Sunday, 17 May 2026 | 05:33 PM

Trending :

EXCLUSIVE

Naomi was criticized for withdrawing from the French Open, Naomi Osaka

Naomi was criticized for withdrawing from the French Open, Naomi Osaka
  • Hindi News
  • Sports
  • Naomi Was Criticized For Withdrawing From The French Open, Naomi Osaka

न्यूयॉर्क13 मिनट पहले

  • कॉपी लिंक

मशहूर टेनिस खिलाड़ी नाओमी ओसाका।- फाइल फोटो

दुनिया अक्सर कामयाबी को सिर्फ उपलब्धियों में मापती है। कितने मैच जीते, कितने रिकॉर्ड बनाए, कितनी बार लोगों की उम्मीदों पर खरे उतरे। लेकिन बहुत कम लोग यह समझ पाते हैं कि किसी इंसान की असली ताकत सिर्फ उसके किए हुए कामों में नहीं, बल्कि उन चीजों में भी छिपी होती है जिन्हें करने से उसने इनकार किया। दुनिया की मशहूर टेनिस खिलाड़ी नाओमी ओसाका की कहानी भी कुछ ऐसी ही है। उन्होंने सिर्फ जीतना नहीं सीखा, बल्कि सही समय पर ‘ना’ कहना भी सीखा और शायद यही उनकी सबसे बड़ी ताकत बन गया।

जापान की ओसाका जैसे-जैसे सफल होती गईं, वैसे-वैसे उनके आसपास उम्मीदों का दायरा भी बढ़ता गया जैसे कि शानदार प्रदर्शन, मुस्कुराहट, इंटरव्यू, हर मंच पर मौजूदगी। ओसाका भी लंबे समय तक हर किसी को खुश रखने की कोशिश करती रहीं। वे बताती हैं, ‘मुझे हमेशा लगता था कि अगर मैंने किसी चीज के लिए मना किया तो लोग निराश हो जाएंगे।’ लेकिन धीरे-धीरे यह आदत बोझ बनने लगी। लगातार काम, मानसिक दबाव, खुद को हर समय साबित करने की कोशिश ने उन्हें थका दिया। बाहर से वे सफल खिलाड़ी दिखती थीं, लेकिन अंदर एक संघर्ष चल रहा था।

फिर उन्होंने साल 2021 के फ्रेंच ओपन से हटने का फैसला कर लिया। यह फैसला खेल जगत के लिए चौंकाने वाला था। आलोचना भी हुई, सवाल भी उठे। लेकिन ओसाका के लिए यह सिर्फ एक फैसला नहीं था, बल्कि खुद को बचाने की शुरुआत थी। वे कहती हैं, ‘उस समय मैंने पहली बार समझा कि मुझे हर वह चीज करने की जरूरत नहीं है, जिसकी लोग मुझसे उम्मीद करते हैं। खुद को बचाना भी जरूरी होता है।’ यही वह मोड़ था, जहां ‘ना’ कहना उनकी सबसे बड़ी ताकत बन गया। उन्होंने महसूस किया कि हर बार दूसरों को खुश करने की कोशिश में इंसान खुद को खो देता है। कई बार इंकार करना कमजोरी नहीं, बल्कि खुद के प्रति जिम्मेदारी होती है।

ओसाका ने धीरे-धीरे सीमाएं तय करनी शुरू कीं। उन्होंने उन कामों से दूरी बनानी शुरू की, जिनमें उनका मन नहीं लगता था। मानसिक शांति को प्राथमिकता देना सीखा। मां बनने के बाद उनकी सोच और मजबूत हो गई। अब उनका हर फैसला सिर्फ उनके लिए नहीं, बल्कि बेटी के लिए भी था। ओसाका ने बताया, ‘अब जब मैं ‘ना’ कहती हूं, तो अपराधबोध नहीं होता क्योंकि मैं जानती हूं कि मैं अपनी शांति और परिवार की सुरक्षा के लिए ऐसा कर रही हूं।’

