Monday, 24 Aug 2026 | 04:43 AM

Trending :

गिनी में कचरे का पहाड़ धंसा, 22 की मौत:6 लोग घायल; भारी बारिश के बाद बचाव अभियान जारी कार रेसिंग में हादसे का शिकार हुए एक्टर अजित कुमार:बेकाबू होकर दूसरी कार से टकराई गाड़ी, सुरक्षित बचे जापान में 5.9 तीव्रता का भूकंप, 37 लोग घायल:ट्रेन सेवाओं पर असर; सुनामी का खतरा नहीं 'अंग्रेजों के सम्मान में लिखा गया जन गण मन':मुकेश खन्ना बोले- ये राष्ट्रगान नहीं हो सकता; इसमें अंग्रेजों को भाग्य विधाता बताया गया पहली भारतीय महिला मिमिक्री आर्टिस्ट आशा सिंह जयसवाल का निधन:मीना कुमारी की नकल से फेम मिला, बीआर चोपड़ा की महाभारत में द्रोणाचार्य की पत्नी बनी थीं पाकिस्तान में 12-12 घंटे बिजली कटौती:लोग सड़कों पर उतरे, रास्ता जाम किया; लगातार कटौती से पानी सप्लाई ठप
EXCLUSIVE

स्कूलों में पढ़ाया जा रहा गणित असल जिंदगी में फेल:गणना के बजाय डेटा-रीजनिंग पर फोकस बढ़ाएं, सेहत से लेकर निवेश तक में होंगे सफल

स्कूलों में पढ़ाया जा रहा गणित असल जिंदगी में फेल:गणना के बजाय डेटा-रीजनिंग पर फोकस बढ़ाएं, सेहत से लेकर निवेश तक में होंगे सफल

