Tuesday, 15 Sep 2026 | 09:40 AM

Trending :

EXCLUSIVE

TCS Nashik Sexual Harassment, POSH Non-Compliance

TCS Nashik Sexual Harassment, POSH Non-Compliance

नई दिल्ली2 मिनट पहले

  • कॉपी लिंक

TCS की नासिक यूनिट से जुड़े सेक्सुअल हैरेसमेंट और जबरन धर्म परिवर्तन के आरोपी।

नेशनल कमीशन फॉर वीमेन (NCW) ने टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (TCS) के नासिक ऑफिस में व्यापक यौन उत्पीड़न, सिस्टमेटिक बुलिंग और POSH कानून के शून्य पालन की बात कही। यह निष्कर्ष फैक्ट-फाइंडिंग रिपोर्ट में सामने आया। रिपोर्ट 8 मई को महाराष्ट्र के CM देवेंद्र फडणवीस को सौंपी गई।

रिपोर्ट में कहा गया कि कई महिलाएं शिकायत करना चाहती थीं, लेकिन डर, सामाजिक बदनामी और भरोसेमंद सिस्टम की कमी से आगे नहीं आईं। आवाज उठाने वालों को ट्रांसफर या नौकरी जाने का डर दिखाया जाता था।

NCW ने मामले में खुद संज्ञान लिया था। इसके बाद चेयरपर्सन विजया राहतकर के निर्देश पर कमेटी बनाई गई, जिसने 18-19 अप्रैल को नासिक जाकर जांच की।

नासिक ऑफिस का माहौल टॉक्सिक था

कमेटी में बॉम्बे हाईकोर्ट की रिटायर्ड जज जस्टिस साधना जाधव, हरियाणा के पूर्व DGP बीके सिन्हा, सुप्रीम कोर्ट की वकील मोनिका अरोड़ा और NCW की सीनियर कोऑर्डिनेटर लीलाबती शामिल थीं। टीम ने पीड़ितों, POSH कमेटी, पुलिस और अन्य लोगों से बातचीत कर 50 पेज से ज्यादा की रिपोर्ट तैयार की।

रिपोर्ट में कहा गया कि नासिक ऑफिस का माहौल गंभीर रूप से परेशान करने वाला और टॉक्सिक था। इसमें सत्ता का दुरुपयोग, यौन उत्पीड़न और मानसिक दबाव के मामले सामने आए। आरोपी युवा और कमजोर महिला कर्मचारियों को निशाना बनाते थे और उनके साथ यौन, मानसिक और भावनात्मक उत्पीड़न करते थे।

महिलाओं पर दबाव बनाया गया

कमेटी ने कहा कि कई मामलों में छेड़छाड़ की कोशिशें हुईं। इसे वर्कप्लेस पर यौन उत्पीड़न का सामान्य उदाहरण बताया गया, जहां महिलाओं को बुलिंग, स्टॉकिंग और अपमानजनक व्यवहार झेलना पड़ा और उन्हें लगातार मानसिक तनाव हुआ।

रिपोर्ट में धार्मिक टिप्पणियों का भी जिक्र है। आरोप है कि महिला कर्मचारियों को हिंदू धर्म, परंपराओं और मान्यताओं को नीचा दिखाकर परेशान किया जाता था। उनके सामने इस्लाम को बेहतर धर्म बताया जाता था, जिससे दबाव वाला माहौल बनता था।

रिपोर्ट के अनुसार आरोपी बार-बार धार्मिक टिप्पणी कर महिलाओं पर दबाव बनाते थे। इससे खासतौर पर युवा कर्मचारियों पर असर पड़ा, जिन्हें ज्यादा असुरक्षित बताया गया।

कमेटी ने आरोप लगाया कि नासिक ऑफिस पर प्रभावी नियंत्रण डेनिश, तौसीफ और रजा मेमन के पास था, जबकि अश्विनी चैनानी ने “चुप्पी और असंवेदनशीलता” के जरिए इन्हें बढ़ावा दिया।

सुरक्षा व्यवस्था पर भी गंभीर सवाल उठे। रिपोर्ट में कहा गया कि ऑफिस में लगे CCTV कैमरे काम नहीं कर रहे थे, जिससे निगरानी में बड़ी कमी सामने आई।

