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Air Conditioning Health Risks; AC Side Effects

Air Conditioning Health Risks; AC Side Effects

55 मिनट पहलेलेखक: गौरव तिवारी

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आजकल एयरकंडीशनर (AC) हमारी रोजमर्रा की जिंदगी का अहम हिस्सा बनता जा रहा है। घर से लेकर ऑफिस तक, दिन का ज्यादातर हिस्सा एसी में गुजरता है। इसके अपने फायदे हैं, लेकिन कुछ नुकसान भी होते हैं।

लगातार ठंडी और ड्राई हवा में रहने से इम्यूनिटी कमजोर पड़ सकती है। साथ ही बंद कमरे का माहौल और टेम्परेचर में बार-बार बदलाव सेहत के लिए चुनौती बन सकता है। ऐसे में जरूरी है कि एसी के इस्तेमाल के साथ अपनी सेहत का भी ध्यान रखें।

इसलिए ‘जरूरत की खबर’ में आज एसी के हेल्थ रिस्क समझेंगे। साथ ही जानेंगे-

किन लोगों को एसी में ज्यादा सावधानी बरतनी चाहिए?

एसी इस्तेमाल करने का सही तरीका क्या है?

एक्सपर्ट: डॉ. मोहम्मद शाहिद, सीनियर कंसल्टेंट, इंटरनल मेडिसिन, अपोलो स्पेक्ट्रा हॉस्पिटल, कानपुर

सवाल- एसी की हवा हमारे शरीर को कैसे प्रभावित करती है?

जवाब- एसी की ठंडी-शुष्क हवा स्किन और रेस्पिरेटरी ट्रैक्ट को ड्राई कर सकती है।

  • लगातार ठंडे टेम्परेचर में रहने से शरीर की थर्मोरेगुलेशन प्रक्रिया स्लो हो जाती है।
  • कम वेंटिलेशन वाले कमरों में कार्बन डाइऑक्साइड और इनडोर पॉल्यूशन बढ़ सकता है।
  • एयर फ्लो के सामने बैठने से आंखों में ड्राईनेस और जलन हो सकती है।
  • टेम्परेचर में बार-बार बदलाव से मसल स्टिफनेस और सिरदर्द हो सकता है।
  • एसी फिल्टर गंदा होने पर एलर्जन और धूल के कण से इन्फेक्शन हो सकता है।

सवाल- क्या लंबे समय तक एसी में रहने से इम्यून सिस्टम कमजोर होता है?

जवाब- लगातार ठंडे वातावरण में रहने से शरीर बाहरी टेम्परेचर के अनुसार एडजस्ट नहीं हो पाता है। इससे इम्यून सिस्टम प्रभावित होता है।

  • ड्राई एयर से म्यूकस मेम्ब्रेन (गले की प्रोटेक्टिव लेयर) की नमी घट जाती है। इससे संक्रमण हो सकता है।
  • धूप न मिलने से विटामिन-D की कमी हो सकती है।
  • बंद जगहों में वायरस और बैक्टीरिया का ट्रांसमिशन तेजी से होता है।
  • देर तक ठंडी हवा में रहने से सर्दी-जुकाम, गले में खराश और खांसी हो सकती है।
  • स्किन ड्राईनेस और डिहाइड्रेशन की समस्या हो सकती है, जिससे स्किन बैरियर कमजोर होता है।

सवाल- इम्यून सिस्टम कमजोर क्यों होता है?

जवाब- गर्मी में लंबे समय तक एसी में रहने से शरीर का टेम्परेचर थर्मल एडैप्टेशन (टेम्परेचर के अनुसर बॉडी एडजस्टमेंट) कमजोर हो जाता है।

