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Delhi-NCR becoming a hub of Adhoris and Tantriks?: delhi ncr secret world of aghoris and tantriks | occult crimes cases burari peeragarhi flyover | kamruddin baba cases delhi police | क्या अघोरियों और तांत्रिकों की गुप्त दुनिया बन गई दिल्ली-NCR? यहां हैं कई कमरुद्दीन की कहानियां, हिल जाएंगे आप

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नई दिल्ली. पीरागढ़ी ट्रिपल मर्डर केस में ढोंगी तांत्रिक कमरुद्दीन से जुड़ी एक के बाद एक सच्चाइयां सामने आ रही हैं. ढोंगी तांत्रिक कमरुद्दीन दो लाख रुपये को पांच करोड़ में बदलने का दावा कर रहा था, वह भी राजधानी में बैठकर. क्या दिल्ली पुलिस और गाजियाबाद पुलिस को कमरुद्दीन बाबा की सच्चाई नहीं पता थी? क्या कमरुद्दीन बाबा को पुलिस प्रशासन का समर्थन प्राप्त था? ये कुछ ऐसे सवाल हैं जो हर कोई जानना चाहता है. क्या दिल्ली-एनसीआर हाल के वर्षों में अघोरियों और तांत्रिकों का गुप्त ठिकाना बनता जा रहा है? हाल के वर्षों में राजधानी में ऐसे-ऐसे कारनामे हुए हैं, जो कहीं न कहीं इसी ओर संकेत कर रहे हैं. बुराड़ी में एक ही घर में 11 लाशें मिलना, छोटी-छोटी बच्चे-बच्चियों की बलि और अब पीरागढ़ी में 2 लाख रुपये को 5 करोड़ में बदलने का खेल, क्या संकेत दे रहा है?

कुछ साल पहले दिल्ली के बुराड़ी इलाके में एक ही परिवार का 11 सदस्य अपने ही घर में रहस्यमयी हालात में मृत पाये गए थे. 10 लोग एक ही कमरे में लटक रहे थे, उनके हाथ-पैर बंधे, आंखों पर पट्टी और मुंह पर टेप लगा हुआ था, जबकि एक 77-साल की बुजुर्ग महिला उसी घर के अलग कमरे में चारपाई पर पाई गई. दिल्ली पुलिस ने शुरुआत में इसे सामूहिक आत्महत्या माना, लेकिन घर से मिले दर्जनों डाइरी पन्नों में कुछ ऐसे निर्देश मिले, जिनमें ‘मुक्ति’ और ‘रूहानी अभ्यास’ जैसे शब्द लिखे थे. डायरी में लिखे नोट्स का स्वरूप इतना अजीब था कि शुरुआती जांच में पुलिस ने बताया कि ये आध्यात्मिक या रहस्यवादी प्रथाओं से जुड़े हो सकते हैं. लोग खुद सोचने लगे कि परिवार किसी तांत्रिक या रहस्यवादी विश्वास में फंसा हुआ था. हालांकि बाद में पुलिस ने इसे विशेष प्रकार के मानसिक असर से जुड़ा मामला बताया. आज भी इस रहस्य से पर्दा नहीं उठा है.

AI Photo: तांत्रिकों का जाल क्यों बढ़ता ही जा रहा है?

क्या अघोरियों और तांत्रिकों की गुप्त दुनिया बन गई दिल्ली-NCR?

अभी कुछ दिन पहले दिल्ली के पीरागढ़ी इलाके में एक कार के अंदर तीन शव मिले. एक महिला और दो पुरुष. शुरुआती जांच में पुलिस को शक हुआ कि ये आत्महत्या का मामला है. लेकिन जैसे-जैसे पुलिस जांच आगे बढ़ी तंत्र-मंत्र से जुड़ा मामला सामने आया. पुलिस ने एक तांत्रिक बाबा कमरुद्दीन को खोजना शुरू किया, जो गाजियाबाद के लोनी में मिला. उससे पूछताछ में खुलासा हुआ कि अंधविश्वास पर आधारित ‘धनवर्षा’ का झांसा देकर लोगों को मौत का घाट उतार दिया.

‘बरगद पूजा’ से ‘वशीकरण मंत्र’ तक

इस तांत्रिक पर आरोप है कि उसने धनवर्षा के नाम पर लोगों को जहरीले लड्डू और पेय दिया और तीन की हत्या कर दी. आरोप के मुताबिक उसने पहले भी दो लोगों की हत्या में नाम रहा है. यह मामला बताता है कि तंत्र-मंत्र-आधारित झूठे वादों के चक्कर में लोग कितने आसानी से दिल्ली-एनसीआर में फंस रहे हैं.

ai photo: वशीकरण, धन कमाने का झांसा या मानसिक त्रासदी के चलते कई मौतें हुई हैं.

