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चरवाहे ने देख लिया था इजराइल का सीक्रेट सैन्य ठिकाना:हेलिकॉप्टर से पीछा कर मारा, तब खुला इराक में इजराइली कैंप का राज

चरवाहे ने देख लिया था इजराइल का सीक्रेट सैन्य ठिकाना:हेलिकॉप्टर से पीछा कर मारा, तब खुला इराक में इजराइली कैंप का राज

तारीख- 3 मार्च जगह- अल-नुखैब कस्बा, पश्चिमी इराक 29 साल का चरवाहा अवाद अल-शम्मारी अपनी पिकअप गाड़ी लेकर जरूरी सामान लेने निकला था। सऊदी अरब और जॉर्डन की सीमाओं के पास बसे इस रेगिस्तानी इलाके में गाड़ियों का गुजरना आम बात थी। कुछ घंटों बाद वही गाड़ी आग की लपटों में घिरी और गोलियों से छलनी हालत में वापस दिखाई दी। लोगों ने बताया कि एक हेलिकॉप्टर ट्रक का पीछा कर रहा था और लगातार उस पर गोलियां चला रहा था, जब तक कि ट्रक रेत में रुक नहीं गया। परिजनों का कहना है कि अवाद गलती से इजराइल के एक सीक्रेट सैन्य ठिकाने तक पहुंच गया था। वहां उसे एक अस्थायी हवाई पट्टी के आसपास सैनिक, हेलिकॉप्टर और तंबू दिखाई दिए। उसने तुरंत इराकी सेना के रिजनल कमांड को फोन कर इसकी सूचना दी। परिवार का मानना है कि इसी वजह से उसकी हत्या कर दी गई। इजराइली सेना ने इन आरोपों पर कोई टिप्पणी नहीं की है। रिपोर्ट में शामिल गवाहों और अधिकारियों ने सुरक्षा कारणों से नाम छिपाने की शर्त पर न्यूयॉर्क टाइम्स से बात की है। ईराक में इजराइल के 2 सीक्रेट सैन्य ठिकाने इजराइल पिछले एक साल से ज्यादा समय तक इराक के पश्चिमी रेगिस्तान में दो सीक्रेट मिलिट्री बेस चला रहा था। क्षेत्रीय और इराकी अधिकारियों के अनुसार इजराइल उस जगह का इस्तेमाल ईरान के खिलाफ सैन्य अभियान में सहायता के लिए कर रहा था। इनमें से एक वही अड्डा था जिसे अवाद ने देख लिया था। इससे पहले वॉल स्ट्रीट जर्नल ने भी इराक में एक इजराइली ठिकाने की खबर दी थी, लेकिन इराकी अधिकारियों ने न्यूयॉर्क टाइम्स को बताया कि दूसरा सीक्रेट ठिकाना भी मौजूद था। अधिकारियों ने कहा कि यह ठिकाना अमेरिका-इजराइल और ईरान के बीच जून 2025 में हुई 12 दिन की लड़ाई से पहले ही बनाया जा चुका था। एक क्षेत्रीय अधिकारी के मुताबिक इजराइल ने 2024 के आखिर में ही ऐसे सीक्रेट ठिकानों की तैयारी शुरू कर दी थी ताकि भविष्य के युद्धों में उनका इस्तेमाल किया जा सके। अमेरिका को थी इजराइली सीक्रेट ठिकाने की जानकारी कम से कम एक सीक्रेट अड्डे की जानकारी अमेरिका को जून 2025 या उससे पहले से थी। इससे माना जा रहा है कि अमेरिका ने इराक से यह बात छिपाई कि उसकी जमीन पर एक दुश्मन देश की सेना काम कर रही थी। इराकी सांसद वाद अल-कदू ने कहा कि इजराइल का इराक की जमीन पर सीक्रेट ठिकाने बनाना देश की संप्रभुता और इराकी लोगों के सम्मान का