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मस्सों की समस्या से हैं परेशान? होम्योपैथिक डॉक्टर ने बताए बचाव के साथ घरेलू इलाज

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आजकल त्वचा संबंधी समस्याओं में मस्सों की परेशानी तेजी से बढ़ती दिखाई दे रही है. चेहरे, गर्दन, हाथों और पैरों पर उभरने वाले छोटे-छोटे दाने शुरुआत में सामान्य लगते हैं, लेकिन समय के साथ यह मस्सों का रूप लेकर लोगों की सुंदरता और आत्मविश्वास दोनों को प्रभावित करने लगते हैं. कई लोग इन्हें नजरअंदाज कर देते हैं, जबकि कुछ महंगे इलाज का सहारा लेते हैं. लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि सही समय पर पहचान और उचित उपचार से इस समस्या से आसानी से छुटकारा पाया जा सकता है.

कैसे फैलता है वायरस

दरअसल, मस्से मुख्य रूप से ह्यूमन पैपिलोमा वायरस (HPV) के कारण होते हैं और यह वायरस संक्रमित व्यक्ति के संपर्क में आने, उसकी वस्तुओं का उपयोग करने या त्वचा पर छोटे कट के माध्यम से शरीर में प्रवेश कर सकता है. बता दें कि कमजोर रोग प्रतिरोधक क्षमता वाले लोगों में यह समस्या अधिक देखने को मिलती है. कई बार मस्से अपने आप समाप्त हो जाते हैं, लेकिन कुछ मामलों में यह तेजी से बढ़ने लगते हैं और शरीर के अन्य हिस्सों में भी फैल सकते हैं.

इस बारे में लोकल 18 को अधिक जानकारी देते हुए अंबाला शहर नागरिक अस्पताल में कार्यरत होम्योपैथिक डॉक्टर रजिता ने बताया कि मस्से ह्यूमन पैपिलोमा वायरस (HPV) के कारण होते हैं और यह स्किन एलर्जी की वजह से भी हो सकते हैं. उन्होंने कहा कि किसी अन्य व्यक्ति का तौलिया इस्तेमाल करने से भी मस्सों की समस्या बढ़ सकती है, लेकिन होम्योपैथिक पद्धति से इसका इलाज संभव है.

क्या है होम्योपैथी में इलाज

उन्होंने बताया कि होम्योपैथी में Thuja Occidentalis, Causticum और Nitric Acid जैसी कई दवाइयां हैं, जिनका उपयोग करके मस्सों को जड़ से खत्म किया जा सकता है. हालांकि, अगर मस्सों में ब्लीडिंग की समस्या ज्यादा बढ़ गई हो, तो पहले किसी नजदीकी डॉक्टर को जरूर दिखाना चाहिए. उन्होंने कहा कि मस्सों को आमतौर पर सर्जिकल माध्यम से हटाया जाता है, लेकिन होम्योपैथी की कुछ दवाइयां इन्हें जड़ से झड़ने में मदद करती हैं.

उन्होंने बताया कि कई लोग मस्सों को हटाने के लिए चूने का इस्तेमाल करते हैं, लेकिन यह काफी घातक साबित हो सकता है. क्योंकि चूना लगाने से घाव हो सकता है, जिससे खासकर शुगर के मरीजों में संक्रमण फैलने का खतरा बढ़ जाता है.

क्या है लक्षण

डॉ. रजिता ने बताया कि मस्सों की पहचान करना सामान्यतः आसान होता है. त्वचा पर छोटे, उभरे हुए और खुरदुरे दाने दिखाई देना इसका प्रमुख लक्षण है. इनका रंग त्वचा जैसा, हल्का भूरा, गुलाबी या सफेद हो सकता है. कई मस्सों पर छोटे काले बिंदु भी दिखाई देते हैं. कभी-कभी इनमें खुजली, जलन या खून आने जैसी समस्याएं भी देखने को मिलती हैं. इसलिए मस्सों को हाथ से छूने के बजाय एक बार डॉक्टर को जरूर दिखाना चाहिए.

होम्योपैथिक चिकित्सकों का कहना है कि मस्सों का उपचार केवल बाहरी रूप से नहीं, बल्कि शरीर की आंतरिक रोग प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत करके किया जाना चाहिए. होम्योपैथी में रोग के मूल कारण को ध्यान में रखकर उपचार किया जाता है, जिससे मस्सों को जड़ से खत्म करने में मदद मिल सकती है.

विशेषज्ञों के अनुसार, कुछ प्रमुख होम्योपैथिक औषधियां मस्सों के उपचार में उपयोगी मानी जाती हैं. Thuja Occidentalis को मस्सों की प्रमुख दवा माना जाता है, विशेष रूप से तब जब मस्से नरम, बड़े और तेजी से बढ़ रहे हों. Causticum उन मस्सों में लाभकारी मानी जाती है, जो चेहरे या हाथों पर अधिक संख्या में हों. Antimonium Crudum कठोर और मोटे मस्सों के लिए उपयोग की जाती है, जबकि Nitric Acid दर्द वाले और खून आने वाले मस्सों में राहत देने में सहायक मानी जाती है.

