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होर्मुज स्ट्रेट बंद होने से कतर का गैस निर्यात ठप:इकोनॉमी 8.6% गिर सकती है; यहां से ही भारत का सबसे ज्यादा LPG आयात

होर्मुज स्ट्रेट बंद होने से कतर का गैस निर्यात ठप:इकोनॉमी 8.6% गिर सकती है; यहां से ही भारत का सबसे ज्यादा LPG आयात

कतर फारस की खाड़ी में मौजूद एक छोटा-सा रेगिस्तानी देश था, जहां ज्यादातर लोग मोती निकालने और समुद्र से जुड़े छोटे-मोटे कारोबार पर निर्भर थे। फिर प्राकृतिक गैस ने इस देश की किस्मत पूरी तरह बदल दी। कतर ने 90 के दशक में बड़े पैमाने पर LNG यानी लिक्विफाइट नैचुरल गैस बनाकर उसे होर्मुज स्ट्रेट के जरिए दुनियाभर में भेजना शुरू किया। इससे उसे हर साल अरबों डॉलर की कमाई होने लगी। सिर्फ 30 साल में वह दुनिया के सबसे अमीर देशों में शामिल हो गया। लेकिन 28 फरवरी के बाद अचानक सब बदल गया। जंग शुरू होने के बाद होर्मुज स्ट्रेट बंद हो गया और कतर की दुनिया तक पहुंच लगभग कट गई है। युद्ध और तनाव की खबरों ने पर्यटन और कारोबार पर भी असर डाला है। इससे देश में मंदी का खतरा बढ़ गया है। भारत भी कतर से भारी मात्रा में प्राकृतिक गैस खरीदता है। अलग-अलग रिपोर्टों के मुताबिक, भारत की कुल LNG आयात का करीब 40% से 47% हिस्सा कतर से आया है। गैस को लिक्विड में बदला, फिर बदली किस्मत कतर में 1971 में नॉर्थ फील्ड नाम का विशाल गैस भंडार मिला था। इसे दुनिया के सबसे बड़े प्राकृतिक गैस भंडारों में गिना जाता है। तब दुनिया में ज्यादातर देशों तक गैस पाइपलाइन के जरिए पहुंचाई जाती थी। समस्या यह थी कि कतर एक छोटा-सा खाड़ी देश है और उससे सीधे यूरोप या एशिया तक पाइपलाइन बिछाना बेहद महंगा और मुश्किल था। तब कतर ने एक बड़ा दांव खेला। उसने अपनी प्राकृतिक गैस को बहुत ज्यादा ठंडा करके तरल, यानी लिक्विड बनाने की तकनीक अपनाई। इसमें गैस को करीब माइनस 162 डिग्री सेल्सियस तक ठंडा किया जाता है। इतना ठंडा होने पर गैस सिकुड़कर तरल बन जाती है और उसका आकार करीब 600 गुना छोटा हो जाता है। यही LNG यानी लिक्विफाइड नेचुरल गैस कहलाती है। इससे गैस को पाइपलाइन की बजाय जहाजों से दुनियाभर में भेजना संभव हो गया। 30 साल पहले जापान के भेजी LNG की पहली खेप यहीं से कतर एक ऊर्जा महाशक्ति बनकर उभरा। 1996 में जापान को 60 हजार टन LNG की पहली खेप भेजी गई। इसके बाद उत्पादन तेजी से बढ़ा और 2010 तक कतर की क्षमता 7.7 करोड़ टन सालाना पहुंच गई। कतर की 60 फीसदी से ज्यादा कमाई गैस और उससे जुड़े कारोबार से होती रही। इस कमाई ने कतर के रेगिस्तान की तस्वीर बदल दी। जहां कभी कच्ची सड़कें और खाली रेतीले मैदान थे, वहां आज ऊंची-ऊंची कॉर्पोरेट इमारतें, चौड़ी सड़कें और आधुनिक शहर खड़े हैं। शहरों में ऐसी सिंचाई व्यवस्था बनाई गई कि रेगिस्तान के बीच भी हरियाली, घास और चमकीले फूल