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रिपोर्ट- ED ने ₹81 हजार करोड़ की संपत्ति अटैच की:लोगों को ₹32 हजार करोड़ लौटाए; गिरफ्तारी में 27% की कमी आई, छापेमारी दोगुनी

रिपोर्ट- ED ने ₹81 हजार करोड़ की संपत्ति अटैच की:लोगों को ₹32 हजार करोड़ लौटाए; गिरफ्तारी में 27% की कमी आई, छापेमारी दोगुनी

प्रवर्तन निदेशालय (ED) की सालाना रिपोर्ट 2025-26 के मुताबिक मनी लॉन्ड्रिंग के तहत गिरफ्तारियों में कमी आई। वहीं छापों, संपत्ति अटैचमेंट और पीड़ितों को पैसे लौटाने के मामलों में रिकॉर्ड बढ़ोतरी दर्ज की गई। ED ने 712 प्रोविजनल अटैचमेंट ऑर्डर जारी कर 81,422 करोड़ रुपए की संपत्ति जब्त की। यह पिछले साल के 30,036 करोड़ रुपए के मुकाबले 171% ज्यादा है। ये अटैचमेंट PMLA की एडजुडिकेटिंग अथॉरिटी से पुष्टि के बाद स्थायी होते हैं। ED की गिरफ्तारियों में करीब 27% की कमी आई है। ED ने 156 लोगों को गिरफ्तार किया, जबकि FY25 में यह संख्या 214 और FY24 में 272 थी। एजेंसी के मुताबिक अब वह टारगेटेड और सबूत आधारित जांच पर ज्यादा फोकस कर रही है। रेड की संख्या दोगुनी हुई साल 2025-26 में ED ने कुल 2,892 छापे मारे, जो पिछले साल 1,491 के मुकाबले लगभग दोगुने हैं। हालांकि एजेंसी अब सिर्फ फिजिकल रेड पर निर्भर नहीं है, बल्कि डेटा एनालिटिक्स, ब्लॉकचेन ट्रैकिंग और रियल-टाइम फाइनेंशियल इंटेलिजेंस का भी इस्तेमाल कर रही है। पीड़ितों को ₹32 हजार करोड़ लौटाए रिपोर्ट की सबसे बड़ी उपलब्धि फ्रॉड पीड़ितों को संपत्ति लौटाना रही। FY26 में ED ने 32,678 करोड़ रुपए की संपत्ति निवेशकों, होमबॉयर्स और बैंकों को वापस दिलाई, जो पिछले साल 15,263 करोड़ रुपए थी। इसमें PACL पोंजी स्कैम केस का बड़ा योगदान रहा, जहां अकेले 15,582 करोड़ रुपए लौटाए गए। केस रजिस्ट्रेशन और चार्जशीट में भी रिकॉर्ड
केस रजिस्ट्रेशन 39% बढ़कर 1,080 हो गए हैं। वहीं इस साल 812 चार्जशीट दाखिल की गईं जो पिछले साल 457 थीं। एजेंसी का दावा है कि अब केस की जांच अवधि 3-4 साल से घटकर 1-1.5 साल रह गई है। विदेशों से कानूनी सहयोग बढ़ा मनी लॉन्ड्रिंग जांच में अंतरराष्ट्रीय सहयोग भी बढ़ा है। वहीं भारत को विदेशों से 246 रिक्वेस्ट मिले, जिनमें सबसे ज्यादा UK (79) से हैं। 31 मार्च 2026 तक 353 MLAT/LR रिक्वेस्ट लंबित हैं, जिनमें सबसे ज्यादा: प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (PMLA) के तहत ED को गिरफ्तारी, तलाशी, जब्ती और संपत्ति अटैच करने के व्यापक अधिकार हैं। इस कानून के तहत जमानत मिलना भी मुश्किल होता है।

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रिपोर्ट- ED ने ₹81 हजार करोड़ की संपत्ति अटैच की:लोगों को ₹32 हजार करोड़ लौटाए; गिरफ्तारी में 27% की कमी आई, छापेमारी दोगुनी

प्रवर्तन निदेशालय (ED) की सालाना रिपोर्ट 2025-26 के मुताबिक मनी लॉन्ड्रिंग के तहत गिरफ्तारियों में कमी आई। वहीं छापों, संपत्ति अटैचमेंट और पीड़ितों को पैसे लौटाने के मामलों में रिकॉर्ड बढ़ोतरी दर्ज की गई। ED ने 712 प्रोविजनल अटैचमेंट ऑर्डर जारी कर 81,422 करोड़ रुपए की संपत्ति जब्त की। यह पिछले साल के 30,036 करोड़ रुपए के मुकाबले 171% ज्यादा है। ये अटैचमेंट PMLA की एडजुडिकेटिंग अथॉरिटी से पुष्टि के बाद स्थायी होते हैं। ED की गिरफ्तारियों में करीब 27% की कमी आई है। ED ने 156 लोगों को गिरफ्तार किया, जबकि FY25 में यह संख्या 214 और FY24 में 272 थी। एजेंसी के मुताबिक अब वह टारगेटेड और सबूत आधारित जांच पर ज्यादा फोकस कर रही है। रेड की संख्या दोगुनी हुई साल 2025-26 में ED ने कुल 2,892 छापे मारे, जो पिछले साल 1,491 के मुकाबले लगभग दोगुने हैं। हालांकि एजेंसी अब सिर्फ फिजिकल रेड पर निर्भर नहीं है, बल्कि डेटा एनालिटिक्स, ब्लॉकचेन ट्रैकिंग और रियल-टाइम फाइनेंशियल इंटेलिजेंस का भी इस्तेमाल कर रही है। पीड़ितों को ₹32 हजार करोड़ लौटाए रिपोर्ट की सबसे बड़ी उपलब्धि फ्रॉड पीड़ितों को संपत्ति लौटाना रही। FY26 में ED ने 32,678 करोड़ रुपए की संपत्ति निवेशकों, होमबॉयर्स और बैंकों को वापस दिलाई, जो पिछले साल 15,263 करोड़ रुपए थी। इसमें PACL पोंजी स्कैम केस का बड़ा योगदान रहा, जहां अकेले 15,582 करोड़ रुपए लौटाए गए। केस रजिस्ट्रेशन और चार्जशीट में भी रिकॉर्ड
केस रजिस्ट्रेशन 39% बढ़कर 1,080 हो गए हैं। वहीं इस साल 812 चार्जशीट दाखिल की गईं जो पिछले साल 457 थीं। एजेंसी का दावा है कि अब केस की जांच अवधि 3-4 साल से घटकर 1-1.5 साल रह गई है। विदेशों से कानूनी सहयोग बढ़ा मनी लॉन्ड्रिंग जांच में अंतरराष्ट्रीय सहयोग भी बढ़ा है। वहीं भारत को विदेशों से 246 रिक्वेस्ट मिले, जिनमें सबसे ज्यादा UK (79) से हैं। 31 मार्च 2026 तक 353 MLAT/LR रिक्वेस्ट लंबित हैं, जिनमें सबसे ज्यादा: प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (PMLA) के तहत ED को गिरफ्तारी, तलाशी, जब्ती और संपत्ति अटैच करने के व्यापक अधिकार हैं। इस कानून के तहत जमानत मिलना भी मुश्किल होता है।

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