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पीएम की बचत की अपील,महाराष्ट्र के मंत्री फ्रांस नहीं जाएंगे:कांस फिल्म फेस्टिवल में हिस्सा लेना था; सरकार बोली- पेट्रोल-डीजल की कमी नहीं

पीएम की बचत की अपील,महाराष्ट्र के मंत्री फ्रांस नहीं जाएंगे:कांस फिल्म फेस्टिवल में हिस्सा लेना था; सरकार बोली- पेट्रोल-डीजल की कमी नहीं

पीएम नरेंद्र मोदी लगातार दो दिन लोगों से ईंधन और संसाधनों का कम इस्तेमाल करने की अपील कर चुके हैं। उन्होंने कहा कि जहां संभव हो पेट्रोल डीजल का उपयोग कम करें और मेट्रो, इलेक्ट्रिक बस और पब्लिक ट्रांसपोर्ट का उपयोग करें। विदेशी यात्राओं से बचें। इसे देखते हुए महाराष्ट्र सरकार में मंत्री आशीष सेलार ने सोमवार को ऐलान किया कि वे इस साल फ्रांस में होने वाले कांस फिल्म फेस्टिवल में शामिल नहीं होंगे। पीएम मोदी ने 10 मई को तेलंगाना के हैदराबाद और फिर 11 मई को गुजरात के वडोदरा में जनसभा को संबोधित करते हुए बचत की बात कही थीं। वडोदरा में मोदी ने कहा कि जैसे देश ने मिलकर कोरोना संकट का सामना किया था, वैसे ही मौजूदा संकट से भी देश बाहर निकल जाएगा। शेलार बोले- विभाग के खर्च कम किए जा रहे हैं आशीष शेलार ने कहा कि इन चुनौतीपूर्ण समय में राष्ट्रीय हितों को सबसे ऊपर रखते हुए विभागीय खर्च में संयम बरतने का फैसला लिया गया है। राज्य के सांस्कृतिक मामलों, इलेक्ट्रॉनिक्स, आईटी और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस मंत्री ने कहा कि वर्चुअल प्लेटफॉर्म के जरिए मीटिंग की जाएंगी। हालांकि, शेलार ने कहा कि सरकारी तंत्र कांस फिल्म फेस्टिवल में हिस्सा ले रही मराठी फिल्मों के लिए जरूरी तालमेल जारी रखेगा। मराठी सिनेमा को बढ़ावा देने के लिए जहां भी ज़रूरी होगा, वे ऑनलाइन हिस्सा लेंगे। 11 मई: वडोदरा में मोदी बोले- पब्लिक ट्रांसपोर्ट का उपयोग करें 10 मई: हैदराबाद में पीएम बोले- विदेश यात्रा को टाल दें सरकार ने कहा- पेट्रोल-डीजल और LPG की कमी नहीं पश्चिम एशिया में चल रहे संकट के बीच सरकार ने देश में ईंधन की कमी की खबरों को खारिज किया है। सरकार ने सोमवार को नागरिकों को आश्वासन दिया कि देश में पेट्रोल, डीजल या LPG की कोई कमी नहीं है। यह बयान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की रविवार को ईंधन पर निर्भरता कम करने और बचत करने की अपील के एक दिन बाद आया है। पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय की संयुक्त सचिव सुजाता शर्मा ने कहा कि पश्चिम एशिया संकट के कारण ग्लोबल एनर्जी सप्लाई में रुकावट जरूर आई है और अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतों में उतार-चढ़ाव देखा जा रहा है। हालांकि, भारत सरकार ने आम उपभोक्ताओं को बिना किसी असुविधा के ईंधन की सप्लाई सुनिश्चित करने के लिए कई प्रभावी कदम उठाए हैं। 7 सवाल-जवाब; 60 दिनों का तेल-गैस है, फिर भी कम खर्चें 1. देश के पास कितना भंडार है?
विशाखापत्तनम, मंगलुरु और पादुर में भूमिगत भंडारण में 5.33 MMT (मिलियन मीट्रिक टन) कच्चा तेल रखने की क्षमता है। अभी यह लगभग 64% (3.37 MMT) भरा है, जो करीब 9.5 दिनों की जरूरत पूरी कर सकता है। अगर तेल कंपनियों के स्टॉक और रणनीतिक भंडार को मिला दिया जाए, तो अभी कुल 60 दिनों का कच्चा तेल, 60 दिनों की प्राकृतिक गैस और 45 दिनों की एलपीजी है। 2. पर्याप्त स्टॉक कितना होता है?
अंतर्राष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी के मानकों के अनुसार, देशों को कम से कम 90 दिनों के आयात के बराबर भंडार रखना चाहिए। भारत इस लक्ष्य से थोड़ा पीछे है, पर 60-74 दिनों का बैकअप सुरक्षित स्तर माना जाता है। 3. फिर ईंधन में किफायत क्यों?
पीएम की अपील का मकसद तेल की कमी नहीं, बल्कि डॉलर की बचत है। भारत अपनी जरूरत का 88% कच्चा तेल विदेश से खरीदता है जिसके लिए डॉलर में भुगतान करना पड़ता है। जंग से तेल महंगा हो गया है, जिससे देश का विदेशी मुद्रा भंडार घट रहा है। 4. अगले ही दिन सफाई क्यों दी?
पीएम मोदी के ‘बचत’ वाले बयान के बाद जनता में पैनिक बाइंग (घबराहट में खरीदारी) शुरू हो गई थी। लोगों को लगा कि शायद लॉकडाउन जैसा कुछ होने वाला है या पेट्रोल पंप सूख जाएंगे। यह डर दूर करने के लिए बताना पड़ा कि अभी भरपूर स्टॉक है। 5. देश रोज कितना तेल इस्तेमाल करता है, उस पर कितना खर्च है?
भारत में रोज करीब 50 लाख बैरल कच्चे तेल की खपत होती है। जंग से पहले हम रोजाना $33 करोड़ (करीब 3141 करोड़ रु.) खर्च करते थे, जो अब $50 करोड़ (करीब 4,760 करोड़) हो गया है। यानी रोज 1619 करोड़ रुपए अतिरिक्त खर्च हो रहे हैं। 6. क्या पेट्रोल-डीजल महंगे होंगे?
एक्सपर्ट कहते हैं कि तेल कंपनियों का घाटे कम करने के लिए 15 मई के आसपास पेट्रोल और डीजल की कीमतों में ₹4 से ₹5 प्रति लीटर की बढ़ोतरी हो सकती है। LPG सिलेंडर के दाम भी ₹50 रु. तक बढ़ सकते हैं। 7. क्या पहले ऐसा संकट आया?
सबसे बड़ा संकट 1991 में आया था, तब भारत के पास तेल स्टॉक करने का कोई साधन ही उपलब्ध नहीं था। साल 2021-22 में कोरोनाकाल के दौरान भी रणनीतिक भंडार काफी घट गया था।