पुणे और नासिक ऑफिस के लिए एक ही इंटरनल कमेटी

  • रिपोर्ट में POSH कानून के पालन को “शून्य अनुपालन” बताया गया। कहा गया कि पुणे और नासिक ऑफिस के लिए एक ही इंटरनल कमेटी (IC) बनाई गई थी, जो नियमों के खिलाफ है। कोई IC सदस्य नासिक ऑफिस का निरीक्षण करने नहीं गया था।
  • यह पाया गया कि कर्मचारियों को POSH कानून की जानकारी देने के लिए कोई बोर्ड, पोस्टर या जागरूकता सामग्री नहीं थी। न कर्मचारियों के लिए ट्रेनिंग हुई और न IC सदस्यों के लिए ओरिएंटेशन प्रोग्राम हुआ।
  • कमेटी ने POSH कमेटी के रवैये पर सवाल उठाए और कहा कि उनमें महिला कर्मचारियों के प्रति संवेदनशीलता की कमी थी। उन्होंने धारा 19(C) के तहत जरूरी ट्रेनिंग और जागरूकता कार्यक्रम नहीं कराए।

रिपोर्ट में कहा गया कि यह सिर्फ नियमों की अनदेखी नहीं, बल्कि “गवर्नेंस की भी कमी” है। कमेटी ने सुझाव दिया कि POSH कानून की धारा 19, 25 और 26 का सख्ती से पालन हो और हर ऑफिस में मजबूत रोकथाम और शिकायत व्यवस्था हो। ——————————————————-

ये खबर भी पढ़ें:

नासिक TCS केस की आरोपी निदा को अग्रिम जमानत नहीं:प्रॉसिक्यूशन ने कोर्ट में कहा, आरोप गंभीर; कस्टडी में पूछताछ करना जरूरी

नासिक कोर्ट ने शनिवार को TCS की नासिक यूनिट से जुड़े सेक्सुअल हैरेसमेंट और जबरन धर्म परिवर्तन के मामले में आरोपी निदा खान की एंटीसिपेटरी बेल याचिका खारिज कर दी। प्रॉसिक्यूशन ने कोर्ट में कहा कि आरोप गंभीर हैं और उनसे कस्टडी में पूछताछ जरूरी है। निदा अब तक फरार है। पढ़ें पूरी खबर…

खबरें और भी हैं…
WhatsApp
Facebook
Twitter
LinkedIn

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

लेटेस्ट टॉप अपडेट

सच्चाई की दहाड़

ब्रेकिंग खबरें सीधे अपने ईमेल पर पाने के लिए रजिस्टर करें।

You have been successfully Subscribed! Ops! Something went wrong, please try again.

ग्लोबल करेंसी अपडेट

Provided by IFC Markets
Randeep Hooda Farmer Look | Sampla Mandi Viral Video

April 15, 2026/
11:56 am

सांपला की अनाज मंडी में बॉलीवुड एक्टर रणदीप हुड्‌डा। बॉलीवुड एक्टर रणदीप हुड्डा रोहतक में देसी अंदाज में नजर आए।...

चुनाव परिणाम 2026 लाइव अपडेट: एबीपी न्यूज के पास बंगाल के राष्ट्रपति भवन की सूची, जानें कौन-कौन बन सकता है मंत्री

May 7, 2026/
8:39 am

टीएमसी (टीएमसी) ने रविवार रात कोलकाता के उत्तरी बाहरी इलाके में भाजपा नेता शुभेंदु अधिकारी के निजी सहायक चंद्रनाथ रथ...

भारतीयों के खिलाफ नस्लीय टिप्पणी पर अमेरिकी विदेश मंत्री निराश:कहा- हर देश में कुछ बेवकूफ लोग होते हैं, वे अमेरिका के नुमाइंदे नहीं

May 24, 2026/
3:50 pm

अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो ने रविवार को अमेरिका में भारतीयों के खिलाफ नस्लीय टिप्पणियों और भेदभाव के सवाल पर...

'यह हमारे लिए बहुत बड़ा सम्मान है':वेब सीरीज ‘फौदा’ के क्रिएटर लियोर राज ने पीएम मोदी से मुलाकात को बताया खास पल

February 27, 2026/
1:51 pm

मशहूर वेब सीरीज ‘फौदा’ के क्रिएटर लियोर राज ने शुक्रवार को इजराइल के यरुशलम में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात...