‘संतान प्राप्ति के लिए बलि’

दिल्ली में पिछले कुछ सालों से वशीकरण, धन कमाने का झांसा या मानसिक त्रासदी के चलते कई मौतें हुई हैं. यहां ऐसे कई केस सामने आ रहे हैं जहां लोग अंधविश्वास या भ्रम में फंस रहे हैं और इससे जानें भी जा रही हैं. आधुनिकता की चमक के पीछे छिपा अंधकार कहने को दिल्ली देश का दिल है और तकनीक व शिक्षा का केंद्र है, लेकिन इसी चकाचौंध के पीछे अंधविश्वास का एक ऐसा काला बाजार फल-फूल रहा है, जो लोगों की जान का दुश्मन बन चुका है.

दिल्ली-एनसीआर में दौलत और मोक्ष के लिए भागते लोग

हाल के वर्षों में दिल्ली-एनसीआर में ऐसी कई वारदातें हुई हैं जिन्होंने साबित कर दिया है कि यहां तांत्रिकों और स्वयंभू बाबाओं का जाल बहुत गहरा है. अमीर से लेकर गरीब तक, हर कोई अपनी समस्याओं के ‘चमत्कारी’ समाधान के चक्कर में इन खूनी तांत्रिकों के हत्थे चढ़ रहा है. मासूमों की बलि और सुसाइड पैक्ट सिर्फ बुराड़ी ही नहीं, सितंबर 2024 में वसंत कुंज के रंगपुरी इलाके में एक पिता और उसकी चार दिव्यांग बेटियों की लाशें मिलीं. शुरुआत में इसे भी तंत्र-मंत्र से जोड़ा गया था क्योंकि लाशों के हाथ-पैर में लाल धागे कलावा बंधे थे और कमरे का माहौल अजीब था. बाद में इसे आर्थिक तंगी से जोड़कर देखा गया. वहीं, रोहिणी और नॉर्थ दिल्ली के इलाकों में कई बार ऐसे मामले सामने आए हैं जहां संतान प्राप्ति के लिए तांत्रिकों के कहने पर पड़ोस के बच्चों की हत्या या ‘बलि’ दे दी गई.

ai photo: दिल्ली-एनसीआर में तांत्रिकों के पैर पसारने के पीछे कई मनोवैज्ञानिक और सामाजिक कारण हैं.

NCR क्यों बनता जा रहा है तांत्रिकों का गढ़?

दिल्ली-एनसीआर में तांत्रिकों के पैर पसारने के पीछे कई मनोवैज्ञानिक और सामाजिक कारण हैं. भीड़भाड़ वाले शहरों में बढ़ता तनाव, वित्तीय असुरक्षा और रिश्तों में कड़वाहट लोगों को कमजोर बना देती है. इसी कमजोरी का फायदा उठाते हैं गाजियाबाद के लोनी, दिल्ली के जेजे क्लस्टर और सीमावर्ती इलाकों में छिपे ये ठग. ये बाबा खुद को ‘मसीहा’ बताते हैं और ‘वशीकरण’ या ‘दुश्मन का नाश’ जैसे विज्ञापनों से लोगों को फंसाते हैं. पीरागढ़ी केस का आरोपी कमरुद्दीन सालों से लोनी में अपना केंद्र चला रहा था और पुलिस की नजरों से बचकर लोगों की जान ले रहा था.

दिल्ली के हालिया केस स्टडीज यह चीख-चीख कर कह रहे हैं कि कोई भी पूजा या तांत्रिक आपके पैसे दोगुना नहीं कर सकता और न ही मुर्दे आपसे बात कर सकते हैं. जब तक समाज में इन ‘शॉर्टकट’ समाधानों की मांग रहेगी, तब तक ये खूनी तांत्रिक दिल्ली की गलियों में अपनी दुकानें चलाते रहेंगे.

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कुछ साल पहले दिल्ली के बुराड़ी इलाके में एक ही परिवार का 11 सदस्य अपने ही घर में रहस्यमयी हालात में मृत पाये गए थे. 10 लोग एक ही कमरे में लटक रहे थे, उनके हाथ-पैर बंधे, आंखों पर पट्टी और मुंह पर टेप लगा हुआ था, जबकि एक 77-साल की बुजुर्ग महिला उसी घर के अलग कमरे में चारपाई पर पाई गई. दिल्ली पुलिस ने शुरुआत में इसे सामूहिक आत्महत्या माना, लेकिन घर से मिले दर्जनों डाइरी पन्नों में कुछ ऐसे निर्देश मिले, जिनमें ‘मुक्ति’ और ‘रूहानी अभ्यास’ जैसे शब्द लिखे थे. डायरी में लिखे नोट्स का स्वरूप इतना अजीब था कि शुरुआती जांच में पुलिस ने बताया कि ये आध्यात्मिक या रहस्यवादी प्रथाओं से जुड़े हो सकते हैं. लोग खुद सोचने लगे कि परिवार किसी तांत्रिक या रहस्यवादी विश्वास में फंसा हुआ था. हालांकि बाद में पुलिस ने इसे विशेष प्रकार के मानसिक असर से जुड़ा मामला बताया. आज भी इस रहस्य से पर्दा नहीं उठा है.

