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अल-सल्वाडोर के तानाशाह का ‘ठोक दो’ मॉडल:हत्या दर 104 से घटकर 1.9 पर आई; अब 12 साल के बच्चों को भी उम्रकैद

अल-सल्वाडोर के तानाशाह का ‘ठोक दो’ मॉडल:हत्या दर 104 से घटकर 1.9 पर आई; अब 12 साल के बच्चों को भी उम्रकैद

कभी दुनिया की ‘मर्डर कैपिटल’ कहे जाने वाले लैटिन अमेरिकी देश अल सल्वाडोर की सड़कों पर आज बच्चे रात को बेखौफ फुटबॉल खेलते हैं। यह बदलाव मुमकिन हुआ 44 वर्षीय राष्ट्रपति नाएब बुकेले के कारण, जिन्हें उनके प्रशंसक ‘मसीहा’ और विरोधी ‘क्रूर तानाशाह’ कहते हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प भी उनकी तारीफ करते रहे हैं और वाइट हाउस में बुला भी चुके हैं। बुकेले ने अपनी 92% लोकप्रियता के दम पर देश को अमेरिका से भी अधिक सुरक्षित बनाया है, लेकिन कीमत लोकतंत्र चुका रहा है। 64 लाख आबादी के साथ अल साल्वाडोर दुनिया का वह देश है, जहां 1.9% लोग (हर 50 में से 1 शख्स) जेलों में कैद हैं। लोकतंत्र को ताक पर रखने वाला दुनिया का अनोखा प्रयोग बुकेले ने खुद को एक्स पर ‘दुनिया का सबसे कूल तानाशाह’ घोषित किया था। उनके ‘ठोक दो’ मॉडल का नतीजा यह है कि देश में 2015 में हत्या दर 104 थी, जो 2026 में घटकर महज 1.9 (प्रति एक लाख) रह गई है। विशेषज्ञों का सवाल है कि क्या बिना निष्पक्ष जांच और मानवाधिकारों के मिली यह ‘शांति’ लंबे समय तक टिक पाएगी? फिलहाल, बुकेले की उल्टी टोपी और सख्त लहजा लैटिन अमेरिका की राजनीति का सबसे शक्तिशाली ‘ब्रांड’ बन चुका है। सुरक्षा की चमक के पीछे सिसकते परिवार 25 मार्च 2022 को शुक्रवार की सुबह अल-सल्वाडोर की सड़कों पर लाशें बिछी थीं। सिर्फ एक दिन में 62 लोगों की हत्या। 1980 के गृहयुद्ध के बाद सबसे खूनी दिन। यह एमएस-13 गैंग की करतूत थी। गैंग राष्ट्रपति बुकेले के सर्फ सिटी टूरिज्म प्रोजेक्ट को रोकना चाहता था। तीन दिन में 87 लोगों को मार दिया गया। तब राष्ट्रपति बुकेले ने आपातकाल लगाया। संवैधानिक अधिकार खत्म कर दिए। अगले दो हफ्ते में 10,000 से ज्यादा गिरफ्तारियां हुईं। अब बुकेले ने ऐसे कानून को मंजूरी दी है, जिसमें 12 साल तक के बच्चों को भी आजीवन कैद की सजा का प्रावधान है। मानवाधिकार समूहों का कहना है कि हजारों निर्दोष युवा सिर्फ शक के आधार पर जेल की कालकोठरियों में ठूंसे गए हैं, जहां न खिड़की है, न परिवार से मिलने की इजाजत। 30 की क्षमता वाली सेल में 100 कैदी हैं। लेकिन बुकेले इसकी परवाह नहीं करते हैं। बिटकॉइन प्रयोग बुकेले ने 2021 में बिटकॉइन को कानूनी मुद्रा बनाया। ऐसा करने वाला अल-सल्वाडोर दुनिया का पहला देश बना, लेकिन 2025 में आर्थिक अस्थिरता और लोगों के विरोध के चलते इसे वापस लेना पड़ा। ‘बिटकॉइन सिटी’ का सपना अब भी अधूरा है। विश्लेषकों का कहना है, ‘बुकेले ने दिखाया है कि अगर आप जनता को सुरक्षा का अहसास करा दें, तो वे अपने मौलिक अधिकार और प्रेस की आजादी तक कुर्बान करने को तैयार हो जाते हैं।’

