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Shyam Manav Ups Bounty on Baba Claims

Shyam Manav Ups Bounty on Baba Claims

बागेश्वर धाम के धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री के ‘दिव्य दरबार’ और उनके दावों को लेकर छिड़ा विवाद एक बार फिर गर्मा गया है। अखिल भारतीय अंधश्रद्धा निर्मूलन समिति ने बाबा के चमत्कारों को सिरे से नकारते हुए अब चुनौती की राशि को 30 लाख से बढ़ाकर सीधे 80 लाख रुपए

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समिति के संयोजक श्याम मानव ने इस चुनौती के लिए धीरेंद्र शास्त्री के सामने नागपुर के पत्रकार भवन का प्रस्ताव रखा था, लेकिन बाबा ने साफ कहा है कि जिसे भी परीक्षा लेनी है वो दरबार में आए।

अब जबकि धीरेंद्र शास्त्री नागपुर से लौट आए हैं। श्याम मानव का कहना है कि लगातार दो बार चुनौती स्वीकार करने में वो शास्त्री नाकाम रहे हैं और एक बार फिर भाग गए हैं।

भास्कर ने अंधश्रद्धा निर्मूलन समिति के संयोजक श्याम मानव से बात कर समझा कि आखिर वो क्यों बाबा के दरबार पर सवाल उठा रहे हैं।

चुनौती का नया स्वरूप: शर्तें बाबा की नहीं, विज्ञान की चलेंगी

समिति ने साफ किया था कि इस बार मुकाबला बाबा के ‘दिव्य दरबार’ में नहीं, बल्कि नागपुर के ‘पत्रकार भवन’ में होगा। इसके पीछे समिति का तर्क है कि बाबा के अपने दरबार में जानकारी जुटाने के कई गुप्त तरीके हो सकते हैं, जिन्हें नियंत्रित करना मुश्किल है।

चुनौती की शर्तें अब भी बरकरार

1. निष्पक्ष मैदान: यह परीक्षण केवल नागपुर के पत्रकार भवन में हो सकेगा।

2. कड़ी निगरानी: एक पंच कमेटी बनाई जाएगी, जिसमें बाबा की सहमति भी शामिल होगी। परीक्षण के दौरान बाबा और वहां मौजूद अन्य लोगों के मोबाइल फोन सीलबंद कर दिए जाएंगे।

3. 90% सटीकता का पैमाना: बाबा के सामने अचानक 10 अनजान व्यक्ति लाए जाएंगे। उन्हें उन व्यक्तियों का नाम, उनके पिता का नाम, सरनेम और मोबाइल नंबर बताना होगा। इसके अलावा, पास में रखी 10 वस्तुओं की पहचान अपनी ‘दिव्य दृष्टि’ से करनी होगी।

4. दोहरा परीक्षण: यदि बाबा पहली बार में सफल होते हैं, तो 5 दिन बाद नए लोगों के साथ दोबारा यही प्रक्रिया दोहराई जाएगी। दोनों बार 90 फीसदी सही नतीजे आने पर ही उन्हें 80 लाख का पुरस्कार दिया जाएगा।

धीरेंद्र शास्त्री अपने दरबार में लोगों का पर्चा बनाते हैं। श्याम मानव ने इसे पाखंड बताया है।

धीरेंद्र शास्त्री अपने दरबार में लोगों का पर्चा बनाते हैं। श्याम मानव ने इसे पाखंड बताया है।

44 साल की साख बनाम ‘बाबागिरी’

समिति के संयोजक श्याम मानव ने बेहद आक्रामक रुख अपनाते हुए कहा, “हम पिछले 44 सालों से कह रहे हैं कि इस दुनिया में कोई दिव्य शक्ति नहीं होती। अगर धीरेंद्र शास्त्री खुद को सिद्ध कर देते हैं, तो मैं उनके चरणों में माथा टेक दूंगा, अपनी संस्था बंद कर दूंगा और उनका भक्त बन जाऊंगा।”

समिति ने बाबा के दावों की तुलना आधुनिक तकनीक से करते हुए एक दिलचस्प उदाहरण दिया। उन्होंने कहा कि आज के दौर में एयरपोर्ट पर फेशियल रिकग्निशन (चेहरा पहचानने वाली तकनीक) से भी ऐसा काम होता है। बिना कागज देखे ही इंसान का नाम, पासपोर्ट और बुकिंग की जानकारी मिल जाती है।

‘चुनौती से भाग रहे हैं महाराज’

समिति का ये भी कहना है कि धीरेंद्र शास्त्री कभी भी इस चुनौती को स्वीकार नहीं करेंगे। समिति का आरोप है कि बाबा अपने दरबार में अपने ही लोगों को खड़ा करते हैं और फोटो या अन्य माध्यमों से 5 मिनट में उनकी जानकारी निकाल लेते हैं। समिति ने सवाल उठाया कि जब महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री जैसे बड़े लोग उनके सामने नतमस्तक हो जाते हैं, तो बाबा को किस बात का डर था? आरोप लगाया गया है कि महाराज और समिति दोनों जानते हैं कि उनके पास कोई दिव्य शक्ति नहीं है। वे केवल अंधविश्वास का फायदा उठाकर लोगों को ठग रहे हैं। समिति के अनुसार, “उन्हें पता था कि अगर वे इस निष्पक्ष चुनौती में शामिल हुए, तो उनकी ‘बाबागिरी’ का धंधा बंद हो जाएगा। यही कारण है कि वे एक बार फिर इस चुनौती से भाग खड़े हुए।”