दिखाई देने लगे। दोहा जैसे शहर आधुनिक महानगरों में बदल गए। कतर ने मेट्रो नेटवर्क बनाया, जो राजधानी दोहा को उत्तर में बसे लुसैल शहर से जोड़ता है। लुसैल में पेरिस जैसे डिजाइन वाला विशाल मॉल बनाया गया और कृत्रिम बर्फ वाला थीम पार्क भी तैयार किया गया। कतर ने साल 2022 में दुनिया का सबसे महंगा फुटबॉल वर्ल्ड कप आयोजित किया। इतना ही नहीं, उसने करीब 600 अरब डॉलर का सॉवरेन वेल्थ फंड बनाया, जिसने लंदन के हीथ्रो एयरपोर्ट, न्यूयॉर्क की एम्पायर स्टेट बिल्डिंग और दुनिया भर की बड़ी संपत्तियों में निवेश किया। रस लाफान सिटी बनाने के बाद अमीर हुआ कतर कतर की आर्थिक सफलता में रस लाफान की बहुत बड़ी भूमिका रही है। इसे कतर की गैस इकोनॉमी का दिल माना जाता है। दोहा से 80 किमी उत्तर रेगिस्तान में बसे इस इंडस्ट्रियल सिटी की वजह से कतर दुनिया के सबसे बड़े LNG निर्यातकों में शामिल हुआ। यह 100 वर्ग मील से ज्यादा इलाके में फैला हुआ है। यहां गैस प्रोसेसिंग और LNG प्लांट बने हैं। दोहा के दक्षिणी हिस्से में समुद्र किनारे लंबी औद्योगिक पट्टी बनाई गई, जहां गैस से अमोनिया और खाद तैयार की जाती है। 1990 से 2010 के बीच कतर की अर्थव्यवस्था हर साल औसतन 13 फीसदी की दर से बढ़ी। इस तेज विकास के लिए देश ने बड़ी संख्या में विदेशी मजदूर और पेशेवर कर्मचारियों को बुलाया। आज कतर की 32 लाख आबादी में करीब 90 फीसदी लोग विदेशी नागरिक हैं। इस सफलता को और बढ़ाने के लिए कतर ने 2019 में घोषणा की कि वह 2027 तक LNG उत्पादन क्षमता बढ़ाकर 12.6 करोड़ टन सालाना करेगा। युद्ध से पहले उसकी क्षमता करीब 7.7 करोड़ टन थी। यह विस्तार दुनिया की सबसे बड़ी ऊर्जा परियोजनाओं में गिना जा रहा था। लेकिन जंग की वजह से यह सब रुक गया है। ईरान की हमले से कतर के रस लाफान को नुकसान हाल के युद्ध में ईरान ने इसे निशाना बनाया। मिसाइलों और ड्रोन हमलों में रस लाफान के कुछ महत्वपूर्ण उपकरणों को नुकसान पहुंचा, जिससे कतर की गैस उत्पादन क्षमता करीब 17 फीसदी घट गई। इसी वजह से यह इलाका अब कतर की सबसे बड़ी चिंता भी बन गया है। कतर का सबसे बड़ा गैस उत्पादन केंद्र रस लाफान लगभग बंद पड़ा है। वहां की सड़कें बंद कर दी गई हैं। राजधानी दोहा के दक्षिण में बने विशाल हमाद पोर्ट पर लोडिंग क्रेन खामोश खड़ी हैं। जहाजों की आवाजाही लगभग रुक गई है। राजधानी के होटल, लग्जरी दुकानें और बाजार खामोश हैं। एशिया ग्रुप नाम की रणनीतिक सलाहकार कंपनी के मैनेजिंग डायरेक्टर अहमद हेलाल ने कहा कि कतर की पूरी अर्थव्यवस्था गैस निर्यात पर टिकी हुई है। उनके मुताबिक, “आज कतर में जो कुछ भी दिखाई देता है, वह ऊर्जा से आई दौलत की वजह से बना है। इसी कारण देश अब बेहद मुश्किल आर्थिक स्थिति की तरफ बढ़ रहा है।” होर्मुज बंद हुआ तो दुनिया से दूर हुआ कतर होर्मुज कतर के लिए जरूरी सामान लाने का जरिया