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नेतन्याहू बोले- ईरान के नए सुप्रीम लीडर जिंदा:बंकर में छिपे, सत्ता पर पिता खामेनेई जैसी पकड़ नहीं, जनता के विद्रोह का डर सता रहा

नेतन्याहू बोले- ईरान के नए सुप्रीम लीडर जिंदा:बंकर में छिपे, सत्ता पर पिता खामेनेई जैसी पकड़ नहीं, जनता के विद्रोह का डर सता रहा

इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने दावा किया है कि ईरान के नए सुप्रीम लीडर मुजतबा खामेनेई जिंदा हैं, लेकिन उनकी सत्ता पर पकड़ उनके पिता अली खामेनेई जैसी मजबूत नहीं है। CBS न्यूज के शो ‘60 मिनट्स’ को दिए इंटरव्यू में नेतन्याहू ने कहा कि मुजतबा किसी बंकर या गुप्त जगह पर छिपे हुए हैं और वहीं से सत्ता संभालने की कोशिश कर रहे हैं। नेतन्याहू ने कहा कि ईरान इस समय 1979 की इस्लामिक क्रांति के बाद सबसे कमजोर दौर में है। उनके मुताबिक, शासन के भीतर दरारें बढ़ रही हैं और अलग-अलग गुटों में मतभेद सामने आ रहे हैं। उन्होंने कहा कि कुछ लोग संघर्ष जारी रखना चाहते हैं, जबकि दूसरे लोगों को डर है कि इससे अर्थव्यवस्था टूट जाएगी और जनता सड़कों पर उतर सकती है। नेतन्याहू ने कहा कि ईरानी शासन को सबसे ज्यादा डर अपनी ही जनता से है। उन्होंने दावा किया कि इजराइल और अमेरिका की कार्रवाई के बाद ईरान में विरोध प्रदर्शन बढ़े और लोगों ने शासन के खिलाफ आवाज उठाई। अमेरिका-इजराइल के हमले में घायल हुए थे मुजबता ईरान के नए सुप्रीम लीडर मुजतबा खामेनेई 28 फरवरी को अमेरिका और इजराइल के हमले में घायल हुए थे। इसके बाद से वह गुप्त ठिकाने पर रह रहे हैं और डॉक्टरों की टीम उनका इलाज कर रही है। न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट्स के मुताबिक 28 फरवरी को अमेरिका और इजराइल ने ईरान में अयातुल्ला अली खामेनेई के ठिकाने पर हमला किया था। दावा किया गया है कि उसी हमले में मुजतबा खामेनेई घायल हो गए थे। हमले में अयातुल्ला अली खामेनेई, उनकी पत्नी और बेटे की मौत हो गई थी। बताया गया कि मुजतबा खामेनेई की हालत गंभीर रही है। उनके एक पैर का तीन बार ऑपरेशन किया गया है और अब उन्हें नकली पैर लगाना पड़ सकता है। एक हाथ की भी सर्जरी हुई है और वह धीरे-धीरे ठीक हो रहा है। उनके चेहरे और होंठ बुरी तरह जल गए हैं। इस वजह से उन्हें बोलने में परेशानी हो रही है और आगे प्लास्टिक सर्जरी की जरूरत पड़ सकती है। ईरान के राष्ट्रपति मसूद पजशकियान, जो पेशे से हार्ट सर्जन हैं, और स्वास्थ्य मंत्री भी उनके इलाज में शामिल रहे हैं। रिपोर्ट के मुताबिक बड़े अधिकारी और सेना के कमांडर उनसे मिलने नहीं जाते, क्योंकि उन्हें डर है कि इजराइल उनके जरिए ठिकाने का पता लगा सकता है। नेतन्याहू बोले- ईरान की अर्थव्यवस्था और सैन्य ताकत नुकसान पहुंचा नेतन्याहू ने कहा कि ईरान के खिलाफ हाल की कार्रवाई में पेट्रोकेमिकल प्लांट, स्टील प्लांट और मिसाइल निर्माण से जुड़े कई ठिकानों को निशाना बनाया गया। उनके मुताबिक, इससे ईरान की अर्थव्यवस्था और सैन्य ताकत दोनों को नुकसान पहुंचा है। इंटरव्यू में नेतन्याहू ने कहा कि ईरान के खिलाफ लड़ाई अभी खत्म नहीं हुई है। उनके मुताबिक, ईरान के पास अब भी एनरिच्ड यूरेनियम मौजूद है, कई परमाणु केंद्र सक्रिय हैं और बैलिस्टिक मिसाइल प्रोग्राम पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है। नेतन्याहू ने कहा कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प और इजराइल इस बात पर सहमत हैं कि अगर जरूरत पड़ी तो दोबारा सैन्य कार्रवाई की जा सकती है। हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि अगर आर्थिक दबाव और समझौते से लक्ष्य हासिल हो जाए तो सैन्य कार्रवाई जरूरी नहीं होगी। नेतन्याहू का दावा- हमला नहीं करते तो ईरान एक-दो महीने में परमाणु बना लेता इंटरव्यू में नेतन्याहू ने दावा किया कि अगर इजराइल और अमेरिका ने हाल में कार्रवाई नहीं की होती, तो ईरान एक-दो महीने में परमाणु बम बना सकता था। उन्होंने कहा कि ईरान लंबे समय से परमाणु हथियार और लंबी दूरी की मिसाइलें विकसित करने की कोशिश कर रहा था। नेतन्याहू ने कहा कि ईरान ऐसा देश है, जो खुले तौर पर अमेरिका और इजराइल के विनाश की बात करता है। उनके मुताबिक, ईरान की मिसाइल क्षमता भविष्य में अमेरिका तक हमला करने की स्थिति में पहुंच सकती थी। इसी बीच, नेतन्याहू ने यह भी कहा कि ईरानी शासन का कमजोर होना हिजबुल्लाह, हमास और हूती जैसे संगठनों को भी प्रभावित करेगा। उनके मुताबिक, ये सभी संगठन ईरान के समर्थन पर टिके हैं और अगर तेहरान कमजोर हुआ तो इनकी ताकत भी घटेगी। उन्होंने दावा किया कि युद्ध से पहले हिजबुल्लाह के पास करीब डेढ़ लाख मिसाइलें और रॉकेट थे। इजराइल ने इनमें से 90% से ज्यादा नष्ट कर दिए हैं, लेकिन खतरा अब भी पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है। ईरान की अर्थव्यवस्था और सैन्य ताकत दोनों को नुकसान पहुंचा सोशल मीडिया और अमेरिका में इजराइल की छवि को लेकर पूछे गए सवाल पर नेतन्याहू ने कहा कि कई विदेशी ताकतें बॉट फार्म और फर्जी अकाउंट के जरिए इजराइल विरोधी माहौल बना रही हैं। उन्होंने कहा कि इसका असर खासतौर पर युवा अमेरिकियों पर पड़ा है। नेतन्याहू ने यह भी कहा कि इजराइल आने वाले वर्षों में अमेरिकी सैन्य आर्थिक मदद को धीरे-धीरे खत्म करना चाहता है। उनके मुताबिक, इजराइल अब मदद लेने वाले देश की बजाय अमेरिका का बराबरी वाला साझेदार बनना चाहता है। उन्होंने कहा कि अगले 10 साल में अमेरिकी सैन्य सहायता को शून्य तक लाने की योजना बनाई जा सकती है। साथ ही इजराइल खुफिया जानकारी, तकनीक और मिसाइल डिफेंस जैसे क्षेत्रों में अमेरिका के साथ साझेदारी बढ़ाना चाहता है।