श्याम मानव ने चुनौती पत्र पब्लिश कराके धीरेंद्र शास्त्री की टीम को दिया था।

श्याम मानव ने चुनौती पत्र पब्लिश कराके धीरेंद्र शास्त्री की टीम को दिया था।

तीन साल पहले भी श्याम मानव ने दी थी चुनौती

जनवरी 2023 में धीरेंद्र शास्त्री कथा वाचन करने नागपुर गए थे। उस समय भी श्याम मानव ने उन्हें चुनौती दी थी। चुनौती यह थी कि धीरेंद्र शास्त्री सार्वजनिक रूप से ऐसे 10 लोगों के बारे में सही-सही जानकारी बताएं- जैसे नाम, फोन नंबर और निजी विवरण। ये 10 लोग श्याम मानव की ओर से चुना जाए, न कि बाबा की टीम की ओर से। उन्होंने कहा था कि यदि शास्त्री यह साबित कर दें, तो वे उन्हें 30 लाख रुपए देंगे।

धीरेंद्र शास्त्री ने स्वीकार की चुनौती

उन्होंने चुनौती स्वीकार करते हुए कहा कि कोई भी ‘खुजली’ हो, दरबार में आ जाइए। हमारे पास जो विद्या होगी और जो शक्ति होगी, हम उसका प्रस्तुतिकरण करेंगे। हम जादूगर नहीं हैं। हमें जो ईश्वर प्रेरणा देगा, हम उसी के अनुसार लोगों का मार्गदर्शन करेंगे।

ये खबर भी पढ़ें…

धीरेंद्र शास्त्री बोले- जिसे खुजली हो, दरबार आ जाए

बागेश्वर धाम के पं. धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री नागपुर के रेशम बाग में 26 से 30 अप्रैल तक श्रीराम कथा कर रहे हैं। इस दौरान धीरेंद्र शास्त्री और अंधश्रद्धा निर्मूलन समिति के श्याम मानव के बीच आस्था, अध्यात्म और विज्ञान को लेकर विवाद बढ़ गया है। श्याम मानव ने 80 लाख रुपए की चुनौती दी, जिसे बाबा ने स्वीकार किया। पढ़ें पूरी खबर…

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बागेश्वर धाम के धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री के ‘दिव्य दरबार’ और उनके दावों को लेकर छिड़ा विवाद एक बार फिर गर्मा गया है। अखिल भारतीय अंधश्रद्धा निर्मूलन समिति ने बाबा के चमत्कारों को सिरे से नकारते हुए अब चुनौती की राशि को 30 लाख से बढ़ाकर सीधे 80 लाख रुपए

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समिति के संयोजक श्याम मानव ने इस चुनौती के लिए धीरेंद्र शास्त्री के सामने नागपुर के पत्रकार भवन का प्रस्ताव रखा था, लेकिन बाबा ने साफ कहा है कि जिसे भी परीक्षा लेनी है वो दरबार में आए।

अब जबकि धीरेंद्र शास्त्री नागपुर से लौट आए हैं। श्याम मानव का कहना है कि लगातार दो बार चुनौती स्वीकार करने में वो शास्त्री नाकाम रहे हैं और एक बार फिर भाग गए हैं।

भास्कर ने अंधश्रद्धा निर्मूलन समिति के संयोजक श्याम मानव से बात कर समझा कि आखिर वो क्यों बाबा के दरबार पर सवाल उठा रहे हैं।

चुनौती का नया स्वरूप: शर्तें बाबा की नहीं, विज्ञान की चलेंगी

समिति ने साफ किया था कि इस बार मुकाबला बाबा के ‘दिव्य दरबार’ में नहीं, बल्कि नागपुर के ‘पत्रकार भवन’ में होगा। इसके पीछे समिति का तर्क है कि बाबा के अपने दरबार में जानकारी जुटाने के कई गुप्त तरीके हो सकते हैं, जिन्हें नियंत्रित करना मुश्किल है।

चुनौती की शर्तें अब भी बरकरार

1. निष्पक्ष मैदान: यह परीक्षण केवल नागपुर के पत्रकार भवन में हो सकेगा।

2. कड़ी निगरानी: एक पंच कमेटी बनाई जाएगी, जिसमें बाबा की सहमति भी शामिल होगी। परीक्षण के दौरान बाबा और वहां मौजूद अन्य लोगों के मोबाइल फोन सीलबंद कर दिए जाएंगे।

3. 90% सटीकता का पैमाना: बाबा के सामने अचानक 10 अनजान व्यक्ति लाए जाएंगे। उन्हें उन व्यक्तियों का नाम, उनके पिता का नाम, सरनेम और मोबाइल नंबर बताना होगा। इसके अलावा, पास में रखी 10 वस्तुओं की पहचान अपनी ‘दिव्य दृष्टि’ से करनी होगी।