विधानसभा चुनाव 2026 वोटिंग लाइव अपडेट: तमिलनाडु, पश्चिम बंगाल में सुबह 7 बजे मतदान शुरू

April 23, 2026/
7:01 am

चुनाव 2026 पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु वोटिंग लाइव अपडेट: तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल में 2026 विधानसभा चुनाव के लिए कई निर्वाचन...

मैग्मा जनरल इंश्योरेंस कंपनी को पतंजलि ग्रुप खरीदेगा:IRDAI से मंजूरी मिली, मार्च 2025 में हुई थी डील; 3 महीने में पूरी होगी प्रोसेस

July 30, 2026/
11:55 am

पतंजलि आयुर्वेद और धर्मपाल सत्यपाल ग्रुप को मैग्मा जनरल इंश्योरेंस में हिस्सेदारी खरीदने के लिए बीमा नियामक IRDAI से मंजूरी...

छतरपुर में आंधी-बारिश से भीगा खुले में रखा अनाज:किसानों को नुकसान; अगले दो दिन और बारिश की चेतावनी

April 30, 2026/
6:47 pm

छतरपुर जिले में गुरुवार को अचानक बदले मौसम ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है। तेज आंधी और झमाझम बारिश...

जॉब - शिक्षा

राजनीति

TCS Nashik Sexual Harassment, POSH Non-Compliance

TCS Nashik Sexual Harassment, POSH Non-Compliance

नई दिल्ली2 मिनट पहले

  • कॉपी लिंक

TCS की नासिक यूनिट से जुड़े सेक्सुअल हैरेसमेंट और जबरन धर्म परिवर्तन के आरोपी।

नेशनल कमीशन फॉर वीमेन (NCW) ने टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (TCS) के नासिक ऑफिस में व्यापक यौन उत्पीड़न, सिस्टमेटिक बुलिंग और POSH कानून के शून्य पालन की बात कही। यह निष्कर्ष फैक्ट-फाइंडिंग रिपोर्ट में सामने आया। रिपोर्ट 8 मई को महाराष्ट्र के CM देवेंद्र फडणवीस को सौंपी गई।

रिपोर्ट में कहा गया कि कई महिलाएं शिकायत करना चाहती थीं, लेकिन डर, सामाजिक बदनामी और भरोसेमंद सिस्टम की कमी से आगे नहीं आईं। आवाज उठाने वालों को ट्रांसफर या नौकरी जाने का डर दिखाया जाता था।

NCW ने मामले में खुद संज्ञान लिया था। इसके बाद चेयरपर्सन विजया राहतकर के निर्देश पर कमेटी बनाई गई, जिसने 18-19 अप्रैल को नासिक जाकर जांच की।

नासिक ऑफिस का माहौल टॉक्सिक था

कमेटी में बॉम्बे हाईकोर्ट की रिटायर्ड जज जस्टिस साधना जाधव, हरियाणा के पूर्व DGP बीके सिन्हा, सुप्रीम कोर्ट की वकील मोनिका अरोड़ा और NCW की सीनियर कोऑर्डिनेटर लीलाबती शामिल थीं। टीम ने पीड़ितों, POSH कमेटी, पुलिस और अन्य लोगों से बातचीत कर 50 पेज से ज्यादा की रिपोर्ट तैयार की।

रिपोर्ट में कहा गया कि नासिक ऑफिस का माहौल गंभीर रूप से परेशान करने वाला और टॉक्सिक था। इसमें सत्ता का दुरुपयोग, यौन उत्पीड़न और मानसिक दबाव के मामले सामने आए। आरोपी युवा और कमजोर महिला कर्मचारियों को निशाना बनाते थे और उनके साथ यौन, मानसिक और भावनात्मक उत्पीड़न करते थे।

महिलाओं पर दबाव बनाया गया

कमेटी ने कहा कि कई मामलों में छेड़छाड़ की कोशिशें हुईं। इसे वर्कप्लेस पर यौन उत्पीड़न का सामान्य उदाहरण बताया गया, जहां महिलाओं को बुलिंग, स्टॉकिंग और अपमानजनक व्यवहार झेलना पड़ा और उन्हें लगातार मानसिक तनाव हुआ।

