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51-year-old Manjinder Nagra, who made rugby history, became Britain’s first Sikh sumo wrestler.

51-year-old Manjinder Nagra, who made rugby history, became Britain's first Sikh sumo wrestler.
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गौरव मारवाह. चंडीगढ़16 मिनट पहले

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तीन बच्चों की मां मनजिंदर अब सूमो रेसलिंग के रिंग में दुनिया को अपनी ताकत दिखाएंगी।

जहां लोग 30 की उम्र में रिटायरमेंट का मन बनाने लगते हैं, वहीं पंजाब की बेटी मनजिंदर नागरा ने साबित कर दिया है कि हौसले की एक्सपायरी डेट नहीं होती। 1990 के दशक में ब्रिटेन की पहली सिख महिला रग्बी खिलाड़ी बनकर इतिहास रचने वाली 51 वर्षीय मनजिंदर अब एक नया अध्याय लिखने जा रही हैं।

तीन बच्चों की मां मनजिंदर अब सूमो रेसलिंग के रिंग में दुनिया को अपनी ताकत दिखाएंगी। मनजिंदर ने रग्बी तब शुरू की थी, जब एशियाई मूल की महिलाओं के लिए यह खेल बिल्कुल अनजाना था।

यूनिवर्सिटी ऑफ बाथ में पढ़ाई के दौरान उन्होंने रग्बी को चुना और जल्द ही इंग्लैंड स्टूडेंट्स टीम में अपनी जगह पक्की कर ली। वे मैदान पर अकेली एशियाई खिलाड़ी थीं। मनजिंदर का यह सफर सिर्फ खेल बदलने की कहानी नहीं है।

सिख गेम्स में एंबेसडर के तौर पर काम करते हुए उनकी मुलाकात सूमो चैंपियन मंदीप सिंह से हुई। उनकी मोटिवेशन पर मनजिंदर ने मार्च 2026 में सूमो इवेंट में कदम रखा। अप्रैल 2026 में उन्होंने अपनी एज कैटेगरी में नेशनल टाइटल जीता। अब जून में स्कॉटलैंड में होने वाली यूरोपियन सूमो रेसलिंग में वे इंग्लैंड का प्रतिनिधित्व करेंगीं।

चुनौतियों पर भारी जीत

मनजिंदर कहती हैं- दक्षिण एशियाई लड़कियों के लिए ड्रेस कोड और पारिवारिक दबाव जैसी कई बाधाएं हैं। अगर हम कोशिश नहीं करेंगे, तो कभी पता नहीं चलेगा कि हम क्या कर सकते हैं।

बेटियों के लिए खोला रास्ता: 6 से 80 खिलाड़ियों तक का सफर

मनजिंदर ने लॉ में करियर बनाया और अन्य लड़कियों के लिए भी रास्ता खोला, ताकि वे सपने पूरे कर सकें।

– 2016 में शुरुआत में उन्होंने ‘होव रग्बी क्लब’ में लड़कियों के सेक्शन की शुरुआत की।

– 6 लड़कियों से शुरू हुआ यह सफर 80 से ज्यादा विमन प्लेयर्स तक पहुंच चुका है।

– वे हंगलटन एंड नॉल प्रोजेक्ट के तहत महिलाओं के लिए ‘वॉकिंग रग्बी’ ग्रुप भी चलाती हैं।

ये भी सफलताएं मिल चुकी हैं मनजिंदर को

– वे सिख गेम्स (2024) की ग्लोबल एंबेसडर रही हैं। गेम्स को प्रमोट किया।

– क्रिकेट डिसिप्लिन पैनल की मेंबर के तौर पर भी काम किया है।

– वे युवाओं के लिए मोटिवेशनल स्पीकर और मेंटॉर भी हैं।

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तीन बच्चों की मां मनजिंदर अब सूमो रेसलिंग के रिंग में दुनिया को अपनी ताकत दिखाएंगी।

जहां लोग 30 की उम्र में रिटायरमेंट का मन बनाने लगते हैं, वहीं पंजाब की बेटी मनजिंदर नागरा ने साबित कर दिया है कि हौसले की एक्सपायरी डेट नहीं होती। 1990 के दशक में ब्रिटेन की पहली सिख महिला रग्बी खिलाड़ी बनकर इतिहास रचने वाली 51 वर्षीय मनजिंदर अब एक नया अध्याय लिखने जा रही हैं।

तीन बच्चों की मां मनजिंदर अब सूमो रेसलिंग के रिंग में दुनिया को अपनी ताकत दिखाएंगी। मनजिंदर ने रग्बी तब शुरू की थी, जब एशियाई मूल की महिलाओं के लिए यह खेल बिल्कुल अनजाना था।

यूनिवर्सिटी ऑफ बाथ में पढ़ाई के दौरान उन्होंने रग्बी को चुना और जल्द ही इंग्लैंड स्टूडेंट्स टीम में अपनी जगह पक्की कर ली। वे मैदान पर अकेली एशियाई खिलाड़ी थीं। मनजिंदर का यह सफर सिर्फ खेल बदलने की कहानी नहीं है।

सिख गेम्स में एंबेसडर के तौर पर काम करते हुए उनकी मुलाकात सूमो चैंपियन मंदीप सिंह से हुई। उनकी मोटिवेशन पर मनजिंदर ने मार्च 2026 में सूमो इवेंट में कदम रखा। अप्रैल 2026 में उन्होंने अपनी एज कैटेगरी में नेशनल टाइटल जीता। अब जून में स्कॉटलैंड में होने वाली यूरोपियन सूमो रेसलिंग में वे इंग्लैंड का प्रतिनिधित्व करेंगीं।

चुनौतियों पर भारी जीत

मनजिंदर कहती हैं- दक्षिण एशियाई लड़कियों के लिए ड्रेस कोड और पारिवारिक दबाव जैसी कई बाधाएं हैं। अगर हम कोशिश नहीं करेंगे, तो कभी पता नहीं चलेगा कि हम क्या कर सकते हैं।

बेटियों के लिए खोला रास्ता: 6 से 80 खिलाड़ियों तक का सफर

मनजिंदर ने लॉ में करियर बनाया और अन्य लड़कियों के लिए भी रास्ता खोला, ताकि वे सपने पूरे कर सकें।

– 2016 में शुरुआत में उन्होंने ‘होव रग्बी क्लब’ में लड़कियों के सेक्शन की शुरुआत की।

– 6 लड़कियों से शुरू हुआ यह सफर 80 से ज्यादा विमन प्लेयर्स तक पहुंच चुका है।

– वे हंगलटन एंड नॉल प्रोजेक्ट के तहत महिलाओं के लिए ‘वॉकिंग रग्बी’ ग्रुप भी चलाती हैं।

ये भी सफलताएं मिल चुकी हैं मनजिंदर को

– वे सिख गेम्स (2024) की ग्लोबल एंबेसडर रही हैं। गेम्स को प्रमोट किया।

– क्रिकेट डिसिप्लिन पैनल की मेंबर के तौर पर भी काम किया है।

– वे युवाओं के लिए मोटिवेशनल स्पीकर और मेंटॉर भी हैं।

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