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ईरान जंग के 2 महीने, पूरी दुनिया में महंगाई बढ़ी:3,600+ मौतें, इनमें 1700+ नागरिक; जीत–हार का फैसला नहीं, 1 ट्रिलियन डॉलर का नुकसान

ईरान जंग के 2 महीने, पूरी दुनिया में महंगाई बढ़ी:3,600+ मौतें, इनमें 1700+ नागरिक; जीत–हार का फैसला नहीं, 1 ट्रिलियन डॉलर का नुकसान

ईरान के खिलाफ शुरू हुई जंग को दो महीने हो चुके हैं, लेकिन इसका कोई साफ अंत अभी तक नजर नहीं आ रहा। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने इसे छोटी और निर्णायक लड़ाई बताया था, लेकिन अब हालात उलट दिख रहे हैं। जंग रुकी जरूर है, पर खत्म नहीं हुई। IMF के मुताबिक, जंग से पहले उम्मीद थी कि इस साल वैश्विक महंगाई 4.1% से घटकर 3.8% हो जाएगी। लेकिन अब उल्टा हो गया है, महंगाई 4.4% तक पहुंचने का अनुमान है। इस जंग की सबसे बड़ी कीमत आम लोग चुका रहे हैं। ईरान के मानवाधिकार संगठनों के मुताबिक, अब तक 3,600 से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है, जिनमें 1,700 से ज्यादा नागरिक हैं। वहीं हार्वर्ड की इकोनॉमिस्ट लिंडा बिल्म्स का अनुमान है कि इस युद्ध की कुल लागत 1 ट्रिलियन डॉलर तक पहुंच चुकी है। यानी दुनिया भर में महंगाई का दबाव और बढ़ना तय है। एक्सपर्ट- इस जंग में कोई असली विजेता नहीं अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प कई बार कह चुके है कि इस जंग में अमेरिका कई मायनों में जीत हासिल कर चुका हैं। ब्रुकिंग्स इंस्टीट्यूट की सीनियर फेलो मेलानी सिसन ने CNN से कहा कि इस जंग में कोई असली विजेता नहीं है। अमेरिका को भी कोई बड़ा रणनीतिक फायदा नहीं मिला है। वहीं, यह संघर्ष अब सीमित नहीं रहा और इसका असर पूरी दुनिया पर दिख रहा है। सबसे ज्यादा नुकसान आम लोगों को हुआ है। ईरान, लेबनान और खाड़ी देशों से लेकर अमेरिका और पूरी दुनिया के लोग इसकी कीमत चुका रहे हैं। साथ ही, ईरान की सरकार ने भी अंदरूनी विरोध पर सख्ती बढ़ा दी है। साल की शुरुआत से अब तक 600 से ज्यादा लोगों को फांसी दी जा चुकी है। देश में आठ हफ्तों से इंटरनेट बंद है और अर्थव्यवस्था भी बुरी तरह प्रभावित हुई है। ईरान में आम जनता पर सरकार की सख्ती ईरान के लोग बाहर से भी हमलों का सामना कर रहे हैं और देश के अंदर से भी दबाव झेल रहे हैं। अमेरिका और इजराइल ने ईरान में हजारों जगहों पर हमले किए हैं, जिनमें कुछ हमले आम नागरिकों से जुड़े ढांचे (जैसे बिजली, पानी आदि) पर भी हुए। नए सुप्रीम लीडर मोजतबा खामेनेई के नेतृत्व में सरकार पहले से ज्यादा सख्त नजर आ रही है और किसी भी विरोध को कुचलने का मैसेज दे रही है। इससे पहले दिसंबर और जनवरी में हुए प्रदर्शनों के दौरान भी हजारों लोग मारे गए थे। साथ ही देश अर्थव्यवस्था भी बुरी तरह प्रभावित हुई है। जिससे नौकरियां जा रही हैं और गरीबी बढ़ रही है। लेबनान में भी भारी तबाही लेबनान के लोग कई दशकों से हिजबुल्लाह और इजराइल के बीच चल रहे संघर्ष में फंसे हुए हैं। फरवरी तक एक नाजुक