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चार्जिंग स्टेशन न बनने से ई-बसों की योजना अटकी:दो साल बाद भी सड़क पर नहीं उतरीं इलेक्ट्रिक बसें; आयुक्त बोले-जून तक संचालन शुरू

चार्जिंग स्टेशन न बनने से ई-बसों की योजना अटकी:दो साल बाद भी सड़क पर नहीं उतरीं इलेक्ट्रिक बसें; आयुक्त बोले-जून तक संचालन शुरू

कटनी शहर को प्रदूषण मुक्त और आधुनिक सार्वजनिक परिवहन की सौगात देने का दावा करने वाली नगर निगम की ‘दीनदयाल सिटी बस योजना’ फिलहाल फाइलों में दबी हुई है। बड़े विज्ञापनों और घोषणाओं के साथ शुरू की गई इस महत्वाकांक्षी इलेक्ट्रिक बस परियोजना को दो साल बीत चुके हैं, लेकिन प्रशासनिक लापरवाही के कारण एक भी बस अब तक सड़क पर नहीं उतर सकी है। मंजूरी, टेंडर और सब्सिडी की लंबी प्रक्रिया पूरी होने के बावजूद धरातल पर शून्य प्रगति ने नगर निगम की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं। इलेक्ट्रिक बस संचालन योजना प्रस्तावित रूट तय योजना के खाके के मुताबिक, शहर में चार अत्याधुनिक इलेक्ट्रिक बसों का संचालन किया जाना है। इनमें से दो बसें कटनी-जबलपुर मार्ग और दो बसें कटनी-रीवा मार्ग पर चलने के लिए प्रस्तावित हैं। दस्तावेजों के अनुसार, दिल्ली की ‘शोलो बस’ कंपनी को इसका टेंडर दिया गया था। टेंडर प्रक्रिया 19 फरवरी 2025 को पूरी हुई और जुलाई 2025 में राज्य स्तरीय तकनीकी समिति (SLTC) से भी हरी झंडी मिल गई। हालांकि, स्वीकृति मिले एक साल से अधिक का समय हो गया है, लेकिन बसें डिपो से बाहर नहीं आ पाई हैं। चार्जिंग स्टेशन न बनने से इलेक्ट्रिक बस योजना अटकी परियोजना के रुकने का सबसे बड़ा तकनीकी कारण चार्जिंग स्टेशन का निर्माण न होना बताया जा रहा है। बसों को चार्ज करने के लिए झिंझरी क्षेत्र में स्टेशन बनाया जाना प्रस्तावित है। 29 जुलाई 2025 को दर स्वीकृति (LOI) जारी होने के बाद भी निर्माण कार्य शुरू नहीं हो सका है। इस पूरी योजना की अनुमानित लागत लगभग 6 करोड़ रुपए है, जिसमें प्रत्येक बस की कीमत 1.50 करोड़ रुपये आंकी गई है। सरकार द्वारा ऑपरेटर को 40 प्रतिशत तक की सब्सिडी का प्रावधान भी है। इसके बावजूद, संचालन करने वाली कंपनी की ओर से 18 लाख रुपए की ‘परफॉर्मेंस गारंटी’ जमा करने और आगे की प्रक्रिया में सुस्ती बरती जा रही है। कांग्रेस नेता राजा जगवानी ने इस देरी की आलोचना करते हुए कहा कि यह सीधे तौर पर जनता की सुविधा के साथ खिलवाड़ है। अधिकारियों की सुस्ती से परियोजना अटकी कटनी शहर में बढ़ते यातायात दबाव और ध्वनि प्रदूषण के बीच इलेक्ट्रिक बसों के शुरू होने का इंतजार लगातार बढ़ता जा रहा है, जिससे आम जनता को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। स्थानीय लोगों का कहना है कि इन बसों के संचालन से न केवल सस्ती और सुरक्षित यात्रा मिलेगी बल्कि डीजल की खपत कम होने से पर्यावरण को भी लाभ होगा। लेकिन फिलहाल जिम्मेदार अधिकारियों की उदासीनता के कारण परियोजना अटकी हुई है। इस योजना के तहत कुल 4 इलेक्ट्रिक बसें प्रस्तावित हैं, जिनमें 2 बसें कटनी-जबलपुर और 2 बसें कटनी-रीवा मार्ग पर चलनी हैं, जिसकी कुल लागत लगभग 6 करोड़ रुपए है और इसमें 40% तक सब्सिडी का प्रावधान भी है। चार्जिंग स्टेशन का निर्माण न होने से योजना आगे नहीं बढ़ पा रही है, जबकि टेंडर प्रक्रिया पूरी हो चुकी है और लक्ष्य जून तक संचालन शुरू करने का रखा गया है। आयुक्त बोले- जून महीने तक बसों का संचालन शुरू नगर नियम आयुक्त तपस्या परिहार ने बताया कि चार इलेक्ट्रिक बसों के संचालन की प्रक्रिया जारी है और टेंडर संबंधी कार्य पूर्ण हो चुके हैं। झिंझरी में चार्जिंग स्टेशन का निर्माण जल्द पूरा कराने का प्रयास किया जा रहा है, ताकि जून महीने तक बसों का संचालन शुरू कर शहरवासियों को इसका लाभ मिल सके।

