Sunday, 03 May 2026 | 02:14 PM

Trending :

EXCLUSIVE

विंध्य के 9 जिलों में सिक्के नहीं चलते:भास्कर के स्टिंग में दुकानदार बोले-बैंक ही नहीं लेती; पंडित-पुरोहित ने कहा-एक रुपए का शगुन खत्म

विंध्य के 9 जिलों में सिक्के नहीं चलते:भास्कर के स्टिंग में दुकानदार बोले-बैंक ही नहीं लेती; पंडित-पुरोहित ने कहा-एक रुपए का शगुन खत्म

मध्य प्रदेश के रीवा, सीधी, सतना, शहडोल, सिंगरौली, उमरिया, मऊगंज, मैहर और अनूपपुर जिलों के दुकानदार RBI (भारतीय रिजर्व बैंक) द्वारा जारी सिक्के नहीं ले रहे हैं। ये स्थिति बीते करीब 5 साल से है। जिसके चलते सिक्के आर्थिक व्यवहार से बाहर हो गए हैं। मतलब साफ है कि विंध्य के इन 9 जिलों में RBI नहीं, दुकानदारों के अपने नियम चलते हैं। प्रशासन भी इन पर नकेल नहीं कस पा रहा है। सिक्के न लेने का कारण कोई भी दुकानदार खुलकर नहीं बताता इसलिए भास्कर रिपोर्टर ने स्टिंग ऑपरेशन किया। रिपोर्टर आम ग्राहक बनकर दुकानों पर पहुंचा और सिक्कों से भुगतान करने की कोशिश की, जिससे जमीनी सच्चाई सामने आ सके। पढ़िए, रिपोर्ट… पंडित-पुरोहितों ने भी किया इनकार भास्कर रिपोर्टर पेट्रोल पंप, मेडिकल स्टोर, डेयरी, फल, जूस और किराना स्टोर पर पहुंचा। सामान खरीदने के बदले में सिक्कों से भुगतान करने की कोशिश की, लेकिन हर जगह लगभग एक जैसा जवाब मिला- सिक्के नहीं लेंगे। यहां तक कि पंडित-पुरोहितों ने भी सिक्के लेने में रुचि नहीं दिखाई। दुकानदारों का कहना है कि ग्राहक सिक्के तो दे जाते हैं, लेकिन आगे उन्हें कोई स्वीकार नहीं करता, जिससे उनका पैसा फंस जाता है। बैंक भी बड़ी मात्रा में सिक्के जमा करने में आनाकानी करते हैं। 7 जगहों पर जांची सिक्कों की जमीनी हकीकत पेट्रोल पंप पर नोट लिए, सिक्का वापस किया भास्कर रिपोर्टर सबसे पहले विश्वविद्यालय सिरमौर रोड स्थित इंडियन ऑयल के पेट्रोल पंप पर पहुंचा। यहां उसने अपनी गाड़ी में 310 रुपए का पेट्रोल डलवाया। बदले में 300 रुपयों के नोट दिए और बाकी 10 रुपए का एक सिक्का दिया। पेट्रोल पंप कर्मी ने नोट तो रख लिए लेकिन सिक्के लेने से मना कर दिया। कहने लगा- भैया सिक्के मत दीजिएगा। जब उससे इसके पीछे का कारण पूछा गया तो बोला कि कई सालों से ऐसा ही चल रहा है। रिपोर्टर ने सिक्का देने की कोशिश की लेकिन उसके बाद भी वह नहीं माना। इसके बाद मजबूरी में 10 रुपए का नोट ही देना पड़ा। कोरोना के बाद से सिक्के नहीं ले रहे व्यापारी इसके बाद रिपोर्टर अनंतपुर में एक डेयरी पर पहुंचा। यहां उसने दही खरीदा। भुगतान करते हुए सिक्के देने चाहे तो दुकानदार ने लेने से साफ मना कर दिया। कहा कि कोरोनाकाल के बाद से यहां सिक्के नहीं चल रहे हैं। बातचीत में दुकानदार ने बड़े व्यापारियों को इसकी वजह बताया। बोला कि वो नहीं तो लेते हम क्यों लें? यहां से रिपोर्टर बजरंग नगर में एक फल और जूस की दुकान पर पहुंचा। दो गिलास आम का जूस खरीदा। 