खुला उल्लंघन है। क्षेत्रीय अधिकारियों के मुताबिक इजराइल को भरोसा था कि वह इराक में सीक्रेट ठिकाना चला सकता है, क्योंकि वहां अमेरिका की मजबूत सैन्य मौजूदगी है। अधिकारियों ने कहा कि 2025 की लड़ाई और मौजूदा तनाव के दौरान अमेरिका ने इराक से अपने रडार बंद करवाए थे, ताकि अमेरिकी विमानों की जानकारी बाहर न जाए। इसकी वजह से इराक अपने इलाके में संदिग्ध गतिविधियों का पता लगाने के लिए काफी हद तक अमेरिका पर निर्भर हो गया। इस खुलासे ने इराक के लिए असहज सवाल खड़े कर दिए हैं। पहला ये कि क्या इराकी सुरक्षा बलों को विदेशी सैन्य मौजूदगी की जानकारी नहीं थी? या फिर उन्हें पता था लेकिन उन्होंने नजरअंदाज किया? दोनों ही हालात से पता चलता है कि इराक अभी भी अपनी जमीन पर पूरी तरह नियंत्रण नहीं रख पा रहा है। इराकी सेना के कमांडर बोले- मुझे पहले से शक था इराकी सेना के यूफ्रेट्स यूनिट के कमांडर मेजर जनरल अली अल-हमदानी ने कहा कि सेना को एक महीने पहले से रेगिस्तान में इजराइली मौजूदगी का शक था। वहां रहने वाले बेदुइन समुदाय के लोग कई हफ्तों से सेना को बता रहे थे कि रेगिस्तान में संदिग्ध गतिविधियां दिखाई दे रही हैं। लोगों ने हेलिकॉप्टरों की आवाजाही, सैनिकों की मौजूदगी और रेगिस्तान में बने अस्थायी ढांचे देखे थे। अली अल-हमदानी ने कहा कि सेना को शक था कि वहां इजराइली बल मौजूद हो सकते हैं, लेकिन सेना ने सीधे वहां जाने की बजाय दूर से निगरानी करना चुना। उन्होंने बताया कि इराकी सेना ने अमेरिकी अधिकारियों से भी जानकारी मांगी थी, लेकिन उन्हें कोई जवाब नहीं मिला। इसके कुछ समय बाद जब चरवाहे अवाद ने खुद फोन कर बताया कि उसने एक हवाई पट्टी के आसपास सैनिक, हेलिकॉप्टर और तंबू देखे हैं, तब मामला और गंभीर हो गया। लेकिन कुछ ही समय बाद उसका संपर्क टूट गया। सेना जांच के लिए पहुंची, इजराइल ने हमला कर भगाया अवाद के परिवार ने दो दिन तक उसकी तलाश की। बाद में उन्हें उन बेदुइन लोगों के बारे में पता चला जिन्होंने उसकी हत्या देखी थी। अवाद के चचेरे भाई आमिर अल-शम्मारी ने कहा कि लोगों ने उन्हें बताया कि रेगिस्तान में अवाद जैसी एक जली हुई पिकअप गाड़ी पड़ी है, लेकिन डर के कारण कोई वहां जाने की हिम्मत नहीं कर रहा था। जब परिवार वहां पहुंचा तो उन्हें जली हुई गाड़ी और अवाद का शव मिला। परिवार ने उसकी खून से लथपथ तस्वीरें साझा कीं। उसका सिर और उंगलियां बुरी तरह जली हुई थीं। परिवार ने उसी जगह गाड़ी के पास एक साधारण कब्र बनाकर उसे दफना दिया। अली अल-हमदानी के मुताबिक अवाद की सूचना के अगले दिन इराकी सेना ने इलाके में जांच के लिए टुकड़ी भेजी। लेकिन जैसे ही सैनिक उस इलाके के करीब पहुंचे, उन पर हमला हो गया। एक सैनिक मारा गया, दो घायल हुए