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ब्रिटिश किंग चार्ल्स ने ट्रम्प पर तंज कसा:अगर हम न होते तो आप फ्रेंच बोल रहे होते, 250 साल पुराने इतिहास की याद दिलाई

ब्रिटिश किंग चार्ल्स ने ट्रम्प पर तंज कसा:अगर हम न होते तो आप फ्रेंच बोल रहे होते, 250 साल पुराने इतिहास की याद दिलाई

किंग चार्ल्स तृतीय ने मंगलवार को व्हाइट हाउस में स्टेट डिनर के दौरान डोनाल्ड ट्रम्प पर हल्के-फुल्के अंदाज में तंज कसा। उन्होंने कहा कि अगर ब्रिटिश न होते, तो आज अमेरिकी लोग फ्रेंच बोल रहे होते। किंग चार्ल्स ने ट्रम्प के उस पुराने बयान का जिक्र किया, जिसमें ट्रम्प ने यूरोपीय देशों पर आरोप लगाया था कि वे दूसरे विश्व युद्ध के बाद सुरक्षा के मामले में अमेरिका पर निर्भर रहे। चार्ल्स ने कहा, “आपने हाल ही में कहा था कि अगर अमेरिका नहीं होता, तो यूरोपीय देश जर्मन बोल रहे होते। तो मैं यह कहने की हिम्मत करता हूं कि अगर हम (ब्रिटिश) नहीं होते, तो आप लोग फ्रेंच बोल रहे होते।” किंग चार्ल्स का इशारा उत्तरी अमेरिका के उन इलाकों की तरफ था, जहां कभी ब्रिटेन और फ्रांस के बीच कब्जे को लेकर संघर्ष हुआ था। यह लड़ाई अमेरिका की आजादी से करीब 250 साल पहले हुई थी। इसमें ब्रिटेन की जीत हुई थी। ट्रम्प ने दावोस समिट में यूरोपीय देशों पर तंज कसा था इससे पहले जनवरी में दावोस समिट के दौरान डोनाल्ड ट्रम्प ने यूरोपीय देशों और उनके सहयोग को लेकर एक बयान दिया था। ट्रम्प ने कहा था कि दूसरे विश्व युद्ध में अगर अमेरिका ने बड़ी भूमिका न निभाई होती, तो आज यूरोप का नक्शा और वहां की भाषा दोनों अलग होते। उनके मुताबिक, उस समय जर्मनी और जापान काफी ताकतवर थे और अगर उन्हें रोका नहीं जाता, तो वे कई देशों पर कब्जा कर सकते थे। इसी संदर्भ में उन्होंने कहा कि “अगर अमेरिका मदद के लिए नहीं आता, तो आज आप लोग जर्मन और थोड़ा जापानी बोल रहे होते।” इस बयान के जरिए ट्रम्प यह बताना चाहते थे कि अमेरिका ने युद्ध में निर्णायक भूमिका निभाई थी और यूरोप की आजादी बनाए रखने में बड़ा योगदान दिया था। साथ ही, वह यह भी संकेत दे रहे थे कि आज भी यूरोप अपनी सुरक्षा के लिए काफी हद तक अमेरिका पर निर्भर है। चार्ल्स ने व्हाइट हाउस जलाने का किस्सा भी याद दिलाया किंग चार्ल्स ने व्हाइट हाउस में हुए बदलावों पर भी ट्रम्प पर चुटकी ली। उन्होंने कहा कि ईस्ट विंग में बहुत ‘रीएडजस्टमेंट’ हो रहे हैं। ट्रम्प ने 400 मिलियन डॉलर का बड़ा बॉलरूम बनाने के लिए पुराने हिस्से को गिरा दिया है। इस पर चार्ल्स ने हंसते हुए कहा, “हमने भी 1814 में व्हाइट हाउस के रियल एस्टेट डेवलपमेंट की अपनी कोशिश की थी।” असल में वह 1814 की घटना याद दिला रहे थे जब ब्रिटिश सैनिकों ने व्हाइट हाउस को आग लगा दी थी। किंग चार्ल्स इतने पर ही नहीं रुके। उन्होंने मजाक में यह भी कहा कि आज का डिनर ‘बोस्टन टी पार्टी’ से काफी बेहतर है। बोस्टन टी पार्टी 16 दिसंबर 