बड़वानी में गैस सिलेंडर की कमी और बढ़ती कीमतों ने लोगों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। एलपीजी की अनुपलब्धता के कारण अब कोयला और लकड़ी के दाम भी तेजी से बढ़ गए हैं, जिससे महंगाई का दोहरा असर पड़ रहा है। मध्य पूर्व में जारी संघर्ष का असर वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला पर दिख रहा है। इसके चलते व्यावसायिक गैस सिलेंडरों की बिक्री पूरी तरह बंद हो गई है, जबकि घरेलू सिलेंडरों की आपूर्ति में भी काफी बाधाएं आ रही हैं। चाय दुकान संचालक महेश धनगर ने बताया कि सिलेंडर की कमी के कारण चाय की दुकानें, फास्ट फूड स्टॉल और होटल-रेस्टोरेंट बंद होने की कगार पर हैं। कई दुकानदारों ने मजबूरी में खाना बनाने के लिए चूल्हे और भट्टियों का इस्तेमाल फिर से शुरू कर दिया है। कोयला लकड़ी के दाम भी बढ़े सिलेंडर की कमी के साथ ही कोयला और लकड़ी के दामों में भी भारी उछाल आया है। पहले जो कोयला 30 रुपए प्रति डिब्बा मिलता था, वह अब 60 रुपए में बिक रहा है। इसी तरह, 25 रुपए प्रति किलो बिकने वाला कोयला अब 50 से 60 रुपए प्रति किलो तक पहुंच गया है। बड़वानी में लोगों ने लकड़ी की भट्टियां खरीदना शुरू कर दिया है। इस मौके का फायदा उठाकर, 500 से 800 रुपए में मिलने वाली भट्टियां अब 2000 से 3000 रुपए में बेची जा रही हैं। घरेलू सिलेंडरों की समय पर डिलीवरी न होने के कारण इलेक्ट्रॉनिक कुकिंग इंडक्शन की मांग में भारी वृद्धि हुई है। सरस्वती इलेक्ट्रिक दुकान के संचालक मनीष मालवीय के अनुसार, इंडक्शन की बिक्री में 50 प्रतिशत का इजाफा हुआ है। ग्राहक ऐसे इंडक्शन की तलाश में हैं जिन पर रोटी सेंकी जा सके और जाली लगाकर किसी भी बर्तन में खाना बनाया जा सके। ब्रांडेड कंपनियों के ये इंडक्शन बाजार में 2500 से 4500 रुपए तक की कीमत में उपलब्ध हैं। होटल संचालक कैलाश यादव ने बताया कि केवल कोयला ही नहीं लकड़ी भी महंगी हो गई है। 5 रुपए किलो की लकड़ी 12 रुपए किलो में बेची जा रही है।












