28 वर्षीय ओसाका की कहानी सिर्फ सफल खिलाड़ी की कहानी नहीं है। यह उस इंसान की कहानी है, जिसने दुनिया को समझाया कि सफलता सिर्फ हर मौके को पकड़ने से नहीं मिलती। कई बार जिंदगी में आगे बढ़ने के लिए यह तय करना जरूरी होता है कि हमें क्या नहीं करना है, और शायद इसी वजह से उनका सबसे मजबूत हथियार कोई टेनिस शॉट नहीं, बल्कि सही समय पर कहा गया एक छोटा-सा ‘ना’ बन गया।

WhatsApp
Facebook
Twitter
LinkedIn

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

लेटेस्ट टॉप अपडेट

सच्चाई की दहाड़

ब्रेकिंग खबरें सीधे अपने ईमेल पर पाने के लिए रजिस्टर करें।

You have been successfully Subscribed! Ops! Something went wrong, please try again.

ग्लोबल करेंसी अपडेट

Provided by IFC Markets
रितेश-जेनेलिया के छोटे बेटे का एक्टिंग डेब्यू:फिल्म 'राजा शिवाजी' में बाल शिवाजी बने 10 साल के राहिल देशमुख

April 22, 2026/
6:06 pm

रितेश देशमुख की फिल्म ‘राजा शिवाजी’ का ट्रेलर लॉन्च हो गया है। इस फिल्म के जरिए रितेश और जेनेलिया के...

Shubman Gill (left) and Abhishek Sharma (AP Photo)

May 12, 2026/
6:41 pm

आखरी अपडेट:12 मई, 2026, 18:41 IST 30 विधायकों वाला एक विद्रोही अन्नाद्रमुक गुट महत्वपूर्ण शक्ति परीक्षण से ठीक 24 घंटे...

वुमन ऑफ द ईयर प्रोजेक्ट-2026 में 3 भारतीय महिलाएं:सफीना ने 20लाख बेटियों को स्कूल लौटाया, 14 देशों को मुफ्त दवा दिलवा रहीं रेशमा; 7.5 लाख छात्राओं को सशक्त कर रहीं सौजानी

February 27, 2026/
1:11 pm

टाइम मैगजीन ने 2026 के वुमन ऑफ द ईयर प्रोजेक्ट के लिए 16 महिलाओं को चुना है। लिस्ट में भारतीय...

PNB Fraud Case FIR Filed Against Anil Ambani

March 8, 2026/
10:52 am

मुंबई2 दिन पहले कॉपी लिंक केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने रिलायंस कम्युनिकेशंस (RCom) के पूर्व डायरेक्टर अनिल अंबानी और अन्य...

अक्षय कुमार ने चक नॉरिस के निधन पर जताया दुख:बोले- मार्शल आर्ट ट्रेनिंग के दौरान देखीं फिल्में, हर सीन से मिली सीख और प्रेरणा

March 21, 2026/
9:57 am

बॉलीवुड एक्टर अक्षय कुमार ने हॉलीवुड एक्टर चक नॉरिस के निधन पर दुख जताया। अक्षय ने कहा कि मार्शल आर्ट...

कोरोना में पंजाबियों की सेवा की मुरीद हुई ऑस्ट्रेलियन नर्स:बोलीं- मैं पंजाब की बेटी, पटियाला शादी में पहुंची, गोल्डन टेंपल को सुकून वाली जगह बताया

March 5, 2026/
5:00 am

पंजाबियों की सेवा देखकर ऑस्ट्रेलिया की नर्स इतनी इंप्रेस व मोटिवेट हुई कि वह खुद को पंजाब की बेटी बता...

राजनीति

Naomi was criticized for withdrawing from the French Open, Naomi Osaka

Naomi was criticized for withdrawing from the French Open, Naomi Osaka
  • Hindi News
  • Sports
  • Naomi Was Criticized For Withdrawing From The French Open, Naomi Osaka

न्यूयॉर्क13 मिनट पहले

  • कॉपी लिंक

मशहूर टेनिस खिलाड़ी नाओमी ओसाका।- फाइल फोटो

दुनिया अक्सर कामयाबी को सिर्फ उपलब्धियों में मापती है। कितने मैच जीते, कितने रिकॉर्ड बनाए, कितनी बार लोगों की उम्मीदों पर खरे उतरे। लेकिन बहुत कम लोग यह समझ पाते हैं कि किसी इंसान की असली ताकत सिर्फ उसके किए हुए कामों में नहीं, बल्कि उन चीजों में भी छिपी होती है जिन्हें करने से उसने इनकार किया। दुनिया की मशहूर टेनिस खिलाड़ी नाओमी ओसाका की कहानी भी कुछ ऐसी ही है। उन्होंने सिर्फ जीतना नहीं सीखा, बल्कि सही समय पर ‘ना’ कहना भी सीखा और शायद यही उनकी सबसे बड़ी ताकत बन गया।

