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पॉवेल की विदाई, कहा था-ईमानदारी की कोई कीमत नहीं होती:लेबल चिपकाने वाले युवक से वैश्विक अर्थव्यवस्था का सबसे अहम चेहरा बनने तक की कहानी

पॉवेल की विदाई, कहा था-ईमानदारी की कोई कीमत नहीं होती:लेबल चिपकाने वाले युवक से वैश्विक अर्थव्यवस्था का सबसे अहम चेहरा बनने तक की कहानी

आठ साल…तीन अमेरिकी राष्ट्रपति… 66 रेट सेटिंग मीटिंग…महामारी, महंगाई, राजनीतिक हमले आपराधिक जांच। इन सबके बीच जेरोम पॉवेल ने अमेरिकी केंद्रीय बैंक फेडरल रिजर्व की कमान संभाली। 29 अप्रैल को उन्होंने फेड चेयर के तौर पर आखिरी पॉलिसी मीटिंग ली। उनकी कहानी भरोसे, दबाव और ईमानदारी की मिसाल बन गई। 15 मई को चेयरमैन के तौर पर कार्यकाल खत्म होने के बाद भी पॉवेल फेड के गवर्नर और रेट-सेटिंग कमेटी के सदस्य बने रहेंगे। उन्होंने कहा कि न्याय विभाग की जांच पूरी पारदर्शिता और अंतिम नतीजे पर पहुंचने तक उनका बने रहना जरूरी है। यह फैसला असामान्य जरूर है, लेकिन शायद पॉवेल हमेशा से ऐसे ही रहे- नियमों से ज्यादा संस्थान की साख को अहमियत देने वाले। कोरोना महामारी के शुरुआती दिनों में दुनिया की अर्थव्यवस्था जैसे अचानक थम गई थी। बाजार टूट रहे थे, सप्लाई चेन बिखर रही थी और करोड़ों लोग भविष्य को लेकर डरे हुए थे। मार्च 2020 में पॉवेल ने आपात बैठक बुलाकर ब्याज दरों में कटौती की। कुछ ही दिनों बाद रविवार को दूसरी इमरजेंसी बैठक बुलाई और दरें लगभग शून्य कर दी गईं। महामारी के बाद जब महंगाई 40 साल के ऊंचे स्तर पर पहुंची, तब भी पॉवेल आलोचनाओं के घेरे में रहे। फेड ने आक्रामक तरीके से ब्याज दरें बढ़ाईं। पॉवेल ने चेतावनी दी थी कि लोगों और कॉरपोरेट्स को कुछ दर्द झेलना पड़ेगा, लेकिन कीमतों को काबू में लाना जरूरी है। लेकिन शायद उनकी सबसे बड़ी लड़ाई राजनीति से रही। डोनाल्ड ट्रंप ने कभी उन्हें ‘स्मार्ट’ और मजबूत कहा था, लेकिन बाद में वही ट्रंप उन्हें ‘फूल’, ‘नंबस्कल’ और ‘मेजर लूजर’ जैसे शब्दों से निशाना बनाने लगे। इसके बावजूद पॉवेल ने शायद ही कभी सार्वजनिक जवाब दिया। जब फेड की स्वतंत्रता पर सवाल उठे, तब उन्होंने खुलकर कहा कि यह लड़ाई सिर्फ उनकी नहीं, बल्कि इस बात की है कि अमेरिका में ब्याज दरें आंकड़ों से तय होंगी या राजनीतिक दबाव से। पॉवेल की निजी कहानी भी उतनी ही मानवीय है। वह शुरुआत में गोदाम में सामान पर लेबल लगाने का काम करते थे। उन्होंने कभी अर्थशास्त्र को उबाऊ समझकर छोड़ दिया था, पर वही व्यक्ति वैश्विक अर्थव्यवस्था का सबसे अहम चेहरा बन गया। सिर्फ एक पद का अंत नहीं, संस्थागत भरोसे की पूरी दास्तान है पावेल का करिअर जेरोम पॉवेल ने 2024 में एक इंटरव्यू में कहा था, ‘ईमानदारी की कोई कीमत नहीं होती। आखिर में आपके पास सिर्फ वही बचती है।’ यही उनके पूरे कार्यकाल का सार बन गया। महामारी हो, महंगाई या राजनीतिक दबाव- पॉवेल ने कई फैसलों पर आलोचना झेली, पर फेड की स्वतंत्रता और अपनी साख से समझौता नहीं किया। उनकी विदाई सिर्फ एक पद का अंत नहीं, बल्कि संस्थागत भरोसे की कहानी बन गई।

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