है। कारें, मशीनें, फल-सब्जियां और बाकी रोजमर्रा का सामान भी इसी रास्ते आता है। अब यह सप्लाई रुक चुकी है। सऊदी अरब और UAE जैसे पड़ोसी देशों के पास ऐसे पाइपलाइन रास्ते हैं जो होर्मुज स्ट्रेट पर निर्भर नहीं हैं। लेकिन कतर पूरी तरह इसी जलमार्ग में फंसा हुआ है। ईरानी नाकेबंदी शुरू होने के सिर्फ 24 घंटे बाद कतर एनर्जी ने कहा कि वह अपने गैस सप्लाई कॉन्ट्रैक्ट पूरे नहीं कर पाएगा। एक्सपर्ट्स का कहना है कि अगर होर्मुज कल भी खुल जाए, तब भी उत्पादन को पुराने स्तर तक लौटाने में कई साल लग सकते हैं। कतर एनर्जी को युद्ध शुरू होने के बाद से अब तक अरबों डॉलर का नुकसान हो चुका है। हर गुजरते दिन के साथ देश को सैकड़ों मिलियन डॉलर की अतिरिक्त चोट लग रही है, क्योंकि गैस बिक्री और जहाज किराये की कमाई पूरी तरह रुक गई है। कतर की इकोनॉमी के 8.6% सिकुड़ने का खतरा LNG सप्लाई रुकने के बाद कतर की आर्थिक विकास दर के अनुमान भी घटा दिए गए हैं। अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) का अनुमान है कि इस साल कतर की अर्थव्यवस्था 8.6% सिकुड़ सकती है। इसे आसान भाषा में समझें, तो मान लीजिए पिछले साल कतर की अर्थव्यवस्था 100 रुपये की थी, तो 8.6% सिकुड़ने का मतलब है कि इस साल वह घटकर करीब 91.4 रुपये के बराबर रह जाएगी। IMF के मुख्य अर्थशास्त्री पियरे-ओलिवियर गोरिनचास ने कहा कि जितने दिन स्ट्रेट बंद रहेगा, हालात उतने खराब होते जाएंगे। जंग से कतर के टूरिज्म को भी नुकसान युद्ध ने कतर की दूसरी बड़ी कमजोरी भी सामने ला दी। पिछले कुछ वर्षों से कतर सिर्फ तेल-गैस देश की छवि से बाहर निकलकर खुद को पर्यटन, फाइनेंस और अंतरराष्ट्रीय कारोबार का केंद्र बनाने की कोशिश कर रहा था। 2019 में उसने विदेशी कंपनियों के लिए स्थानीय साझेदार रखने की शर्त खत्म कर दी। ट्रांजिट यात्रियों को लग्जरी होटल में रुकने के लिए सब्सिडी दी जाने लगी। फॉर्मूला-1 से लेकर फेंसिंग टूर्नामेंट तक, लगभग हर महीने कोई न कोई अंतरराष्ट्रीय खेल आयोजन हो रहा था। लेकिन युद्ध शुरू होने के बाद हालात बदल गए। अमेरिका और कई देशों ने यात्रा चेतावनी जारी कर दी। इसके बाद विदेशी पर्यटकों की संख्या तेजी से गिर गई। कई बहुराष्ट्रीय कंपनियों ने क्षेत्रीय अस्थिरता के डर से अपने कर्मचारियों को बाहर भेजना शुरू कर दिया। मार्च में वर्ल्ड ट्रैवल एंड टूरिज्म काउंसिल ने अनुमान लगाया कि मिडिल ईस्ट को पर्यटन में हर दिन करीब 60 करोड़ डॉलर का नुकसान हो रहा है। हवाई कार्गो से सब्जियां मंगवा रहा कतर कतर सरकार अब एक तरफ लोगों में सामान्य माहौल दिखाने की कोशिश कर रही है और दूसरी तरफ संकट से निपटने में लगी है। कतर अपना करीब 90 फीसदी खाना आयात करता है। समुद्री रास्ता बंद होने के बाद यूरोप से आने वाली ताजी सब्जियां और अमेरिका से आने वाला अनाज अब महंगे हवाई कार्गो या