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MP Jal Nigam Officer Saves Tourists From Bargi Dam Cruise Accident

MP Jal Nigam Officer Saves Tourists From Bargi Dam Cruise Accident

अधिकारी मौके पर मौजूद रहे और रेस्क्यू ऑपरेशन चलाते रहे।

जैसे ही मेरा पास आया काल आया कि एक क्रूज बरगी बांध में थम गया है, शायद उसका इंजन भी बंद हो गया है। उसमें बहुत सारे लोग सवार हैं। उस दौरान मैं 100 से 150 किलोमीटर दूर था। जानकारी लगते ही फौरन मौके के लिए रवाना हुआ, जब तक पहुंचा तो क्रूज पानी में समा च

.

2 घंटे के भीतर जब पहुंचा तो पानी में हाहाकार मचा हुआ था,आसपास कोई नहीं था, टीम के साथ पानी में कूद पड़े और क्रूज में मौजूद लोगों को बचाया। हम हर स्तर से काम कर रहे हैं, इसके लिए भले ही जल निगम का काम प्रभावित हो, लेकिन पहले लोगों की जान बचाना प्राथमिकता है।

ये कहना है जल निगम के अधिकारी अलोक तिवारी का, जिन्होंने लगातार 10 घंटे तक अपनी टीम के साथ क्रूज में फंसे लोगों को बचाने का काम किया था। सीएम ने उनकी टीम को इस कार्य के लिए इनाम देने की घोषणा भी की है।

सील पैक थी लाइफ जैकेट

बताया जाता है कि क्रूज के अंदर रखी हुई लाइफ जैकेट सील पैक थी। मतलब अभी तक खुली ही नहीं थी। वहीं रेस्क्यू टीम भी दो घंटे लेट हुई थी। टीम की गाड़ी खराब हो गई थी तो दूसरी गाड़ी से गए जिससे दो घंटे लेट हुए। वहीं हादसे में बचकर लौटे लोगों ने खुलासा किया है कि मौसम खराब होने के बावजूद कैप्टन ने क्रूज को किनारे लगाने का फैसला नहीं लिया। मामले की जांच अब हाई लेवल कमेटी करेगी।

आलोक तिवारी ने लगातार लोगों को बचाने में मदद की।

हमने लगा दी मशीन-मेन पवार

जल निगम में कार्यरत अलोक तिवारी ने दैनिक भास्कर से बात करते हुए कहा कि गुरुवार को हुआ हादसा बहुत ही खतरनाक था। कर्मचारियों की नजरों के सामने क्रू पानी में समा गया था। उन्होंने बताया कि हमारा काम चल रहा था, इसलिए जैसे ही पता चला तो जेसीबी, पोकलेन मशीन के साथ-साथ हमारे कर्मचारियों ने दौड़ लगा दी और लोगों को बचाने में जुट गए। गुरुवार की रात से पूरी टीम मौके पर मौजूद है। जिस दौरान यह घटना हुई, तब क्रू करीब 90 मीटर दूर था। सबसे पहले लोगों की जान बचाना टास्क था, जिसे कि हमने स्थानीय पुलिस की मदद से मिलकर पूरा किया।

रेस्क्यू टीम लगातार ऑपरेशन चलाती रही।

रेस्क्यू टीम लगातार ऑपरेशन चलाती रही।

15 घंटे में 90 मीटर लाया

अलोक तिवारी ने बताया कि खमरिया टापू से करीब 90 मीटर लौटते समय क्रू पानी में डूबा था। ऐसे में रात भर से हमारी टीम लगी रही। रात को 50 मीटर तक जैसे-तैसे मशीनों के द्रारा क्रू को खींचकर लाया गया थाष तब तक 9 लोगों की मौत हो चुकी थी। बहुत सारे लोग क्रू में चीख-चिल्ला रहे थे। उन्होंने बताया कि रात को ही मशीनों के जरिए मोटे तार की मदद से क्रू को बाहर लाने की कोशिश की जा रही थी, पर अंधेरा के साथ-साथ भार होने के कारण तार टूट रही थी, जिसके चलते शुक्रवार की सुबह फिर से रेस्क्यू किया गया।