और सेना की गाड़ियों पर बमबारी की गई। इसके बाद सैनिकों को पीछे हटना पड़ा। सीनियर अधिकारियों ने जांच को धीमा करने की कोशिश की बगदाद में सीनियर अफसर समझ नहीं पा रहे थे कि हमला किसने किया। कुछ बड़े सैन्य अधिकारियों ने घटना को कम महत्व देकर जांच को धीमा कर दिया। उन्होंने सार्वजनिक रूप से इराकी सेना ने सिर्फ इतना कहा कि ‘विदेशी फोर्स’ ने हमला किया और UNSC में शिकायत दर्ज कराई गई है। हालांकि अंदरूनी स्तर पर इराकी आर्मी चीफ जनरल अब्दुल-अमीर यारल्लाह ने अमेरिकी सेना से संपर्क किया। मेजर जनरल हमदानी और दो सीनियर अधिकारियों के मुताबिक अमेरिकी पक्ष ने कहा कि हमला अमेरिका ने नहीं किया। इसके बाद इराकी अधिकारियों को समझ आया कि यह इजराइल था। अली अल-हमदानी ने न्यूयॉर्क टाइम्स से कहा, “अब तक सरकार इस मुद्दे पर चुप है।” यानी उनका इशारा इस बात की तरफ था कि सरकार को शक और जानकारी होने के बावजूद उसने सार्वजनिक तौर पर कुछ नहीं कहा। इराक ने इजराइली ठिकाने होने की बात नहीं मानी इराक और इजराइल के बीच कोई राजनयिक संबंध नहीं हैं और इराक की जनता इजराइल को दुश्मन मानती है। इराक की सरकार ने अब तक आधिकारिक तौर पर इन अड्डों की मौजूदगी स्वीकार नहीं की है। रिपोर्ट में कहा गया है कि अल-नुखैब वाला अड्डा इजराइल के विमानों को ईरान तक कम दूरी में पहुंचने, ईंधन भरने और घायलों के इलाज के लिए इस्तेमाल होता था। क्षेत्रीय अधिकारियों के मुताबिक जून 2025 की लड़ाई में यह अड्डा बेहद उपयोगी साबित हुआ था। अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने इराक में इजराइली गतिविधियों पर टिप्पणी करने से इनकार कर दिया। लेकिन पूर्व अमेरिकी सैन्य अधिकारियों और राजनयिकों ने कहा कि अमेरिका और इजराइल की सेनाओं के करीबी संबंधों को देखते हुए यह मानना मुश्किल है कि अमेरिकी सेंट्रल कमांड को इसकी जानकारी न हो। इराकी अधिकारी ने दूसरे सीक्रेट अड्डे की पुष्टि की हमले के 5 दिन बाद 8 मार्च को इराकी संसद ने सैन्य अधिकारियों को गोपनीय ब्रीफिंग देने के लिए बुलाया। बैठक में मौजूद सांसद हसन फदाम ने न्यूयॉर्क टाइम्स को बताया कि इजराइल ने इराक में कम से कम एक और सैन्य ठिकाना बना रखा था। उन्होंने कहा कि अल-नुखैब वाला अड्डा सिर्फ इसलिए सामने आया क्योंकि वह पकड़ा गया। एक दूसरे इराकी अधिकारी ने भी दूसरे अड्डे की पुष्टि की, हालांकि उन्होंने उसकी सटीक जगह नहीं बताई। सिर्फ इतना कहा कि वह भी पश्चिमी रेगिस्तान में था। रिपोर्ट में कहा गया है कि नियमों के मुताबिक इराक की जमीन पर किसी भी सैन्य गतिविधि की जानकारी अमेरिका को बगदाद को देनी होती है। इससे दो संभावनाएं बनती हैं। या तो अमेरिका ने यह बात छिपाई, या इराकी शीर्ष अधिकारियों को जानकारी