सऊदी अरब के रास्ते ट्रकों से लाया जा रहा है। आम तौर पर ऐसी स्थिति में महंगाई तेजी से बढ़ जाती, लेकिन सरकार भारी सब्सिडी देकर दाम कंट्रोल रखने की कोशिश कर रही है। सुपरमार्केट कर्मचारियों के मुताबिक, तंजानिया जैसे देशों से हवाई जहाजों के जरिए लाई जा रही एवोकाडो जैसी चीजों के दाम सिर्फ 5 से 10 फीसदी तक ही बढ़े हैं। लोग कहते हैं कि वे खुद को अभी भी सुरक्षित महसूस करते हैं, लेकिन रस लाफान पर हमला लोगों के दिमाग में अब भी ताजा है। कई लोगों ने बताया कि हमले वाली रात दोहा से भी आग का विशाल गुबार दिखाई दे रहा था और हवा में धुएं की तीखी गंध फैली हुई थी। तेल कमाई बंद हुई तो भी कतर के पास अकूत संपत्ति आर्थिक विशेषज्ञों का मानना है कि अगर कई साल तक गैस से कमाई बंद भी रहे, तब भी कतर के पास इतनी बचत है कि वह वेतन और जरूरी सरकारी सेवाएं जारी रख सके। कतर के पास करीब 600 अरब डॉलर (लगभग 50 लाख करोड़ रुपये) की विदेशी बचत है। कतर सरकार ने दुनियाभर की बड़ी संपत्तियों और कंपनियों में निवेश कर रखा है। SP ग्लोबल रेटिंग्स ने भी इस महीने कतर की क्रेडिट रेटिंग बरकरार रखी और कहा कि देश के पास बड़े वित्तीय भंडार मौजूद हैं। फिर भी सरकार की सबसे बड़ी चिंता विदेशी कंपनियों और विदेशी कर्मचारियों को देश में बनाए रखना है। अधिकारियों ने कई अंतरराष्ट्रीय कंपनियों पर दबाव डाला है कि वे अपना काम बंद न करें और कर्मचारियों को वापस बुलाएं।

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होर्मुज स्ट्रेट बंद होने से कतर का गैस निर्यात ठप:इकोनॉमी 8.6% गिर सकती है; यहां से ही भारत का सबसे ज्यादा LPG आयात

होर्मुज स्ट्रेट बंद होने से कतर का गैस निर्यात ठप:इकोनॉमी 8.6% गिर सकती है; यहां से ही भारत का सबसे ज्यादा LPG आयात

कतर फारस की खाड़ी में मौजूद एक छोटा-सा रेगिस्तानी देश था, जहां ज्यादातर लोग मोती निकालने और समुद्र से जुड़े छोटे-मोटे कारोबार पर निर्भर थे। फिर प्राकृतिक गैस ने इस देश की किस्मत पूरी तरह बदल दी। कतर ने 90 के दशक में बड़े पैमाने पर LNG यानी लिक्विफाइट नैचुरल गैस बनाकर उसे होर्मुज स्ट्रेट के जरिए दुनियाभर में भेजना शुरू किया। इससे उसे हर साल अरबों डॉलर की कमाई होने लगी। सिर्फ 30 साल में वह दुनिया के सबसे अमीर देशों में शामिल हो गया। लेकिन 28 फरवरी के बाद अचानक सब बदल गया। जंग शुरू होने के बाद होर्मुज स्ट्रेट बंद हो गया और कतर की दुनिया तक पहुंच लगभग कट गई है। युद्ध और तनाव की खबरों ने पर्यटन और कारोबार पर भी असर डाला है। इससे देश में मंदी का खतरा बढ़ गया है। भारत भी कतर से भारी मात्रा में प्राकृतिक गैस खरीदता है। अलग-अलग रिपोर्टों के मुताबिक, भारत की कुल LNG आयात का करीब 40% से 47% हिस्सा कतर से आया है। गैस को लिक्विड में बदला, फिर बदली किस्मत कतर में 1971 में नॉर्थ फील्ड नाम