रेस्क्यू ऑपरेशन रात में भी जारी रहा था।

रेस्क्यू ऑपरेशन रात में भी जारी रहा था।

रेस्क्यू के समय लोग परेशान कर रहे थे

आलोक तिवारी ने बताया कि रेस्क्यू के समय बहुत सारे लोग परेशान कर रहे थे। हमारा कुछ काम नहीं था, इसके बाद भी मशीनों के साथ रेस्क्यू किया। जब हम लोग क्रू को निकाल रहे थे, उस दौरान परेशानी भी आ रही थी, जिसके चलते गुस्सा भी आया। उनका कहना था कि हम रात से ही लगे हुए थे, पर बीच-बीच में कुछ अधिकारी आकर परेशान कर रहे थे, कोई कुछ डायरेक्शन देता, तो कोई कुछ बोलता।

ऐसे में लाजमी है, गुस्सा आ जाता है। हम लोग भूखे,प्यासे थे, पर अधिकारी आकर यहां पर रौब जमाते, जिसके कारण गुस्सा आ गया था। उनका कहना था, कि जितने लोग आते, वह अपना-अपना मत देते, इस वजह से गुस्सा आ गई थी।

हादसे के बाद रोते बिलखते लोग।

हादसे के बाद रोते बिलखते लोग।

जिम्मेदार आंधी नहीं, अंधा-बहरा सिस्टम है

लाइफ जैकेट…जिसमें जिंदगी ही नहीं बची थी। उसमें था मां के साथ लिपटे एक मासूम का शव। जबलपुर के बरगी डैम हादसे के बाद किसी चमत्कार की आस लगाए बैठे बचाव दल और परिवार के लिए वो पल झकझोर देने वाला था…जब मां-बेटे का शव बाहर निकाला गया। बेटे को बचा लेने की चिंता और जिद दिखाती वो तस्वीर रुला देने वाली थी। पढ़ें पूरी खबर…

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MP Jal Nigam Officer Saves Tourists From Bargi Dam Cruise Accident

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जैसे ही मेरा पास आया काल आया कि एक क्रूज बरगी बांध में थम गया है, शायद उसका इंजन भी बंद हो गया है। उसमें बहुत सारे लोग सवार हैं। उस दौरान मैं 100 से 150 किलोमीटर दूर था। जानकारी लगते ही फौरन मौके के लिए रवाना हुआ, जब तक पहुंचा तो क्रूज पानी में समा च

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2 घंटे के भीतर जब पहुंचा तो पानी में हाहाकार मचा हुआ था,आसपास कोई नहीं था, टीम के साथ पानी में कूद पड़े और क्रूज में मौजूद लोगों को बचाया। हम हर स्तर से काम कर रहे हैं, इसके लिए भले ही जल निगम का काम प्रभावित हो, लेकिन पहले लोगों की जान बचाना प्राथमिकता है।

ये कहना है जल निगम के अधिकारी अलोक तिवारी का, जिन्होंने लगातार 10 घंटे तक अपनी टीम के साथ क्रूज में फंसे लोगों को बचाने का काम किया था। सीएम ने उनकी टीम को इस कार्य के लिए इनाम देने की घोषणा भी की है।

सील पैक थी लाइफ जैकेट

बताया जाता है कि क्रूज के अंदर रखी हुई लाइफ जैकेट सील पैक थी। मतलब अभी तक खुली ही नहीं थी। वहीं रेस्क्यू टीम भी दो घंटे लेट हुई थी। टीम की गाड़ी खराब हो गई थी तो दूसरी गाड़ी से गए जिससे दो घंटे लेट हुए। वहीं हादसे में बचकर लौटे लोगों ने खुलासा किया है कि मौसम खराब होने के बावजूद कैप्टन ने क्रूज को किनारे लगाने का फैसला नहीं लिया। मामले की जांच अब हाई लेवल कमेटी करेगी।

