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Sambhal Honor Killing| Love Affair Crime Story| Muslim Girl Hindu Boy Love Story

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संभल: उत्तर प्रदेश के संभल जिले के मतावली पट्टी जग्गू गांव की गलियों में आज सन्नाटा है, लेकिन हवाओं में एक बेबस चीख और एक पिता के पत्थर दिल बयानों की गूंज है. यह कहानी 18 साल की रूपजहां और शिवम सैनी के उस अधूरे इश्क की है, जिसका अंत निकाह के मंडप में नहीं, बल्कि श्मशान और कब्रिस्तान के बीच नफरत की भेंट चढ़ गया. एक तरफ वो प्रेमी था जिसके साथ रूपजहां ने सात जन्मों के वादे किए थे, और दूसरी तरफ वो सगा भाई था जिसके हाथों में बहन की सुरक्षा की डोर होनी चाहिए थी, लेकिन उसने उसी दुपट्टे से रूपजहां का दम घोंट दिया जिसे वह अपनी शान समझती थी. दरअसल, भाई ने अपनी सगी बहन का गला महज इसलिए घोंट दिया क्योंकि वह एक दूसरे मजहब के लड़के से मोहब्बत करने की ‘खता’ कर बैठी थी.

चारपाई पर बिछी लाश और पिता की बेखौफ बातें
गुरुवार की रात करीब 11 बजे जब संभल के एसएसपी कुलदीप सिंह मतावली पट्टी गांव पहुंचे, तो मंजर रूह कंपा देने वाला था. घर के आंगन में बिछी एक चारपाई पर 18 साल की रूपजहां का बेजान शरीर पड़ा था. उसी घर के एक कोने में खड़ा उसका भाई जाने आलम और पिता नौशे आलम पुलिस को देख जरा भी विचलित नहीं थे. जाने आलम ने खुद पुलिस को फोन कर कहा था,

साहब, मैंने अपनी बहन को मार डाला है, आकर मुझे ले जाओ.

हैरानी की बात पुलिस के लिए यह नहीं थी कि हत्या हुई है, बल्कि हैरानी इस बात पर थी कि पिता नौशे के चेहरे पर न तो बेटी को खोने का गम था और न ही बेटे के जेल जाने का डर. नौशे ने कैमरे के सामने खड़े होकर जो कहा, वह समाज के उस काले चेहरे को उजागर करता है जिसे ‘ऑनर किलिंग’ कहा जाता है.

पिता का कबूलनामा, ‘वो जिद पर अड़ी थी, मारना ही सही था’
नौशे आलम की बातों में नफरत और कट्टरता का मिला-जुला स्वर था. उसने दोटूक शब्दों में कहा,

मेरी बेटी शिवम सैनी नाम के लड़के से प्यार करती थी. वह उससे शादी करना चाहती थी और वह उसके साथ भाग गई थी. गांववाले मेरा मजाक उड़ा रहे थे, गलियों से गुजरना मुश्किल हो गया था. मैं परेशान था. दो दिन पहले वह शिवम के साथ भाग गई थी. हमने उसे समझाने की कोशिश की, लेकिन वह नहीं मानी.

नौशे आगे कहता है,

हम मुसलमान हैं. बेटी का प्रेमी सैनी (हिंदू) है. हम ऐसी शादी कैसे कर देते? अगर हमारी बिरादरी में शादी की बात होती, तो हम करा देते. जब वह घर आई और फिर से उसी के पास जाने की जिद करने लगी, तो मेरे बेटे ने दुपट्टे से उसका गला घोंट दिया. मुझे कोई पछतावा नहीं है. ऐसी लड़की को मारना ही सही है, इससे घर की इज्जत बच गई.

