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रिजेक्शन, प्यार और संघर्ष: अंशुमन‑महवश ने सुनाई दिल छूती कहानी:छोटे शहरों से निकले दोनों बोले- सफलता के पीछे दर्द और अधूरा इश्क

रिजेक्शन, प्यार और संघर्ष: अंशुमन‑महवश ने सुनाई दिल छूती कहानी:छोटे शहरों से निकले दोनों बोले- सफलता के पीछे दर्द और अधूरा इश्क

अंशुमन पुष्कर और महवश जल्द ही वेब सीरीज ‘सतरंगी बदला का खेल’ में नजर आने वाले हैं। छोटे शहरों से निकलकर अपनी मेहनत और टैलेंट के दम पर पहचान बनाने वाले दोनों कलाकारों ने दैनिक भास्कर से खास बातचीत की। इंटरव्यू में उन्होंने अपने संघर्ष, रिजेक्शन, प्यार, छोटे शहरों की सोच और एक्टिंग के सफर पर खुलकर बात की। अंशुमन ने बताया कि कैसे कुछ किरदार उन्हें अंदर तक प्रभावित कर जाते हैं, वहीं महवश ने अपने पहले प्यार और परिवार से लड़कर करियर बनाने के अनुभव साझा किए। दोनों ने यह भी बताया कि सफलता के पीछे कितनी मेहनत, दर्द और भावनात्मक संघर्ष छिपे होते हैं। सवाल: ‘सतरंगी बदला का खेल’ में बबलू के किरदार से आप खुद को कितना जोड़ पाते हैं? जवाब/अंशुमन: मैं दोनों चीजों से जुड़ पाता हूं। एक तरफ बबलू का टूटा हुआ इमोशनल पक्ष है और दूसरी तरफ उसके अंदर बदले की भावना। लेकिन अगर एक चीज चुननी हो, तो मैं उसके दर्द और उन वजहों से ज्यादा जुड़ता हूं, जिनकी वजह से उसके अंदर बदले की भावना पैदा होती है। समाज में उसके साथ जो भेदभाव और अन्याय होता है, वही उसकी सबसे बड़ी तकलीफ है। सवाल: लाली और बबलू में कौन-सा किरदार आपके ज्यादा करीब है? जवाब/अंशुमन: दोनों किरदार मेरे बहुत करीब हैं। बचपन से मुझे परफॉर्म करना पसंद था। शादियों में डांस करना और स्टेज पर जाना अच्छा लगता था, लेकिन उस माहौल में इसे ज्यादा अच्छा नहीं माना जाता था। इसलिए लाली के किरदार से मैं जुड़ता हूं। वहीं, बबलू की तरह मेरे अंदर भी बचपन से कुछ बड़ा और अच्छा करने की चाह थी। उसके लिए मेहनत करने और हर हद तक जाने का जज्बा था। इसलिए बबलू से भी बहुत जुड़ाव महसूस होता है। सवाल: महवश, आप अपने किरदार आरती से कितना रिलेट करती हैं? जवाब/महवश: मैं आरती के किरदार से काफी जुड़ती हूं। वह अपने लोगों के लिए किसी भी हद तक जा सकती है और मैं भी ऐसी ही हूं। मुझे सही और गलत बहुत साफ दिखाई देता है। कॉलेज के समय मैं यूनिवर्सिटी चुनाव में भी खड़ी हुई थी। अगर समाज में कुछ गलत दिखता है, तो मैं उसके खिलाफ बोलती हूं। यही बात आरती में भी है। सवाल: क्या आपको अपना पहला प्यार आज भी याद है? जवाब/महवश: पहला प्यार हमेशा याद रहता है। मैं अपनी स्कूटी लेकर उसके कोचिंग सेंटर के बाहर खड़ी हो जाती थी, सिर्फ उसे देखने के लिए। सर्दियों में सुबह जल्दी उठकर उसकी स्कूल बस देखने का इंतजार करती थी। वह एहसास बहुत खास था। सवाल: अंशुमन, आपने कभी किसी से इंतिहा वाला इश्क किया है? जवाब/अंशुमन: मैं हमेशा बहुत फिल्मी रहा हूं। स्कूल के दिनों में भी मुझे लगता था कि यही प्यार है। लेकिन सच