थी लेकिन उन्होंने इसे गुप्त रखा। हालांकि अधिकारियों का मानना है कि इराकी नेतृत्व को शायद यह पता नहीं था कि मौजूदगी इजराइल की है। संभवतः उन्हें लगा होगा कि वहां अमेरिकी बल हैं। एक्सपर्ट बोले- ईरान को इराक पर हमले करने का बहाना मिला 2003 में अमेरिका के इराक पर हमले के बाद से ही बगदाद अमेरिका और ईरान के बीच संतुलन बनाने की कोशिश करता रहा है। ट्रम्प सरकार लगातार इराक पर दबाव डालता रहा है कि वह ईरान समर्थक मिलिशिया को कमजोर करे और उन्हें सरकार व सुरक्षा बलों से दूर रखे। विशेषज्ञों का कहना है कि इजराइल के गुप्त अड्डों का खुलासा इस संतुलन को और बिगाड़ सकता है। जियोपोल लैब्स के संस्थापक रमजी मार्दिनी ने कहा कि अब अमेरिका के साथ सहयोग को इजराइल के साथ खड़े होने के रूप में देखा जा सकता है। अगर ईरान के साथ युद्ध दोबारा शुरू हुआ तो इससे ईरान को इराक में और सीधे दखल का बहाना मिल सकता है। उन्होंने कहा कि इससे ईरान समर्थक मिलिशिया को हथियार छोड़ने से इनकार करने का आधार भी मिल जाएगा। रिपोर्ट के मुताबिक अल-नुखैब वाला इजराइली अड्डा अब सक्रिय नहीं है, जबकि दूसरे अड्डे की स्थिति स्पष्ट नहीं है। वहीं अवाद अल-शम्मारी के परिवार का कहना है कि उसकी हत्या को नजरअंदाज किया गया। उसके चचेरे भाई आमिर ने कहा कि परिवार चाहता है कि सरकार इस मामले की जांच करे और पता लगाए कि उसके साथ ऐसा क्यों हुआ।

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चरवाहे ने देख लिया था इजराइल का सीक्रेट सैन्य ठिकाना:हेलिकॉप्टर से पीछा कर मारा, तब खुला इराक में इजराइली कैंप का राज

तारीख- 3 मार्च जगह- अल-नुखैब कस्बा, पश्चिमी इराक 29 साल का चरवाहा अवाद अल-शम्मारी अपनी पिकअप गाड़ी लेकर जरूरी सामान लेने निकला था। सऊदी अरब और जॉर्डन की सीमाओं के पास बसे इस रेगिस्तानी इलाके में गाड़ियों का गुजरना आम बात थी। कुछ घंटों बाद वही गाड़ी आग की लपटों में घिरी और गोलियों से छलनी हालत में वापस दिखाई दी। लोगों ने बताया कि एक हेलिकॉप्टर ट्रक का पीछा कर रहा था और लगातार उस पर गोलियां चला रहा था, जब तक कि ट्रक रेत में रुक नहीं गया। परिजनों का कहना है कि अवाद गलती से इजराइल के एक सीक्रेट सैन्य ठिकाने तक पहुंच गया था। वहां उसे एक अस्थायी हवाई पट्टी के आसपास सैनिक, हेलिकॉप्टर और तंबू दिखाई दिए। उसने तुरंत इराकी सेना के रिजनल कमांड को फोन कर इसकी सूचना दी। परिवार का मानना है कि इसी वजह से उसकी हत्या कर दी गई। इजराइली सेना ने इन आरोपों पर कोई टिप्पणी नहीं की है। रिपोर्ट में शामिल गवाहों और अधिकारियों ने सुरक्षा कारणों से नाम छिपाने की शर्त पर न्यूयॉर्क टाइम्स से बात की है। ईराक में इजराइल के 2 सीक्रेट सैन्य ठिकाने इजराइल पिछले एक