Monday, 14 Sep 2026 | 01:39 AM

Trending :

EXCLUSIVE

Volodymyr Zelensky Vs Hungary PM; Viktor Orban – Russia Ukraine War

Volodymyr Zelensky Vs Hungary PM; Viktor Orban - Russia Ukraine War

म्यूनिख5 दिन पहले

  • कॉपी लिंक

यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की ने रविवार को जर्मनी के म्यूनिख सिक्योरिटी कॉन्फ्रेंस में हंगरी के प्रधानमंत्री विक्टर ऑर्बन का मजाक उड़ाया। उन्होंने कहा कि यूक्रेन, रूस से लड़ रहा है, इसलिए यूरोप के देश आज आजादी से जी पा रहे हैं।

जेलेंस्की ने कहा कि विक्टर ऑर्बन सोच रहे हैं कि अपना पेट कैसे बढ़ाया जाए, लेकिन ये नहीं सोच रहे कि सेना को कैसे बढ़ाया जाए, ताकि रूस टैंकों को बुडापेस्ट (हंगरी की राजधानी) की सड़कों पर फिर लौटने से रोका जा सके।

जेलेंस्की का कहना है कि ऑर्बन रूस के खतरे को गंभीरता से लेने के बजाय अपनी राजनीति और आराम पर ज्यादा ध्यान दे रहे हैं। वे सुरक्षा और रक्षा तैयारियों के बजाय दूसरी बातों में ज्यादा उलझे हुए हैं।

‘रूसी टैंकों के बुडापेस्ट की सड़कों पर लौटने’ की बात हंगरी के इतिहास से जुड़ी चेतावनी है। 1956 में सोवियत टैंक हंगरी में घुसे थे और विद्रोह को कुचल दिया गया था। जेलेंस्की याद दिलाना चाहते हैं कि अगर रूस को खुली छूट दी गई और समय रहते उसका विरोध नहीं किया गया, तो ऐसा खतरा दोबारा भी सामने आ सकता है।

हंगरी के प्रधानमंत्री विक्टर ऑर्बन के साथ यूक्रेनी राष्ट्रपति जेलेंस्की। यह तस्वीर जुलाई 2024 की है।

हंगरी के प्रधानमंत्री विक्टर ऑर्बन के साथ यूक्रेनी राष्ट्रपति जेलेंस्की। यह तस्वीर जुलाई 2024 की है।

ऑर्बन पर रूस को लेकर नरम रुख अपनाने का आरोप

कोल्ड वॉर के समय हंगरी सोवियत यूनियन (आज का रूस) का हिस्सा था। बीते कुछ सालों में यूक्रेन और हंगरी के रिश्ते काफी तनावपूर्ण हुए हैं।

इसकी वजह यह है कि ऑर्बन पर रूस को लेकर नरम रुख अपनाने का आरोप है। हाल के हफ्तों में उन्होंने देश के चुनाव से पहले यूक्रेन के खिलाफ बयानबाजी भी तेज कर दी है।

इससे पहले 2022 में रूसी हमले के बाद यूक्रेन ने यूरोपीय संघ (EU) में शामिल होने के लिए आवेदन किया था, लेकिन तब ऑर्बन के वीटो की वजह से आगे की बातचीत आगे नहीं बढ़ सकी थी। बाकी यूरोपीय देशों के उलट, हंगरी ने यूक्रेन पर रूस के हमले के बाद भी रूस से अपने इंपोर्ट में कोई बड़ा बदलाव नहीं किया।

जेलेंस्की बोले- अमेरिका अब यूरोप को पहले जैसा साझेदार नहीं मानता

जेलेंस्की ने कहा कि अब पुराने दिन खत्म हो चुके हैं। अमेरिका अब यूरोप को पहले जैसा साझेदार नहीं मानता। इसलिए यूरोप को यूक्रेन के साथ मिलकर अपनी खुद की सेना बनानी चाहिए।