40 रुपए का बिल बना। रिपोर्टर ने 30 रुपए के नोट दिए, बाकी बचे 10 रुपए के सिक्के दिए। दुकानदार हैरान होकर बोला कि भैया, ये सिक्के यहां नहीं चलते। इसका कारण पूछा तो कोई ठोस जवाब नहीं मिला। दुकानदार ने यही कहा कि मैं क्या, कोई भी यहां सिक्के नहीं लेता। किराना स्टोर संचालक बोला- सिक्के काम के नहीं रिपोर्टर केके बाजार रोड स्थित एक किराना स्टोर पहुंचा। 60 रुपए का व्रत वाला सेंधा नमक खरीदा। इसके बाद में संचालक को सिक्के देकर टॉफी लेने की कोशिश की। दुकानदार से सिक्के लेने से मना कर दिया। कहने लगा कि भैया ये सिक्के निकालिए ही मत। किसी काम के नहीं हैं। जब उससे इसके पीछे की वजह पूछ तो ज्यादा कुछ नहीं बोला। बस इतना ही कहा- कई सालों से यही हाल है। मेडिकल संचालक बोला- मैं खुद बाहर जाकर चला रहा सिक्का चलाने की कोशिश करने रिपोर्टर दो मेडिकल स्टोर्स पर पहुंचा। सिरमौर चौराहे के मेडिकल स्टोर पर विक्स की गोलियां लीं, लेकिन सिक्के देने पर दुकानदार ने मना कर दिया। उसने कहा कि सिक्के चलते ही नहीं हैं। मैं खुद बाहर ले जाकर चलाता हूं। लाइफ केयर हॉस्पिटल के पास एक दूसरी मेडिकल स्टोर पर रिपोर्टर पहुंचा। ईनो और सिर दर्द की दवा खरीदी। यहां भी दुकानदार ने मुस्कुराते हुए कहा- भैया सिक्के नहीं चल पाएंगे, कोरोना काल से बंद हैं। जब उनसे कारण पूछा तो बताया लोग नहीं लेते, इसलिए मैं भी नहीं लेता। डिलीवरी बॉय ने भी नहीं लिए सिक्के स्टिंग ऑपरेशन के तहत रिपोर्टर ने फूड ऑर्डर किया। डिलीवरी बॉय जब ऑर्डर लेकर पहुंचा तो बिल का आंशिक रूप से भुगतान करने सिक्कों को देने की कोशिश की। डिलीवरी बॉय ने जैसे ही सिक्के देखे उसने तुरंत उन्हें लेने से मना कर दिया। उसने कहा- सर, सिक्के मैं नहीं ले पाऊंगा। कंपनी में जमा करने में दिक्कत होती है। वहां भी कोई नहीं लेता। सिक्के ले भी लेता हूं तो बाद में मुझे ही परेशानी होती है। इसलिए अब सीधे मना ही कर देता हूं। ऑटो ड्राइवर बोला- सिक्के चलाना मुश्किल सिक्के न लेने की वजह जानने के लिए भास्कर रिपोर्टर ने सिरमौर चौराहा से नए बस स्टैंड तक ऑटो से सफर किया। उतरते समय सिक्कों में भुगतान करने की कोशिश की तो ऑटो चालक ने हाथ खड़े कर दिए। उसने कहा- भैया सिक्के लेकर क्या करूंगा, कोई लेता ही नहीं है। पूछने पर उसने बताया कि दिनभर की कमाई में अगर सिक्के इकट्ठे हो