1773 को हुई थी। उस समय अमेरिका, ब्रिटेन का उपनिवेश था। ब्रिटेन ने वहां के लोगों पर कई टैक्स लगाए थे, खासकर चाय पर। इससे नाराज होकर लोगों ने समुद्र में चाय फेंक दी थी। यह घटना अमेरिका की आजादी की लड़ाई की शुरुआत की बड़ी वजहों में से एक मानी जाती है। ट्रम्प बोले- चार्ल्स ने वो किया जो मैं नहीं कर पाया जब ट्रम्प के बोलने की बारी आई तो उन्होंने चार्ल्स की तारीफ की और कहा कि उन्होंने संसद में शानदार भाषण दिया। उन्होंने मजाक में यह भी कहा कि चार्ल्स ने डेमोक्रेट्स को भी खड़ा कर दिया, जो वह खुद कभी नहीं कर पाए। दरअसल, अमेरिका में दो बड़ी पार्टियां हैं। रिपब्लिकन (ट्रम्प की) और डेमोक्रेट्स (विपक्ष)। आमतौर पर डेमोक्रेट्स, ट्रम्प की बातों से सहमत नहीं होते, इसलिए उनके लिए खड़े होकर तालियां नहीं बजाते। लेकिन चार्ल्स के भाषण पर डेमोक्रेट्स ने भी खड़े होकर तालियां बजाईं। किंग चार्ल्स अपने साथ एक तोहफा भी लाए। यह ब्रिटेन की तरफ से ट्रम्प के लिए एक तरह की कूटनीतिक पहल मानी जा रही है, खासकर तब जब ट्रम्प ने ईरान मुद्दे पर ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर की आलोचना की थी। चार्ल्स ने ट्रम्प को ब्रिटिश पनडुब्बी HMS की घंटी भेंट की। यह पनडुब्बी 1944 में दूसरे विश्व युद्ध के दौरान लॉन्च हुई थी। तोहफा देते हुए चार्ल्स ने कहा कि यह हमारी साझा इतिहास और उज्ज्वल भविष्य का प्रतीक बने। साथ ही हंसते हुए कहा, “अगर कभी हमें बुलाना हो, तो बस घंटी बजा दीजिए।” चार्ल्स का किंग बनने के बाद पहला अमेरिका दौरा किंग चार्ल्स ने ट्रम्प की मेहमाननवाजी के लिए धन्यवाद भी दिया और बताया कि यह उनका अमेरिका का 20वां दौरा है, लेकिन पहली बार वे राजा के रूप में आए हैं। यह दौरा ऐसे समय में हुआ जब ब्रिटेन और अमेरिका के बीच कुछ तनाव भी रहा है। खासकर ईरान पर अमेरिका-इजराइल हमले को लेकर, जिसमें ब्रिटेन की लेबर सरकार शामिल नहीं हुई। इसके बाद ट्रम्प ने ब्रिटेन के प्रधानमंत्री की आलोचना भी की थी।
ट्रम्प ने ईरान का मुद्दा उठाया ट्रम्प ने ईरान का मुद्दा उठाते हुए कहा कि वे और चार्ल्स दोनों इस बात से सहमत हैं कि ईरान को परमाणु हथियार नहीं मिलना चाहिए। इससे पहले चार्ल्स ने अमेरिकी संसद में अपने संबोधन में लोकतंत्र की तारीफ की थी। उन्होंने कहा कि सत्ता (पावर) एक ही व्यक्ति के पास नहीं होनी चाहिए, बल्कि अलग-अलग हिस्सों में बंटी होनी चाहिए। उनका मतलब यह था कि अमेरिका पहले ब्रिटेन के राजा के अधीन था। फिर आजादी के बाद उसने ऐसा सिस्टम बनाया, जिसमें कोई राजा नहीं होता और सत्ता बांट दी जाती है ताकि तानाशाही न हो। अमेरिका में सरकार तीन हिस्सों में बंटी होती है। राष्ट्रपति, संसद (कांग्रेस) और अदालत। चार्ल्स ने कहा कि 250 साल पहले जो मतभेद थे, अब उनकी जगह एक मजबूत दोस्ती ने ले ली है, जो दुनिया के सबसे अहम गठबंधनों में से एक बन चुकी है।