4. दोहरा परीक्षण: यदि बाबा पहली बार में सफल होते हैं, तो 5 दिन बाद नए लोगों के साथ दोबारा यही प्रक्रिया दोहराई जाएगी। दोनों बार 90 फीसदी सही नतीजे आने पर ही उन्हें 80 लाख का पुरस्कार दिया जाएगा।

धीरेंद्र शास्त्री अपने दरबार में लोगों का पर्चा बनाते हैं। श्याम मानव ने इसे पाखंड बताया है।

धीरेंद्र शास्त्री अपने दरबार में लोगों का पर्चा बनाते हैं। श्याम मानव ने इसे पाखंड बताया है।

44 साल की साख बनाम ‘बाबागिरी’

समिति के संयोजक श्याम मानव ने बेहद आक्रामक रुख अपनाते हुए कहा, “हम पिछले 44 सालों से कह रहे हैं कि इस दुनिया में कोई दिव्य शक्ति नहीं होती। अगर धीरेंद्र शास्त्री खुद को सिद्ध कर देते हैं, तो मैं उनके चरणों में माथा टेक दूंगा, अपनी संस्था बंद कर दूंगा और उनका भक्त बन जाऊंगा।”

समिति ने बाबा के दावों की तुलना आधुनिक तकनीक से करते हुए एक दिलचस्प उदाहरण दिया। उन्होंने कहा कि आज के दौर में एयरपोर्ट पर फेशियल रिकग्निशन (चेहरा पहचानने वाली तकनीक) से भी ऐसा काम होता है। बिना कागज देखे ही इंसान का नाम, पासपोर्ट और बुकिंग की जानकारी मिल जाती है।

‘चुनौती से भाग रहे हैं महाराज’

समिति का ये भी कहना है कि धीरेंद्र शास्त्री कभी भी इस चुनौती को स्वीकार नहीं करेंगे। समिति का आरोप है कि बाबा अपने दरबार में अपने ही लोगों को खड़ा करते हैं और फोटो या अन्य माध्यमों से 5 मिनट में उनकी जानकारी निकाल लेते हैं। समिति ने सवाल उठाया कि जब महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री जैसे बड़े लोग उनके सामने नतमस्तक हो जाते हैं, तो बाबा को किस बात का डर था? आरोप लगाया गया है कि महाराज और समिति दोनों जानते हैं कि उनके पास कोई दिव्य शक्ति नहीं है। वे केवल अंधविश्वास का फायदा उठाकर लोगों को ठग रहे हैं। समिति के अनुसार, “उन्हें पता था कि अगर वे इस निष्पक्ष चुनौती में शामिल हुए, तो उनकी ‘बाबागिरी’ का धंधा बंद हो जाएगा। यही कारण है कि वे एक बार फिर इस चुनौती से भाग खड़े हुए।”

श्याम मानव ने चुनौती पत्र पब्लिश कराके धीरेंद्र शास्त्री की टीम को दिया था।

श्याम मानव ने चुनौती पत्र पब्लिश कराके धीरेंद्र शास्त्री की टीम को दिया था।

तीन साल पहले भी श्याम मानव ने दी थी चुनौती

जनवरी 2023 में धीरेंद्र शास्त्री कथा वाचन करने नागपुर गए थे। उस समय भी श्याम मानव ने उन्हें चुनौती दी थी। चुनौती यह थी कि धीरेंद्र शास्त्री सार्वजनिक रूप से ऐसे 10 लोगों के बारे में सही-सही जानकारी बताएं- जैसे नाम, फोन नंबर और निजी विवरण। ये 10 लोग श्याम मानव की ओर से चुना जाए, न कि बाबा की टीम की ओर से। उन्होंने कहा था कि यदि शास्त्री यह साबित कर दें, तो वे उन्हें 30 लाख रुपए देंगे।

धीरेंद्र शास्त्री ने स्वीकार की चुनौती

उन्होंने चुनौती स्वीकार करते हुए कहा कि कोई भी ‘खुजली’ हो, दरबार में आ जाइए। हमारे पास जो विद्या होगी और जो शक्ति होगी, हम उसका प्रस्तुतिकरण करेंगे। हम जादूगर नहीं हैं। हमें जो ईश्वर प्रेरणा देगा, हम उसी के अनुसार लोगों का मार्गदर्शन करेंगे।

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धीरेंद्र शास्त्री बोले- जिसे खुजली हो, दरबार आ जाए

बागेश्वर धाम के पं. धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री नागपुर के रेशम बाग में 26 से 30 अप्रैल तक श्रीराम कथा कर रहे हैं। इस दौरान धीरेंद्र शास्त्री और अंधश्रद्धा निर्मूलन समिति के श्याम मानव के बीच आस्था, अध्यात्म और विज्ञान को लेकर विवाद बढ़ गया है। श्याम मानव ने 80 लाख रुपए की चुनौती दी, जिसे बाबा ने स्वीकार किया। पढ़ें पूरी खबर…

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