‘प्रधान ने मांगी घूस, पुलिस कराना चाहती थी फेरे’: चाचा का आरोप
इस पूरी साजिश में एक और सनसनीखेज पहलू सामने आया है रुपयों का लेनदेन. रूपजहां के चाचा दुलारे हुसैन ने ऑन-कैमरा बताया कि इस पूरी वारदात के पीछे गांव के प्रधान और पुलिस की भूमिका भी संदेह के घेरे में है. दुलारे के मुताबिक, जब रूपजहां और शिवम थाने पहुंचे थे, तो वहां पंचायत हुई. चाचा दुलारे ने बताया,

थाने के एसओ साहब दोनों के फेरे कराने को तैयार थे. उन्होंने कहा था कि लड़की बालिग है. उन्होंने हमसे अंगूठा लगवाने को कहा, तो हम वहां से भाग आए. इसके बाद प्रधान लेखराज ने बीच-बचाव किया और बेटी को वापस लाने के बदले 3 लाख रुपये मांगे. प्रधान ने कहा कि पुलिस और मामले को रफा-दफा करने के लिए पैसे लगेंगे. हमने किसी तरह 1.5 लाख रुपये दिए.

परिजनों का आरोप है कि पैसे देने के बाद वे बेटी को घर तो ले आए, लेकिन उसकी ‘आजादी’ छीनने के लिए. जब घर के भीतर बंद रूपजहां ने फिर से शिवम का नाम लिया, तो भाई जाने आलम का खून खौल उठा.

एक साल का इश्क और दो महीने पहले की गुप्त शादी
रूपजहां और शिवम सैनी का घर एक-दूसरे से महज 400 मीटर की दूरी पर है. पिछले एक साल से दोनों के बीच प्रेम प्रसंग चल रहा था. शिवम के परिवार को इस रिश्ते से ऐतराज नहीं था, लेकिन रूपजहां का परिवार इसे मजहबी चश्मे से देख रहा था. इधर, शिवम की मां हरप्यारी का रो-रोकर बुरा हाल है. उन्होंने पुलिस को एक ऐसा सच बताया जिसने इस केस की दिशा बदल दी.

हरप्यारी के मुताबिक,

मेरे बेटे और रूपजहां ने दो महीने पहले ही चोरी-छिपे शादी कर ली थी. वे एक-दूसरे के हो चुके थे. रूपजहां हमारी बहू थी. बुधवार को जब वे घर से भागे थे, तो वे अपनी सुरक्षा की गुहार लगाने थाने गए थे.

हरप्यारी ने ही अपनी ‘बहू’ की हत्या के आरोप में रूपजहां के भाई जाने आलम के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया है. अब पुलिस इस मामले को एक पत्नी की हत्या के नजरिए से भी देख रही है.

साजिश के तहत बुलाई गई मौत, अमरोहा से घर तक का सफर
बुधवार को जब रूपजहां और शिवम थाने पहुंचे, तो पुलिस ने उन्हें बालिग होने के नाते साथ रहने की अनुमति दे दी थी. शिवम सुरक्षा के लिहाज से रूपजहां को लेकर अमरोहा में अपनी एक रिश्तेदारी में चला गया था. उसे लगा था कि वह सुरक्षित है. लेकिन घर पर पिता और भाई ने उसे वापस लाने का जाल बुना.

प्रधान की मदद से उसे ‘सब ठीक हो जाएगा’ का झांसा देकर घर बुलाया गया. गुरुवार की शाम जब रूपजहां अपने घर की दहलीज पर कदम रखी, उसे नहीं पता था कि यह उसका आखिरी सफर है. रात करीब 10:30 बजे, जब परिवार के अन्य सदस्य एक शादी में गए हुए थे (जैसा कि कुछ रिपोर्ट में दावा है), घर में सिर्फ जाने आलम और रूपजहां थे. इसी दौरान विवाद हुआ और जाने आलम ने दुपट्टे का फंदा बनाकर अपनी बहन की जीवनलीला समाप्त कर दी.

इस घटना ने खड़े किए कई कड़वे सवाल
इस हत्या के मामले में केस दर्ज हो चुका है. लेकिन इस घटना ने समाज के सामने कई कड़वे सवाल खड़े कर दिए हैं.

  1. क्या ‘मजहब’ किसी की जान से बढ़कर है?
  2. अगर पुलिस ने सुरक्षा का वादा किया था, तो रूपजहां को वापस उसी ‘खतरनाक’ घर में क्यों जाने दिया गया?
  3. क्या प्रधान ने वाकई 1.5 लाख रुपये लेकर एक लड़की की जिंदगी का सौदा किया?
  4. पिता और चाचा के बयानों में जो नफरत दिख रही है, क्या वह हमारे समाज के बदलते चेहरे की हकीकत है?