आलोक तिवारी ने लगातार लोगों को बचाने में मदद की।

हमने लगा दी मशीन-मेन पवार

जल निगम में कार्यरत अलोक तिवारी ने दैनिक भास्कर से बात करते हुए कहा कि गुरुवार को हुआ हादसा बहुत ही खतरनाक था। कर्मचारियों की नजरों के सामने क्रू पानी में समा गया था। उन्होंने बताया कि हमारा काम चल रहा था, इसलिए जैसे ही पता चला तो जेसीबी, पोकलेन मशीन के साथ-साथ हमारे कर्मचारियों ने दौड़ लगा दी और लोगों को बचाने में जुट गए। गुरुवार की रात से पूरी टीम मौके पर मौजूद है। जिस दौरान यह घटना हुई, तब क्रू करीब 90 मीटर दूर था। सबसे पहले लोगों की जान बचाना टास्क था, जिसे कि हमने स्थानीय पुलिस की मदद से मिलकर पूरा किया।

रेस्क्यू टीम लगातार ऑपरेशन चलाती रही।

रेस्क्यू टीम लगातार ऑपरेशन चलाती रही।

15 घंटे में 90 मीटर लाया

अलोक तिवारी ने बताया कि खमरिया टापू से करीब 90 मीटर लौटते समय क्रू पानी में डूबा था। ऐसे में रात भर से हमारी टीम लगी रही। रात को 50 मीटर तक जैसे-तैसे मशीनों के द्रारा क्रू को खींचकर लाया गया थाष तब तक 9 लोगों की मौत हो चुकी थी। बहुत सारे लोग क्रू में चीख-चिल्ला रहे थे। उन्होंने बताया कि रात को ही मशीनों के जरिए मोटे तार की मदद से क्रू को बाहर लाने की कोशिश की जा रही थी, पर अंधेरा के साथ-साथ भार होने के कारण तार टूट रही थी, जिसके चलते शुक्रवार की सुबह फिर से रेस्क्यू किया गया।

रेस्क्यू ऑपरेशन रात में भी जारी रहा था।

रेस्क्यू ऑपरेशन रात में भी जारी रहा था।

रेस्क्यू के समय लोग परेशान कर रहे थे

आलोक तिवारी ने बताया कि रेस्क्यू के समय बहुत सारे लोग परेशान कर रहे थे। हमारा कुछ काम नहीं था, इसके बाद भी मशीनों के साथ रेस्क्यू किया। जब हम लोग क्रू को निकाल रहे थे, उस दौरान परेशानी भी आ रही थी, जिसके चलते गुस्सा भी आया। उनका कहना था कि हम रात से ही लगे हुए थे, पर बीच-बीच में कुछ अधिकारी आकर परेशान कर रहे थे, कोई कुछ डायरेक्शन देता, तो कोई कुछ बोलता।

ऐसे में लाजमी है, गुस्सा आ जाता है। हम लोग भूखे,प्यासे थे, पर अधिकारी आकर यहां पर रौब जमाते, जिसके कारण गुस्सा आ गया था। उनका कहना था, कि जितने लोग आते, वह अपना-अपना मत देते, इस वजह से गुस्सा आ गई थी।

हादसे के बाद रोते बिलखते लोग।

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जिम्मेदार आंधी नहीं, अंधा-बहरा सिस्टम है

लाइफ जैकेट…जिसमें जिंदगी ही नहीं बची थी। उसमें था मां के साथ लिपटे एक मासूम का शव। जबलपुर के बरगी डैम हादसे के बाद किसी चमत्कार की आस लगाए बैठे बचाव दल और परिवार के लिए वो पल झकझोर देने वाला था…जब मां-बेटे का शव बाहर निकाला गया। बेटे को बचा लेने की चिंता और जिद दिखाती वो तस्वीर रुला देने वाली थी। पढ़ें पूरी खबर…

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