जाएं तो उन्हें चलाना मुश्किल हो जाता है। मजबूरी में या तो छोटे दुकानदार ढूंढने पड़ते हैं या फिर नोट में ही लेनदेन करना पड़ता है। आखिरकार हमें नोट में ही किराया देना पड़ा। पंडित बोले- शगुन का धीरे-धीरे हो रहा खात्मा पंडित राजेश शास्त्री ने कहा- शुभ कार्यों में शगुन के तौर पर एक रुपए के सिक्के का विशेष महत्व होता था, लेकिन अब लोग नोट में ही पूरी राशि देने लगे हैं। पुरानी परंपरा धीरे-धीरे खत्म होती जा रही है। कियोस्क संचालक बोला- बैंक अस्वीकार कर देती है कियोस्क संचालक ने कहा- काफी ग्राहक सिक्के लेकर आते हैं, लेकिन इन्हें बैंक में आसानी से स्वीकार नहीं किया जाता। एक-दो बार ज्यादा मात्रा में सिक्के ले जाने पर घंटों लाइन में खड़ा रहना पड़ता है। कई बार वापस लौटा दिया जाता है। इसी वजह से अब मजबूरी में ग्राहकों से सिक्के लेने से मना करना पड़ता है। अगर बैंक स्तर पर सरल व्यवस्था हो जाए तो सिक्के लेने में कोई दिक्कत नहीं है। लोग बोले- बाजार में सिक्के चलाना समस्या बना स्थानीय निवासी अमित तिवारी ने कहा कि बाजार में सिक्के लेकर जाना समस्या बन चुका है। दुकानदार सीधे मना कर देते हैं, जिससे शर्मिंदगी उठानी होती है। कई बार छोटे भुगतान के लिए सिक्के ही होते हैं, लेकिन कोई लेने को तैयार नहीं होता। मजबूरी में नोट ही रखने पड़ते हैं। जब सरकार ने सिक्के जारी किए हैं तो उन्हें हर जगह स्वीकार किया जाना चाहिए। रामलाल कोल ने कहा कि गांव से शहर आने पर सबसे ज्यादा परेशानी सिक्कों को लेकर होती है, छोटी-छोटी खरीदारी में भी लोग मना कर देते हैं। कई बार किराया देने में भी दिक्कत होती है क्योंकि ऑटो वाले सिक्के नहीं लेते। बैंक कर्मचारी बोले- गिनने में समय लगता है एक्सिस बैंक के एक कर्मचारी ने नाम न बताने की शर्त पर कहा- सिक्कों को लेकर जमीनी स्तर पर दिक्कत बनी हुई है। बैंक में सिक्के जमा करने की प्रक्रिया समय लेने वाली होती है। बड़ी मात्रा में आने पर अलग से गिनती और प्रबंधन करना पड़ता है। कई बार शाखाओं में पर्याप्त स्टाफ और संसाधन नहीं होने से लोग कर्मचारी इंटरेस्ट नहीं दिखाते हैं। अगर व्यवस्थित कलेक्शन और डिपॉजिट सिस्टम बने तो यह समस्या काफी हद तक खत्म हो सकती है। सिक्का लेने से मना करना कानूनन अपराध RBI के नियमों के अनुसार, वैध भारतीय सिक्के (1, 2, 5, 10, 20 रुपए) लेने से मना करना कानूनन अपराध है। सिक्का लेने से इनकार करने पर भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 124-A के तहत राष्ट्रद्रोह या अन्य धाराओं के तहत शिकायत की जा सकती है। सभी बैंक और दुकानदार इन्हें लेने के लिए बाध्य हैं।