उन्होंने कहा कि यह युद्ध कुछ नेताओं के बीच बैठकर तय नहीं किया जा सकता। न तो डोनाल्ड ट्रम्प और व्लादिमीर पुतिन मिलकर इसका फैसला कर सकते हैं, न ही मैं खुद और पुतिन। म्यूनिख में बैठा कोई भी नेता अकेले पुतिन से बात करके इस युद्ध का अंत तय नहीं कर सकता। असली शांति के लिए सभी को मिलकर दबाव बनाना होगा।

उन्होंने कहा कि कई नेता पहले भी कह चुके हैं कि यूरोप की अपनी सेना होनी चाहिए। उनके मुताबिक अब समय आ गया है कि यूरोप की सेनाएं बनाई जाएं।

यूरोप को एक आवाज में बोलना होगा, अलग-अलग नहीं

जेलेंस्की ने कहा कि अमेरिका को यूरोप एक बाजार के रूप में तो चाहिए, लेकिन क्या वह उसे सहयोगी के रूप में देखता है, यह साफ नहीं है। यूरोप को एक आवाज में बोलना होगा, अलग-अलग आवाजों में नहीं।

उन्होंने बताया कि कुछ दिन पहले राष्ट्रपति ट्रम्प ने उनसे पुतिन के साथ अपनी बातचीत के बारे में बताया, लेकिन एक बार भी यह नहीं कहा कि अमेरिका को बातचीत में यूरोप की जरूरत है। यह बात बहुत कुछ बताती है।

जेलेंस्की ने कहा कि यूक्रेन आज ड्रोन युद्ध में दुनिया का नेता है। यह यूक्रेन की सफलता है, लेकिन यह दूसरों की भी सफलता है। उन्होंने कहा कि यूक्रेन अपनी रक्षा के लिए जो कुछ भी बना रहा है, वह दूसरे देशों की सुरक्षा को भी मजबूत करता है।

अमेरिका से करीबी रिश्ते बनाना जरूरी

जेलेंस्की ने कहा कि अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने साफ कर दिया है कि यूरोप और अमेरिका के बीच पुराने रिश्तों का दौर खत्म हो रहा है। अब हालात अलग होंगे और यूरोप को इसके मुताबिक खुद को ढालना होगा।

उन्होंने कहा कि पहले अमेरिका सिर्फ इसलिए यूरोप का साथ देता था क्योंकि वह हमेशा से ऐसा करता आया था। लेकिन अब हालात बदल गए हैं। उन्होंने ट्रम्प के उस बयान का जिक्र किया कि इंसान के लिए वह परिवार ज्यादा मायने रखता है जिसे वह खुद बनाता है। उन्होंने कहा कि अमेरिका के साथ सबसे करीबी रिश्ता बनाना जरूरी है।

ट्रम्प ने पिछले महीने स्विट्जरलैंड के दावोस में कहा था कि आर्थिक मामलों में यूरोप को अमेरिका जैसा बनना चाहिए। यूरोप वही करे जो अमेरिका कर रहा।

ट्रम्प ने पिछले महीने स्विट्जरलैंड के दावोस में कहा था कि आर्थिक मामलों में यूरोप को अमेरिका जैसा बनना चाहिए। यूरोप वही करे जो अमेरिका कर रहा।

यूक्रेन पर कोई फैसला यूक्रेन के बिना नहीं होना चाहिए

जेलेंस्की ने साफ कहा कि यूक्रेन अपने पीछे या अपनी भागीदारी के बिना किए गए किसी भी समझौते को कभी स्वीकार नहीं करेगा। यही नियम पूरे यूरोप पर भी लागू होना चाहिए। यूक्रेन के बारे में कोई फैसला यूक्रेन के बिना नहीं और यूरोप के बारे में कोई फैसला यूरोप के बिना नहीं होना चाहिए।

उन्होंने यह भी कहा कि रूस हर हफ्ते नए सैन्य भर्ती केंद्र खोल रहा है और पुतिन ऐसा इसलिए कर पा रहे हैं क्योंकि तेल की कीमतें अभी भी इतनी ऊंची हैं कि वह दुनिया की परवाह किए बिना अपने फैसले ले सकते हैं।