  • ठंडी-शुष्क हवा से रेस्पिरेटरी ट्रैक्ट की म्यूकस लेयर ड्राई हो जाती है। इससे इम्यूनिटी कमजोर हो सकती है।
  • बंद कमरों में ताजी हवा कम मिलने से माइक्रोब्स का एक्सपोजर बढ़ सकता है।
  • लो टेम्परेचर से ब्लड सर्कुलेशन और मेटाबॉलिक एक्टिविटी प्रभावित हो सकती है।
  • धूप न मिलने से विटामिन-D सिंथेसिस घटता है, जिससे इम्यून फंक्शन कमजोर हो जाता है।
  • बार-बार ठंडे-गर्म माहौल में जाने से शरीर पर फिजियोलॉजिकल स्ट्रेस (बॉडी पर काम का दबाव) बढ़ता है।

ग्राफिक में देखिए, एसी में रहने से इम्यूनिटी क्यों और कैसे कमजोर होती है-

सवाल- क्या हर वक्त एसी में रहने वाले लोग जल्दी बीमार पड़ते हैं?

जवाब- ऐसा नहीं है, लेकिन लगातार एसी में रहने से बाहरी मौसम के प्रति शरीर की सहनशीलता कम हो सकती है।

  • लो एयर सर्कुलेशन वाले कमरों में संक्रमण का रिस्क बढ़ जाता है।
  • टेम्परेचर में बदलाव का अनुभव न होने से थर्मल एडैप्टेशन प्रभावित होता है।
  • धूप न मिलने से सर्केडियन रिद्म और हॉर्मोनल इंबैलेंस हो सकता है।
  • ठंडे माहौल में बैठने से नाक-गले में इन्फेक्शन हो सकता है।

सवाल- एसी का टेम्परेचर बहुत कम रखने से शरीर के डिफेंस मैकेनिज्म पर क्या प्रभाव पड़ता है?

जवाब- लो टेम्परेचर से शरीर को हीट कंजर्व करने के लिए लगातार काम करना पड़ता है। इससे ब्लड वेसल्स संकुचित हो सकती हैं और इम्यून रिस्पॉन्स स्लो हो सकता है।

  • नाक और गले की नेचुरल क्लीनिंग प्रोसेस (म्यूकोसिलियरी क्लियरेंस) धीमी पड़ जाती है।
  • ठंडी हवा से व्हाइट ब्लड सेल्स की एफिशिएंसी प्रभावित हो सकती है, जिससे संक्रमण से लड़ने की क्षमता कम होती है।
  • बार-बार ठंड लगने से सर्दी, फ्लू और साइनस इंफेक्शन का रिस्क बढ़ सकता है।
  • मसल्स सख्त हो सकती हैं, जिससे बॉडी पर एक्स्ट्रा स्ट्रेस पड़ता है।
  • लो टेम्परेचर से शरीर में ब्लड सर्कुलेशन कम हो सकता है। इससे टिश्यू तक जरूरी न्यूट्रिएंट्स और ऑक्सीजन की सप्लाई प्रभावित हो सकती है।
  • तापमान में अचानक बदलाव (एसी और बाहर की गर्मी) शरीर के डिफेंस सिस्टम को कन्फ्यूज कर सकता है।
  • यह सब ओवरऑल इम्यून हेल्थ को प्रभावित करता है।

सवाल- क्या ज्यादा एसी में रहने से सर्दी-जुकाम, एलर्जी या इन्फेक्शन का रिस्क भी बढ़ता है?

जवाब- हां ऐसा हो सकता है, इसके कई कारण हैं-

  • एसी वाले बंद माहौल में वायरस-बैक्टीरिया का ट्रांसमिशन तेज होता है।
  • ड्राई एयर में नाक की नेचुरल फिल्ट्रेशन क्षमता घट सकती है।
  • गंदे फिल्टर एलर्जन और डस्ट माइट्स का एक्सपोजर बढ़ाते हैं।
  • टेम्परेचर में बदलाव से इम्यून रिएक्टिविटी प्रभावित होती है।
  • ठंडी हवा से साइनस कंजेशन और गले में इरिटेशन महसूस हो सकती है।

सवाल- एसी की ठंडी और ड्राई हवा रेस्पिरेटरी सिस्टम और स्किन बैरियर को कैसे प्रभावित करती है?

