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32 की उम्र तक परिपक्व हो पाता है दिमाग:दबाव से 18-34 साल के 33% युवा आत्मनिर्भर नहीं हो पाते; बच्चों के बॉस नहीं, दोस्त बनें पेरेंट्स

32 की उम्र तक परिपक्व हो पाता है दिमाग:दबाव से 18-34 साल के 33% युवा आत्मनिर्भर नहीं हो पाते; बच्चों के बॉस नहीं, दोस्त बनें पेरेंट्स

18 की उम्र में युवा बालिग हो जाता है, लेकिन कैम्ब्रिज यूनिवर्सिटी की रिसर्च बताती है कि इंसानी दिमाग की किशोर अवस्था 32 साल तक रहती है। यानी 18-25 की उम्र में परिपक्वता पूरी नहीं होती। यह समय बच्चों के लिए चुनौती और अवसर दोनों होता है। ब्रिटेन की साइकोथेरेपिस्ट जूलिया सैमुअल के अनुसार, आज के दौर में माता-पिता और बच्चों के बीच टकराव का सबसे बड़ा कारण यही है कि पेरेंट्स 18 के बाद भी बच्चों पर नियंत्रण बनाए रखना चाहते हैं। रिसर्च के मुताबिक ज्यादा दखल देने वाले पेरेंट्स के बच्चों में आत्मविश्वास की कमी होती है और वे अपनी पहचान नहीं बना पाते। महंगे रहन-सहन और बदलते करियर के कारण आज 18-34 साल के 33% युवा आत्मनिर्भर नहीं हो पाए हैं और माता-पिता के साथ रहने को मजबूर हैं। ऐसे में पेरेंट्स को बॉस के बजाय दोस्त की भूमिका निभानी चाहिए। रिश्ता: हर वक्त माता-पिता की निगरानी से घटता है बच्चों का आत्मविश्वास कई माता-पिता अक्सर ‘हेलिकॉप्टर पेरेंटिंग’ (हर वक्त निगरानी) का शिकार हो जाते हैं, जिससे बच्चों का आत्मविश्वास और मानसिक स्वास्थ्य प्रभावित होता है। विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि जब बच्चा होस्टल से स्कूलिंग-कॉलेज कर वयस्क होकर घर लौटे, तो उससे घर के खर्चों, कामकाज और प्राइवेसी पर खुलकर बात करें। उन्हें किशोर के बजाय वयस्क की तरह ट्रीट करें। अगर आप उनके हर फैसले खुद लेंगे, तो वे कभी जिम्मेदार नहीं बन पाएंगे। याद रखें, एक मां या पिता का असली काम बच्चे को अपने ऊपर निर्भर बनाना नहीं, बल्कि उसे इस काबिल बनाना है कि वह खुद अपनी राह चुन सके। आपसी मतभेद होने पर बहस जीतने के बजाय उनके नजरिए को समझना रिश्ते को टूटने से बचाता है। आपसी समझ ही सुखी परिवार का असली राज रिश्तों में जरूरत से ज्यादा निर्भरता अक्सर गलत मानी जाती है, लेकिन एक्सपर्ट नेड्रा तवाब के अनुसार हर निर्भरता खराब नहीं होती। वे इसे ‘हेल्दी डिपेंडेंसी’ कहती हैं। तवाब का मानना है कि अकेले रहकर हम अपनी पसंद समझना या अपनी बात मजबूती से रखना जैसे गुण नहीं सीख सकते। ये अनुभव केवल रिश्तों के साथ ही मुमकिन हैं। उनके मुताबिक, हर रिश्ता गणित के 50-50 नियम पर नहीं चलता।

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32 की उम्र तक परिपक्व हो पाता है दिमाग:दबाव से 18-34 साल के 33% युवा आत्मनिर्भर नहीं हो पाते; बच्चों के बॉस नहीं, दोस्त बनें पेरेंट्स

18 की उम्र में युवा बालिग हो जाता है, लेकिन कैम्ब्रिज यूनिवर्सिटी की रिसर्च बताती है कि इंसानी दिमाग की किशोर अवस्था 32 साल तक रहती है। यानी 18-25 की उम्र में परिपक्वता पूरी नहीं होती। यह समय बच्चों के लिए चुनौती और अवसर दोनों होता है। ब्रिटेन की साइकोथेरेपिस्ट जूलिया सैमुअल के अनुसार, आज के दौर में माता-पिता और बच्चों के बीच टकराव का सबसे बड़ा कारण यही है कि पेरेंट्स 18 के बाद भी बच्चों पर नियंत्रण बनाए रखना चाहते हैं। रिसर्च के मुताबिक ज्यादा दखल देने वाले पेरेंट्स के बच्चों में आत्मविश्वास की कमी होती है और वे अपनी पहचान नहीं बना पाते। महंगे रहन-सहन और बदलते करियर के कारण आज 18-34 साल के 33% युवा आत्मनिर्भर नहीं हो पाए हैं और माता-पिता के साथ रहने को मजबूर हैं। ऐसे में पेरेंट्स को बॉस के बजाय दोस्त की भूमिका निभानी चाहिए। रिश्ता: हर वक्त माता-पिता की निगरानी से घटता है बच्चों का आत्मविश्वास कई माता-पिता अक्सर ‘हेलिकॉप्टर पेरेंटिंग’ (हर वक्त निगरानी) का शिकार हो जाते हैं, जिससे बच्चों का आत्मविश्वास और मानसिक स्वास्थ्य प्रभावित होता है। विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि जब बच्चा होस्टल से स्कूलिंग-कॉलेज कर वयस्क होकर घर लौटे, तो उससे घर के खर्चों, कामकाज और प्राइवेसी पर खुलकर बात करें। उन्हें किशोर के बजाय वयस्क की तरह ट्रीट करें। अगर आप उनके हर फैसले खुद लेंगे, तो वे कभी जिम्मेदार नहीं बन पाएंगे। याद रखें, एक मां या पिता का असली काम बच्चे को अपने ऊपर निर्भर बनाना नहीं, बल्कि उसे इस काबिल बनाना है कि वह खुद अपनी राह चुन सके। आपसी मतभेद होने पर बहस जीतने के बजाय उनके नजरिए को समझना रिश्ते को टूटने से बचाता है। आपसी समझ ही सुखी परिवार का असली राज रिश्तों में जरूरत से ज्यादा निर्भरता अक्सर गलत मानी जाती है, लेकिन एक्सपर्ट नेड्रा तवाब के अनुसार हर निर्भरता खराब नहीं होती। वे इसे ‘हेल्दी डिपेंडेंसी’ कहती हैं। तवाब का मानना है कि अकेले रहकर हम अपनी पसंद समझना या अपनी बात मजबूती से रखना जैसे गुण नहीं सीख सकते। ये अनुभव केवल रिश्तों के साथ ही मुमकिन हैं। उनके मुताबिक, हर रिश्ता गणित के 50-50 नियम पर नहीं चलता।

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