गणित का नाम सुनते ही अक्सर लोगों के जेहन में स्कूल के दिनों की वे डरावनी यादें ताजा हो जाती हैं- अलजेब्रा, ज्योमेट्री, ट्रिगोनोमेट्री और कैलकुलस का एक अंतहीन चक्रवात… लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि जिस गणित के लिए हमने हजारों घंटे बर्बाद किए, वह हमारे वास्तविक जीवन में कितना काम आता है? आधुनिक शोध और विशेषज्ञों का मानना है कि हम न सिर्फ गलत गणित पढ़ रहे हैं, बल्कि उसे आंकने का हमारा तरीका भी पूरी तरह गलत है। चौंकाने वाला तथ्य यह है कि अमेरिका समेत दुनिया के कई हिस्सों में गणित का वर्तमान पाठ्यक्रम 1893 की ‘कमेटी ऑफ टेन’ द्वारा निर्धारित किया गया था। उस दौर में रटकर गणना करना (रोट मैथ) आर्किटेक्ट, खगोलविदों और सिविल इंजीनियरों के लिए जरूरी था। पर आज, जब हमारे हाथ में सुपरकंप्यूटर जैसे स्मार्टफोन हैं, तब भी हम बच्चों को हाथ से जटिल समीकरण हल करना सिखा रहे हैं। ‘आफ्टरमैथ: द लाइफ-चेंजिंग मैथ दैट स्कूल्स वॉन्ट टीच यू’ के लेखक टेड डिनर्टस्मिथ कहते हैं, आज की दुनिया डेटा, एल्गोरिदम, सांख्यिकी व एआई से चलती है। पर हमारी शिक्षा नीति अब भी 19वीं सदी के रटने वाले गणित व मल्टीपल चॉइस टेस्ट स्कोर के पीछे भाग रही है।’ एक्सपर्ट मानते हैं अगर कंप्यूटर कोई काम बेहतर व तेज कर सकता है, तो बच्चों को उसी काम में उलझाए रखना गुणवत्ता का पैमाना नहीं हो सकता। गणित की अज्ञानता से जोखिम ओईसीडी के एजुकेशन डायरेक्टर एंड्रियास श्लीचर के मुताबिक गणित की व्यावहारिक समझ न होना सिर्फ अकादमिक कमी नहीं, बल्कि जिंदगी व स्वास्थ्य के लिए भी बड़ा जोखिम है। डेटा की समझ न होने से लोग मेडिकल टेस्ट की रिपोर्ट व डॉक्टरों द्वारा डेटा की गलत व्याख्या से जीवन-मरण से जुड़े गलत फैसले ले लेते हैं। वहीं, ‘मैथ एंग्जायटी’ के शिकार 93% लोग वित्तीय जाल में फंस रहे हैं; वे महंगाई व ब्याज के गणित को न समझ पाने से निवेश व भविष्य बर्बाद कर रहे हैं। यही अज्ञानता जनता को नीति-निर्धारकों के आंकड़ों के मायाजाल में भी उलझाती है। कई देशों में बेरोजगारी के आधिकारिक आंकड़े हकीकत छुपाते हैं, जबकि असली दर ज्यादा है। पर गणित से दूरी, यह गफलत समझा नहीं पाती। जनगणना जैसी प्रक्रियाओं में भी डेटा की गलतियों से संसाधनों का गलत आवंटन होता है। जब तक हम आंकड़ों में छिपा सच नहीं समझेंगे, तब तक गुमराह होते रहेंगे।
एक्सपर्ट कहते हैं,‘गणित का सही ज्ञान न सिर्फ व्यक्तिगत सफलता के लिए जरूरी है, बल्कि यह लोकतंत्र को भी मजबूत करता है। जब नागरिक डेटा व आंकड़ों को समझना शुरू करेंगे, तभी सही सवाल पूछ सकेंगे। वक्त आ गया है कि हम रटने वाले गणित से बाहर निकलें और उस गणित को अपनाएं जो हमारा कल संवार सके। 80% वक्त गणना पर खर्च हो रहा, इसे एआई-कंप्यूटर को करने दें अमेरिकी शिक्षाविद् कॉनराड वोल्फ्राम का तर्क है कि हमें ‘डेटा एनालिटिक्स’ व ‘फाइनेंशियल लिटरेसी’ को महत्व देना चाहिए। वर्तमान शिक्षा 80% समय ‘गणना’ पर खर्च करती है, जबकि यह काम कंप्यूटर व एआई कहीं बेहतर कर सकते हैं। छात्रों को गणना के बोझ से मुक्त कर समस्या सुलझाने पर ध्यान देना चाहिए। छात्र सांख्यिकीय तर्क व वित्तीय फैसले सीखें जो जीवन को प्रभावित करते हैं। यदि छात्र स्कूल से निकलने के बाद टैक्स, निवेश या ब्याज दर नहीं समझ सकते, तो उनकी गणित की शिक्षा अधूरी है। इन व्यावहारिक आंकड़ों में दक्षता ही शिक्षा का वास्तविक उद्देश्य होना चाहिए।

WhatsApp
Facebook
Twitter
LinkedIn

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

लेटेस्ट टॉप अपडेट

सच्चाई की दहाड़

ब्रेकिंग खबरें सीधे अपने ईमेल पर पाने के लिए रजिस्टर करें।

You have been successfully Subscribed! Ops! Something went wrong, please try again.

ग्लोबल करेंसी अपडेट

Provided by IFC Markets
Rishabh Pant LSG Captaincy Resign Update; IPL 2026

May 29, 2026/
5:30 pm

स्पोर्ट्स डेस्क11 मिनट पहले कॉपी लिंक ऋषभ पंत ने IPL फ्रेंचाइजी लखनऊ सुपर जाइंट्स (LSG) की कप्तानी छोड़ने का फैसला...

12 जून से इंग्लैंड में महिला टी20 वर्ल्ड कप:पहली बार मैदान में होंगी 5 गेमचेंजर खिलाड़ी; 12 टीमों में से मिलेगी भविष्य की सुपरस्टार

June 10, 2026/
12:45 pm

महिला टी20 वर्ल्ड कप हमेशा से उन खिलाड़ियों के लिए सबसे बड़ा मंच रहा है, जो अपनी प्रतिभा को साबित...