साल से ज्यादा समय तक इराक के पश्चिमी रेगिस्तान में दो सीक्रेट मिलिट्री बेस चला रहा था। क्षेत्रीय और इराकी अधिकारियों के अनुसार इजराइल उस जगह का इस्तेमाल ईरान के खिलाफ सैन्य अभियान में सहायता के लिए कर रहा था। इनमें से एक वही अड्डा था जिसे अवाद ने देख लिया था। इससे पहले वॉल स्ट्रीट जर्नल ने भी इराक में एक इजराइली ठिकाने की खबर दी थी, लेकिन इराकी अधिकारियों ने न्यूयॉर्क टाइम्स को बताया कि दूसरा सीक्रेट ठिकाना भी मौजूद था। अधिकारियों ने कहा कि यह ठिकाना अमेरिका-इजराइल और ईरान के बीच जून 2025 में हुई 12 दिन की लड़ाई से पहले ही बनाया जा चुका था। एक क्षेत्रीय अधिकारी के मुताबिक इजराइल ने 2024 के आखिर में ही ऐसे सीक्रेट ठिकानों की तैयारी शुरू कर दी थी ताकि भविष्य के युद्धों में उनका इस्तेमाल किया जा सके। अमेरिका को थी इजराइली सीक्रेट ठिकाने की जानकारी कम से कम एक सीक्रेट अड्डे की जानकारी अमेरिका को जून 2025 या उससे पहले से थी। इससे माना जा रहा है कि अमेरिका ने इराक से यह बात छिपाई कि उसकी जमीन पर एक दुश्मन देश की सेना काम कर रही थी। इराकी सांसद वाद अल-कदू ने कहा कि इजराइल का इराक की जमीन पर सीक्रेट ठिकाने बनाना देश की संप्रभुता और इराकी लोगों के सम्मान का खुला उल्लंघन है। क्षेत्रीय अधिकारियों के मुताबिक इजराइल को भरोसा था कि वह इराक में सीक्रेट ठिकाना चला सकता है, क्योंकि वहां अमेरिका की मजबूत सैन्य मौजूदगी है। अधिकारियों ने कहा कि 2025 की लड़ाई और मौजूदा तनाव के दौरान अमेरिका ने इराक से अपने रडार बंद करवाए थे, ताकि अमेरिकी विमानों की जानकारी बाहर न जाए। इसकी वजह से इराक अपने इलाके में संदिग्ध गतिविधियों का पता लगाने के लिए काफी हद तक अमेरिका पर निर्भर हो गया। इस खुलासे ने इराक के लिए असहज सवाल खड़े कर दिए हैं। पहला ये कि क्या इराकी सुरक्षा बलों को विदेशी सैन्य मौजूदगी की जानकारी नहीं थी? या फिर उन्हें पता था लेकिन उन्होंने नजरअंदाज किया? दोनों ही हालात से पता चलता है कि इराक अभी भी अपनी जमीन पर पूरी तरह नियंत्रण नहीं रख पा रहा है। इराकी सेना के कमांडर बोले- मुझे पहले से शक था इराकी सेना के यूफ्रेट्स यूनिट के कमांडर मेजर जनरल अली अल-हमदानी ने कहा कि सेना को एक महीने पहले से रेगिस्तान में इजराइली मौजूदगी का शक था। वहां रहने वाले बेदुइन समुदाय के लोग कई हफ्तों से सेना को बता रहे थे कि रेगिस्तान में संदिग्ध गतिविधियां दिखाई दे रही हैं। लोगों ने हेलिकॉप्टरों की आवाजाही, सैनिकों की मौजूदगी और रेगिस्तान में बने अस्थायी ढांचे देखे थे। अली अल-हमदानी ने कहा कि सेना को शक था कि वहां इजराइली बल मौजूद हो सकते हैं, लेकिन सेना ने सीधे वहां जाने की बजाय दूर से निगरानी करना चुना। उन्होंने