जापान की ओसाका जैसे-जैसे सफल होती गईं, वैसे-वैसे उनके आसपास उम्मीदों का दायरा भी बढ़ता गया जैसे कि शानदार प्रदर्शन, मुस्कुराहट, इंटरव्यू, हर मंच पर मौजूदगी। ओसाका भी लंबे समय तक हर किसी को खुश रखने की कोशिश करती रहीं। वे बताती हैं, ‘मुझे हमेशा लगता था कि अगर मैंने किसी चीज के लिए मना किया तो लोग निराश हो जाएंगे।’ लेकिन धीरे-धीरे यह आदत बोझ बनने लगी। लगातार काम, मानसिक दबाव, खुद को हर समय साबित करने की कोशिश ने उन्हें थका दिया। बाहर से वे सफल खिलाड़ी दिखती थीं, लेकिन अंदर एक संघर्ष चल रहा था।

फिर उन्होंने साल 2021 के फ्रेंच ओपन से हटने का फैसला कर लिया। यह फैसला खेल जगत के लिए चौंकाने वाला था। आलोचना भी हुई, सवाल भी उठे। लेकिन ओसाका के लिए यह सिर्फ एक फैसला नहीं था, बल्कि खुद को बचाने की शुरुआत थी। वे कहती हैं, ‘उस समय मैंने पहली बार समझा कि मुझे हर वह चीज करने की जरूरत नहीं है, जिसकी लोग मुझसे उम्मीद करते हैं। खुद को बचाना भी जरूरी होता है।’ यही वह मोड़ था, जहां ‘ना’ कहना उनकी सबसे बड़ी ताकत बन गया। उन्होंने महसूस किया कि हर बार दूसरों को खुश करने की कोशिश में इंसान खुद को खो देता है। कई बार इंकार करना कमजोरी नहीं, बल्कि खुद के प्रति जिम्मेदारी होती है।

ओसाका ने धीरे-धीरे सीमाएं तय करनी शुरू कीं। उन्होंने उन कामों से दूरी बनानी शुरू की, जिनमें उनका मन नहीं लगता था। मानसिक शांति को प्राथमिकता देना सीखा। मां बनने के बाद उनकी सोच और मजबूत हो गई। अब उनका हर फैसला सिर्फ उनके लिए नहीं, बल्कि बेटी के लिए भी था। ओसाका ने बताया, ‘अब जब मैं ‘ना’ कहती हूं, तो अपराधबोध नहीं होता क्योंकि मैं जानती हूं कि मैं अपनी शांति और परिवार की सुरक्षा के लिए ऐसा कर रही हूं।’

28 वर्षीय ओसाका की कहानी सिर्फ सफल खिलाड़ी की कहानी नहीं है। यह उस इंसान की कहानी है, जिसने दुनिया को समझाया कि सफलता सिर्फ हर मौके को पकड़ने से नहीं मिलती। कई बार जिंदगी में आगे बढ़ने के लिए यह तय करना जरूरी होता है कि हमें क्या नहीं करना है, और शायद इसी वजह से उनका सबसे मजबूत हथियार कोई टेनिस शॉट नहीं, बल्कि सही समय पर कहा गया एक छोटा-सा ‘ना’ बन गया।

WhatsApp
Facebook
Twitter
LinkedIn

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

जॉब - शिक्षा

हेल्थ & फिटनेस

विज्ञापन

राजनीति

लेटेस्ट टॉप अपडेट

ग्लोबल करेंसी अपडेट

Provided by IFC Markets

Live Cricket

सच्चाई की दहाड़

ब्रेकिंग खबरें सीधे अपने ईमेल पर पाने के लिए रजिस्टर करें।

You have been successfully Subscribed! Ops! Something went wrong, please try again.