बैतूल में जल गंगा संवर्धन अभियान शुरू, विक्रमोत्सव भी मनाया:केंद्रीय मंत्री उइके की मौजूदगी में ब्रम्हध्वज वंदना भी हुई

March 19, 2026/
12:41 pm

बैतूल जिले में गुरुवार को शासकीय जयवंती हॉक्सर महाविद्यालय परिसर में जल संरक्षण और सांस्कृतिक चेतना से जुड़े दो बड़े...

Smoke rises following Israeli bombardment in southern Lebanon as seen from a position across the border in the Upper Galilee, in northern Israel on June 5, 2026. (AFP)

June 6, 2026/
8:16 am

आखरी अपडेट:06 जून, 2026, 08:16 IST बागी टीएमसी विधायक रीतब्रत बनर्जी, जो बुधवार को विधानसभा में विपक्ष के नेता बने,...

Yash Toxic Film Event Accident

August 23, 2026/
10:53 am

1 मिनट पहले कॉपी लिंक यश की फिल्म ‘टक्सिक’ के प्री-रिलीज इवेंट में शनिवार को हैदराबाद की मल्ला रेड्डी यूनिवर्सिटी...

News18 Showsha Reel Awards 2026 LIVE Updates

March 7, 2026/
9:02 pm

आखरी अपडेट:मार्च 07, 2026, 21:02 IST पीएम मोदी की यह टिप्पणी राष्ट्रपति मुर्मू द्वारा कथित तौर पर अंतर्राष्ट्रीय संथाल कॉन्क्लेव...

authorimg

May 20, 2026/
4:54 pm

Last Updated:May 20, 2026, 16:54 IST Summer Health Tips: बढ़ती गर्मी में बच्चों को लू, डिहाइड्रेशन और अन्य स्वास्थ्य समस्याओं...

राजनीति

स्कूलों में पढ़ाया जा रहा गणित असल जिंदगी में फेल:गणना के बजाय डेटा-रीजनिंग पर फोकस बढ़ाएं, सेहत से लेकर निवेश तक में होंगे सफल

स्कूलों में पढ़ाया जा रहा गणित असल जिंदगी में फेल:गणना के बजाय डेटा-रीजनिंग पर फोकस बढ़ाएं, सेहत से लेकर निवेश तक में होंगे सफल