विक्टर ऑर्बन रूस पर प्रतिबंध लगाने से इनकार कर चुके हैं

हंगरी के प्रधानमंत्री विक्टर ऑर्बन पहले भी कह चुके हैं कि उनके देश ने कभी भी रूस के खिलाफ यूरोपीय संघ के प्रतिबंधों का समर्थन नहीं किया। कुछ साल पहले उन्होंने कहा कि फ्रांसीसी पत्रिका से कहा था कि उनका मकसद हमेशा हंगरी के राष्ट्रीय हितों की रक्षा करना रहा है।

ऑर्बन ने कहा था कि यूरोप के इतिहास में शायद ही कोई उदाहरण हो, जब प्रतिबंधों से मनचाहा नतीजा मिला हो। रूस के मामले में प्रतिबंधों का असर सही तरीके से लागू नहीं हो रहा है और कई बार यूरोपीय देशों को रूस से ज्यादा नुकसान हो रहा है।

उन्होंने यह भी आरोप लगाया था कि रूस पर प्रतिबंधों की बात करने के बावजूद अमेरिका परमाणु ईंधन की खरीद कर रहा है। उनके मुताबिक जब यूरोप प्रतिबंधों की बात करता है, तो कुछ देश इनसे बचकर अच्छा कारोबार कर रहे हैं।

हंगरी न तो यूक्रेन युद्ध में सैनिक भेजेगा न हथियार देगा

उन्होंने साफ कहा था कि हंगरी रूस-यूक्रेन युद्ध में शामिल नहीं होना चाहता। उनका कहना है कि यूक्रेन को शांति वार्ता करनी चाहिए। हंगरी न तो सैनिक भेजेगा, न हथियार और न ही पैसा, लेकिन शांति की कोशिशों में मदद करने को तैयार है।

ऑर्बन ने कहा था कि अगर यूरोपीय संघ को यूरोप के भविष्य से जुड़े फैसलों में शामिल रहना है, तो उसे खुद अपनी कूटनीतिक पहल करनी चाहिए और सीधे मॉस्को से बातचीत शुरू करनी चाहिए। उन्होंने बताया था कि अमेरिका और रूस पहले से बातचीत कर रहे हैं और कभी भी समझौता हो सकता है।

यूक्रेन की यूरोपीय संघ सदस्यता पर उन्होंने कहा कि हंगरी ऐसे किसी गठबंधन का हिस्सा नहीं बनना चाहता, जिसमें कोई ऐसा देश शामिल हो जो लगातार युद्ध के खतरे में हो। उन्होंने कहा था कि रूस-यूक्रेन युद्ध हमारा युद्ध नहीं है। अगर यूक्रेन EU में शामिल होता है, तो यह युद्ध हमारा भी बन जाएगा, और हम ऐसा नहीं चाहते।

ऑर्बन ने कहा था कि यूक्रेन की आर्थिक स्थिति ऐसी है कि अगर उसे EU में शामिल किया गया तो यूरोप के संसाधन उस पर खर्च होंगे और सदस्य देशों के विकास के लिए जरूरी पैसा कम पड़ जाएगा। इसी वजह से हंगरी यूक्रेन के साथ सदस्यता वार्ता शुरू करने या उसे आर्थिक मदद देने वाले किसी भी प्रस्ताव का समर्थन नहीं करेगा।

———————

यह खबर भी पढ़ें…

यूक्रेन-रूस और अमेरिका के बीच 4 साल में पहली बैठक:जमीन छोड़ने पर विवाद; मेलोनी बोली- जंग खत्म हुई तो ट्रम्प को नोबेल के लिए नॉमिनेट करूंगी

यूक्रेन, रूस और अमेरिका के बीच अबू धाबी में शुक्रवार को त्रिपक्षीय वार्ता हुई। यह बातचीत आज भी जारी रहेगी। 2022 में रूस के यूक्रेन पर हमले के बाद तीनों देशों की पहली संयुक्त बैठक है। यहां पढ़ें पूरी खबर…

खबरें और भी हैं…
WhatsApp
Facebook
Twitter
LinkedIn

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

लेटेस्ट टॉप अपडेट

सच्चाई की दहाड़

ब्रेकिंग खबरें सीधे अपने ईमेल पर पाने के लिए रजिस्टर करें।

You have been successfully Subscribed! Ops! Something went wrong, please try again.

