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Ayurveda for Infertility | धौलपुर आयुर्वेद चिकित्सालय | Rajabeti Ayurveda Hospital

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Dholpur News: धौलपुर का राजाबेटी राजकीय जिला आयुर्वेद चिकित्सालय निसंतान दंपतियों के लिए आशा का केंद्र बना हुआ है. डॉ. गुरप्रीत के मार्गदर्शन में पंचकर्म और प्राचीन औषधियों के जरिए PCOD और ट्यूब ब्लॉकेज जैसी समस्याओं का सफल इलाज किया जा रहा है. अब तक 100 से अधिक दंपतियों को संतान सुख मिल चुका है. आधुनिक इलाज में विफल रहे मरीज अब विदेशों से भी यहां पहुंच रहे हैं. राजस्थान सरकार द्वारा गर्भवती महिलाओं को निशुल्क औषधियां भी प्रदान की जा रही हैं.

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Dholpur News: आज की भागदौड़ भरी जिंदगी और आधुनिक जीवनशैली ने स्वास्थ्य संबंधी कई जटिलताओं को जन्म दिया है, जिनमें निसंतानता (Infertility) एक गंभीर समस्या बनकर उभरी है. जहां लोग लाखों रुपये खर्च कर आईवीएफ (IVF) जैसे महंगे इलाजों का सहारा ले रहे हैं, वहीं राजस्थान के धौलपुर स्थित राजाबेटी राजकीय जिला आयुर्वेद चिकित्सालय एक नई उम्मीद की किरण बनकर सामने आया है. यहां की प्राचीन आयुर्वेदिक पद्धतियों ने उन दंपतियों के जीवन में खुशियां भरी हैं, जो बरसों से संतान सुख के लिए भटक रहे थे.

चिकित्सालय में कार्यरत डॉ. गुरप्रीत के अनुसार, आयुर्वेद न केवल बीमारी को दबाता है बल्कि उसे जड़ से खत्म करता है. यहां कई ऐसे मामले सामने आए हैं जहां महिलाओं ने बड़े शहरों में इलाज कराया लेकिन सफलता नहीं मिली, मगर यहां आयुर्वेदिक उपचार शुरू होने के कुछ ही समय बाद उन्हें सकारात्मक परिणाम मिले. चौंकाने वाली बात यह है कि कुछ मामलों में तो मात्र 9 दिन के उपचार के बाद ही गर्भधारण में सफलता मिली है. इसी सफलता का परिणाम है कि आज यहां राजस्थान के अलावा उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश और विदेशों से भी मरीज पहुंच रहे हैं.

बांझपन के कारणों पर आयुर्वेद का प्रहार
निसंतानता के पीछे कई चिकित्सीय कारण होते हैं. डॉ. गुरप्रीत बताती हैं कि महिलाओं में PCOD, PCOS, बच्चेदानी में गांठ, फैलोपियन ट्यूब का ब्लॉक होना, और मासिक धर्म की अनियमितता प्रमुख समस्याएं हैं. वहीं, पुरुषों में शुक्राणुओं की कमी एक बड़ा कारण है. इन सभी समस्याओं के लिए आयुर्वेद में पंचकर्म चिकित्सा को रामबाण माना गया है.

पंचकर्म और डिटॉक्स का प्रभाव
चिकित्सालय में पंचकर्म के जरिए शरीर का शुद्धिकरण किया जाता है. इसमें स्नेहन, स्वेदन, वमन और विशेष रूप से ‘बस्ती’ प्रक्रिया का उपयोग होता है. ‘बस्ती’ पंचकर्म उन महिलाओं के लिए अत्यंत लाभकारी है जिनकी ट्यूब ब्लॉक होती है या बच्चेदानी में सूजन रहती है. यह प्रक्रिया शरीर को अंदर से डिटॉक्स कर गर्भधारण के लिए अनुकूल बनाती है. अब तक करीब 100 से अधिक निसंतान दंपतियों का सफल इलाज यहां किया जा चुका है, जिससे आयुर्वेद के प्रति लोगों का अटूट विश्वास पैदा हुआ है.

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vicky Rathore

Vicky Rathore (born July 25, 1994) is a multimedia journalist and digital content specialist currently working with News18 Rajasthan. I have over 8 years of experience in digital media, where I specialize in cr…और पढ़ें

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Dholpur News: आज की भागदौड़ भरी जिंदगी और आधुनिक जीवनशैली ने स्वास्थ्य संबंधी कई जटिलताओं को जन्म दिया है, जिनमें निसंतानता (Infertility) एक गंभीर समस्या बनकर उभरी है. जहां लोग लाखों रुपये खर्च कर आईवीएफ (IVF) जैसे महंगे इलाजों का सहारा ले रहे हैं, वहीं राजस्थान के धौलपुर स्थित राजाबेटी राजकीय जिला आयुर्वेद चिकित्सालय एक नई उम्मीद की किरण बनकर सामने आया है. यहां की प्राचीन आयुर्वेदिक पद्धतियों ने उन दंपतियों के जीवन में खुशियां भरी हैं, जो बरसों से संतान सुख के लिए भटक रहे थे.

चिकित्सालय में कार्यरत डॉ. गुरप्रीत के अनुसार, आयुर्वेद न केवल बीमारी को दबाता है बल्कि उसे जड़ से खत्म करता है. यहां कई ऐसे मामले सामने आए हैं जहां महिलाओं ने बड़े शहरों में इलाज कराया लेकिन सफलता नहीं मिली, मगर यहां आयुर्वेदिक उपचार शुरू होने के कुछ ही समय बाद उन्हें सकारात्मक परिणाम मिले. चौंकाने वाली बात यह है कि कुछ मामलों में तो मात्र 9 दिन के उपचार के बाद ही गर्भधारण में सफलता मिली है. इसी सफलता का परिणाम है कि आज यहां राजस्थान के अलावा उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश और विदेशों से भी मरीज पहुंच रहे हैं.

बांझपन के कारणों पर आयुर्वेद का प्रहार
निसंतानता के पीछे कई चिकित्सीय कारण होते हैं. डॉ. गुरप्रीत बताती हैं कि महिलाओं में PCOD, PCOS, बच्चेदानी में गांठ, फैलोपियन ट्यूब का ब्लॉक होना, और मासिक धर्म की अनियमितता प्रमुख समस्याएं हैं. वहीं, पुरुषों में शुक्राणुओं की कमी एक बड़ा कारण है. इन सभी समस्याओं के लिए आयुर्वेद में पंचकर्म चिकित्सा को रामबाण माना गया है.

पंचकर्म और डिटॉक्स का प्रभाव
चिकित्सालय में पंचकर्म के जरिए शरीर का शुद्धिकरण किया जाता है. इसमें स्नेहन, स्वेदन, वमन और विशेष रूप से ‘बस्ती’ प्रक्रिया का उपयोग होता है. ‘बस्ती’ पंचकर्म उन महिलाओं के लिए अत्यंत लाभकारी है जिनकी ट्यूब ब्लॉक होती है या बच्चेदानी में सूजन रहती है. यह प्रक्रिया शरीर को अंदर से डिटॉक्स कर गर्भधारण के लिए अनुकूल बनाती है. अब तक करीब 100 से अधिक निसंतान दंपतियों का सफल इलाज यहां किया जा चुका है, जिससे आयुर्वेद के प्रति लोगों का अटूट विश्वास पैदा हुआ है.

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