कहूं तो जिन लड़कियों को पसंद करता था, उनसे कभी ठीक से बात तक नहीं कर पाया। बस दूर से ही खुश रहता था। लेकिन जब सच में प्यार होता है, तब उसकी गहराई समझ में आती है। वह एहसास बहुत इंटेंस होता है। सवाल: छोटे शहर से मुंबई आने के बाद क्या सबसे ज्यादा बदला? जवाब/महवश: मैं बहुत मासूम थी, लेकिन इस शहर में आकर अपने इमोशन्स छुपाने पड़ते हैं। यहां बहुत कॉम्पिटिशन है। डर रहता है कि कोई आपकी अच्छाई का फायदा न उठा ले। इसलिए खुद को मजबूत बनाना पड़ता है। मुझे आज भी वह मासूमियत याद आती है। सवाल: क्या आज के समय में प्यार पहले जैसा नहीं रहा? जवाब/अंशुमन: आज सब कुछ बहुत जल्दी होने लगा है। पहले लोग प्यार को महसूस करते थे, उसके लिए इंतजार करते थे। अब रिश्तों में गहराई कम होती जा रही है। मुझे लगता है कि असली प्यार में समझदारी से ज्यादा दिल की जरूरत होती है। टूटे हुए दिल से ही अच्छी शायरी, संगीत और कहानियां निकलती हैं। सवाल: जिंदगी का कोई ऐसा अपमान या संघर्ष, जो आज भी याद हो? जवाब/महवश: एक बार स्कूल टूर पर जाना था और बहुत बारिश हो रही थी। हमारे पास गाड़ी नहीं थी। मैंने पापा से कहा कि पड़ोसी से गाड़ी मांग लीजिए। लेकिन उन्होंने मना कर दिया। बाद में पापा मुझे बारिश में साइकिल से छोड़ने गए। उस दिन मैंने सोचा था कि एक दिन मैं अपने पापा को उनकी पसंद की गाड़ी जरूर दिलाऊंगी। जब मैंने अपनी पहली कार खरीदी, तब वही पल याद आया। सवाल: एक्टिंग की दुनिया में रिजेक्शन का सामना कैसे किया? जवाब/अंशुमन: ऑडिशन में कई बार बिना वजह ‘नॉट फिट’ कहकर रिजेक्ट कर दिया जाता था। शुरुआत में बुरा लगता था, लेकिन मैंने कभी किसी के लिए मन में कड़वाहट नहीं रखी। अगर कोई कहता था कि मैं खराब एक्टर हूं, तो मैं सोचता था कि शायद अभी मुझे और मेहनत करनी है। वही बातें मुझे बेहतर बनने के लिए प्रेरित करती रहीं। सवाल: महवश, आपके संघर्ष की शुरुआत कहां से हुई? जवाब/महवश: हमारे यहां लड़कियों की लड़ाई बहुत जल्दी शुरू हो जाती है। पहले घरवालों को मनाना पड़ता है कि बाहर जाकर पढ़ाई करनी है। फिर शादी का दबाव होता है। मेरी भी कम उम्र में सगाई हो गई थी, जो बाद में टूट गई। अगर मैं वापस लौट जाती, तो शायद मेरी जिंदगी बिल्कुल अलग होती। इसलिए इस शहर में आने के बाद मेरे पास सिर्फ एक ही रास्ता था- कुछ करके दिखाना। सवाल: ‘12th Fail’ के बाद जिंदगी में कितना बदलाव आया? जवाब/अंशुमन: बहुत बड़ा बदलाव तो नहीं आया, लेकिन लोगों का भरोसा बढ़ा है। ‘12th Fail’ जैसी सफल फिल्म का हिस्सा बनना मेरे लिए बहुत खास रहा। हर प्रोजेक्ट आपको थोड़ा-थोड़ा आगे बढ़ाता है। मुझे लगता है कि अभी सफर जारी है और बहुत कुछ करना बाकी है। सवाल: सबसे खास कॉम्प्लिमेंट कौन-सा मिला? जवाब/अंशुमन: ‘ग्रहण’ देखने के बाद मेरे थिएटर के सीनियर्स ने कहा था कि उन्हें नहीं पता था कि मैं किसी किरदार से इतने गहरे इमोशनली जुड़ सकता हूं। वह मेरे लिए बहुत खास था। महवश: हाल ही में डायरेक्टर जय सिंह का फोन आया। उन्होंने कहा कि एक सीन में मेरा रिएक्शन देखकर उन्हें गूजबंप्स आ गए। वह कॉम्प्लिमेंट हमेशा याद रहेगा।