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अल-सल्वाडोर के तानाशाह का ‘ठोक दो’ मॉडल:हत्या दर 104 से घटकर 1.9 पर आई; अब 12 साल के बच्चों को भी उम्रकैद

कभी दुनिया की ‘मर्डर कैपिटल’ कहे जाने वाले लैटिन अमेरिकी देश अल सल्वाडोर की सड़कों पर आज बच्चे रात को बेखौफ फुटबॉल खेलते हैं। यह बदलाव मुमकिन हुआ 44 वर्षीय राष्ट्रपति नाएब बुकेले के कारण, जिन्हें उनके प्रशंसक ‘मसीहा’ और विरोधी ‘क्रूर तानाशाह’ कहते हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प भी उनकी तारीफ करते रहे हैं और वाइट हाउस में बुला भी चुके हैं। बुकेले ने अपनी 92% लोकप्रियता के दम पर देश को अमेरिका से भी अधिक सुरक्षित बनाया है, लेकिन कीमत लोकतंत्र चुका रहा है। 64 लाख आबादी के साथ अल साल्वाडोर दुनिया का वह देश है, जहां 1.9% लोग (हर 50 में से 1 शख्स) जेलों में कैद हैं। लोकतंत्र को ताक पर रखने वाला दुनिया का अनोखा प्रयोग बुकेले ने खुद को एक्स पर ‘दुनिया का सबसे कूल तानाशाह’ घोषित किया था। उनके ‘ठोक दो’ मॉडल का नतीजा यह है कि देश में 2015 में हत्या दर 104 थी, जो 2026 में घटकर महज 1.9 (प्रति एक लाख) रह गई है। विशेषज्ञों का सवाल है कि क्या बिना निष्पक्ष जांच और मानवाधिकारों के मिली यह ‘शांति’ लंबे समय तक टिक पाएगी? फिलहाल, बुकेले की उल्टी टोपी और सख्त लहजा लैटिन अमेरिका की राजनीति का सबसे शक्तिशाली ‘ब्रांड’ बन चुका है। सुरक्षा की चमक के पीछे सिसकते परिवार 25 मार्च 2022 को शुक्रवार की सुबह अल-सल्वाडोर की सड़कों पर लाशें बिछी थीं। सिर्फ एक दिन में 62 लोगों की हत्या। 1980 के गृहयुद्ध के बाद सबसे खूनी दिन। यह एमएस-13 गैंग की करतूत थी। गैंग राष्ट्रपति बुकेले के सर्फ सिटी टूरिज्म प्रोजेक्ट को रोकना चाहता था। तीन दिन में 87 लोगों को मार दिया गया। तब राष्ट्रपति बुकेले ने आपातकाल लगाया। संवैधानिक अधिकार खत्म कर दिए। अगले दो हफ्ते में 10,000 से ज्यादा गिरफ्तारियां हुईं। अब बुकेले ने ऐसे कानून को मंजूरी दी है, जिसमें 12 साल तक के बच्चों को भी आजीवन कैद की सजा का प्रावधान है। मानवाधिकार समूहों का कहना है कि हजारों निर्दोष युवा सिर्फ शक के आधार पर जेल की कालकोठरियों में ठूंसे गए हैं, जहां न खिड़की है, न परिवार से मिलने की इजाजत। 30 की क्षमता वाली सेल में 100 कैदी हैं। लेकिन बुकेले इसकी परवाह नहीं करते हैं। बिटकॉइन प्रयोग बुकेले ने 2021 में बिटकॉइन को कानूनी मुद्रा बनाया। ऐसा करने वाला अल-सल्वाडोर दुनिया का पहला देश बना, लेकिन 2025 में आर्थिक अस्थिरता और लोगों के विरोध के चलते इसे वापस लेना पड़ा। ‘बिटकॉइन सिटी’ का सपना अब भी अधूरा है। विश्लेषकों का कहना है, ‘बुकेले ने दिखाया है कि अगर आप जनता को सुरक्षा का अहसास करा दें, तो वे अपने मौलिक अधिकार और प्रेस की आजादी तक कुर्बान करने को तैयार हो जाते हैं।’

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