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पीएम की बचत की अपील,महाराष्ट्र के मंत्री फ्रांस नहीं जाएंगे:कांस फिल्म फेस्टिवल में हिस्सा लेना था; सरकार बोली- पेट्रोल-डीजल की कमी नहीं

पीएम की बचत की अपील,महाराष्ट्र के मंत्री फ्रांस नहीं जाएंगे:कांस फिल्म फेस्टिवल में हिस्सा लेना था; सरकार बोली- पेट्रोल-डीजल की कमी नहीं

पीएम नरेंद्र मोदी लगातार दो दिन लोगों से ईंधन और संसाधनों का कम इस्तेमाल करने की अपील कर चुके हैं। उन्होंने कहा कि जहां संभव हो पेट्रोल डीजल का उपयोग कम करें और मेट्रो, इलेक्ट्रिक बस और पब्लिक ट्रांसपोर्ट का उपयोग करें। विदेशी यात्राओं से बचें। इसे देखते हुए महाराष्ट्र सरकार में मंत्री आशीष सेलार ने सोमवार को ऐलान किया कि वे इस साल फ्रांस में होने वाले कांस फिल्म फेस्टिवल में शामिल नहीं होंगे। पीएम मोदी ने 10 मई को तेलंगाना के हैदराबाद और फिर 11 मई को गुजरात के वडोदरा में जनसभा को संबोधित करते हुए बचत की बात कही थीं। वडोदरा में मोदी ने कहा कि जैसे देश ने मिलकर कोरोना संकट का सामना किया था, वैसे ही मौजूदा संकट से भी देश बाहर निकल जाएगा। शेलार बोले- विभाग के खर्च कम किए जा रहे हैं आशीष शेलार ने कहा कि इन चुनौतीपूर्ण समय में राष्ट्रीय हितों को सबसे ऊपर रखते हुए विभागीय खर्च में संयम बरतने का फैसला लिया गया है। राज्य के सांस्कृतिक मामलों, इलेक्ट्रॉनिक्स, आईटी और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस मंत्री ने कहा कि वर्चुअल प्लेटफॉर्म के जरिए मीटिंग की जाएंगी। हालांकि, शेलार ने कहा कि सरकारी तंत्र कांस फिल्म फेस्टिवल में हिस्सा ले रही मराठी फिल्मों के लिए जरूरी तालमेल जारी रखेगा। मराठी सिनेमा को बढ़ावा देने के लिए जहां भी ज़रूरी होगा, वे ऑनलाइन हिस्सा लेंगे। 11 मई: वडोदरा में मोदी बोले- पब्लिक ट्रांसपोर्ट का उपयोग करें 10 मई: हैदराबाद में पीएम बोले- विदेश यात्रा को टाल दें सरकार ने कहा- पेट्रोल-डीजल और LPG की कमी नहीं पश्चिम एशिया में चल रहे संकट के बीच सरकार ने देश में ईंधन की कमी की खबरों को खारिज किया है। सरकार ने सोमवार को नागरिकों को आश्वासन दिया कि देश में पेट्रोल, डीजल या LPG की कोई कमी नहीं है। यह बयान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की रविवार को ईंधन पर निर्भरता कम करने और बचत करने की अपील के एक दिन बाद आया है। पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय की संयुक्त सचिव सुजाता शर्मा ने कहा कि पश्चिम एशिया संकट के कारण ग्लोबल एनर्जी सप्लाई में रुकावट जरूर आई है और अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतों में उतार-चढ़ाव देखा जा रहा है। हालांकि, भारत सरकार ने आम उपभोक्ताओं को बिना किसी असुविधा के ईंधन की सप्लाई सुनिश्चित करने के लिए कई प्रभावी कदम उठाए हैं। 7 सवाल-जवाब; 60 दिनों का तेल-गैस है, फिर भी कम खर्चें 1. देश के पास कितना भंडार है?
