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बार-बार हो रही टैनिंग? डॉ. की चेतावनी हो सकता है स्किन कैंसर का शुरुआती लक्षण

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Tanning And Cancer Connetion: लंबे समय तक धूप में काम करना, बार-बार त्वचा जलना, टैनिंग या रेडिएशन के संपर्क में आना त्वचा के कैंसर का कारण बन सकता है. ऐसे में यदि त्वचा पर कोई नया तिल, घाव, खुजली या रंग में बदलाव दिखाई दे, तो तुरंत डॉक्टर से सलाह लें.

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लगातार तेज धूप में रहने और बहुत अधिक टैनिंग होने से त्वचा को धीरे-धीरे नुकसान पहुंचता है. समय के साथ यह नुकसान बढ़ता जाता है और त्वचा से जुड़ी कई समस्याएं पैदा हो सकती हैं. इसमें सनबर्न, समय से पहले झुर्रियां आना, पिगमेंटेशन बढ़ना और यहां तक कि त्वचा का कैंसर होने का भी रिस्क होता है.

पंचशील पार्क स्थित मैक्स मल्टी स्पेशलिटी सेंटर में त्वचा रोग विशेषज्ञ डॉ.नंदिनी बरुआ बताती हैं, कि सूरज से मुख्य रूप से UVA और UVB नाम की किरणें निकलती हैं. ये किरणें त्वचा की ऊपरी सतह के साथ-साथ अंदर की परतों तक भी पहुंच जाती हैं. लंबे समय तक इनके संपर्क में रहने से त्वचा की कोशिकाओं का DNA खराब हो सकता है, जिससे बाद में त्वचा का कैंसर होने का खतरा बढ़ जाता है. हालांकि केवल गर्मी से कैंसर नहीं होता, लेकिन लगातार गर्म वातावरण और इंफ्रारेड रोशनी त्वचा में सूजन और कमजोरी पैदा कर सकती है.

टैनिंग और कैंसर का कनेक्शन

त्वचा में मौजूद मेलानिन UV किरणों को सोखकर त्वचा की गहरी परतों तक नुकसान पहुंचने से रोकता है. यही कारण है कि भारत में त्वचा के कैंसर के मामले कम देखने को मिलते हैं. फिर भी इसका मतलब यह नहीं है कि भारतीयों को यह बीमारी नहीं हो सकती. लंबे समय तक धूप में काम करना, बार-बार त्वचा जलना, टैनिंग या रेडिएशन के संपर्क में आना त्वचा के कैंसर का कारण बन सकता है.

जिन लोगों की त्वचा हल्की होती है, वे धूप में जल्दी जल जाते हैं. ऐसे लोगों में बेसल सेल कार्सिनोमा (BCC), स्क्वैमस सेल कार्सिनोमा (SCC) और मेलानोमा जैसे त्वचा कैंसर का खतरा ज्यादा होता है. BCC आमतौर पर चमकदार उभार या ऐसा घाव होता है जो ठीक नहीं होता. SCC सूखे और पपड़ीदार घाव के रूप में दिखाई देता है. मेलानोमा दुर्लभ लेकिन सबसे खतरनाक कैंसर है क्योंकि यह तेजी से शरीर में फैल सकता है.

पहले माना जाता था कि गहरे रंग की त्वचा वाले लोग पूरी तरह सुरक्षित होते हैं, लेकिन अब पर्यावरण और जीवनशैली में बदलाव के कारण उनमें भी त्वचा संबंधी समस्याएं बढ़ रही हैं. ओजोन परत का कमजोर होना, ग्लोबल वार्मिंग, बाहर खेलने की बढ़ती आदतें और लंबे समय तक धूप में रहना इसके मुख्य कारण हैं.

किसान, मजदूर, ट्रैफिक पुलिसकर्मी, खिलाड़ी और लंबे समय तक बाहर काम करने वाले लोगों में त्वचा को नुकसान होने का खतरा अधिक होता है. जिन लोगों का इम्यून सिस्टम कमजोर हो या परिवार में त्वचा कैंसर का इतिहास हो, उन्हें विशेष सावधानी बरतनी चाहिए.

बचाव के लिए जरूरी उपाय
एक्सपर्ट बताती हैं कि त्वचा को सुरक्षित रखने के लिए रोजाना SPF 30 या उससे अधिक वाला ब्रॉड-स्पेक्ट्रम सनस्क्रीन लगाना जरूरी है. बाहर रहने पर हर 2 से 3 घंटे में सनस्क्रीन दोबारा लगाना चाहिए. साथ ही टोपी, धूप का चश्मा, छाता और पूरी बाजू के कपड़े पहनने चाहिए. सुबह 10 बजे से शाम 4 बजे के बीच तेज धूप में जाने से बचना बेहतर होता है.

पर्याप्त पानी पीना, पौष्टिक भोजन करना और त्वचा की नियमित जांच करवाना भी जरूरी है. यदि त्वचा पर कोई नया तिल, घाव, खुजली या रंग में बदलाव दिखाई दे, तो तुरंत डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए. सही जागरूकता और बचाव से त्वचा को लंबे समय तक स्वस्थ रखा जा सकता है.