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ब्रिटिश किंग चार्ल्स ने ट्रम्प पर तंज कसा:अगर हम न होते तो आप फ्रेंच बोल रहे होते, 250 साल पुराने इतिहास की याद दिलाई

ब्रिटिश किंग चार्ल्स ने ट्रम्प पर तंज कसा:अगर हम न होते तो आप फ्रेंच बोल रहे होते, 250 साल पुराने इतिहास की याद दिलाई

किंग चार्ल्स तृतीय ने मंगलवार को व्हाइट हाउस में स्टेट डिनर के दौरान डोनाल्ड ट्रम्प पर हल्के-फुल्के अंदाज में तंज कसा। उन्होंने कहा कि अगर ब्रिटिश न होते, तो आज अमेरिकी लोग फ्रेंच बोल रहे होते। किंग चार्ल्स ने ट्रम्प के उस पुराने बयान का जिक्र किया, जिसमें ट्रम्प ने यूरोपीय देशों पर आरोप लगाया था कि वे दूसरे विश्व युद्ध के बाद सुरक्षा के मामले में अमेरिका पर निर्भर रहे। चार्ल्स ने कहा, “आपने हाल ही में कहा था कि अगर अमेरिका नहीं होता, तो यूरोपीय देश जर्मन बोल रहे होते। तो मैं यह कहने की हिम्मत करता हूं कि अगर हम (ब्रिटिश) नहीं होते, तो आप लोग फ्रेंच बोल रहे होते।” किंग चार्ल्स का इशारा उत्तरी अमेरिका के उन इलाकों की तरफ था, जहां कभी ब्रिटेन और फ्रांस के बीच कब्जे को लेकर संघर्ष हुआ था। यह लड़ाई अमेरिका की आजादी से करीब 250 साल पहले हुई थी। इसमें ब्रिटेन की जीत हुई थी। ट्रम्प ने दावोस समिट में यूरोपीय देशों पर तंज कसा था इससे पहले जनवरी में दावोस समिट के दौरान डोनाल्ड ट्रम्प ने यूरोपीय देशों और उनके सहयोग को लेकर एक बयान दिया था। ट्रम्प ने कहा था कि दूसरे विश्व युद्ध में अगर अमेरिका ने बड़ी भूमिका न निभाई होती, तो आज यूरोप का नक्शा और वहां की भाषा दोनों अलग होते। उनके मुताबिक, उस समय जर्मनी और जापान काफी ताकतवर थे और अगर उन्हें रोका नहीं जाता, तो वे कई देशों पर कब्जा कर सकते थे। इसी संदर्भ में उन्होंने कहा कि “अगर अमेरिका मदद के लिए नहीं आता, तो आज आप लोग जर्मन और थोड़ा जापानी बोल रहे होते।” इस बयान के जरिए ट्रम्प यह बताना चाहते थे कि अमेरिका ने युद्ध में निर्णायक भूमिका निभाई थी और यूरोप की आजादी बनाए रखने में बड़ा योगदान दिया था। साथ ही, वह यह भी संकेत दे रहे थे कि आज भी यूरोप अपनी सुरक्षा के लिए काफी हद तक अमेरिका पर निर्भर है। चार्ल्स ने व्हाइट हाउस जलाने का किस्सा भी याद दिलाया किंग चार्ल्स ने व्हाइट हाउस में हुए बदलावों पर भी ट्रम्प पर चुटकी ली। उन्होंने कहा कि ईस्ट विंग में बहुत ‘रीएडजस्टमेंट’ हो रहे हैं। ट्रम्प ने 400 मिलियन डॉलर का बड़ा बॉलरूम बनाने के लिए पुराने हिस्से को गिरा दिया है। इस पर चार्ल्स ने हंसते हुए कहा, “हमने भी 1814 में व्हाइट हाउस के रियल एस्टेट डेवलपमेंट की अपनी कोशिश की थी।” असल में वह 1814 की घटना याद दिला रहे थे जब ब्रिटिश सैनिकों ने व्हाइट हाउस को आग लगा दी थी। किंग चार्ल्स इतने पर ही नहीं रुके। उन्होंने मजाक में यह भी कहा कि आज का डिनर ‘बोस्टन टी पार्टी’ से काफी बेहतर है। बोस्टन टी पार्टी 16 दिसंबर 1773 को हुई थी। उस समय