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नेतन्याहू बोले- ईरान के नए सुप्रीम लीडर जिंदा:बंकर में छिपे, सत्ता पर पिता खामेनेई जैसी पकड़ नहीं, जनता के विद्रोह का डर सता रहा

नेतन्याहू बोले- ईरान के नए सुप्रीम लीडर जिंदा:बंकर में छिपे, सत्ता पर पिता खामेनेई जैसी पकड़ नहीं, जनता के विद्रोह का डर सता रहा

इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने दावा किया है कि ईरान के नए सुप्रीम लीडर मुजतबा खामेनेई जिंदा हैं, लेकिन उनकी सत्ता पर पकड़ उनके पिता अली खामेनेई जैसी मजबूत नहीं है। CBS न्यूज के शो ‘60 मिनट्स’ को दिए इंटरव्यू में नेतन्याहू ने कहा कि मुजतबा किसी बंकर या गुप्त जगह पर छिपे हुए हैं और वहीं से सत्ता संभालने की कोशिश कर रहे हैं। नेतन्याहू ने कहा कि ईरान इस समय 1979 की इस्लामिक क्रांति के बाद सबसे कमजोर दौर में है। उनके मुताबिक, शासन के भीतर दरारें बढ़ रही हैं और अलग-अलग गुटों में मतभेद सामने आ रहे हैं। उन्होंने कहा कि कुछ लोग संघर्ष जारी रखना चाहते हैं, जबकि दूसरे लोगों को डर है कि इससे अर्थव्यवस्था टूट जाएगी और जनता सड़कों पर उतर सकती है। नेतन्याहू ने कहा कि ईरानी शासन को सबसे ज्यादा डर अपनी ही जनता से है। उन्होंने दावा किया कि इजराइल और अमेरिका की कार्रवाई के बाद ईरान में विरोध प्रदर्शन बढ़े और लोगों ने शासन के खिलाफ आवाज उठाई। अमेरिका-इजराइल के हमले में घायल हुए थे मुजबता ईरान के नए सुप्रीम लीडर मुजतबा खामेनेई 28 फरवरी को अमेरिका और इजराइल के हमले में घायल हुए थे। इसके बाद से वह गुप्त ठिकाने पर रह रहे हैं और डॉक्टरों की टीम उनका इलाज कर रही है। न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट्स के मुताबिक 28 फरवरी को अमेरिका और इजराइल ने ईरान में अयातुल्ला अली खामेनेई के ठिकाने पर हमला किया था। दावा किया गया है कि उसी हमले में मुजतबा खामेनेई घायल हो गए थे। हमले में अयातुल्ला अली खामेनेई, उनकी पत्नी और बेटे की मौत हो गई थी। बताया गया कि मुजतबा खामेनेई की हालत गंभीर रही है। उनके एक पैर का तीन बार ऑपरेशन किया गया है और अब उन्हें नकली पैर लगाना पड़ सकता है। एक हाथ की भी सर्जरी हुई है और वह धीरे-धीरे ठीक हो रहा है। उनके चेहरे और होंठ बुरी तरह जल गए हैं। इस वजह से उन्हें बोलने में परेशानी हो रही है और आगे प्लास्टिक सर्जरी की जरूरत पड़ सकती है। ईरान के राष्ट्रपति मसूद पजशकियान, जो पेशे से हार्ट सर्जन हैं, और स्वास्थ्य मंत्री भी उनके इलाज में शामिल रहे हैं। रिपोर्ट के मुताबिक बड़े अधिकारी और सेना के कमांडर उनसे मिलने नहीं जाते, क्योंकि उन्हें डर है कि इजराइल उनके जरिए ठिकाने का पता लगा सकता है। नेतन्याहू बोले- ईरान की अर्थव्यवस्था और सैन्य ताकत नुकसान पहुंचा नेतन्याहू ने कहा कि ईरान के खिलाफ हाल की कार्रवाई में पेट्रोकेमिकल प्लांट, स्टील