ग्लोबल करेंसी अपडेट

Provided by IFC Markets
कब्ज का रामबाण इलाज है कीवी, रोज इस तरह से कारगर; पेट बिल्कुल साफ, दवा की भी जरूरत नहीं

March 6, 2026/
12:46 pm

लाइफस्टाइल और आर्किटेक्चर में बदलाव की वजह से रिकॉर्डिंग की शिकायत आम हो रही है। जंक फूड, कम पानी और...

SRH batter Heinrich Klaasen. (AP Photo)

May 6, 2026/
8:56 pm

आखरी अपडेट:06 मई, 2026, 20:56 IST पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के नतीजे सोमवार को घोषित किए गए। इसके बाद राज्य...

Brent crude jumped 8% to $116 per barrel and is up nearly 60% since the war began in late February. (Image: Reuters)

March 19, 2026/
5:33 pm

आखरी अपडेट:मार्च 19, 2026, 17:33 IST एक उच्च पदस्थ महानिदेशक (डीजी) से एक राजनीतिक हस्ती में डॉ. कुमार के परिवर्तन...

राम गोपाल वर्मा बोले- दाऊद को क्रेडिट क्यों न दें:अंडरवर्ल्ड डॉन की वजह से ‘सत्या’ और ‘कंपनी’ बनाई, आज भी कमा रहा हूं

April 11, 2026/
7:04 pm

फिल्ममेकर राम गोपाल वर्मा अपने बयान को लेकर चर्चा में हैं। उन्होंने अंडरवर्ल्ड डॉन दाऊद इब्राहिम पर ऐसा बयान दिया,...

धार हादसे में किसी ने बेटी खोई, किसी ने पत्नी:शादी तय होने के 3 दिन बाद युवती की मौत; बुजुर्ग बोले-अब पोता ही सहारा

May 1, 2026/
9:23 am

मध्य प्रदेश के धार में टायर फटने से अनियंत्रित होकर पिकअप वाहन डिवाइडर पर चढ़कर पलट गया। वाहन ने 3-4...

आईपीएस अधिकारी सिमाला प्रसाद बनीं एक्ट्रेस:मुकेश तिवारी बोले- लगा था ये कैसे एक्टिंग करेंगी, लेकिन उन्हें जज करना मेरी गलती थी

June 2, 2026/
5:30 am

आईपीएस अधिकारी सिमाला प्रसाद फिल्म ‘द नर्मदा स्टोरी’ में अहम भूमिका निभाती नजर आएंगी। दैनिक भास्कर से बातचीत में उन्होंने...

CBSE Glitches: Minister Pradhan Takes Responsibility

May 28, 2026/
8:56 pm

नई दिल्ली17 मिनट पहले कॉपी लिंक नई दिल्ली में CBSE मुख्यालय शिक्षा मंत्री ने अधिकारियों के साथ बैठक की। केंद्रीय...

जॉब - शिक्षा

राजनीति

Volodymyr Zelensky Vs Hungary PM; Viktor Orban – Russia Ukraine War

Volodymyr Zelensky Vs Hungary PM; Viktor Orban - Russia Ukraine War

म्यूनिख5 दिन पहले

  • कॉपी लिंक

यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की ने रविवार को जर्मनी के म्यूनिख सिक्योरिटी कॉन्फ्रेंस में हंगरी के प्रधानमंत्री विक्टर ऑर्बन का मजाक उड़ाया। उन्होंने कहा कि यूक्रेन, रूस से लड़ रहा है, इसलिए यूरोप के देश आज आजादी से जी पा रहे हैं।