WhatsApp
Facebook
Twitter
LinkedIn

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

लेटेस्ट टॉप अपडेट

सच्चाई की दहाड़

ब्रेकिंग खबरें सीधे अपने ईमेल पर पाने के लिए रजिस्टर करें।

You have been successfully Subscribed! Ops! Something went wrong, please try again.

ग्लोबल करेंसी अपडेट

Provided by IFC Markets
Sanju Samson; CSK vs PBKS IPL 2026 LIVE Score Update

April 3, 2026/
5:10 am

स्पोर्ट्स डेस्क2 घंटे पहले कॉपी लिंक IPL के इस सीजन का 7वां मैच चेन्नई सुपर किंग्स और पंजाब किंग्स के...

The MP Board 10th and 12th results declared at mpbse.nic.in.

April 15, 2026/
1:05 pm

आखरी अपडेट:15 अप्रैल, 2026, 13:05 IST तेलंगाना के मुख्यमंत्री ने विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33% आरक्षण प्रदान करने के...

पवन खेड़ा की ट्रांजिट अग्रिम जमानत बढ़ाने की मांग खारिज:SC ने कहा- असम कोर्ट जाएं; खेड़ा बोले- क्या मैं अपराधी हूं?

April 17, 2026/
2:07 pm

सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को कांग्रेस नेता पवन खेड़ा की ट्रांजिट अग्रिम जमानत बढ़ाने की मांग खारिज कर दी। कोर्ट...

authorimg

March 29, 2026/
3:58 pm

गोरखपुर: गर्मियों का मौसम आते ही शरीर को ठंडा और तरोताजा रखना सबसे बड़ी चुनौती बन जाता है. तेज धूप,...

राजनीति

विंध्य के 9 जिलों में सिक्के नहीं चलते:भास्कर के स्टिंग में दुकानदार बोले-बैंक ही नहीं लेती; पंडित-पुरोहित ने कहा-एक रुपए का शगुन खत्म

विंध्य के 9 जिलों में सिक्के नहीं चलते:भास्कर के स्टिंग में दुकानदार बोले-बैंक ही नहीं लेती; पंडित-पुरोहित ने कहा-एक रुपए का शगुन खत्म