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कटनी शहर को प्रदूषण मुक्त और आधुनिक सार्वजनिक परिवहन की सौगात देने का दावा करने वाली नगर निगम की ‘दीनदयाल सिटी बस योजना’ फिलहाल फाइलों में दबी हुई है। बड़े विज्ञापनों और घोषणाओं के साथ शुरू की गई इस महत्वाकांक्षी इलेक्ट्रिक बस परियोजना को दो साल बीत चुके हैं, लेकिन प्रशासनिक लापरवाही के कारण एक भी बस अब तक सड़क पर नहीं उतर सकी है। मंजूरी, टेंडर और सब्सिडी की लंबी प्रक्रिया पूरी होने के बावजूद धरातल पर शून्य प्रगति ने नगर निगम की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं। इलेक्ट्रिक बस संचालन योजना प्रस्तावित रूट तय योजना के खाके के मुताबिक, शहर में चार अत्याधुनिक इलेक्ट्रिक बसों का संचालन किया जाना है। इनमें से दो बसें कटनी-जबलपुर मार्ग और दो बसें कटनी-रीवा मार्ग पर चलने के लिए प्रस्तावित हैं। दस्तावेजों के अनुसार, दिल्ली की ‘शोलो बस’ कंपनी को इसका टेंडर दिया गया था। टेंडर प्रक्रिया 19 फरवरी 2025 को पूरी हुई और जुलाई 2025 में राज्य स्तरीय तकनीकी समिति (SLTC) से भी हरी झंडी मिल गई। हालांकि, स्वीकृति मिले एक साल से अधिक का समय हो गया है, लेकिन बसें डिपो से बाहर नहीं आ पाई हैं। चार्जिंग स्टेशन न बनने से इलेक्ट्रिक बस योजना अटकी परियोजना के रुकने का सबसे बड़ा तकनीकी कारण चार्जिंग स्टेशन का निर्माण न होना बताया जा रहा है। बसों को चार्ज करने के लिए झिंझरी क्षेत्र में स्टेशन बनाया जाना प्रस्तावित है। 29 जुलाई 2025 को दर स्वीकृति (LOI) जारी होने के बाद भी निर्माण कार्य शुरू नहीं हो सका है। इस पूरी योजना की अनुमानित लागत लगभग 6 करोड़ रुपए है, जिसमें प्रत्येक बस की कीमत 1.50 करोड़ रुपये आंकी गई है। सरकार द्वारा ऑपरेटर को 40 प्रतिशत तक की सब्सिडी का प्रावधान भी है। इसके बावजूद, संचालन करने वाली कंपनी की ओर से 18 लाख रुपए की ‘परफॉर्मेंस गारंटी’ जमा करने और आगे की प्रक्रिया में सुस्ती बरती जा रही है। कांग्रेस नेता राजा जगवानी ने इस देरी की आलोचना करते हुए कहा कि यह सीधे तौर पर जनता की सुविधा के साथ खिलवाड़ है। अधिकारियों की सुस्ती से परियोजना अटकी कटनी शहर में बढ़ते यातायात दबाव और ध्वनि प्रदूषण के बीच इलेक्ट्रिक बसों के शुरू होने का इंतजार लगातार बढ़ता जा रहा है, जिससे आम जनता को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। स्थानीय लोगों का कहना है कि इन बसों के संचालन से न केवल सस्ती और सुरक्षित यात्रा मिलेगी बल्कि डीजल की खपत कम होने से पर्यावरण को भी लाभ होगा। लेकिन फिलहाल जिम्मेदार अधिकारियों की उदासीनता के कारण परियोजना अटकी हुई है। इस योजना के तहत कुल 4 इलेक्ट्रिक बसें प्रस्तावित हैं, जिनमें 2 बसें कटनी-जबलपुर और 2 बसें कटनी-रीवा मार्ग पर चलनी हैं, जिसकी कुल लागत लगभग 6 करोड़ रुपए है और इसमें 40% तक सब्सिडी का प्रावधान भी है। चार्जिंग स्टेशन का निर्माण न होने से योजना आगे नहीं बढ़ पा रही है, जबकि टेंडर प्रक्रिया पूरी हो चुकी है और लक्ष्य जून तक संचालन शुरू करने का रखा गया है। आयुक्त बोले- जून महीने तक बसों का संचालन शुरू नगर नियम आयुक्त तपस्या परिहार ने बताया कि चार इलेक्ट्रिक बसों के संचालन की प्रक्रिया जारी है और टेंडर संबंधी कार्य पूर्ण हो चुके हैं। झिंझरी में चार्जिंग स्टेशन का निर्माण जल्द पूरा कराने का प्रयास किया जा रहा है, ताकि जून महीने तक बसों का संचालन शुरू कर शहरवासियों को इसका लाभ मिल सके।

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