सीजफायर बना हुआ था, लेकिन हालात तब बिगड़ गए जब इजराइल ने ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई को मार दिया। इसके बाद हिजबुल्लाह ने इजराइल पर हमले शुरू कर दिए। जवाब में इजराइल ने लेबनान पर जोरदार एयरस्ट्राइक और जमीनी कार्रवाई शुरू की, जिसका मकसद हिजबुल्लाह को खत्म करना बताया गया। लेबनान के स्वास्थ्य मंत्रालय के मुताबिक, 2 मार्च से अब तक इन हमलों में 2500 से ज्यादा लोग मारे जा चुके हैं। सैटेलाइट तस्वीरों से सामने आया है कि इजराइल वही रणनीति अपना रहा है, जो उसने पहले गाजा में अपनाई थी। यानी पूरे के पूरे गांवों को तबाह करना। हालात इतने खराब हैं कि दक्षिणी लेबनान से करीब 6 लाख लोग अपने घर छोड़ने पर मजबूर हो गए हैं। इजराइल ने साफ कहा है कि जब तक हिजबुल्लाह से उत्तरी इजराइल को खतरा खत्म नहीं होता, तब तक इन लोगों को वापस घर लौटने नहीं दिया जाएगा। खाड़ी देशों की अर्थव्यवस्था पर असर खाड़ी के कई देश भी इस जंग की चपेट में आ गए हैं। सबसे ज्यादा असर UAE पर पड़ा है। यहां ईरान ने सबसे ज्यादा मिसाइल और ड्रोन हमले किए। हालांकि ज्यादातर हमले रोक दिए गए, लेकिन भारी नुकसान हुआ है और इससे UAE की एक बड़े बिजनेस और टूरिज्म हब वाली छवि को झटका लगा है। वहीं, ईरान द्वारा होर्मुज स्ट्रेट को बंद करने से इराक, कतर और कुवैत की अर्थव्यवस्था पर बुरा असर पड़ा है। ये देश अपने तेल, गैस और दूसरे सामान की सप्लाई के लिए इसी रास्ते पर निर्भर हैं। इंटरनेशनल मॉनेटरी फंड (IMF) ने भी इन देशों की आर्थिक ग्रोथ के अनुमान घटा दिए हैं और माना है कि इस साल इराक, कतर और कुवैत की अर्थव्यवस्था सिकुड़ सकती है। अमेरिका में महंगाई, आम अमेरिकयों पर असर इस जंग का असर आम अमेरिकियों की जेब पर साफ दिख रहा है। पेट्रोल, हवाई टिकट और कई सर्विसेज महंगी हो गई हैं, क्योंकि कंपनियां अब कीमतों में फ्यूल सरचार्ज जोड़ रही हैं। महंगाई दर फरवरी के 2.4% से बढ़कर मार्च में 3.3% हो गई है, और लोगों का भरोसा (कंज्यूमर सेंटिमेंट) तेजी से गिर रहा है। ब्रुकिंग्स इंस्टीट्यूट के मुताबिक, अमेरिका की अर्थव्यवस्था काफी हद तक तेल पर निर्भर है। वहीं, रिन्यूएबल एनर्जी (जैसे सोलर, विंड) में निवेश अभी भी कम है और यही अब कमजोरी बन रही है। चीन और रूस को इस जंग से फायदा चीन इस जंग से अपेक्षाकृत मजबूत स्थिति में दिख रहा है। चीन ने पहले ही तेल के भंडार जोड़ रखे थे और वैकल्पिक ऊर्जा पर भी कई दशकों पहले से ध्यान दे रहा था। साथ ही, अमेरिका की छवि कमजोर होने से उसे कूटनीतिक फायदा मिला है। चीन की तेल और गैस कंपनियां भी मुनाफा कमा रही हैं। CNN के मुताबिक, 6 बड़ी कंपनियां इस साल 94 अरब डॉलर तक का फायदा कमा सकती हैं। इसके अलावा इस जंग से रूस की अर्थव्यवस्था को फायदा मिलता दिख रहा है। तेल और खाद की ऊंची कीमतों की वजह से रूस की कमाई बढ़ी है। साथ ही जब तेल की कीमतें तेजी से बढ़ रही थीं, तब अमेरिका ने समुद्र में मौजूद रूसी तेल पर कुछ समय के लिए पाबंदियां ढीली कर दीं, जिससे