जवाब- लंग्स पर ये प्रभाव पड़ता है-

  • ड्राई एयर रेस्पिरेटरी ट्रैक्ट की प्रोटेक्टिव लेयर (म्यूकस) को पतला कर सकती है, जिससे कण इसे धोखा देकर शरीर में प्रवेश कर जाते हैं।
  • लगातार ठंडी हवा से लंग्स एयर-वे सेंसिटिव होकर कमजोर हो सकते हैं।

स्किन पर एसी का प्रभाव

  • स्किन ड्राई होने से उसका प्रोटेक्टिव बैरियर कमजोर पड़ता है।
  • स्किन में छोटे-छोटे क्रैक बन सकते हैं, जिससे इंफेक्शन का खतरा बढ़ता है।
  • कुछ लोगों को खुजली या डर्मेटाइटिस भी हो सकता है।

सवाल- कौन-से लक्षण बताते हैं कि एसी एक्सपोजर शरीर को सूट नहीं कर रहा? क्या इन्हें नजरअंदाज करना सही है?

जवाब- लगातार ठंडे और ड्राई वातावरण में रहने से शरीर की नेचुरल एडैप्टेशन क्षमता प्रभावित हो सकती है। कुछ लोगों में एयर-वे सेंसिटिविटी बढ़ने से रेस्पिरेटरी डिस्कम्फर्ट महसूस होता है। सभीसंकेत ग्राफिक में देखिए-

सवाल- किन लोगों को एसी में रहने से ज्यादा हेल्थ रिस्क होता है?

जवाब- कुछ लोगों का शरीर टेम्परेचर और नमी के बदलाव के प्रति ज्यादा सेंसिटिव होता है।

  • कमजोर इम्यूनिटी वाले लोगों को जल्दी परेशानी हो सकती है।
  • लो फिजिकल एक्टिविटी वालों को सर्कुलेटरी प्रॉब्लम हो सकती है।

ग्राफिक में देखिए किन लोगों को ज्यादा रिस्क होता है-

सवाल- अगर एसी के इतने नुकसान हैं तो क्या एसी बिल्कुल यूज नहीं करना चाहिए?

जवाब- ऐसा नहीं है। इसका सही इस्तेमाल फायदेमंद है-

  • बहुत अधिक गर्मी (जैसे 40°C) में एसी शरीर को ओवरहीटिंग और हीट-स्ट्रेस से बचाने में मदद करता है।
  • कंट्रोल्ड ठंडा वातावरण हार्ट रेट, पसीना और थकान कम कर सकता है।
  • समस्या एसी नहीं, बल्कि बार-बार ठंडे और गर्म माहौल में बदलाव है।
  • शरीर को टेम्परेचर के अनुसार खुद को एडजस्ट करने के लिए समय चाहिए।
  • स्टेबल टेम्परेचर पर रहना थर्मल एडैप्टेशन को संतुलित रखता है।
  • अरब देशों में सेंट्रलाइज्ड एसी और बेहतर वेंटिलेशन के कारण कम रिस्क होता है।

सवाल- एसी के इस्तेमाल का सही तरीका क्या है?

जवाब- टेम्परेचर 24-26°C के बीच रखना शरीर के लिए आरामदायक माना जाता है।

  • लगातार कई घंटों तक बैठने की बजाय बीच-बीच में ब्रेक लेकर मूवमेंट करें।
  • कमरे में कुछ समय खिड़की खोलकर फ्रेश एयर सर्कुलेशन बनाए रखें।
  • एसी फिल्टर की रेगुलर सफाई करें।
  • एयर फ्लो के ठीक सामने न बैठें।
  • बाहर से आने पर तुरंत बहुत लो टेम्परेचर में न बैठें।
  • पर्याप्त पानी पिएं और हल्के कपड़े पहनें। इससे थर्मल कंफर्ट बढ़ता है।

……………… ये खबर भी पढ़िए जरूरत की खबर- क्या आप आउटडोर वर्क करते हैं: हो सकते हैं ये 10 हेल्थ रिस्क, ऐसे करें हीटवेव से बचाव, खाली पेट धूप में न निकलें