प्लांट और मिसाइल निर्माण से जुड़े कई ठिकानों को निशाना बनाया गया। उनके मुताबिक, इससे ईरान की अर्थव्यवस्था और सैन्य ताकत दोनों को नुकसान पहुंचा है। इंटरव्यू में नेतन्याहू ने कहा कि ईरान के खिलाफ लड़ाई अभी खत्म नहीं हुई है। उनके मुताबिक, ईरान के पास अब भी एनरिच्ड यूरेनियम मौजूद है, कई परमाणु केंद्र सक्रिय हैं और बैलिस्टिक मिसाइल प्रोग्राम पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है। नेतन्याहू ने कहा कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प और इजराइल इस बात पर सहमत हैं कि अगर जरूरत पड़ी तो दोबारा सैन्य कार्रवाई की जा सकती है। हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि अगर आर्थिक दबाव और समझौते से लक्ष्य हासिल हो जाए तो सैन्य कार्रवाई जरूरी नहीं होगी। नेतन्याहू का दावा- हमला नहीं करते तो ईरान एक-दो महीने में परमाणु बना लेता इंटरव्यू में नेतन्याहू ने दावा किया कि अगर इजराइल और अमेरिका ने हाल में कार्रवाई नहीं की होती, तो ईरान एक-दो महीने में परमाणु बम बना सकता था। उन्होंने कहा कि ईरान लंबे समय से परमाणु हथियार और लंबी दूरी की मिसाइलें विकसित करने की कोशिश कर रहा था। नेतन्याहू ने कहा कि ईरान ऐसा देश है, जो खुले तौर पर अमेरिका और इजराइल के विनाश की बात करता है। उनके मुताबिक, ईरान की मिसाइल क्षमता भविष्य में अमेरिका तक हमला करने की स्थिति में पहुंच सकती थी। इसी बीच, नेतन्याहू ने यह भी कहा कि ईरानी शासन का कमजोर होना हिजबुल्लाह, हमास और हूती जैसे संगठनों को भी प्रभावित करेगा। उनके मुताबिक, ये सभी संगठन ईरान के समर्थन पर टिके हैं और अगर तेहरान कमजोर हुआ तो इनकी ताकत भी घटेगी। उन्होंने दावा किया कि युद्ध से पहले हिजबुल्लाह के पास करीब डेढ़ लाख मिसाइलें और रॉकेट थे। इजराइल ने इनमें से 90% से ज्यादा नष्ट कर दिए हैं, लेकिन खतरा अब भी पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है। ईरान की अर्थव्यवस्था और सैन्य ताकत दोनों को नुकसान पहुंचा सोशल मीडिया और अमेरिका में इजराइल की छवि को लेकर पूछे गए सवाल पर नेतन्याहू ने कहा कि कई विदेशी ताकतें बॉट फार्म और फर्जी अकाउंट के जरिए इजराइल विरोधी माहौल बना रही हैं। उन्होंने कहा कि इसका असर खासतौर पर युवा अमेरिकियों पर पड़ा है। नेतन्याहू ने यह भी कहा कि इजराइल आने वाले वर्षों में अमेरिकी सैन्य आर्थिक मदद को धीरे-धीरे खत्म करना चाहता है। उनके मुताबिक, इजराइल अब मदद लेने वाले देश की बजाय अमेरिका का बराबरी वाला साझेदार बनना चाहता है। उन्होंने कहा कि अगले 10 साल में अमेरिकी सैन्य सहायता को शून्य तक लाने की योजना बनाई जा सकती है। साथ ही इजराइल खुफिया जानकारी, तकनीक और मिसाइल डिफेंस जैसे क्षेत्रों में अमेरिका के साथ साझेदारी बढ़ाना चाहता है।

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