Tuesday, 16 Jun 2026 | 04:03 PM

Trending :

EXCLUSIVE

32 की उम्र तक परिपक्व हो पाता है दिमाग:दबाव से 18-34 साल के 33% युवा आत्मनिर्भर नहीं हो पाते; बच्चों के बॉस नहीं, दोस्त बनें पेरेंट्स

32 की उम्र तक परिपक्व हो पाता है दिमाग:दबाव से 18-34 साल के 33% युवा आत्मनिर्भर नहीं हो पाते; बच्चों के बॉस नहीं, दोस्त बनें पेरेंट्स

18 की उम्र में युवा बालिग हो जाता है, लेकिन कैम्ब्रिज यूनिवर्सिटी की रिसर्च बताती है कि इंसानी दिमाग की किशोर अवस्था 32 साल तक रहती है। यानी 18-25 की उम्र में परिपक्वता पूरी नहीं होती। यह समय बच्चों के लिए चुनौती और अवसर दोनों होता है। ब्रिटेन की साइकोथेरेपिस्ट जूलिया सैमुअल के अनुसार, आज के दौर में माता-पिता और बच्चों के बीच टकराव का सबसे बड़ा कारण यही है कि पेरेंट्स 18 के बाद भी बच्चों पर नियंत्रण बनाए रखना चाहते हैं। रिसर्च के मुताबिक ज्यादा दखल देने वाले पेरेंट्स के बच्चों में आत्मविश्वास की कमी होती है और वे अपनी पहचान नहीं बना पाते। महंगे रहन-सहन और बदलते करियर के कारण आज 18-34 साल के 33% युवा आत्मनिर्भर नहीं हो पाए हैं और माता-पिता के साथ रहने को मजबूर हैं। ऐसे में पेरेंट्स को बॉस के बजाय दोस्त की भूमिका निभानी चाहिए। रिश्ता: हर वक्त माता-पिता की निगरानी से घटता है बच्चों का आत्मविश्वास कई माता-पिता अक्सर ‘हेलिकॉप्टर पेरेंटिंग’ (हर वक्त निगरानी) का शिकार हो जाते हैं, जिससे बच्चों का आत्मविश्वास और मानसिक स्वास्थ्य प्रभावित होता है। विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि जब बच्चा होस्टल से स्कूलिंग-कॉलेज कर वयस्क होकर घर लौटे, तो उससे घर के खर्चों, कामकाज और प्राइवेसी पर खुलकर बात करें। उन्हें किशोर के बजाय वयस्क की तरह ट्रीट करें। अगर आप उनके हर फैसले खुद लेंगे, तो वे कभी जिम्मेदार नहीं बन पाएंगे। याद रखें, एक मां या पिता का असली काम बच्चे को अपने ऊपर निर्भर बनाना नहीं, बल्कि उसे इस काबिल बनाना है कि वह खुद अपनी राह चुन सके। आपसी मतभेद होने पर बहस जीतने के बजाय उनके नजरिए को समझना रिश्ते को टूटने से बचाता है। आपसी समझ ही सुखी परिवार का असली राज रिश्तों में जरूरत से ज्यादा निर्भरता अक्सर गलत मानी जाती है, लेकिन एक्सपर्ट नेड्रा तवाब के अनुसार हर निर्भरता खराब नहीं होती। वे इसे ‘हेल्दी डिपेंडेंसी’ कहती हैं। तवाब का मानना है कि अकेले रहकर हम अपनी पसंद समझना या अपनी बात मजबूती से रखना जैसे गुण नहीं सीख सकते। ये अनुभव केवल रिश्तों के साथ ही मुमकिन हैं। उनके मुताबिक, हर रिश्ता गणित के 50-50 नियम पर नहीं चलता।

WhatsApp
Facebook
Twitter
LinkedIn

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

लेटेस्ट टॉप अपडेट

सच्चाई की दहाड़

ब्रेकिंग खबरें सीधे अपने ईमेल पर पाने के लिए रजिस्टर करें।

You have been successfully Subscribed! Ops! Something went wrong, please try again.

ग्लोबल करेंसी अपडेट

Provided by IFC Markets
म्यांमार सीमा से आए उग्रवादियों ने मणिपुर में घर जलाए:सुबह 4 बजे हमला, लोग जान बचाकर जंगलों में भागे, महिला समेत दो लापता

May 7, 2026/
5:20 pm

मणिपुर के कमजोंग जिले में भारत-म्यांमार सीमा के पास गुरुवार सुबह हथियारबंद उग्रवादियों ने कई गांवों पर हमला किया। कई...

निजी स्कूलों में मनमानी फीस के खिलाफ अभिभावकों का प्रदर्शन:कलेक्ट्रेट पहुंचा पालक संघ, एनसीईआरटी पाठ्यक्रम अनिवार्य करने सहित कई मांगे रखी

April 1, 2026/
7:12 pm

नीमच में निजी स्कूलों की मनमानी फीस और नियमों के उल्लंघन के विरोध में बुधवार को पालक संघ जिला इकाई...