सप्लाई बढ़ सके, इससे रूस को और फायदा हुआ। अंतर्राष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी (IEA) के मुताबिक, मार्च में रूस की एनर्जी कमाई करीब दोगुनी होकर 19 अरब डॉलर पहुंच गई, जो फरवरी में 9.75 अरब डॉलर थी। ग्लोबल ग्रोथ रेट 3.3% से घटकर 3.1% हुआ इस जंग का असर अब पूरी दुनिया के आम लोगों की जेब पर दिखने लगा है। IMF ने ग्लोबल ग्रोथ का अनुमान भी घटा दिया है। अब इस साल दुनिया की अर्थव्यवस्था 3.1% की दर से बढ़ने की उम्मीद है, जबकि जनवरी में ये अनुमान 3.3% था। खाद की कीमतों में भी तेज बढ़ोतरी हुई है। जिन देशों में लोग खेती पर ज्यादा निर्भर हैं और अपनी कमाई का बड़ा हिस्सा खाने पर खर्च करते हैं, उन्हें इस महंगाई का असर सीधे और ज्यादा पड़ता है। जंग की स्थिति पर ट्रम्प की लोकप्रियता गिरी डोनाल्ड ट्रम्प के लिए यह जंग एक बड़ा दांव था। उन्होंने इसे जल्दी खत्म करने का वादा किया था, लेकिन अब तक न तो ईरान झुका है और न ही जंग खत्म हुई है। CNN के पोल में सामने आया, उनकी लोकप्रियता भी घटकर 37% रह गई है। इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू को शुरुआत में रणनीतिक फायदा मिला, लेकिन अब वहां भी लोग मानते हैं कि जंग में जीत साफ नहीं है। ईरान की सत्ता को भी नुकसान हुआ है, लेकिन नई लीडरशिप और ज्यादा आक्रामक दिख रही है। साथ ही, होर्मुज स्ट्रेट पर नियंत्रण दिखाकर से ईरान ने वैश्विक दबाव बनाने की क्षमता दिखाई है।

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ईरान जंग के 2 महीने, पूरी दुनिया में महंगाई बढ़ी:3,600+ मौतें, इनमें 1700+ नागरिक; जीत–हार का फैसला नहीं, 1 ट्रिलियन डॉलर का नुकसान

ईरान जंग के 2 महीने, पूरी दुनिया में महंगाई बढ़ी:3,600+ मौतें, इनमें 1700+ नागरिक; जीत–हार का फैसला नहीं, 1 ट्रिलियन डॉलर का नुकसान

ईरान के खिलाफ शुरू हुई जंग को दो महीने हो चुके हैं, लेकिन इसका कोई साफ अंत अभी तक नजर नहीं आ रहा। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने इसे छोटी और निर्णायक लड़ाई बताया था, लेकिन अब हालात उलट दिख रहे हैं। जंग रुकी जरूर है, पर खत्म नहीं हुई। IMF के मुताबिक, जंग से पहले उम्मीद थी कि इस साल वैश्विक महंगाई 4.1% से घटकर 3.8% हो जाएगी। लेकिन अब उल्टा हो गया है, महंगाई 4.4% तक पहुंचने का अनुमान है। इस जंग की सबसे बड़ी कीमत आम लोग चुका रहे हैं। ईरान के मानवाधिकार संगठनों के मुताबिक, अब तक 3,600 से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है, जिनमें 1,700 से ज्यादा नागरिक हैं। वहीं हार्वर्ड की इकोनॉमिस्ट लिंडा बिल्म्स का अनुमान है कि इस युद्ध की कुल लागत 1 ट्रिलियन डॉलर तक पहुंच चुकी है। यानी दुनिया भर में महंगाई का दबाव और बढ़ना तय है। एक्सपर्ट- इस जंग में कोई असली विजेता नहीं अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प कई बार कह चुके है कि इस जंग में अमेरिका कई मायनों में जीत हासिल कर चुका हैं। ब्रुकिंग्स इंस्टीट्यूट की सीनियर