पुलिस ने भाई को किया गिरफ्तार
एसपी कृष्ण विश्नोई ने बताया कि आरोपी भाई जाने आलम को गिरफ्तार कर लिया गया है. प्रेमी शिवम की मां की तहरीर पर हत्या का मामला दर्ज किया गया है. पुलिस अब उस एंगल की भी जांच कर रही है जिसमें 1.5 लाख रुपये के लेनदेन और प्रधान की भूमिका का जिक्र है. मतावली पट्टी गांव में आज खौफ और सन्नाटा है. रूपजहां का घर बंद है और परिवार के अन्य सदस्य फरार हैं.

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चारपाई पर बिछी लाश और पिता की बेखौफ बातें
गुरुवार की रात करीब 11 बजे जब संभल के एसएसपी कुलदीप सिंह मतावली पट्टी गांव पहुंचे, तो मंजर रूह कंपा देने वाला था. घर के आंगन में बिछी एक चारपाई पर 18 साल की रूपजहां का बेजान शरीर पड़ा था. उसी घर के एक कोने में खड़ा उसका भाई जाने आलम और पिता नौशे आलम पुलिस को देख जरा भी विचलित नहीं थे. जाने आलम ने खुद पुलिस को फोन कर कहा था,

साहब, मैंने अपनी बहन को मार डाला है, आकर मुझे ले जाओ.

हैरानी की बात पुलिस के लिए यह नहीं थी कि हत्या हुई है, बल्कि हैरानी इस बात पर थी कि पिता नौशे के चेहरे पर न तो बेटी को खोने का गम था और न ही बेटे के जेल जाने का डर. नौशे ने कैमरे के सामने खड़े होकर जो कहा, वह समाज के उस काले चेहरे को उजागर करता है जिसे ‘ऑनर किलिंग’ कहा जाता है.

पिता का कबूलनामा, ‘वो जिद पर अड़ी थी, मारना ही सही था’
नौशे आलम की बातों में नफरत और कट्टरता का मिला-जुला स्वर था. उसने दोटूक शब्दों में कहा,

मेरी बेटी शिवम सैनी नाम के लड़के से प्यार करती थी. वह उससे शादी करना चाहती थी और वह उसके साथ भाग गई थी. गांववाले मेरा मजाक उड़ा रहे थे, गलियों से गुजरना मुश्किल हो गया था. मैं परेशान था. दो दिन पहले वह शिवम के साथ भाग गई थी. हमने उसे समझाने की कोशिश की, लेकिन वह नहीं मानी.

नौशे आगे कहता है,

हम मुसलमान हैं. बेटी का प्रेमी सैनी (हिंदू) है. हम ऐसी शादी कैसे कर देते? अगर हमारी बिरादरी में शादी की बात होती, तो हम करा देते. जब वह घर आई और फिर से उसी के पास जाने की जिद करने लगी, तो मेरे बेटे ने दुपट्टे से उसका गला घोंट दिया. मुझे कोई पछतावा नहीं है. ऐसी लड़की को मारना ही सही है, इससे घर की इज्जत बच गई.

‘प्रधान ने मांगी घूस, पुलिस कराना चाहती थी फेरे’: चाचा का आरोप
इस पूरी साजिश में एक और सनसनीखेज पहलू सामने आया है रुपयों का लेनदेन. रूपजहां के चाचा दुलारे हुसैन ने ऑन-कैमरा बताया कि इस पूरी वारदात के पीछे गांव के प्रधान और पुलिस की भूमिका भी संदेह के घेरे में है. दुलारे के मुताबिक, जब रूपजहां और शिवम थाने पहुंचे थे, तो वहां पंचायत हुई. चाचा दुलारे ने बताया,

थाने के एसओ साहब दोनों के फेरे कराने को तैयार थे. उन्होंने कहा था कि लड़की बालिग है. उन्होंने हमसे अंगूठा लगवाने को कहा, तो हम वहां से भाग आए. इसके बाद प्रधान लेखराज ने बीच-बचाव किया और बेटी को वापस लाने के बदले 3 लाख रुपये मांगे. प्रधान ने कहा कि पुलिस और मामले को रफा-दफा करने के लिए पैसे लगेंगे. हमने किसी तरह 1.5 लाख रुपये दिए.