जेलेंस्की ने कहा कि विक्टर ऑर्बन सोच रहे हैं कि अपना पेट कैसे बढ़ाया जाए, लेकिन ये नहीं सोच रहे कि सेना को कैसे बढ़ाया जाए, ताकि रूस टैंकों को बुडापेस्ट (हंगरी की राजधानी) की सड़कों पर फिर लौटने से रोका जा सके।

जेलेंस्की का कहना है कि ऑर्बन रूस के खतरे को गंभीरता से लेने के बजाय अपनी राजनीति और आराम पर ज्यादा ध्यान दे रहे हैं। वे सुरक्षा और रक्षा तैयारियों के बजाय दूसरी बातों में ज्यादा उलझे हुए हैं।

‘रूसी टैंकों के बुडापेस्ट की सड़कों पर लौटने’ की बात हंगरी के इतिहास से जुड़ी चेतावनी है। 1956 में सोवियत टैंक हंगरी में घुसे थे और विद्रोह को कुचल दिया गया था। जेलेंस्की याद दिलाना चाहते हैं कि अगर रूस को खुली छूट दी गई और समय रहते उसका विरोध नहीं किया गया, तो ऐसा खतरा दोबारा भी सामने आ सकता है।

हंगरी के प्रधानमंत्री विक्टर ऑर्बन के साथ यूक्रेनी राष्ट्रपति जेलेंस्की। यह तस्वीर जुलाई 2024 की है।

हंगरी के प्रधानमंत्री विक्टर ऑर्बन के साथ यूक्रेनी राष्ट्रपति जेलेंस्की। यह तस्वीर जुलाई 2024 की है।

ऑर्बन पर रूस को लेकर नरम रुख अपनाने का आरोप

कोल्ड वॉर के समय हंगरी सोवियत यूनियन (आज का रूस) का हिस्सा था। बीते कुछ सालों में यूक्रेन और हंगरी के रिश्ते काफी तनावपूर्ण हुए हैं।

इसकी वजह यह है कि ऑर्बन पर रूस को लेकर नरम रुख अपनाने का आरोप है। हाल के हफ्तों में उन्होंने देश के चुनाव से पहले यूक्रेन के खिलाफ बयानबाजी भी तेज कर दी है।

इससे पहले 2022 में रूसी हमले के बाद यूक्रेन ने यूरोपीय संघ (EU) में शामिल होने के लिए आवेदन किया था, लेकिन तब ऑर्बन के वीटो की वजह से आगे की बातचीत आगे नहीं बढ़ सकी थी। बाकी यूरोपीय देशों के उलट, हंगरी ने यूक्रेन पर रूस के हमले के बाद भी रूस से अपने इंपोर्ट में कोई बड़ा बदलाव नहीं किया।

जेलेंस्की बोले- अमेरिका अब यूरोप को पहले जैसा साझेदार नहीं मानता

जेलेंस्की ने कहा कि अब पुराने दिन खत्म हो चुके हैं। अमेरिका अब यूरोप को पहले जैसा साझेदार नहीं मानता। इसलिए यूरोप को यूक्रेन के साथ मिलकर अपनी खुद की सेना बनानी चाहिए।

उन्होंने कहा कि यह युद्ध कुछ नेताओं के बीच बैठकर तय नहीं किया जा सकता। न तो डोनाल्ड ट्रम्प और व्लादिमीर पुतिन मिलकर इसका फैसला कर सकते हैं, न ही मैं खुद और पुतिन। म्यूनिख में बैठा कोई भी नेता अकेले पुतिन से बात करके इस युद्ध का अंत तय नहीं कर सकता। असली शांति के लिए सभी को मिलकर दबाव बनाना होगा।

उन्होंने कहा कि कई नेता पहले भी कह चुके हैं कि यूरोप की अपनी सेना होनी चाहिए। उनके मुताबिक अब समय आ गया है कि यूरोप की सेनाएं बनाई जाएं।