फेलो मेलानी सिसन ने CNN से कहा कि इस जंग में कोई असली विजेता नहीं है। अमेरिका को भी कोई बड़ा रणनीतिक फायदा नहीं मिला है। वहीं, यह संघर्ष अब सीमित नहीं रहा और इसका असर पूरी दुनिया पर दिख रहा है। सबसे ज्यादा नुकसान आम लोगों को हुआ है। ईरान, लेबनान और खाड़ी देशों से लेकर अमेरिका और पूरी दुनिया के लोग इसकी कीमत चुका रहे हैं। साथ ही, ईरान की सरकार ने भी अंदरूनी विरोध पर सख्ती बढ़ा दी है। साल की शुरुआत से अब तक 600 से ज्यादा लोगों को फांसी दी जा चुकी है। देश में आठ हफ्तों से इंटरनेट बंद है और अर्थव्यवस्था भी बुरी तरह प्रभावित हुई है। ईरान में आम जनता पर सरकार की सख्ती ईरान के लोग बाहर से भी हमलों का सामना कर रहे हैं और देश के अंदर से भी दबाव झेल रहे हैं। अमेरिका और इजराइल ने ईरान में हजारों जगहों पर हमले किए हैं, जिनमें कुछ हमले आम नागरिकों से जुड़े ढांचे (जैसे बिजली, पानी आदि) पर भी हुए। नए सुप्रीम लीडर मोजतबा खामेनेई के नेतृत्व में सरकार पहले से ज्यादा सख्त नजर आ रही है और किसी भी विरोध को कुचलने का मैसेज दे रही है। इससे पहले दिसंबर और जनवरी में हुए प्रदर्शनों के दौरान भी हजारों लोग मारे गए थे। साथ ही देश अर्थव्यवस्था भी बुरी तरह प्रभावित हुई है। जिससे नौकरियां जा रही हैं और गरीबी बढ़ रही है। लेबनान में भी भारी तबाही लेबनान के लोग कई दशकों से हिजबुल्लाह और इजराइल के बीच चल रहे संघर्ष में फंसे हुए हैं। फरवरी तक एक नाजुक सीजफायर बना हुआ था, लेकिन हालात तब बिगड़ गए जब इजराइल ने ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई को मार दिया। इसके बाद हिजबुल्लाह ने इजराइल पर हमले शुरू कर दिए। जवाब में इजराइल ने लेबनान पर जोरदार एयरस्ट्राइक और जमीनी कार्रवाई शुरू की, जिसका मकसद हिजबुल्लाह को खत्म करना बताया गया। लेबनान के स्वास्थ्य मंत्रालय के मुताबिक, 2 मार्च से अब तक इन हमलों में 2500 से ज्यादा लोग मारे जा चुके हैं। सैटेलाइट तस्वीरों से सामने आया है कि इजराइल वही रणनीति अपना रहा है, जो उसने पहले गाजा में अपनाई थी। यानी पूरे के पूरे गांवों को तबाह करना। हालात इतने खराब हैं कि दक्षिणी लेबनान से करीब 6 लाख लोग अपने घर छोड़ने पर मजबूर हो गए हैं। इजराइल ने साफ कहा है कि जब तक हिजबुल्लाह से उत्तरी इजराइल को खतरा खत्म नहीं होता, तब तक इन लोगों को वापस घर लौटने नहीं दिया जाएगा। खाड़ी देशों की अर्थव्यवस्था पर असर खाड़ी के कई देश भी इस जंग की चपेट में आ गए हैं। सबसे ज्यादा असर UAE पर पड़ा है। यहां ईरान ने सबसे ज्यादा मिसाइल और ड्रोन हमले किए। हालांकि ज्यादातर हमले रोक दिए गए, लेकिन भारी नुकसान हुआ है और इससे UAE की एक बड़े बिजनेस और टूरिज्म हब वाली छवि को झटका लगा है। वहीं, ईरान द्वारा होर्मुज स्ट्रेट को बंद करने से इराक, कतर और कुवैत की अर्थव्यवस्था पर बुरा असर पड़ा है। ये देश अपने तेल, गैस और दूसरे सामान की सप्लाई के लिए इसी रास्ते पर निर्भर हैं। इंटरनेशनल मॉनेटरी फंड (IMF) ने भी इन देशों की