विशाखापत्तनम, मंगलुरु और पादुर में भूमिगत भंडारण में 5.33 MMT (मिलियन मीट्रिक टन) कच्चा तेल रखने की क्षमता है। अभी यह लगभग 64% (3.37 MMT) भरा है, जो करीब 9.5 दिनों की जरूरत पूरी कर सकता है। अगर तेल कंपनियों के स्टॉक और रणनीतिक भंडार को मिला दिया जाए, तो अभी कुल 60 दिनों का कच्चा तेल, 60 दिनों की प्राकृतिक गैस और 45 दिनों की एलपीजी है। 2. पर्याप्त स्टॉक कितना होता है?
अंतर्राष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी के मानकों के अनुसार, देशों को कम से कम 90 दिनों के आयात के बराबर भंडार रखना चाहिए। भारत इस लक्ष्य से थोड़ा पीछे है, पर 60-74 दिनों का बैकअप सुरक्षित स्तर माना जाता है। 3. फिर ईंधन में किफायत क्यों?
पीएम की अपील का मकसद तेल की कमी नहीं, बल्कि डॉलर की बचत है। भारत अपनी जरूरत का 88% कच्चा तेल विदेश से खरीदता है जिसके लिए डॉलर में भुगतान करना पड़ता है। जंग से तेल महंगा हो गया है, जिससे देश का विदेशी मुद्रा भंडार घट रहा है। 4. अगले ही दिन सफाई क्यों दी?
पीएम मोदी के ‘बचत’ वाले बयान के बाद जनता में पैनिक बाइंग (घबराहट में खरीदारी) शुरू हो गई थी। लोगों को लगा कि शायद लॉकडाउन जैसा कुछ होने वाला है या पेट्रोल पंप सूख जाएंगे। यह डर दूर करने के लिए बताना पड़ा कि अभी भरपूर स्टॉक है। 5. देश रोज कितना तेल इस्तेमाल करता है, उस पर कितना खर्च है?
भारत में रोज करीब 50 लाख बैरल कच्चे तेल की खपत होती है। जंग से पहले हम रोजाना $33 करोड़ (करीब 3141 करोड़ रु.) खर्च करते थे, जो अब $50 करोड़ (करीब 4,760 करोड़) हो गया है। यानी रोज 1619 करोड़ रुपए अतिरिक्त खर्च हो रहे हैं। 6. क्या पेट्रोल-डीजल महंगे होंगे?
एक्सपर्ट कहते हैं कि तेल कंपनियों का घाटे कम करने के लिए 15 मई के आसपास पेट्रोल और डीजल की कीमतों में ₹4 से ₹5 प्रति लीटर की बढ़ोतरी हो सकती है। LPG सिलेंडर के दाम भी ₹50 रु. तक बढ़ सकते हैं। 7. क्या पहले ऐसा संकट आया?
सबसे बड़ा संकट 1991 में आया था, तब भारत के पास तेल स्टॉक करने का कोई साधन ही उपलब्ध नहीं था। साल 2021-22 में कोरोनाकाल के दौरान भी रणनीतिक भंडार काफी घट गया था।

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