परिजनों का आरोप है कि पैसे देने के बाद वे बेटी को घर तो ले आए, लेकिन उसकी ‘आजादी’ छीनने के लिए. जब घर के भीतर बंद रूपजहां ने फिर से शिवम का नाम लिया, तो भाई जाने आलम का खून खौल उठा.

एक साल का इश्क और दो महीने पहले की गुप्त शादी
रूपजहां और शिवम सैनी का घर एक-दूसरे से महज 400 मीटर की दूरी पर है. पिछले एक साल से दोनों के बीच प्रेम प्रसंग चल रहा था. शिवम के परिवार को इस रिश्ते से ऐतराज नहीं था, लेकिन रूपजहां का परिवार इसे मजहबी चश्मे से देख रहा था. इधर, शिवम की मां हरप्यारी का रो-रोकर बुरा हाल है. उन्होंने पुलिस को एक ऐसा सच बताया जिसने इस केस की दिशा बदल दी.

हरप्यारी के मुताबिक,

मेरे बेटे और रूपजहां ने दो महीने पहले ही चोरी-छिपे शादी कर ली थी. वे एक-दूसरे के हो चुके थे. रूपजहां हमारी बहू थी. बुधवार को जब वे घर से भागे थे, तो वे अपनी सुरक्षा की गुहार लगाने थाने गए थे.

हरप्यारी ने ही अपनी ‘बहू’ की हत्या के आरोप में रूपजहां के भाई जाने आलम के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया है. अब पुलिस इस मामले को एक पत्नी की हत्या के नजरिए से भी देख रही है.

साजिश के तहत बुलाई गई मौत, अमरोहा से घर तक का सफर
बुधवार को जब रूपजहां और शिवम थाने पहुंचे, तो पुलिस ने उन्हें बालिग होने के नाते साथ रहने की अनुमति दे दी थी. शिवम सुरक्षा के लिहाज से रूपजहां को लेकर अमरोहा में अपनी एक रिश्तेदारी में चला गया था. उसे लगा था कि वह सुरक्षित है. लेकिन घर पर पिता और भाई ने उसे वापस लाने का जाल बुना.

प्रधान की मदद से उसे ‘सब ठीक हो जाएगा’ का झांसा देकर घर बुलाया गया. गुरुवार की शाम जब रूपजहां अपने घर की दहलीज पर कदम रखी, उसे नहीं पता था कि यह उसका आखिरी सफर है. रात करीब 10:30 बजे, जब परिवार के अन्य सदस्य एक शादी में गए हुए थे (जैसा कि कुछ रिपोर्ट में दावा है), घर में सिर्फ जाने आलम और रूपजहां थे. इसी दौरान विवाद हुआ और जाने आलम ने दुपट्टे का फंदा बनाकर अपनी बहन की जीवनलीला समाप्त कर दी.

इस घटना ने खड़े किए कई कड़वे सवाल
इस हत्या के मामले में केस दर्ज हो चुका है. लेकिन इस घटना ने समाज के सामने कई कड़वे सवाल खड़े कर दिए हैं.

  1. क्या ‘मजहब’ किसी की जान से बढ़कर है?
  2. अगर पुलिस ने सुरक्षा का वादा किया था, तो रूपजहां को वापस उसी ‘खतरनाक’ घर में क्यों जाने दिया गया?
  3. क्या प्रधान ने वाकई 1.5 लाख रुपये लेकर एक लड़की की जिंदगी का सौदा किया?
  4. पिता और चाचा के बयानों में जो नफरत दिख रही है, क्या वह हमारे समाज के बदलते चेहरे की हकीकत है?

पुलिस ने भाई को किया गिरफ्तार
एसपी कृष्ण विश्नोई ने बताया कि आरोपी भाई जाने आलम को गिरफ्तार कर लिया गया है. प्रेमी शिवम की मां की तहरीर पर हत्या का मामला दर्ज किया गया है. पुलिस अब उस एंगल की भी जांच कर रही है जिसमें 1.5 लाख रुपये के लेनदेन और प्रधान की भूमिका का जिक्र है. मतावली पट्टी गांव में आज खौफ और सन्नाटा है. रूपजहां का घर बंद है और परिवार के अन्य सदस्य फरार हैं.

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