठे होते हैं, इसलिए बहुत कम मात्रा में ही इस्तेमाल किए जाते हैं. थोड़ी सी मात्रा में भी ये ड्रिंक को मीठा स्वाद दे देते हैं. इसी वजह से कैलोरी भी काफी कम रहती है.

नेचुरल विकल्प भी होते हैं
कुछ कंपनियां प्राकृतिक स्रोतों से मिलने वाली मिठास का इस्तेमाल करती हैं. जैसे स्टीविया और मोंक फ्रूट एक्सट्रैक्ट. स्टीविया एक पौधे की पत्तियों से मिलता है और यह बिना चीनी के मीठा स्वाद देता है. इसी तरह मोंक फ्रूट भी प्राकृतिक विकल्प माना जाता है. ये दोनों आमतौर पर उन लोगों को पसंद आते हैं जो आर्टिफिशियल चीजों से बचना चाहते हैं.

शुगर अल्कोहल क्या है
कई जीरो शुगर या लो कार्ब ड्रिंक्स और प्रोडक्ट्स में एरिथ्रिटॉल, जाइलिटॉल जैसे तत्व मिलाए जाते हैं. इन्हें शुगर अल्कोहल कहा जाता है. ये स्वाद में मीठे होते हैं, लेकिन सामान्य चीनी की तुलना में कम कैलोरी देते हैं. हालांकि कुछ लोगों को ज्यादा मात्रा में लेने पर पेट फूलना या गैस जैसी परेशानी हो सकती है.

बिना मीठा डाले भी मीठा स्वाद कैसे बढ़ता है
कुछ ड्रिंक्स में फ्लेवर एन्हांसर, एसिड्स और खुशबू वाले तत्व भी डाले जाते हैं. ये दिमाग को मीठा स्वाद ज्यादा महसूस कराने में मदद करते हैं. यानी कभी-कभी वास्तविक मिठास कम होने पर भी स्वाद मीठा लग सकता है. यह स्वाद विज्ञान का हिस्सा है.

क्या ये फायदेमंद हैं
अगर कोई व्यक्ति बहुत ज्यादा चीनी वाले ड्रिंक्स पीता है और उसकी जगह सीमित मात्रा में नो शुगर ड्रिंक चुनता है, तो यह बेहतर विकल्प हो सकता है. इससे कैलोरी कम हो सकती है और शुगर इनटेक भी घट सकता है. खासकर वजन कंट्रोल या डायबिटीज मैनेजमेंट में कुछ लोगों को फायदा मिल सकता है. नो शुगर का मतलब यह नहीं कि आप इसे जितना चाहें उतना पी सकते हैं. ज्यादा मात्रा में लेने से मीठे स्वाद की आदत बनी रह सकती है. कुछ लोगों को कुछ स्वीटनर सूट नहीं करते. इसलिए लेबल पढ़ना जरूरी है और सीमित मात्रा में सेवन करना बेहतर है.

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