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अंशुमन पुष्कर और महवश जल्द ही वेब सीरीज ‘सतरंगी बदला का खेल’ में नजर आने वाले हैं। छोटे शहरों से निकलकर अपनी मेहनत और टैलेंट के दम पर पहचान बनाने वाले दोनों कलाकारों ने दैनिक भास्कर से खास बातचीत की। इंटरव्यू में उन्होंने अपने संघर्ष, रिजेक्शन, प्यार, छोटे शहरों की सोच और एक्टिंग के सफर पर खुलकर बात की। अंशुमन ने बताया कि कैसे कुछ किरदार उन्हें अंदर तक प्रभावित कर जाते हैं, वहीं महवश ने अपने पहले प्यार और परिवार से लड़कर करियर बनाने के अनुभव साझा किए। दोनों ने यह भी बताया कि सफलता के पीछे कितनी मेहनत, दर्द और भावनात्मक संघर्ष छिपे होते हैं। सवाल: ‘सतरंगी बदला का खेल’ में बबलू के किरदार से आप खुद को कितना जोड़ पाते हैं? जवाब/अंशुमन: मैं दोनों चीजों से जुड़ पाता हूं। एक तरफ बबलू का टूटा हुआ इमोशनल पक्ष है और दूसरी तरफ उसके अंदर बदले की भावना। लेकिन अगर एक चीज चुननी हो, तो मैं उसके दर्द और उन वजहों से ज्यादा जुड़ता हूं, जिनकी वजह से उसके अंदर बदले की भावना पैदा होती है। समाज में उसके साथ जो भेदभाव और अन्याय होता है, वही उसकी सबसे बड़ी तकलीफ है। सवाल: लाली और बबलू में कौन-सा किरदार आपके ज्यादा करीब है? जवाब/अंशुमन: दोनों किरदार मेरे बहुत करीब हैं। बचपन से मुझे परफॉर्म करना पसंद था। शादियों में डांस करना और स्टेज पर जाना अच्छा लगता था, लेकिन उस माहौल में इसे ज्यादा अच्छा नहीं माना जाता था। इसलिए लाली के किरदार से मैं जुड़ता हूं। वहीं, बबलू की तरह मेरे अंदर भी बचपन से कुछ बड़ा और अच्छा करने की चाह थी। उसके लिए मेहनत करने और हर हद तक जाने का जज्बा था। इसलिए बबलू से भी बहुत जुड़ाव महसूस होता है। सवाल: महवश, आप अपने किरदार आरती से कितना रिलेट करती हैं? जवाब/महवश: मैं आरती के किरदार से काफी जुड़ती हूं। वह अपने लोगों के लिए किसी भी हद तक जा सकती है और मैं भी ऐसी ही हूं। मुझे सही और गलत बहुत साफ दिखाई देता है। कॉलेज के समय मैं यूनिवर्सिटी चुनाव में भी खड़ी हुई थी। अगर समाज में कुछ गलत दिखता है, तो मैं उसके खिलाफ बोलती हूं। यही बात आरती में भी है। सवाल: क्या आपको अपना पहला प्यार आज भी याद है? जवाब/महवश: पहला प्यार हमेशा याद रहता है। मैं अपनी स्कूटी लेकर उसके कोचिंग सेंटर के बाहर खड़ी हो जाती थी, सिर्फ उसे देखने के लिए। सर्दियों में सुबह जल्दी उठकर उसकी स्कूल बस देखने का इंतजार करती थी। वह एहसास बहुत खास था। सवाल: अंशुमन, आपने कभी किसी से इंतिहा वाला इश्क किया है? जवाब/अंशुमन: मैं हमेशा बहुत फिल्मी रहा हूं। स्कूल के दिनों में भी मुझे लगता था कि यही प्यार है। लेकिन सच कहूं तो जिन लड़कियों को पसंद करता था, उनसे कभी ठीक से बात तक नहीं कर पाया। बस दूर से ही खुश रहता था। लेकिन जब सच में प्यार होता है, तब उसकी गहराई समझ में आती