का विशाल गैस भंडार मिला था। इसे दुनिया के सबसे बड़े प्राकृतिक गैस भंडारों में गिना जाता है। तब दुनिया में ज्यादातर देशों तक गैस पाइपलाइन के जरिए पहुंचाई जाती थी। समस्या यह थी कि कतर एक छोटा-सा खाड़ी देश है और उससे सीधे यूरोप या एशिया तक पाइपलाइन बिछाना बेहद महंगा और मुश्किल था। तब कतर ने एक बड़ा दांव खेला। उसने अपनी प्राकृतिक गैस को बहुत ज्यादा ठंडा करके तरल, यानी लिक्विड बनाने की तकनीक अपनाई। इसमें गैस को करीब माइनस 162 डिग्री सेल्सियस तक ठंडा किया जाता है। इतना ठंडा होने पर गैस सिकुड़कर तरल बन जाती है और उसका आकार करीब 600 गुना छोटा हो जाता है। यही LNG यानी लिक्विफाइड नेचुरल गैस कहलाती है। इससे गैस को पाइपलाइन की बजाय जहाजों से दुनियाभर में भेजना संभव हो गया। 30 साल पहले जापान के भेजी LNG की पहली खेप यहीं से कतर एक ऊर्जा महाशक्ति बनकर उभरा। 1996 में जापान को 60 हजार टन LNG की पहली खेप भेजी गई। इसके बाद उत्पादन तेजी से बढ़ा और 2010 तक कतर की क्षमता 7.7 करोड़ टन सालाना पहुंच गई। कतर की 60 फीसदी से ज्यादा कमाई गैस और उससे जुड़े कारोबार से होती रही। इस कमाई ने कतर के रेगिस्तान की तस्वीर बदल दी। जहां कभी कच्ची सड़कें और खाली रेतीले मैदान थे, वहां आज ऊंची-ऊंची कॉर्पोरेट इमारतें, चौड़ी सड़कें और आधुनिक शहर खड़े हैं। शहरों में ऐसी सिंचाई व्यवस्था बनाई गई कि रेगिस्तान के बीच भी हरियाली, घास और चमकीले फूल दिखाई देने लगे। दोहा जैसे शहर आधुनिक महानगरों में बदल गए। कतर ने मेट्रो नेटवर्क बनाया, जो राजधानी दोहा को उत्तर में बसे लुसैल शहर से जोड़ता है। लुसैल में पेरिस जैसे डिजाइन वाला विशाल मॉल बनाया गया और कृत्रिम बर्फ वाला थीम पार्क भी तैयार किया गया। कतर ने साल 2022 में दुनिया का सबसे महंगा फुटबॉल वर्ल्ड कप आयोजित किया। इतना ही नहीं, उसने करीब 600 अरब डॉलर का सॉवरेन वेल्थ फंड बनाया, जिसने लंदन के हीथ्रो एयरपोर्ट, न्यूयॉर्क की एम्पायर स्टेट बिल्डिंग और दुनिया भर की बड़ी संपत्तियों में निवेश किया। रस लाफान सिटी बनाने के बाद अमीर हुआ कतर कतर की आर्थिक सफलता में रस लाफान की बहुत बड़ी भूमिका रही है। इसे कतर की गैस इकोनॉमी का दिल माना जाता है। दोहा से 80 किमी उत्तर रेगिस्तान में बसे इस इंडस्ट्रियल सिटी की वजह से कतर दुनिया के सबसे बड़े LNG निर्यातकों में शामिल हुआ। यह 100 वर्ग मील से ज्यादा इलाके में फैला हुआ है। यहां गैस प्रोसेसिंग और LNG प्लांट बने हैं। दोहा के दक्षिणी हिस्से में समुद्र किनारे लंबी औद्योगिक पट्टी बनाई गई, जहां गैस से अमोनिया और खाद तैयार की जाती है। 