मध्य प्रदेश के रीवा, सीधी, सतना, शहडोल, सिंगरौली, उमरिया, मऊगंज, मैहर और अनूपपुर जिलों के दुकानदार RBI (भारतीय रिजर्व बैंक) द्वारा जारी सिक्के नहीं ले रहे हैं। ये स्थिति बीते करीब 5 साल से है। जिसके चलते सिक्के आर्थिक व्यवहार से बाहर हो गए हैं। मतलब साफ है कि विंध्य के इन 9 जिलों में RBI नहीं, दुकानदारों के अपने नियम चलते हैं। प्रशासन भी इन पर नकेल नहीं कस पा रहा है। सिक्के न लेने का कारण कोई भी दुकानदार खुलकर नहीं बताता इसलिए भास्कर रिपोर्टर ने स्टिंग ऑपरेशन किया। रिपोर्टर आम ग्राहक बनकर दुकानों पर पहुंचा और सिक्कों से भुगतान करने की कोशिश की, जिससे जमीनी सच्चाई सामने आ सके। पढ़िए, रिपोर्ट… पंडित-पुरोहितों ने भी किया इनकार भास्कर रिपोर्टर पेट्रोल पंप, मेडिकल स्टोर, डेयरी, फल, जूस और किराना स्टोर पर पहुंचा। सामान खरीदने के बदले में सिक्कों से भुगतान करने की कोशिश की, लेकिन हर जगह लगभग एक जैसा जवाब मिला- सिक्के नहीं लेंगे। यहां तक कि पंडित-पुरोहितों ने भी सिक्के लेने में रुचि नहीं दिखाई। दुकानदारों का कहना है कि ग्राहक सिक्के तो दे जाते हैं, लेकिन आगे उन्हें कोई स्वीकार नहीं करता, जिससे उनका पैसा फंस जाता है। बैंक भी बड़ी मात्रा में सिक्के जमा करने में आनाकानी करते हैं। 7 जगहों पर जांची सिक्कों की जमीनी हकीकत पेट्रोल पंप पर नोट लिए, सिक्का वापस किया भास्कर रिपोर्टर सबसे पहले विश्वविद्यालय सिरमौर रोड स्थित इंडियन ऑयल के पेट्रोल पंप पर पहुंचा। यहां उसने अपनी गाड़ी में 310 रुपए का पेट्रोल डलवाया। बदले में 300 रुपयों के नोट दिए और बाकी 10 रुपए का एक सिक्का दिया। पेट्रोल पंप कर्मी ने नोट तो रख लिए लेकिन सिक्के लेने से मना कर दिया। कहने लगा- भैया सिक्के मत दीजिएगा। जब उससे इसके पीछे का कारण पूछा गया तो बोला कि कई सालों से ऐसा ही चल रहा है। रिपोर्टर ने सिक्का देने की कोशिश की लेकिन उसके बाद भी वह नहीं माना। इसके बाद मजबूरी में 10 रुपए का नोट ही देना पड़ा। कोरोना के बाद से सिक्के नहीं ले रहे व्यापारी इसके बाद रिपोर्टर अनंतपुर में एक डेयरी पर पहुंचा। यहां उसने दही खरीदा। भुगतान करते हुए सिक्के देने चाहे तो दुकानदार ने लेने से साफ मना कर दिया। कहा कि कोरोनाकाल के बाद से यहां सिक्के नहीं चल रहे हैं। बातचीत में दुकानदार ने बड़े व्यापारियों को इसकी वजह बताया। बोला कि वो नहीं तो लेते हम क्यों लें? यहां से रिपोर्टर बजरंग नगर में एक फल और जूस की दुकान पर पहुंचा। दो गिलास आम का जूस खरीदा। 40 रुपए का बिल बना। रिपोर्टर ने 30 रुपए के नोट दिए, बाकी बचे 10 रुपए के सिक्के दिए। दुकानदार हैरान होकर बोला कि भैया, ये सिक्के यहां नहीं चलते। इसका कारण पूछा तो कोई ठोस जवाब नहीं मिला। दुकानदार ने यही कहा कि मैं क्या, कोई भी यहां सिक्के नहीं लेता। किराना स्टोर संचालक बोला- सिक्के काम के नहीं रिपोर्टर केके बाजार रोड स्थित एक किराना स्टोर पहुंचा। 60 रुपए का व्रत वाला सेंधा नमक खरीदा। इसके बाद में संचालक को सिक्के देकर टॉफी लेने की कोशिश की। दुकानदार से सिक्के लेने से मना कर दिया। कहने लगा कि भैया ये सिक्के निकालिए ही मत। किसी काम के नहीं हैं। जब उससे इसके पीछे की वजह पूछ तो ज्यादा कुछ नहीं बोला। बस इतना ही कहा- कई सालों से यही हाल है। मेडिकल संचालक बोला- मैं खुद बाहर जाकर चला रहा सिक्का चलाने की कोशिश करने रिपोर्टर दो मेडिकल स्टोर्स पर पहुंचा। सिरमौर चौराहे के मेडिकल स्टोर पर विक्स की गोलियां लीं, लेकिन सिक्के देने पर दुकानदार ने मना कर दिया। उसने कहा कि सिक्के चलते ही नहीं हैं। मैं खुद बाहर ले जाकर चलाता हूं। लाइफ केयर हॉस्पिटल के पास एक दूसरी मेडिकल स्टोर पर रिपोर्टर पहुंचा। ईनो और सिर दर्द की दवा खरीदी। यहां भी दुकानदार ने मुस्कुराते हुए कहा- भैया सिक्के नहीं चल पाएंगे, कोरोना काल से बंद हैं। जब उनसे कारण पूछा तो बताया लोग नहीं लेते, इसलिए मैं भी नहीं लेता। डिलीवरी बॉय ने भी नहीं लिए सिक्के स्टिंग