बताया कि इराकी सेना ने अमेरिकी अधिकारियों से भी जानकारी मांगी थी, लेकिन उन्हें कोई जवाब नहीं मिला। इसके कुछ समय बाद जब चरवाहे अवाद ने खुद फोन कर बताया कि उसने एक हवाई पट्टी के आसपास सैनिक, हेलिकॉप्टर और तंबू देखे हैं, तब मामला और गंभीर हो गया। लेकिन कुछ ही समय बाद उसका संपर्क टूट गया। सेना जांच के लिए पहुंची, इजराइल ने हमला कर भगाया अवाद के परिवार ने दो दिन तक उसकी तलाश की। बाद में उन्हें उन बेदुइन लोगों के बारे में पता चला जिन्होंने उसकी हत्या देखी थी। अवाद के चचेरे भाई आमिर अल-शम्मारी ने कहा कि लोगों ने उन्हें बताया कि रेगिस्तान में अवाद जैसी एक जली हुई पिकअप गाड़ी पड़ी है, लेकिन डर के कारण कोई वहां जाने की हिम्मत नहीं कर रहा था। जब परिवार वहां पहुंचा तो उन्हें जली हुई गाड़ी और अवाद का शव मिला। परिवार ने उसकी खून से लथपथ तस्वीरें साझा कीं। उसका सिर और उंगलियां बुरी तरह जली हुई थीं। परिवार ने उसी जगह गाड़ी के पास एक साधारण कब्र बनाकर उसे दफना दिया। अली अल-हमदानी के मुताबिक अवाद की सूचना के अगले दिन इराकी सेना ने इलाके में जांच के लिए टुकड़ी भेजी। लेकिन जैसे ही सैनिक उस इलाके के करीब पहुंचे, उन पर हमला हो गया। एक सैनिक मारा गया, दो घायल हुए और सेना की गाड़ियों पर बमबारी की गई। इसके बाद सैनिकों को पीछे हटना पड़ा। सीनियर अधिकारियों ने जांच को धीमा करने की कोशिश की बगदाद में सीनियर अफसर समझ नहीं पा रहे थे कि हमला किसने किया। कुछ बड़े सैन्य अधिकारियों ने घटना को कम महत्व देकर जांच को धीमा कर दिया। उन्होंने सार्वजनिक रूप से इराकी सेना ने सिर्फ इतना कहा कि ‘विदेशी फोर्स’ ने हमला किया और UNSC में शिकायत दर्ज कराई गई है। हालांकि अंदरूनी स्तर पर इराकी आर्मी चीफ जनरल अब्दुल-अमीर यारल्लाह ने अमेरिकी सेना से संपर्क किया। मेजर जनरल हमदानी और दो सीनियर अधिकारियों के मुताबिक अमेरिकी पक्ष ने कहा कि हमला अमेरिका ने नहीं किया। इसके बाद इराकी अधिकारियों को समझ आया कि यह इजराइल था। अली अल-हमदानी ने न्यूयॉर्क टाइम्स से कहा, “अब तक सरकार इस मुद्दे पर चुप है।” यानी उनका इशारा इस बात की तरफ था कि सरकार को शक और जानकारी होने के बावजूद उसने सार्वजनिक तौर पर कुछ नहीं कहा। इराक ने इजराइली ठिकाने होने की बात नहीं मानी इराक और इजराइल के बीच कोई राजनयिक संबंध नहीं हैं और इराक की जनता इजराइल को दुश्मन मानती है। इराक की सरकार ने अब तक आधिकारिक तौर पर इन अड्डों की मौजूदगी स्वीकार नहीं की है। रिपोर्ट में कहा गया है कि अल-नुखैब वाला अड्डा इजराइल के विमानों को ईरान तक कम दूरी में पहुंचने, ईंधन भरने और घायलों के इलाज के लिए इस्तेमाल होता था। क्षेत्रीय अधिकारियों के मुताबिक जून 2025 की लड़ाई