AI Photo: तांत्रिकों का जाल क्यों बढ़ता ही जा रहा है?

क्या अघोरियों और तांत्रिकों की गुप्त दुनिया बन गई दिल्ली-NCR?

अभी कुछ दिन पहले दिल्ली के पीरागढ़ी इलाके में एक कार के अंदर तीन शव मिले. एक महिला और दो पुरुष. शुरुआती जांच में पुलिस को शक हुआ कि ये आत्महत्या का मामला है. लेकिन जैसे-जैसे पुलिस जांच आगे बढ़ी तंत्र-मंत्र से जुड़ा मामला सामने आया. पुलिस ने एक तांत्रिक बाबा कमरुद्दीन को खोजना शुरू किया, जो गाजियाबाद के लोनी में मिला. उससे पूछताछ में खुलासा हुआ कि अंधविश्वास पर आधारित ‘धनवर्षा’ का झांसा देकर लोगों को मौत का घाट उतार दिया.

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इस तांत्रिक पर आरोप है कि उसने धनवर्षा के नाम पर लोगों को जहरीले लड्डू और पेय दिया और तीन की हत्या कर दी. आरोप के मुताबिक उसने पहले भी दो लोगों की हत्या में नाम रहा है. यह मामला बताता है कि तंत्र-मंत्र-आधारित झूठे वादों के चक्कर में लोग कितने आसानी से दिल्ली-एनसीआर में फंस रहे हैं.

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दिल्ली-एनसीआर में दौलत और मोक्ष के लिए भागते लोग

हाल के वर्षों में दिल्ली-एनसीआर में ऐसी कई वारदातें हुई हैं जिन्होंने साबित कर दिया है कि यहां तांत्रिकों और स्वयंभू बाबाओं का जाल बहुत गहरा है. अमीर से लेकर गरीब तक, हर कोई अपनी समस्याओं के ‘चमत्कारी’ समाधान के चक्कर में इन खूनी तांत्रिकों के हत्थे चढ़ रहा है. मासूमों की बलि और सुसाइड पैक्ट सिर्फ बुराड़ी ही नहीं, सितंबर 2024 में वसंत कुंज के रंगपुरी इलाके में एक पिता और उसकी चार दिव्यांग बेटियों की लाशें मिलीं. शुरुआत में इसे भी तंत्र-मंत्र से जोड़ा गया था क्योंकि लाशों के हाथ-पैर में लाल धागे कलावा बंधे थे और कमरे का माहौल अजीब था. बाद में इसे आर्थिक तंगी से जोड़कर देखा गया. वहीं, रोहिणी और नॉर्थ दिल्ली के इलाकों में कई बार ऐसे मामले सामने आए हैं जहां संतान प्राप्ति के लिए तांत्रिकों के कहने पर पड़ोस के बच्चों की हत्या या ‘बलि’ दे दी गई.

ai photo: दिल्ली-एनसीआर में तांत्रिकों के पैर पसारने के पीछे कई मनोवैज्ञानिक और सामाजिक कारण हैं.

NCR क्यों बनता जा रहा है तांत्रिकों का गढ़?

दिल्ली-एनसीआर में तांत्रिकों के पैर पसारने के पीछे कई मनोवैज्ञानिक और सामाजिक कारण हैं. भीड़भाड़ वाले शहरों में बढ़ता तनाव, वित्तीय असुरक्षा और रिश्तों में कड़वाहट लोगों को कमजोर बना देती है. इसी कमजोरी का फायदा उठाते हैं गाजियाबाद के लोनी, दिल्ली के जेजे क्लस्टर और सीमावर्ती इलाकों में छिपे ये ठग. ये बाबा खुद को ‘मसीहा’ बताते हैं और ‘वशीकरण’ या ‘दुश्मन का नाश’ जैसे विज्ञापनों से लोगों को फंसाते हैं. पीरागढ़ी केस का आरोपी कमरुद्दीन सालों से लोनी में अपना केंद्र चला रहा था और पुलिस की नजरों से बचकर लोगों की जान ले रहा था.

दिल्ली के हालिया केस स्टडीज यह चीख-चीख कर कह रहे हैं कि कोई भी पूजा या तांत्रिक आपके पैसे दोगुना नहीं कर सकता और न ही मुर्दे आपसे बात कर सकते हैं. जब तक समाज में इन ‘शॉर्टकट’ समाधानों की मांग रहेगी, तब तक ये खूनी तांत्रिक दिल्ली की गलियों में अपनी दुकानें चलाते रहेंगे.

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