है। वह एहसास बहुत इंटेंस होता है। सवाल: छोटे शहर से मुंबई आने के बाद क्या सबसे ज्यादा बदला? जवाब/महवश: मैं बहुत मासूम थी, लेकिन इस शहर में आकर अपने इमोशन्स छुपाने पड़ते हैं। यहां बहुत कॉम्पिटिशन है। डर रहता है कि कोई आपकी अच्छाई का फायदा न उठा ले। इसलिए खुद को मजबूत बनाना पड़ता है। मुझे आज भी वह मासूमियत याद आती है। सवाल: क्या आज के समय में प्यार पहले जैसा नहीं रहा? जवाब/अंशुमन: आज सब कुछ बहुत जल्दी होने लगा है। पहले लोग प्यार को महसूस करते थे, उसके लिए इंतजार करते थे। अब रिश्तों में गहराई कम होती जा रही है। मुझे लगता है कि असली प्यार में समझदारी से ज्यादा दिल की जरूरत होती है। टूटे हुए दिल से ही अच्छी शायरी, संगीत और कहानियां निकलती हैं। सवाल: जिंदगी का कोई ऐसा अपमान या संघर्ष, जो आज भी याद हो? जवाब/महवश: एक बार स्कूल टूर पर जाना था और बहुत बारिश हो रही थी। हमारे पास गाड़ी नहीं थी। मैंने पापा से कहा कि पड़ोसी से गाड़ी मांग लीजिए। लेकिन उन्होंने मना कर दिया। बाद में पापा मुझे बारिश में साइकिल से छोड़ने गए। उस दिन मैंने सोचा था कि एक दिन मैं अपने पापा को उनकी पसंद की गाड़ी जरूर दिलाऊंगी। जब मैंने अपनी पहली कार खरीदी, तब वही पल याद आया। सवाल: एक्टिंग की दुनिया में रिजेक्शन का सामना कैसे किया? जवाब/अंशुमन: ऑडिशन में कई बार बिना वजह ‘नॉट फिट’ कहकर रिजेक्ट कर दिया जाता था। शुरुआत में बुरा लगता था, लेकिन मैंने कभी किसी के लिए मन में कड़वाहट नहीं रखी। अगर कोई कहता था कि मैं खराब एक्टर हूं, तो मैं सोचता था कि शायद अभी मुझे और मेहनत करनी है। वही बातें मुझे बेहतर बनने के लिए प्रेरित करती रहीं। सवाल: महवश, आपके संघर्ष की शुरुआत कहां से हुई? जवाब/महवश: हमारे यहां लड़कियों की लड़ाई बहुत जल्दी शुरू हो जाती है। पहले घरवालों को मनाना पड़ता है कि बाहर जाकर पढ़ाई करनी है। फिर शादी का दबाव होता है। मेरी भी कम उम्र में सगाई हो गई थी, जो बाद में टूट गई। अगर मैं वापस लौट जाती, तो शायद मेरी जिंदगी बिल्कुल अलग होती। इसलिए इस शहर में आने के बाद मेरे पास सिर्फ एक ही रास्ता था- कुछ करके दिखाना। सवाल: ‘12th Fail’ के बाद जिंदगी में कितना बदलाव आया? जवाब/अंशुमन: बहुत बड़ा बदलाव तो नहीं आया, लेकिन लोगों का भरोसा बढ़ा है। ‘12th Fail’ जैसी सफल फिल्म का हिस्सा बनना मेरे लिए बहुत खास रहा। हर प्रोजेक्ट आपको थोड़ा-थोड़ा आगे बढ़ाता है। मुझे लगता है कि अभी सफर जारी है और बहुत कुछ करना बाकी है। सवाल: सबसे खास कॉम्प्लिमेंट कौन-सा मिला? जवाब/अंशुमन: ‘ग्रहण’ देखने के बाद मेरे थिएटर के सीनियर्स ने कहा था कि उन्हें नहीं पता था कि मैं किसी किरदार से इतने गहरे इमोशनली जुड़ सकता हूं। वह मेरे लिए बहुत खास था। महवश: हाल ही में डायरेक्टर जय सिंह का फोन आया। उन्होंने कहा कि एक सीन में मेरा रिएक्शन देखकर उन्हें गूजबंप्स आ गए। वह कॉम्प्लिमेंट हमेशा याद रहेगा।

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