आर्थिक ग्रोथ के अनुमान घटा दिए हैं और माना है कि इस साल इराक, कतर और कुवैत की अर्थव्यवस्था सिकुड़ सकती है। अमेरिका में महंगाई, आम अमेरिकयों पर असर इस जंग का असर आम अमेरिकियों की जेब पर साफ दिख रहा है। पेट्रोल, हवाई टिकट और कई सर्विसेज महंगी हो गई हैं, क्योंकि कंपनियां अब कीमतों में फ्यूल सरचार्ज जोड़ रही हैं। महंगाई दर फरवरी के 2.4% से बढ़कर मार्च में 3.3% हो गई है, और लोगों का भरोसा (कंज्यूमर सेंटिमेंट) तेजी से गिर रहा है। ब्रुकिंग्स इंस्टीट्यूट के मुताबिक, अमेरिका की अर्थव्यवस्था काफी हद तक तेल पर निर्भर है। वहीं, रिन्यूएबल एनर्जी (जैसे सोलर, विंड) में निवेश अभी भी कम है और यही अब कमजोरी बन रही है। चीन और रूस को इस जंग से फायदा चीन इस जंग से अपेक्षाकृत मजबूत स्थिति में दिख रहा है। चीन ने पहले ही तेल के भंडार जोड़ रखे थे और वैकल्पिक ऊर्जा पर भी कई दशकों पहले से ध्यान दे रहा था। साथ ही, अमेरिका की छवि कमजोर होने से उसे कूटनीतिक फायदा मिला है। चीन की तेल और गैस कंपनियां भी मुनाफा कमा रही हैं। CNN के मुताबिक, 6 बड़ी कंपनियां इस साल 94 अरब डॉलर तक का फायदा कमा सकती हैं। इसके अलावा इस जंग से रूस की अर्थव्यवस्था को फायदा मिलता दिख रहा है। तेल और खाद की ऊंची कीमतों की वजह से रूस की कमाई बढ़ी है। साथ ही जब तेल की कीमतें तेजी से बढ़ रही थीं, तब अमेरिका ने समुद्र में मौजूद रूसी तेल पर कुछ समय के लिए पाबंदियां ढीली कर दीं, जिससे सप्लाई बढ़ सके, इससे रूस को और फायदा हुआ। अंतर्राष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी (IEA) के मुताबिक, मार्च में रूस की एनर्जी कमाई करीब दोगुनी होकर 19 अरब डॉलर पहुंच गई, जो फरवरी में 9.75 अरब डॉलर थी। ग्लोबल ग्रोथ रेट 3.3% से घटकर 3.1% हुआ इस जंग का असर अब पूरी दुनिया के आम लोगों की जेब पर दिखने लगा है। IMF ने ग्लोबल ग्रोथ का अनुमान भी घटा दिया है। अब इस साल दुनिया की अर्थव्यवस्था 3.1% की दर से बढ़ने की उम्मीद है, जबकि जनवरी में ये अनुमान 3.3% था। खाद की कीमतों में भी तेज बढ़ोतरी हुई है। जिन देशों में लोग खेती पर ज्यादा निर्भर हैं और अपनी कमाई का बड़ा हिस्सा खाने पर खर्च करते हैं, उन्हें इस महंगाई का असर सीधे और ज्यादा पड़ता है। जंग की स्थिति पर ट्रम्प की लोकप्रियता गिरी डोनाल्ड ट्रम्प के लिए यह जंग एक बड़ा दांव था। उन्होंने इसे जल्दी खत्म करने का वादा किया था, लेकिन अब तक न तो ईरान झुका है और न ही जंग खत्म हुई है। CNN के पोल में सामने आया, उनकी लोकप्रियता भी घटकर 37% रह गई है। इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू को शुरुआत में रणनीतिक फायदा मिला, लेकिन अब वहां भी लोग मानते हैं कि जंग में जीत साफ नहीं है। ईरान की सत्ता को भी नुकसान हुआ है, लेकिन नई लीडरशिप और ज्यादा आक्रामक दिख रही है। साथ ही, होर्मुज स्ट्रेट पर नियंत्रण दिखाकर से ईरान ने वैश्विक दबाव बनाने की क्षमता दिखाई है।

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