यूरोप को एक आवाज में बोलना होगा, अलग-अलग नहीं

जेलेंस्की ने कहा कि अमेरिका को यूरोप एक बाजार के रूप में तो चाहिए, लेकिन क्या वह उसे सहयोगी के रूप में देखता है, यह साफ नहीं है। यूरोप को एक आवाज में बोलना होगा, अलग-अलग आवाजों में नहीं।

उन्होंने बताया कि कुछ दिन पहले राष्ट्रपति ट्रम्प ने उनसे पुतिन के साथ अपनी बातचीत के बारे में बताया, लेकिन एक बार भी यह नहीं कहा कि अमेरिका को बातचीत में यूरोप की जरूरत है। यह बात बहुत कुछ बताती है।

जेलेंस्की ने कहा कि यूक्रेन आज ड्रोन युद्ध में दुनिया का नेता है। यह यूक्रेन की सफलता है, लेकिन यह दूसरों की भी सफलता है। उन्होंने कहा कि यूक्रेन अपनी रक्षा के लिए जो कुछ भी बना रहा है, वह दूसरे देशों की सुरक्षा को भी मजबूत करता है।

अमेरिका से करीबी रिश्ते बनाना जरूरी

जेलेंस्की ने कहा कि अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने साफ कर दिया है कि यूरोप और अमेरिका के बीच पुराने रिश्तों का दौर खत्म हो रहा है। अब हालात अलग होंगे और यूरोप को इसके मुताबिक खुद को ढालना होगा।

उन्होंने कहा कि पहले अमेरिका सिर्फ इसलिए यूरोप का साथ देता था क्योंकि वह हमेशा से ऐसा करता आया था। लेकिन अब हालात बदल गए हैं। उन्होंने ट्रम्प के उस बयान का जिक्र किया कि इंसान के लिए वह परिवार ज्यादा मायने रखता है जिसे वह खुद बनाता है। उन्होंने कहा कि अमेरिका के साथ सबसे करीबी रिश्ता बनाना जरूरी है।

ट्रम्प ने पिछले महीने स्विट्जरलैंड के दावोस में कहा था कि आर्थिक मामलों में यूरोप को अमेरिका जैसा बनना चाहिए। यूरोप वही करे जो अमेरिका कर रहा।

ट्रम्प ने पिछले महीने स्विट्जरलैंड के दावोस में कहा था कि आर्थिक मामलों में यूरोप को अमेरिका जैसा बनना चाहिए। यूरोप वही करे जो अमेरिका कर रहा।

यूक्रेन पर कोई फैसला यूक्रेन के बिना नहीं होना चाहिए

जेलेंस्की ने साफ कहा कि यूक्रेन अपने पीछे या अपनी भागीदारी के बिना किए गए किसी भी समझौते को कभी स्वीकार नहीं करेगा। यही नियम पूरे यूरोप पर भी लागू होना चाहिए। यूक्रेन के बारे में कोई फैसला यूक्रेन के बिना नहीं और यूरोप के बारे में कोई फैसला यूरोप के बिना नहीं होना चाहिए।

उन्होंने यह भी कहा कि रूस हर हफ्ते नए सैन्य भर्ती केंद्र खोल रहा है और पुतिन ऐसा इसलिए कर पा रहे हैं क्योंकि तेल की कीमतें अभी भी इतनी ऊंची हैं कि वह दुनिया की परवाह किए बिना अपने फैसले ले सकते हैं।

विक्टर ऑर्बन रूस पर प्रतिबंध लगाने से इनकार कर चुके हैं

हंगरी के प्रधानमंत्री विक्टर ऑर्बन पहले भी कह चुके हैं कि उनके देश ने कभी भी रूस के खिलाफ यूरोपीय संघ के प्रतिबंधों का समर्थन नहीं किया। कुछ साल पहले उन्होंने कहा कि फ्रांसीसी पत्रिका से कहा था कि उनका मकसद हमेशा हंगरी के राष्ट्रीय हितों की रक्षा करना रहा है।