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शारदा सिंहSenior Sub Editor

शारदा सिंह मध्यप्रदेश की रहने वाली हैं. उन्होंने माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय, भोपाल से पत्रकारिता के क्षेत्र में अपना सफर शुरू किया. उनके पास डिजिटल मीडिया और लाइफस्टाइल पत्रक…और पढ़ें

Disclaimer: इस खबर में दी गई दवा/औषधि और स्वास्थ्य से जुड़ी सलाह, एक्सपर्ट्स से की गई बातचीत के आधार पर है. यह सामान्य जानकारी है, व्यक्तिगत सलाह नहीं. इसलिए डॉक्टर्स से परामर्श के बाद ही कोई चीज उपयोग करें. Local-18 किसी भी उपयोग से होने वाले नुकसान के लिए जिम्मेदार नहीं होगा.

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पंचशील पार्क स्थित मैक्स मल्टी स्पेशलिटी सेंटर में त्वचा रोग विशेषज्ञ डॉ.नंदिनी बरुआ बताती हैं, कि सूरज से मुख्य रूप से UVA और UVB नाम की किरणें निकलती हैं. ये किरणें त्वचा की ऊपरी सतह के साथ-साथ अंदर की परतों तक भी पहुंच जाती हैं. लंबे समय तक इनके संपर्क में रहने से त्वचा की कोशिकाओं का DNA खराब हो सकता है, जिससे बाद में त्वचा का कैंसर होने का खतरा बढ़ जाता है. हालांकि केवल गर्मी से कैंसर नहीं होता, लेकिन लगातार गर्म वातावरण और इंफ्रारेड रोशनी त्वचा में सूजन और कमजोरी पैदा कर सकती है.

टैनिंग और कैंसर का कनेक्शन

त्वचा में मौजूद मेलानिन UV किरणों को सोखकर त्वचा की गहरी परतों तक नुकसान पहुंचने से रोकता है. यही कारण है कि भारत में त्वचा के कैंसर के मामले कम देखने को मिलते हैं. फिर भी इसका मतलब यह नहीं है कि भारतीयों को यह बीमारी नहीं हो सकती. लंबे समय तक धूप में काम करना, बार-बार त्वचा जलना, टैनिंग या रेडिएशन के संपर्क में आना त्वचा के कैंसर का कारण बन सकता है.

जिन लोगों की त्वचा हल्की होती है, वे धूप में जल्दी जल जाते हैं. ऐसे लोगों में बेसल सेल कार्सिनोमा (BCC), स्क्वैमस सेल कार्सिनोमा (SCC) और मेलानोमा जैसे त्वचा कैंसर का खतरा ज्यादा होता है. BCC आमतौर पर चमकदार उभार या ऐसा घाव होता है जो ठीक नहीं होता. SCC सूखे और पपड़ीदार घाव के रूप में दिखाई देता है. मेलानोमा दुर्लभ लेकिन सबसे खतरनाक कैंसर है क्योंकि यह तेजी से शरीर में फैल सकता है.

पहले माना जाता था कि गहरे रंग की त्वचा वाले लोग पूरी तरह सुरक्षित होते हैं, लेकिन अब पर्यावरण और जीवनशैली में बदलाव के कारण उनमें भी त्वचा संबंधी समस्याएं बढ़ रही हैं. ओजोन परत का कमजोर होना, ग्लोबल वार्मिंग, बाहर खेलने की बढ़ती आदतें और लंबे समय तक धूप में रहना इसके मुख्य कारण हैं.

किसान, मजदूर, ट्रैफिक पुलिसकर्मी, खिलाड़ी और लंबे समय तक बाहर काम करने वाले लोगों में त्वचा को नुकसान होने का खतरा अधिक होता है. जिन लोगों का इम्यून सिस्टम कमजोर हो या परिवार में त्वचा कैंसर का इतिहास हो, उन्हें विशेष सावधानी बरतनी चाहिए.

बचाव के लिए जरूरी उपाय
एक्सपर्ट बताती हैं कि त्वचा को सुरक्षित रखने के लिए रोजाना SPF 30 या उससे अधिक वाला ब्रॉड-स्पेक्ट्रम सनस्क्रीन लगाना जरूरी है. बाहर रहने पर हर 2 से 3 घंटे में सनस्क्रीन दोबारा लगाना चाहिए. साथ ही टोपी, धूप का चश्मा, छाता और पूरी बाजू के कपड़े पहनने चाहिए. सुबह 10 बजे से शाम 4 बजे के बीच तेज धूप में जाने से बचना बेहतर होता है.

पर्याप्त पानी पीना, पौष्टिक भोजन करना और त्वचा की नियमित जांच करवाना भी जरूरी है. यदि त्वचा पर कोई नया तिल, घाव, खुजली या रंग में बदलाव दिखाई दे, तो तुरंत डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए. सही जागरूकता और बचाव से त्वचा को लंबे समय तक स्वस्थ रखा जा सकता है.

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