ऑपरेशन के तहत रिपोर्टर ने फूड ऑर्डर किया। डिलीवरी बॉय जब ऑर्डर लेकर पहुंचा तो बिल का आंशिक रूप से भुगतान करने सिक्कों को देने की कोशिश की। डिलीवरी बॉय ने जैसे ही सिक्के देखे उसने तुरंत उन्हें लेने से मना कर दिया। उसने कहा- सर, सिक्के मैं नहीं ले पाऊंगा। कंपनी में जमा करने में दिक्कत होती है। वहां भी कोई नहीं लेता। सिक्के ले भी लेता हूं तो बाद में मुझे ही परेशानी होती है। इसलिए अब सीधे मना ही कर देता हूं। ऑटो ड्राइवर बोला- सिक्के चलाना मुश्किल सिक्के न लेने की वजह जानने के लिए भास्कर रिपोर्टर ने सिरमौर चौराहा से नए बस स्टैंड तक ऑटो से सफर किया। उतरते समय सिक्कों में भुगतान करने की कोशिश की तो ऑटो चालक ने हाथ खड़े कर दिए। उसने कहा- भैया सिक्के लेकर क्या करूंगा, कोई लेता ही नहीं है। पूछने पर उसने बताया कि दिनभर की कमाई में अगर सिक्के इकट्ठे हो जाएं तो उन्हें चलाना मुश्किल हो जाता है। मजबूरी में या तो छोटे दुकानदार ढूंढने पड़ते हैं या फिर नोट में ही लेनदेन करना पड़ता है। आखिरकार हमें नोट में ही किराया देना पड़ा। पंडित बोले- शगुन का धीरे-धीरे हो रहा खात्मा पंडित राजेश शास्त्री ने कहा- शुभ कार्यों में शगुन के तौर पर एक रुपए के सिक्के का विशेष महत्व होता था, लेकिन अब लोग नोट में ही पूरी राशि देने लगे हैं। पुरानी परंपरा धीरे-धीरे खत्म होती जा रही है। कियोस्क संचालक बोला- बैंक अस्वीकार कर देती है कियोस्क संचालक ने कहा- काफी ग्राहक सिक्के लेकर आते हैं, लेकिन इन्हें बैंक में आसानी से स्वीकार नहीं किया जाता। एक-दो बार ज्यादा मात्रा में सिक्के ले जाने पर घंटों लाइन में खड़ा रहना पड़ता है। कई बार वापस लौटा दिया जाता है। इसी वजह से अब मजबूरी में ग्राहकों से सिक्के लेने से मना करना पड़ता है। अगर बैंक स्तर पर सरल व्यवस्था हो जाए तो सिक्के लेने में कोई दिक्कत नहीं है। लोग बोले- बाजार में सिक्के चलाना समस्या बना स्थानीय निवासी अमित तिवारी ने कहा कि बाजार में सिक्के लेकर जाना समस्या बन चुका है। दुकानदार सीधे मना कर देते हैं, जिससे शर्मिंदगी उठानी होती है। कई बार छोटे भुगतान के लिए सिक्के ही होते हैं, लेकिन कोई लेने को तैयार नहीं होता। मजबूरी में नोट ही रखने पड़ते हैं। जब सरकार ने सिक्के जारी किए हैं तो उन्हें हर जगह स्वीकार किया जाना चाहिए। रामलाल कोल ने कहा कि गांव से शहर आने पर सबसे ज्यादा परेशानी सिक्कों को लेकर होती है, छोटी-छोटी खरीदारी में भी लोग मना कर देते हैं। कई बार किराया देने में भी दिक्कत होती है क्योंकि ऑटो वाले सिक्के नहीं लेते। बैंक कर्मचारी बोले- गिनने में समय लगता है एक्सिस बैंक के एक कर्मचारी ने नाम न बताने की शर्त पर कहा- सिक्कों को लेकर जमीनी स्तर पर दिक्कत बनी हुई है। बैंक में सिक्के जमा करने की प्रक्रिया समय लेने वाली होती है। बड़ी मात्रा में आने पर अलग से गिनती और प्रबंधन करना पड़ता है। कई बार शाखाओं में पर्याप्त स्टाफ और संसाधन नहीं होने से लोग कर्मचारी इंटरेस्ट नहीं दिखाते हैं। अगर व्यवस्थित कलेक्शन और डिपॉजिट सिस्टम बने तो यह समस्या काफी हद तक खत्म हो सकती है। सिक्का लेने से मना करना कानूनन अपराध RBI के नियमों के अनुसार, वैध भारतीय सिक्के (1, 2, 5, 10, 20 रुपए) लेने से मना करना कानूनन अपराध है। सिक्का लेने से इनकार करने पर भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 124-A के तहत राष्ट्रद्रोह या अन्य धाराओं के तहत शिकायत की जा सकती है। सभी बैंक और दुकानदार इन्हें लेने के लिए बाध्य हैं।

WhatsApp
Facebook
Twitter
LinkedIn

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

हेल्थ & फिटनेस

विज्ञापन

राजनीति

लेटेस्ट टॉप अपडेट

ग्लोबल करेंसी अपडेट

Provided by IFC Markets

Live Cricket

सच्चाई की दहाड़

ब्रेकिंग खबरें सीधे अपने ईमेल पर पाने के लिए रजिस्टर करें।

You have been successfully Subscribed! Ops! Something went wrong, please try again.