में यह अड्डा बेहद उपयोगी साबित हुआ था। अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने इराक में इजराइली गतिविधियों पर टिप्पणी करने से इनकार कर दिया। लेकिन पूर्व अमेरिकी सैन्य अधिकारियों और राजनयिकों ने कहा कि अमेरिका और इजराइल की सेनाओं के करीबी संबंधों को देखते हुए यह मानना मुश्किल है कि अमेरिकी सेंट्रल कमांड को इसकी जानकारी न हो। इराकी अधिकारी ने दूसरे सीक्रेट अड्डे की पुष्टि की हमले के 5 दिन बाद 8 मार्च को इराकी संसद ने सैन्य अधिकारियों को गोपनीय ब्रीफिंग देने के लिए बुलाया। बैठक में मौजूद सांसद हसन फदाम ने न्यूयॉर्क टाइम्स को बताया कि इजराइल ने इराक में कम से कम एक और सैन्य ठिकाना बना रखा था। उन्होंने कहा कि अल-नुखैब वाला अड्डा सिर्फ इसलिए सामने आया क्योंकि वह पकड़ा गया। एक दूसरे इराकी अधिकारी ने भी दूसरे अड्डे की पुष्टि की, हालांकि उन्होंने उसकी सटीक जगह नहीं बताई। सिर्फ इतना कहा कि वह भी पश्चिमी रेगिस्तान में था। रिपोर्ट में कहा गया है कि नियमों के मुताबिक इराक की जमीन पर किसी भी सैन्य गतिविधि की जानकारी अमेरिका को बगदाद को देनी होती है। इससे दो संभावनाएं बनती हैं। या तो अमेरिका ने यह बात छिपाई, या इराकी शीर्ष अधिकारियों को जानकारी थी लेकिन उन्होंने इसे गुप्त रखा। हालांकि अधिकारियों का मानना है कि इराकी नेतृत्व को शायद यह पता नहीं था कि मौजूदगी इजराइल की है। संभवतः उन्हें लगा होगा कि वहां अमेरिकी बल हैं। एक्सपर्ट बोले- ईरान को इराक पर हमले करने का बहाना मिला 2003 में अमेरिका के इराक पर हमले के बाद से ही बगदाद अमेरिका और ईरान के बीच संतुलन बनाने की कोशिश करता रहा है। ट्रम्प सरकार लगातार इराक पर दबाव डालता रहा है कि वह ईरान समर्थक मिलिशिया को कमजोर करे और उन्हें सरकार व सुरक्षा बलों से दूर रखे। विशेषज्ञों का कहना है कि इजराइल के गुप्त अड्डों का खुलासा इस संतुलन को और बिगाड़ सकता है। जियोपोल लैब्स के संस्थापक रमजी मार्दिनी ने कहा कि अब अमेरिका के साथ सहयोग को इजराइल के साथ खड़े होने के रूप में देखा जा सकता है। अगर ईरान के साथ युद्ध दोबारा शुरू हुआ तो इससे ईरान को इराक में और सीधे दखल का बहाना मिल सकता है। उन्होंने कहा कि इससे ईरान समर्थक मिलिशिया को हथियार छोड़ने से इनकार करने का आधार भी मिल जाएगा। रिपोर्ट के मुताबिक अल-नुखैब वाला इजराइली अड्डा अब सक्रिय नहीं है, जबकि दूसरे अड्डे की स्थिति स्पष्ट नहीं है। वहीं अवाद अल-शम्मारी के परिवार का कहना है कि उसकी हत्या को नजरअंदाज किया गया। उसके चचेरे भाई आमिर ने कहा कि परिवार चाहता है कि सरकार इस मामले की जांच करे और पता लगाए कि उसके साथ ऐसा क्यों हुआ।

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