ऑर्बन ने कहा था कि यूरोप के इतिहास में शायद ही कोई उदाहरण हो, जब प्रतिबंधों से मनचाहा नतीजा मिला हो। रूस के मामले में प्रतिबंधों का असर सही तरीके से लागू नहीं हो रहा है और कई बार यूरोपीय देशों को रूस से ज्यादा नुकसान हो रहा है।

उन्होंने यह भी आरोप लगाया था कि रूस पर प्रतिबंधों की बात करने के बावजूद अमेरिका परमाणु ईंधन की खरीद कर रहा है। उनके मुताबिक जब यूरोप प्रतिबंधों की बात करता है, तो कुछ देश इनसे बचकर अच्छा कारोबार कर रहे हैं।

हंगरी न तो यूक्रेन युद्ध में सैनिक भेजेगा न हथियार देगा

उन्होंने साफ कहा था कि हंगरी रूस-यूक्रेन युद्ध में शामिल नहीं होना चाहता। उनका कहना है कि यूक्रेन को शांति वार्ता करनी चाहिए। हंगरी न तो सैनिक भेजेगा, न हथियार और न ही पैसा, लेकिन शांति की कोशिशों में मदद करने को तैयार है।

ऑर्बन ने कहा था कि अगर यूरोपीय संघ को यूरोप के भविष्य से जुड़े फैसलों में शामिल रहना है, तो उसे खुद अपनी कूटनीतिक पहल करनी चाहिए और सीधे मॉस्को से बातचीत शुरू करनी चाहिए। उन्होंने बताया था कि अमेरिका और रूस पहले से बातचीत कर रहे हैं और कभी भी समझौता हो सकता है।

यूक्रेन की यूरोपीय संघ सदस्यता पर उन्होंने कहा कि हंगरी ऐसे किसी गठबंधन का हिस्सा नहीं बनना चाहता, जिसमें कोई ऐसा देश शामिल हो जो लगातार युद्ध के खतरे में हो। उन्होंने कहा था कि रूस-यूक्रेन युद्ध हमारा युद्ध नहीं है। अगर यूक्रेन EU में शामिल होता है, तो यह युद्ध हमारा भी बन जाएगा, और हम ऐसा नहीं चाहते।

ऑर्बन ने कहा था कि यूक्रेन की आर्थिक स्थिति ऐसी है कि अगर उसे EU में शामिल किया गया तो यूरोप के संसाधन उस पर खर्च होंगे और सदस्य देशों के विकास के लिए जरूरी पैसा कम पड़ जाएगा। इसी वजह से हंगरी यूक्रेन के साथ सदस्यता वार्ता शुरू करने या उसे आर्थिक मदद देने वाले किसी भी प्रस्ताव का समर्थन नहीं करेगा।

———————

यह खबर भी पढ़ें…

यूक्रेन-रूस और अमेरिका के बीच 4 साल में पहली बैठक:जमीन छोड़ने पर विवाद; मेलोनी बोली- जंग खत्म हुई तो ट्रम्प को नोबेल के लिए नॉमिनेट करूंगी

यूक्रेन, रूस और अमेरिका के बीच अबू धाबी में शुक्रवार को त्रिपक्षीय वार्ता हुई। यह बातचीत आज भी जारी रहेगी। 2022 में रूस के यूक्रेन पर हमले के बाद तीनों देशों की पहली संयुक्त बैठक है। यहां पढ़ें पूरी खबर…

खबरें और भी हैं…
WhatsApp
Facebook
Twitter
LinkedIn

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

जॉब - शिक्षा

हेल्थ & फिटनेस

विज्ञापन

राजनीति

लेटेस्ट टॉप अपडेट

ग्लोबल करेंसी अपडेट

Provided by IFC Markets

Live Cricket

सच्चाई की दहाड़

ब्रेकिंग खबरें सीधे अपने ईमेल पर पाने के लिए रजिस्टर करें।

You have been successfully Subscribed! Ops! Something went wrong, please try again.