गणित का नाम सुनते ही अक्सर लोगों के जेहन में स्कूल के दिनों की वे डरावनी यादें ताजा हो जाती हैं- अलजेब्रा, ज्योमेट्री, ट्रिगोनोमेट्री और कैलकुलस का एक अंतहीन चक्रवात… लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि जिस गणित के लिए हमने हजारों घंटे बर्बाद किए, वह हमारे वास्तविक जीवन में कितना काम आता है? आधुनिक शोध और विशेषज्ञों का मानना है कि हम न सिर्फ गलत गणित पढ़ रहे हैं, बल्कि उसे आंकने का हमारा तरीका भी पूरी तरह गलत है। चौंकाने वाला तथ्य यह है कि अमेरिका समेत दुनिया के कई हिस्सों में गणित का वर्तमान पाठ्यक्रम 1893 की ‘कमेटी ऑफ टेन’ द्वारा निर्धारित किया गया था। उस दौर में रटकर गणना करना (रोट मैथ) आर्किटेक्ट, खगोलविदों और सिविल इंजीनियरों के लिए जरूरी था। पर आज, जब हमारे हाथ में सुपरकंप्यूटर जैसे स्मार्टफोन हैं, तब भी हम बच्चों को हाथ से जटिल समीकरण हल करना सिखा रहे हैं। ‘आफ्टरमैथ: द लाइफ-चेंजिंग मैथ दैट स्कूल्स वॉन्ट टीच यू’ के लेखक टेड डिनर्टस्मिथ कहते हैं, आज की दुनिया डेटा, एल्गोरिदम, सांख्यिकी व एआई से चलती है। पर हमारी शिक्षा नीति अब भी 19वीं सदी के रटने वाले गणित व मल्टीपल चॉइस टेस्ट स्कोर के पीछे भाग रही है।’ एक्सपर्ट मानते हैं अगर कंप्यूटर कोई काम बेहतर व तेज कर सकता है, तो बच्चों को उसी काम में उलझाए रखना गुणवत्ता का पैमाना नहीं हो सकता। गणित की अज्ञानता से जोखिम ओईसीडी के एजुकेशन डायरेक्टर एंड्रियास श्लीचर के मुताबिक गणित की व्यावहारिक समझ न होना सिर्फ अकादमिक कमी नहीं, बल्कि जिंदगी व स्वास्थ्य के लिए भी बड़ा जोखिम है। डेटा की समझ न होने से लोग मेडिकल टेस्ट की रिपोर्ट व डॉक्टरों द्वारा डेटा की गलत व्याख्या से जीवन-मरण से जुड़े गलत फैसले ले लेते हैं। वहीं, ‘मैथ एंग्जायटी’ के शिकार 93% लोग वित्तीय जाल में फंस रहे हैं; वे महंगाई व ब्याज के गणित को न समझ पाने से निवेश व भविष्य बर्बाद कर रहे हैं। यही अज्ञानता जनता को नीति-निर्धारकों के आंकड़ों के मायाजाल में भी उलझाती है। कई देशों में बेरोजगारी के आधिकारिक आंकड़े हकीकत छुपाते हैं, जबकि असली दर ज्यादा है। पर गणित से दूरी, यह गफलत समझा नहीं पाती। जनगणना जैसी प्रक्रियाओं में भी डेटा की गलतियों से संसाधनों का गलत आवंटन होता है। जब तक हम आंकड़ों में छिपा सच नहीं समझेंगे, तब तक गुमराह होते रहेंगे।
एक्सपर्ट कहते हैं,‘गणित का सही ज्ञान न सिर्फ व्यक्तिगत सफलता के लिए जरूरी है, बल्कि यह लोकतंत्र को भी मजबूत करता है। जब नागरिक डेटा व आंकड़ों को समझना शुरू करेंगे, तभी सही सवाल पूछ सकेंगे। वक्त आ गया है कि हम रटने वाले गणित से बाहर निकलें और उस गणित को अपनाएं जो हमारा कल संवार सके। 80% वक्त गणना पर खर्च हो रहा, इसे एआई-कंप्यूटर को करने दें अमेरिकी शिक्षाविद् कॉनराड वोल्फ्राम का तर्क है कि हमें ‘डेटा एनालिटिक्स’ व ‘फाइनेंशियल लिटरेसी’ को महत्व देना चाहिए। वर्तमान शिक्षा 80% समय ‘गणना’ पर खर्च करती है, जबकि यह काम कंप्यूटर व एआई कहीं बेहतर कर सकते हैं। छात्रों को गणना के बोझ से मुक्त कर समस्या सुलझाने पर ध्यान देना चाहिए। छात्र सांख्यिकीय तर्क व वित्तीय फैसले सीखें जो जीवन को प्रभावित करते हैं। यदि छात्र स्कूल से निकलने के बाद टैक्स, निवेश या ब्याज दर नहीं समझ सकते, तो उनकी गणित की शिक्षा अधूरी है। इन व्यावहारिक आंकड़ों में दक्षता ही शिक्षा का वास्तविक उद्देश्य होना चाहिए।

WhatsApp
Facebook
Twitter
LinkedIn

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

हेल्थ & फिटनेस

विज्ञापन

राजनीति

लेटेस्ट टॉप अपडेट

ग्लोबल करेंसी अपडेट

Provided by IFC Markets

Live Cricket

सच्चाई की दहाड़

ब्रेकिंग खबरें सीधे अपने ईमेल पर पाने के लिए रजिस्टर करें।

You have been successfully Subscribed! Ops! Something went wrong, please try again.