देशभर में इन दिनों भीषण गर्मी पड़ रही है। कई शहरों में तापमान 40 डिग्री सेल्सियस के पार पहुंच गया है। तेज धूप और लू के कारण लोगों का घर से बाहर निकलना मुश्किल हो रहा है। आगे पढ़िए…

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आजकल एयरकंडीशनर (AC) हमारी रोजमर्रा की जिंदगी का अहम हिस्सा बनता जा रहा है। घर से लेकर ऑफिस तक, दिन का ज्यादातर हिस्सा एसी में गुजरता है। इसके अपने फायदे हैं, लेकिन कुछ नुकसान भी होते हैं।

लगातार ठंडी और ड्राई हवा में रहने से इम्यूनिटी कमजोर पड़ सकती है। साथ ही बंद कमरे का माहौल और टेम्परेचर में बार-बार बदलाव सेहत के लिए चुनौती बन सकता है। ऐसे में जरूरी है कि एसी के इस्तेमाल के साथ अपनी सेहत का भी ध्यान रखें।

इसलिए ‘जरूरत की खबर’ में आज एसी के हेल्थ रिस्क समझेंगे। साथ ही जानेंगे-

किन लोगों को एसी में ज्यादा सावधानी बरतनी चाहिए?

एसी इस्तेमाल करने का सही तरीका क्या है?

एक्सपर्ट: डॉ. मोहम्मद शाहिद, सीनियर कंसल्टेंट, इंटरनल मेडिसिन, अपोलो स्पेक्ट्रा हॉस्पिटल, कानपुर

सवाल- एसी की हवा हमारे शरीर को कैसे प्रभावित करती है?

जवाब- एसी की ठंडी-शुष्क हवा स्किन और रेस्पिरेटरी ट्रैक्ट को ड्राई कर सकती है।

  • लगातार ठंडे टेम्परेचर में रहने से शरीर की थर्मोरेगुलेशन प्रक्रिया स्लो हो जाती है।
  • कम वेंटिलेशन वाले कमरों में कार्बन डाइऑक्साइड और इनडोर पॉल्यूशन बढ़ सकता है।
  • एयर फ्लो के सामने बैठने से आंखों में ड्राईनेस और जलन हो सकती है।
  • टेम्परेचर में बार-बार बदलाव से मसल स्टिफनेस और सिरदर्द हो सकता है।
  • एसी फिल्टर गंदा होने पर एलर्जन और धूल के कण से इन्फेक्शन हो सकता है।

सवाल- क्या लंबे समय तक एसी में रहने से इम्यून सिस्टम कमजोर होता है?

जवाब- लगातार ठंडे वातावरण में रहने से शरीर बाहरी टेम्परेचर के अनुसार एडजस्ट नहीं हो पाता है। इससे इम्यून सिस्टम प्रभावित होता है।

  • ड्राई एयर से म्यूकस मेम्ब्रेन (गले की प्रोटेक्टिव लेयर) की नमी घट जाती है। इससे संक्रमण हो सकता है।
  • धूप न मिलने से विटामिन-D की कमी हो सकती है।
  • बंद जगहों में वायरस और बैक्टीरिया का ट्रांसमिशन तेजी से होता है।
  • देर तक ठंडी हवा में रहने से सर्दी-जुकाम, गले में खराश और खांसी हो सकती है।
  • स्किन ड्राईनेस और डिहाइड्रेशन की समस्या हो सकती है, जिससे स्किन बैरियर कमजोर होता है।

सवाल- इम्यून सिस्टम कमजोर क्यों होता है?