घरेलू इलाज

इसके अलावा घरेलू स्तर पर एलोवेरा जेल, केले के छिलके और प्याज के रस का प्रयोग भी लोग करते हैं. हालांकि, डॉक्टर बिना सलाह के किसी भी उपाय को अपनाने से बचने की सलाह देते हैं. उन्होंने बताया कि होम्योपैथिक पद्धति से कई बार एक हफ्ते में भी मस्सों का इलाज संभव हो जाता है. इसलिए नागरिक अस्पताल में 5 रुपये की पर्ची बनवाकर कोई भी व्यक्ति होम्योपैथिक ओपीडी में आकर जांच करवाकर निशुल्क दवा ले सकता है.

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कैसे फैलता है वायरस

दरअसल, मस्से मुख्य रूप से ह्यूमन पैपिलोमा वायरस (HPV) के कारण होते हैं और यह वायरस संक्रमित व्यक्ति के संपर्क में आने, उसकी वस्तुओं का उपयोग करने या त्वचा पर छोटे कट के माध्यम से शरीर में प्रवेश कर सकता है. बता दें कि कमजोर रोग प्रतिरोधक क्षमता वाले लोगों में यह समस्या अधिक देखने को मिलती है. कई बार मस्से अपने आप समाप्त हो जाते हैं, लेकिन कुछ मामलों में यह तेजी से बढ़ने लगते हैं और शरीर के अन्य हिस्सों में भी फैल सकते हैं.

इस बारे में लोकल 18 को अधिक जानकारी देते हुए अंबाला शहर नागरिक अस्पताल में कार्यरत होम्योपैथिक डॉक्टर रजिता ने बताया कि मस्से ह्यूमन पैपिलोमा वायरस (HPV) के कारण होते हैं और यह स्किन एलर्जी की वजह से भी हो सकते हैं. उन्होंने कहा कि किसी अन्य व्यक्ति का तौलिया इस्तेमाल करने से भी मस्सों की समस्या बढ़ सकती है, लेकिन होम्योपैथिक पद्धति से इसका इलाज संभव है.

क्या है होम्योपैथी में इलाज

उन्होंने बताया कि होम्योपैथी में Thuja Occidentalis, Causticum और Nitric Acid जैसी कई दवाइयां हैं, जिनका उपयोग करके मस्सों को जड़ से खत्म किया जा सकता है. हालांकि, अगर मस्सों में ब्लीडिंग की समस्या ज्यादा बढ़ गई हो, तो पहले किसी नजदीकी डॉक्टर को जरूर दिखाना चाहिए. उन्होंने कहा कि मस्सों को आमतौर पर सर्जिकल माध्यम से हटाया जाता है, लेकिन होम्योपैथी की कुछ दवाइयां इन्हें जड़ से झड़ने में मदद करती हैं.

उन्होंने बताया कि कई लोग मस्सों को हटाने के लिए चूने का इस्तेमाल करते हैं, लेकिन यह काफी घातक साबित हो सकता है. क्योंकि चूना लगाने से घाव हो सकता है, जिससे खासकर शुगर के मरीजों में संक्रमण फैलने का खतरा बढ़ जाता है.

क्या है लक्षण

डॉ. रजिता ने बताया कि मस्सों की पहचान करना सामान्यतः आसान होता है. त्वचा पर छोटे, उभरे हुए और खुरदुरे दाने दिखाई देना इसका प्रमुख लक्षण है. इनका रंग त्वचा जैसा, हल्का भूरा, गुलाबी या सफेद हो सकता है. कई मस्सों पर छोटे काले बिंदु भी दिखाई देते हैं. कभी-कभी इनमें खुजली, जलन या खून आने जैसी समस्याएं भी देखने को मिलती हैं. इसलिए मस्सों को हाथ से छूने के बजाय एक बार डॉक्टर को जरूर दिखाना चाहिए.

होम्योपैथिक चिकित्सकों का कहना है कि मस्सों का उपचार केवल बाहरी रूप से नहीं, बल्कि शरीर की आंतरिक रोग प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत करके किया जाना चाहिए. होम्योपैथी में रोग के मूल कारण को ध्यान में रखकर उपचार किया जाता है, जिससे मस्सों को जड़ से खत्म करने में मदद मिल सकती है.

विशेषज्ञों के अनुसार, कुछ प्रमुख होम्योपैथिक औषधियां मस्सों के उपचार में उपयोगी मानी जाती हैं. Thuja Occidentalis को मस्सों की प्रमुख दवा माना जाता है, विशेष रूप से तब जब मस्से नरम, बड़े और तेजी से बढ़ रहे हों. Causticum उन मस्सों में लाभकारी मानी जाती है, जो चेहरे या हाथों पर अधिक संख्या में हों. Antimonium Crudum कठोर और मोटे मस्सों के लिए उपयोग की जाती है, जबकि Nitric Acid दर्द वाले और खून आने वाले मस्सों में राहत देने में सहायक मानी जाती है.

घरेलू इलाज

इसके अलावा घरेलू स्तर पर एलोवेरा जेल, केले के छिलके और प्याज के रस का प्रयोग भी लोग करते हैं. हालांकि, डॉक्टर बिना सलाह के किसी भी उपाय को अपनाने से बचने की सलाह देते हैं. उन्होंने बताया कि होम्योपैथिक पद्धति से कई बार एक हफ्ते में भी मस्सों का इलाज संभव हो जाता है. इसलिए नागरिक अस्पताल में 5 रुपये की पर्ची बनवाकर कोई भी व्यक्ति होम्योपैथिक ओपीडी में आकर जांच करवाकर निशुल्क दवा ले सकता है.

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