रिपोर्ट में धार्मिक टिप्पणियों का भी जिक्र है। आरोप है कि महिला कर्मचारियों को हिंदू धर्म, परंपराओं और मान्यताओं को नीचा दिखाकर परेशान किया जाता था। उनके सामने इस्लाम को बेहतर धर्म बताया जाता था, जिससे दबाव वाला माहौल बनता था।

रिपोर्ट के अनुसार आरोपी बार-बार धार्मिक टिप्पणी कर महिलाओं पर दबाव बनाते थे। इससे खासतौर पर युवा कर्मचारियों पर असर पड़ा, जिन्हें ज्यादा असुरक्षित बताया गया।

कमेटी ने आरोप लगाया कि नासिक ऑफिस पर प्रभावी नियंत्रण डेनिश, तौसीफ और रजा मेमन के पास था, जबकि अश्विनी चैनानी ने “चुप्पी और असंवेदनशीलता” के जरिए इन्हें बढ़ावा दिया।

सुरक्षा व्यवस्था पर भी गंभीर सवाल उठे। रिपोर्ट में कहा गया कि ऑफिस में लगे CCTV कैमरे काम नहीं कर रहे थे, जिससे निगरानी में बड़ी कमी सामने आई।

पुणे और नासिक ऑफिस के लिए एक ही इंटरनल कमेटी

  • रिपोर्ट में POSH कानून के पालन को “शून्य अनुपालन” बताया गया। कहा गया कि पुणे और नासिक ऑफिस के लिए एक ही इंटरनल कमेटी (IC) बनाई गई थी, जो नियमों के खिलाफ है। कोई IC सदस्य नासिक ऑफिस का निरीक्षण करने नहीं गया था।
  • यह पाया गया कि कर्मचारियों को POSH कानून की जानकारी देने के लिए कोई बोर्ड, पोस्टर या जागरूकता सामग्री नहीं थी। न कर्मचारियों के लिए ट्रेनिंग हुई और न IC सदस्यों के लिए ओरिएंटेशन प्रोग्राम हुआ।
  • कमेटी ने POSH कमेटी के रवैये पर सवाल उठाए और कहा कि उनमें महिला कर्मचारियों के प्रति संवेदनशीलता की कमी थी। उन्होंने धारा 19(C) के तहत जरूरी ट्रेनिंग और जागरूकता कार्यक्रम नहीं कराए।

रिपोर्ट में कहा गया कि यह सिर्फ नियमों की अनदेखी नहीं, बल्कि “गवर्नेंस की भी कमी” है। कमेटी ने सुझाव दिया कि POSH कानून की धारा 19, 25 और 26 का सख्ती से पालन हो और हर ऑफिस में मजबूत रोकथाम और शिकायत व्यवस्था हो। ——————————————————-

ये खबर भी पढ़ें:

नासिक TCS केस की आरोपी निदा को अग्रिम जमानत नहीं:प्रॉसिक्यूशन ने कोर्ट में कहा, आरोप गंभीर; कस्टडी में पूछताछ करना जरूरी

नासिक कोर्ट ने शनिवार को TCS की नासिक यूनिट से जुड़े सेक्सुअल हैरेसमेंट और जबरन धर्म परिवर्तन के मामले में आरोपी निदा खान की एंटीसिपेटरी बेल याचिका खारिज कर दी। प्रॉसिक्यूशन ने कोर्ट में कहा कि आरोप गंभीर हैं और उनसे कस्टडी में पूछताछ जरूरी है। निदा अब तक फरार है। पढ़ें पूरी खबर…

खबरें और भी हैं…
WhatsApp
Facebook
Twitter
LinkedIn

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

जॉब - शिक्षा

हेल्थ & फिटनेस

विज्ञापन

राजनीति

लेटेस्ट टॉप अपडेट

ग्लोबल करेंसी अपडेट

Provided by IFC Markets

Live Cricket

सच्चाई की दहाड़

ब्रेकिंग खबरें सीधे अपने ईमेल पर पाने के लिए रजिस्टर करें।

You have been successfully Subscribed! Ops! Something went wrong, please try again.