अमेरिका, ब्रिटेन का उपनिवेश था। ब्रिटेन ने वहां के लोगों पर कई टैक्स लगाए थे, खासकर चाय पर। इससे नाराज होकर लोगों ने समुद्र में चाय फेंक दी थी। यह घटना अमेरिका की आजादी की लड़ाई की शुरुआत की बड़ी वजहों में से एक मानी जाती है। ट्रम्प बोले- चार्ल्स ने वो किया जो मैं नहीं कर पाया जब ट्रम्प के बोलने की बारी आई तो उन्होंने चार्ल्स की तारीफ की और कहा कि उन्होंने संसद में शानदार भाषण दिया। उन्होंने मजाक में यह भी कहा कि चार्ल्स ने डेमोक्रेट्स को भी खड़ा कर दिया, जो वह खुद कभी नहीं कर पाए। दरअसल, अमेरिका में दो बड़ी पार्टियां हैं। रिपब्लिकन (ट्रम्प की) और डेमोक्रेट्स (विपक्ष)। आमतौर पर डेमोक्रेट्स, ट्रम्प की बातों से सहमत नहीं होते, इसलिए उनके लिए खड़े होकर तालियां नहीं बजाते। लेकिन चार्ल्स के भाषण पर डेमोक्रेट्स ने भी खड़े होकर तालियां बजाईं। किंग चार्ल्स अपने साथ एक तोहफा भी लाए। यह ब्रिटेन की तरफ से ट्रम्प के लिए एक तरह की कूटनीतिक पहल मानी जा रही है, खासकर तब जब ट्रम्प ने ईरान मुद्दे पर ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर की आलोचना की थी। चार्ल्स ने ट्रम्प को ब्रिटिश पनडुब्बी HMS की घंटी भेंट की। यह पनडुब्बी 1944 में दूसरे विश्व युद्ध के दौरान लॉन्च हुई थी। तोहफा देते हुए चार्ल्स ने कहा कि यह हमारी साझा इतिहास और उज्ज्वल भविष्य का प्रतीक बने। साथ ही हंसते हुए कहा, “अगर कभी हमें बुलाना हो, तो बस घंटी बजा दीजिए।” चार्ल्स का किंग बनने के बाद पहला अमेरिका दौरा किंग चार्ल्स ने ट्रम्प की मेहमाननवाजी के लिए धन्यवाद भी दिया और बताया कि यह उनका अमेरिका का 20वां दौरा है, लेकिन पहली बार वे राजा के रूप में आए हैं। यह दौरा ऐसे समय में हुआ जब ब्रिटेन और अमेरिका के बीच कुछ तनाव भी रहा है। खासकर ईरान पर अमेरिका-इजराइल हमले को लेकर, जिसमें ब्रिटेन की लेबर सरकार शामिल नहीं हुई। इसके बाद ट्रम्प ने ब्रिटेन के प्रधानमंत्री की आलोचना भी की थी।
ट्रम्प ने ईरान का मुद्दा उठाया ट्रम्प ने ईरान का मुद्दा उठाते हुए कहा कि वे और चार्ल्स दोनों इस बात से सहमत हैं कि ईरान को परमाणु हथियार नहीं मिलना चाहिए। इससे पहले चार्ल्स ने अमेरिकी संसद में अपने संबोधन में लोकतंत्र की तारीफ की थी। उन्होंने कहा कि सत्ता (पावर) एक ही व्यक्ति के पास नहीं होनी चाहिए, बल्कि अलग-अलग हिस्सों में बंटी होनी चाहिए। उनका मतलब यह था कि अमेरिका पहले ब्रिटेन के राजा के अधीन था। फिर आजादी के बाद उसने ऐसा सिस्टम बनाया, जिसमें कोई राजा नहीं होता और सत्ता बांट दी जाती है ताकि तानाशाही न हो। अमेरिका में सरकार तीन हिस्सों में बंटी होती है। राष्ट्रपति, संसद (कांग्रेस) और अदालत। चार्ल्स ने कहा कि 250 साल पहले जो मतभेद थे, अब उनकी जगह एक मजबूत दोस्ती ने ले ली है, जो दुनिया के सबसे अहम गठबंधनों में से एक बन चुकी है।

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