1990 से 2010 के बीच कतर की अर्थव्यवस्था हर साल औसतन 13 फीसदी की दर से बढ़ी। इस तेज विकास के लिए देश ने बड़ी संख्या में विदेशी मजदूर और पेशेवर कर्मचारियों को बुलाया। आज कतर की 32 लाख आबादी में करीब 90 फीसदी लोग विदेशी नागरिक हैं। इस सफलता को और बढ़ाने के लिए कतर ने 2019 में घोषणा की कि वह 2027 तक LNG उत्पादन क्षमता बढ़ाकर 12.6 करोड़ टन सालाना करेगा। युद्ध से पहले उसकी क्षमता करीब 7.7 करोड़ टन थी। यह विस्तार दुनिया की सबसे बड़ी ऊर्जा परियोजनाओं में गिना जा रहा था। लेकिन जंग की वजह से यह सब रुक गया है। ईरान की हमले से कतर के रस लाफान को नुकसान हाल के युद्ध में ईरान ने इसे निशाना बनाया। मिसाइलों और ड्रोन हमलों में रस लाफान के कुछ महत्वपूर्ण उपकरणों को नुकसान पहुंचा, जिससे कतर की गैस उत्पादन क्षमता करीब 17 फीसदी घट गई। इसी वजह से यह इलाका अब कतर की सबसे बड़ी चिंता भी बन गया है। कतर का सबसे बड़ा गैस उत्पादन केंद्र रस लाफान लगभग बंद पड़ा है। वहां की सड़कें बंद कर दी गई हैं। राजधानी दोहा के दक्षिण में बने विशाल हमाद पोर्ट पर लोडिंग क्रेन खामोश खड़ी हैं। जहाजों की आवाजाही लगभग रुक गई है। राजधानी के होटल, लग्जरी दुकानें और बाजार खामोश हैं। एशिया ग्रुप नाम की रणनीतिक सलाहकार कंपनी के मैनेजिंग डायरेक्टर अहमद हेलाल ने कहा कि कतर की पूरी अर्थव्यवस्था गैस निर्यात पर टिकी हुई है। उनके मुताबिक, “आज कतर में जो कुछ भी दिखाई देता है, वह ऊर्जा से आई दौलत की वजह से बना है। इसी कारण देश अब बेहद मुश्किल आर्थिक स्थिति की तरफ बढ़ रहा है।” होर्मुज बंद हुआ तो दुनिया से दूर हुआ कतर होर्मुज कतर के लिए जरूरी सामान लाने का जरिया है। कारें, मशीनें, फल-सब्जियां और बाकी रोजमर्रा का सामान भी इसी रास्ते आता है। अब यह सप्लाई रुक चुकी है। सऊदी अरब और UAE जैसे पड़ोसी देशों के पास ऐसे पाइपलाइन रास्ते हैं जो होर्मुज स्ट्रेट पर निर्भर नहीं हैं। लेकिन कतर पूरी तरह इसी जलमार्ग में फंसा हुआ है। ईरानी नाकेबंदी शुरू होने के सिर्फ 24 घंटे बाद कतर एनर्जी ने कहा कि वह अपने गैस सप्लाई कॉन्ट्रैक्ट पूरे नहीं कर पाएगा। एक्सपर्ट्स का कहना है कि अगर होर्मुज कल भी खुल जाए, तब भी उत्पादन को पुराने स्तर तक लौटाने में कई साल लग सकते हैं। कतर एनर्जी को युद्ध शुरू होने के बाद से अब तक अरबों डॉलर का नुकसान हो चुका है। हर गुजरते दिन के साथ देश को सैकड़ों मिलियन डॉलर की अतिरिक्त चोट लग रही है, क्योंकि गैस बिक्री और जहाज किराये की कमाई पूरी तरह रुक गई है। कतर की इकोनॉमी के 8.6% सिकुड़ने का खतरा LNG सप्लाई रुकने के बाद कतर की आर्थिक विकास दर के अनुमान भी घटा दिए गए हैं। अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) का अनुमान है कि इस साल कतर की अर्थव्यवस्था 8.6% सिकुड़ सकती है। इसे आसान भाषा में समझें, तो मान लीजिए पिछले साल कतर की अर्थव्यवस्था 100 रुपये की थी, तो 8.6% सिकुड़ने का मतलब है कि इस साल वह घटकर करीब 91.4 रुपये के बराबर रह जाएगी। IMF के मुख्य अर्थशास्त्री पियरे-ओलिवियर गोरिनचास ने कहा कि जितने दिन स्ट्रेट बंद रहेगा, हालात उतने खराब होते जाएंगे। जंग से कतर के टूरिज्म को भी नुकसान युद्ध ने कतर की दूसरी बड़ी कमजोरी भी सामने ला दी। पिछले कुछ वर्षों से कतर सिर्फ तेल-गैस देश की छवि से बाहर निकलकर खुद को पर्यटन, फाइनेंस और अंतरराष्ट्रीय कारोबार का केंद्र बनाने की कोशिश कर रहा था। 