जवाब- गर्मी में लंबे समय तक एसी में रहने से शरीर का टेम्परेचर थर्मल एडैप्टेशन (टेम्परेचर के अनुसर बॉडी एडजस्टमेंट) कमजोर हो जाता है।

  • ठंडी-शुष्क हवा से रेस्पिरेटरी ट्रैक्ट की म्यूकस लेयर ड्राई हो जाती है। इससे इम्यूनिटी कमजोर हो सकती है।
  • बंद कमरों में ताजी हवा कम मिलने से माइक्रोब्स का एक्सपोजर बढ़ सकता है।
  • लो टेम्परेचर से ब्लड सर्कुलेशन और मेटाबॉलिक एक्टिविटी प्रभावित हो सकती है।
  • धूप न मिलने से विटामिन-D सिंथेसिस घटता है, जिससे इम्यून फंक्शन कमजोर हो जाता है।
  • बार-बार ठंडे-गर्म माहौल में जाने से शरीर पर फिजियोलॉजिकल स्ट्रेस (बॉडी पर काम का दबाव) बढ़ता है।

ग्राफिक में देखिए, एसी में रहने से इम्यूनिटी क्यों और कैसे कमजोर होती है-

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  • लो एयर सर्कुलेशन वाले कमरों में संक्रमण का रिस्क बढ़ जाता है।
  • टेम्परेचर में बदलाव का अनुभव न होने से थर्मल एडैप्टेशन प्रभावित होता है।
  • धूप न मिलने से सर्केडियन रिद्म और हॉर्मोनल इंबैलेंस हो सकता है।
  • ठंडे माहौल में बैठने से नाक-गले में इन्फेक्शन हो सकता है।

सवाल- एसी का टेम्परेचर बहुत कम रखने से शरीर के डिफेंस मैकेनिज्म पर क्या प्रभाव पड़ता है?

जवाब- लो टेम्परेचर से शरीर को हीट कंजर्व करने के लिए लगातार काम करना पड़ता है। इससे ब्लड वेसल्स संकुचित हो सकती हैं और इम्यून रिस्पॉन्स स्लो हो सकता है।

  • नाक और गले की नेचुरल क्लीनिंग प्रोसेस (म्यूकोसिलियरी क्लियरेंस) धीमी पड़ जाती है।
  • ठंडी हवा से व्हाइट ब्लड सेल्स की एफिशिएंसी प्रभावित हो सकती है, जिससे संक्रमण से लड़ने की क्षमता कम होती है।
  • बार-बार ठंड लगने से सर्दी, फ्लू और साइनस इंफेक्शन का रिस्क बढ़ सकता है।
  • मसल्स सख्त हो सकती हैं, जिससे बॉडी पर एक्स्ट्रा स्ट्रेस पड़ता है।
  • लो टेम्परेचर से शरीर में ब्लड सर्कुलेशन कम हो सकता है। इससे टिश्यू तक जरूरी न्यूट्रिएंट्स और ऑक्सीजन की सप्लाई प्रभावित हो सकती है।
  • तापमान में अचानक बदलाव (एसी और बाहर की गर्मी) शरीर के डिफेंस सिस्टम को कन्फ्यूज कर सकता है।
  • यह सब ओवरऑल इम्यून हेल्थ को प्रभावित करता है।

सवाल- क्या ज्यादा एसी में रहने से सर्दी-जुकाम, एलर्जी या इन्फेक्शन का रिस्क भी बढ़ता है?

जवाब- हां ऐसा हो सकता है, इसके कई कारण हैं-

  • एसी वाले बंद माहौल में वायरस-बैक्टीरिया का ट्रांसमिशन तेज होता है।
  • ड्राई एयर में नाक की नेचुरल फिल्ट्रेशन क्षमता घट सकती है।
  • गंदे फिल्टर एलर्जन और डस्ट माइट्स का एक्सपोजर बढ़ाते हैं।
  • टेम्परेचर में बदलाव से इम्यून रिएक्टिविटी प्रभावित होती है।
  • ठंडी हवा से साइनस कंजेशन और गले में इरिटेशन महसूस हो सकती है।

सवाल- एसी की ठंडी और ड्राई हवा रेस्पिरेटरी सिस्टम और स्किन बैरियर को कैसे प्रभावित करती है?