Anant Ambani birthday celebration in jamnagar

April 10, 2026/
12:40 pm

जामनगर11 मिनट पहले कॉपी लिंक जामनगर में आसपास के सभी गांवों में भोज दिया गया। कारोबारी मुकेश अंबानी के छोटे...

SEAL Team 6 Rescue US Airman in Iran

April 6, 2026/
7:46 pm

वॉशिंगटन डीसी/तेहरान11 मिनट पहले कॉपी लिंक सील टीम-6 पर बनी एक फिक्शनल फिल्म का दृश्य अमेरिका ने ईरान में लापता...

राजनीति

32 की उम्र तक परिपक्व हो पाता है दिमाग:दबाव से 18-34 साल के 33% युवा आत्मनिर्भर नहीं हो पाते; बच्चों के बॉस नहीं, दोस्त बनें पेरेंट्स

32 की उम्र तक परिपक्व हो पाता है दिमाग:दबाव से 18-34 साल के 33% युवा आत्मनिर्भर नहीं हो पाते; बच्चों के बॉस नहीं, दोस्त बनें पेरेंट्स

18 की उम्र में युवा बालिग हो जाता है, लेकिन कैम्ब्रिज यूनिवर्सिटी की रिसर्च बताती है कि इंसानी दिमाग की किशोर अवस्था 32 साल तक रहती है। यानी 18-25 की उम्र में परिपक्वता पूरी नहीं होती। यह समय बच्चों के लिए चुनौती और अवसर दोनों होता है। ब्रिटेन की साइकोथेरेपिस्ट जूलिया सैमुअल के अनुसार, आज के दौर में माता-पिता और बच्चों के बीच टकराव का सबसे बड़ा कारण यही है कि पेरेंट्स 18 के बाद भी बच्चों पर नियंत्रण बनाए रखना चाहते हैं। रिसर्च के मुताबिक ज्यादा दखल देने वाले पेरेंट्स के बच्चों में आत्मविश्वास की कमी होती है और वे अपनी पहचान नहीं बना पाते। महंगे रहन-सहन और बदलते करियर के कारण आज 18-34 साल के 33% युवा आत्मनिर्भर नहीं हो पाए हैं और माता-पिता के साथ रहने को मजबूर हैं। ऐसे में पेरेंट्स को बॉस के बजाय दोस्त की भूमिका निभानी चाहिए। रिश्ता: हर वक्त माता-पिता की निगरानी से घटता है बच्चों का आत्मविश्वास कई माता-पिता अक्सर ‘हेलिकॉप्टर पेरेंटिंग’ (हर वक्त निगरानी) का शिकार हो जाते हैं, जिससे बच्चों का आत्मविश्वास और मानसिक स्वास्थ्य प्रभावित होता है। विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि जब बच्चा होस्टल से स्कूलिंग-कॉलेज कर वयस्क होकर घर लौटे, तो उससे घर के खर्चों, कामकाज और प्राइवेसी पर खुलकर बात करें। उन्हें किशोर के बजाय वयस्क की तरह ट्रीट करें। अगर आप उनके हर फैसले खुद लेंगे, तो वे कभी जिम्मेदार नहीं बन पाएंगे। याद रखें, एक मां या पिता का असली काम बच्चे को अपने ऊपर निर्भर बनाना नहीं, बल्कि उसे इस काबिल बनाना है कि वह खुद अपनी राह चुन सके। आपसी मतभेद होने पर बहस जीतने के बजाय उनके नजरिए को समझना रिश्ते को टूटने से बचाता है। आपसी समझ ही सुखी परिवार का असली राज रिश्तों में जरूरत से ज्यादा निर्भरता अक्सर गलत मानी जाती है, लेकिन एक्सपर्ट नेड्रा तवाब के अनुसार हर निर्भरता खराब नहीं होती। वे इसे ‘हेल्दी डिपेंडेंसी’ कहती हैं। तवाब का मानना है कि अकेले रहकर हम अपनी पसंद समझना या अपनी बात मजबूती से रखना जैसे गुण नहीं सीख सकते। ये अनुभव केवल रिश्तों के साथ ही मुमकिन हैं। उनके मुताबिक, हर रिश्ता गणित के 50-50 नियम पर नहीं चलता।

WhatsApp
Facebook
Twitter
LinkedIn

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

हेल्थ & फिटनेस

विज्ञापन

राजनीति

लेटेस्ट टॉप अपडेट

ग्लोबल करेंसी अपडेट

Provided by IFC Markets

Live Cricket

सच्चाई की दहाड़

ब्रेकिंग खबरें सीधे अपने ईमेल पर पाने के लिए रजिस्टर करें।

You have been successfully Subscribed! Ops! Something went wrong, please try again.