2019 में उसने विदेशी कंपनियों के लिए स्थानीय साझेदार रखने की शर्त खत्म कर दी। ट्रांजिट यात्रियों को लग्जरी होटल में रुकने के लिए सब्सिडी दी जाने लगी। फॉर्मूला-1 से लेकर फेंसिंग टूर्नामेंट तक, लगभग हर महीने कोई न कोई अंतरराष्ट्रीय खेल आयोजन हो रहा था। लेकिन युद्ध शुरू होने के बाद हालात बदल गए। अमेरिका और कई देशों ने यात्रा चेतावनी जारी कर दी। इसके बाद विदेशी पर्यटकों की संख्या तेजी से गिर गई। कई बहुराष्ट्रीय कंपनियों ने क्षेत्रीय अस्थिरता के डर से अपने कर्मचारियों को बाहर भेजना शुरू कर दिया। मार्च में वर्ल्ड ट्रैवल एंड टूरिज्म काउंसिल ने अनुमान लगाया कि मिडिल ईस्ट को पर्यटन में हर दिन करीब 60 करोड़ डॉलर का नुकसान हो रहा है। हवाई कार्गो से सब्जियां मंगवा रहा कतर कतर सरकार अब एक तरफ लोगों में सामान्य माहौल दिखाने की कोशिश कर रही है और दूसरी तरफ संकट से निपटने में लगी है। कतर अपना करीब 90 फीसदी खाना आयात करता है। समुद्री रास्ता बंद होने के बाद यूरोप से आने वाली ताजी सब्जियां और अमेरिका से आने वाला अनाज अब महंगे हवाई कार्गो या सऊदी अरब के रास्ते ट्रकों से लाया जा रहा है। आम तौर पर ऐसी स्थिति में महंगाई तेजी से बढ़ जाती, लेकिन सरकार भारी सब्सिडी देकर दाम कंट्रोल रखने की कोशिश कर रही है। सुपरमार्केट कर्मचारियों के मुताबिक, तंजानिया जैसे देशों से हवाई जहाजों के जरिए लाई जा रही एवोकाडो जैसी चीजों के दाम सिर्फ 5 से 10 फीसदी तक ही बढ़े हैं। लोग कहते हैं कि वे खुद को अभी भी सुरक्षित महसूस करते हैं, लेकिन रस लाफान पर हमला लोगों के दिमाग में अब भी ताजा है। कई लोगों ने बताया कि हमले वाली रात दोहा से भी आग का विशाल गुबार दिखाई दे रहा था और हवा में धुएं की तीखी गंध फैली हुई थी। तेल कमाई बंद हुई तो भी कतर के पास अकूत संपत्ति आर्थिक विशेषज्ञों का मानना है कि अगर कई साल तक गैस से कमाई बंद भी रहे, तब भी कतर के पास इतनी बचत है कि वह वेतन और जरूरी सरकारी सेवाएं जारी रख सके। कतर के पास करीब 600 अरब डॉलर (लगभग 50 लाख करोड़ रुपये) की विदेशी बचत है। कतर सरकार ने दुनियाभर की बड़ी संपत्तियों और कंपनियों में निवेश कर रखा है। SP ग्लोबल रेटिंग्स ने भी इस महीने कतर की क्रेडिट रेटिंग बरकरार रखी और कहा कि देश के पास बड़े वित्तीय भंडार मौजूद हैं। फिर भी सरकार की सबसे बड़ी चिंता विदेशी कंपनियों और विदेशी कर्मचारियों को देश में बनाए रखना है। अधिकारियों ने कई 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