जवाब- लंग्स पर ये प्रभाव पड़ता है-

  • ड्राई एयर रेस्पिरेटरी ट्रैक्ट की प्रोटेक्टिव लेयर (म्यूकस) को पतला कर सकती है, जिससे कण इसे धोखा देकर शरीर में प्रवेश कर जाते हैं।
  • लगातार ठंडी हवा से लंग्स एयर-वे सेंसिटिव होकर कमजोर हो सकते हैं।

स्किन पर एसी का प्रभाव

  • स्किन ड्राई होने से उसका प्रोटेक्टिव बैरियर कमजोर पड़ता है।
  • स्किन में छोटे-छोटे क्रैक बन सकते हैं, जिससे इंफेक्शन का खतरा बढ़ता है।
  • कुछ लोगों को खुजली या डर्मेटाइटिस भी हो सकता है।

सवाल- कौन-से लक्षण बताते हैं कि एसी एक्सपोजर शरीर को सूट नहीं कर रहा? क्या इन्हें नजरअंदाज करना सही है?

जवाब- लगातार ठंडे और ड्राई वातावरण में रहने से शरीर की नेचुरल एडैप्टेशन क्षमता प्रभावित हो सकती है। कुछ लोगों में एयर-वे सेंसिटिविटी बढ़ने से रेस्पिरेटरी डिस्कम्फर्ट महसूस होता है। सभीसंकेत ग्राफिक में देखिए-

सवाल- किन लोगों को एसी में रहने से ज्यादा हेल्थ रिस्क होता है?

जवाब- कुछ लोगों का शरीर टेम्परेचर और नमी के बदलाव के प्रति ज्यादा सेंसिटिव होता है।

  • कमजोर इम्यूनिटी वाले लोगों को जल्दी परेशानी हो सकती है।
  • लो फिजिकल एक्टिविटी वालों को सर्कुलेटरी प्रॉब्लम हो सकती है।

ग्राफिक में देखिए किन लोगों को ज्यादा रिस्क होता है-

सवाल- अगर एसी के इतने नुकसान हैं तो क्या एसी बिल्कुल यूज नहीं करना चाहिए?

जवाब- ऐसा नहीं है। इसका सही इस्तेमाल फायदेमंद है-

  • बहुत अधिक गर्मी (जैसे 40°C) में एसी शरीर को ओवरहीटिंग और हीट-स्ट्रेस से बचाने में मदद करता है।
  • कंट्रोल्ड ठंडा वातावरण हार्ट रेट, पसीना और थकान कम कर सकता है।
  • समस्या एसी नहीं, बल्कि बार-बार ठंडे और गर्म माहौल में बदलाव है।
  • शरीर को टेम्परेचर के अनुसार खुद को एडजस्ट करने के लिए समय चाहिए।
  • स्टेबल टेम्परेचर पर रहना थर्मल एडैप्टेशन को संतुलित रखता है।
  • अरब देशों में सेंट्रलाइज्ड एसी और बेहतर वेंटिलेशन के कारण कम रिस्क होता है।

सवाल- एसी के इस्तेमाल का सही तरीका क्या है?

जवाब- टेम्परेचर 24-26°C के बीच रखना शरीर के लिए आरामदायक माना जाता है।

  • लगातार कई घंटों तक बैठने की बजाय बीच-बीच में ब्रेक लेकर मूवमेंट करें।
  • कमरे में कुछ समय खिड़की खोलकर फ्रेश एयर सर्कुलेशन बनाए रखें।
  • एसी फिल्टर की रेगुलर सफाई करें।
  • एयर फ्लो के ठीक सामने न बैठें।
  • बाहर से आने पर तुरंत बहुत लो टेम्परेचर में न बैठें।
  • पर्याप्त पानी पिएं और हल्के कपड़े पहनें। इससे थर्मल कंफर्ट बढ़ता है।

……………… ये खबर भी पढ़िए जरूरत की खबर- क्या आप आउटडोर वर्क करते हैं: हो सकते हैं ये 10 हेल्थ रिस्क, ऐसे करें हीटवेव से बचाव, खाली पेट धूप में न निकलें

देशभर में इन दिनों भीषण गर्मी पड़ रही है। कई शहरों में तापमान 40 डिग्री सेल्सियस के पार पहुंच गया है। तेज धूप और लू के कारण लोगों का घर से बाहर निकलना मुश्किल हो रहा है। आगे पढ़िए…

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