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Manish & Jackie Shroffs Emotional Superhero Film Chat

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3 मिनट पहलेलेखक: आशीष तिवारी

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फिल्म ‘द ग्रेट ग्रैंड सुपरहीरो’ में जैकी श्रॉफ ऐसे देसी सुपरहीरो बने हैं, जो पृथ्वी को एलियन आक्रमण से बचाते हैं।

जैकी श्रॉफ और तीन बार नेशनल अवॉर्ड जीत चुके डायरेक्टर मनीष सैनी ने फिल्म ‘द ग्रेट ग्रैंड सुपरहीरो – एलियंस का आगमन’ को लेकर दैनिक भास्कर से खास बातचीत की। इस दौरान जैकी श्रॉफ ने बच्चों से अपने खास कनेक्शन, जिंदगी के उतार-चढ़ाव, भाई की मौत के ट्रॉमा और बिंदास जिंदगी जीने के मंत्र पर बात की।

वहीं मनीष सैनी ने बताया कि डार्क और VFX फिल्मों के दौर में उन्होंने ऐसा सुपरहीरो बनाने की कोशिश की है, जो लोगों को डराए नहीं, बल्कि मुस्कुराए और परिवार को साथ बैठकर फिल्म देखने का मौका दे।

जैकी श्रॉफ और डायरेक्टर मनीष सैनी ने फिल्म ‘द ग्रेट ग्रैंड सुपरहीरो – एलियंस का आगमन’ से जुड़े अपने अनुभव शेयर किए।

जैकी श्रॉफ और डायरेक्टर मनीष सैनी ने फिल्म ‘द ग्रेट ग्रैंड सुपरहीरो – एलियंस का आगमन’ से जुड़े अपने अनुभव शेयर किए।

सवाल: दादा, आपसे हर जनरेशन जुड़ जाती है। बच्चे भी और बड़े भी। इस कनेक्शन का राज क्या है?

जवाब/ जैकी श्रॉफ: मुझे खुद नहीं पता यार। बस दिल से जीने, प्यार बांटने और लोगों के साथ घुलने-मिलने का। मैं हमेशा यही सोचता हूं कि किसी को नीचे गिराकर बड़ा नहीं बनना चाहिए। बच्चों के साथ बच्चा बन जाओ, बड़ों के साथ दोस्त बन जाओ। जब आप किसी से दिल से मिलते हो, तो एक एनर्जी एक्सचेंज होती है।

हाथ मिलाओ, गले लगो, प्यार से बात करो, वही कनेक्शन बना देता है। ग्रैंडफादर और ग्रैंडचाइल्ड का रिश्ता भी ऐसा ही होता है।

सवाल: क्या आज जॉइंट फैमिली की कमी महसूस होती है?

जवाब/ जैकी श्रॉफ: आजकल परिवार छोटे हो गए हैं। पहले छोटे घर में भी 6-7 लोग साथ रहते थे, लेकिन प्यार बहुत होता था। हम लोग छोटे से घर में रहते थे, मगर मजा बहुत आता था। दादा-दादी के साथ रहने से बच्चे जिंदगी सीखते हैं। उनके अनुभव, बातें और प्यार जैसी चीजें आज कहीं ना कहीं कम हो गई हैं।

सवाल: आजकल लोगों में प्यार और रिस्पेक्ट कम होता जा रहा है?

जवाब/ जैकी श्रॉफ: मैं हमेशा अच्छाई देखने की कोशिश करता हूं। चांद को देखता हूं, उसके दाग नहीं। अगर इंसान हर वक्त सिर्फ कमी देखेगा, तो जिंदगी भारी हो जाएगी। कई बार मैं खुद की गलतियां देख लेता हूं, फिर दूसरों की बुराई करने का मन नहीं करता। हर इंसान में कुछ अच्छा जरूर होता है।

मनीष सैनी को गुजराती फिल्म ‘ढह’, चिल्ड्रन फीचर फिल्म ‘गांधी एंड कंपनी’ और शॉर्ट फिल्म ‘गिद्ध- द स्केवेंजर’ के लिए राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार (नेशनल अवॉर्ड) मिल चुका है।

मनीष सैनी को गुजराती फिल्म ‘ढह’, चिल्ड्रन फीचर फिल्म ‘गांधी एंड कंपनी’ और शॉर्ट फिल्म ‘गिद्ध- द स्केवेंजर’ के लिए राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार (नेशनल अवॉर्ड) मिल चुका है।

सवाल: मनीष जी, आपने जैकी दादा में कौन-सी सुपरपावर देखी?

जवाब/ मनीष सैनी: जैकी सर का पॉजिटिव ऑरा बहुत अलग है। वो फिटनेस, हेल्थ और एनवायरमेंट की जो बातें करते हैं, वैसे ही असल जिंदगी में भी हैं। मुझे लगा कि अगर वो यह किरदार निभाएंगे, तो लोग उस कहानी पर यकीन करेंगे। क्योंकि उनका व्यक्तित्व ऐसा है कि लोग उनसे तुरंत जुड़ जाते हैं।

सवाल: सेट पर जैकी दादा कैसे थे?

जवाब/ मनीष सैनी: सेट पर वो बिल्कुल बच्चों जैसे हो जाते थे। बच्चे उनके आसपास आराम से घूमते, चॉकलेट पर झगड़ते और बातें करते थे। कोई बच्चा उनसे डरता नहीं था। मैं देखता था कि बच्चे उनकी उंगली पकड़कर ले जा रहे हैं और वीडियो कॉल पर टाइगर से बात कर रहे हैं। तब लगा कि हमने सही इंसान को चुना है।

सवाल: उनकी सबसे बड़ी खासियत क्या लगी?

जवाब/ मनीष सैनी: इतने बड़े स्टार होने के बाद भी उनमें कोई स्टार वाला एटीट्यूड नहीं था। रात 1 बजे शूट खत्म हुआ, फिर भी खुद गाड़ी चलाकर फार्महाउस गए। मैंने पूछा, “सर, आप क्यों ड्राइव कर रहे हो?” तो बोले, “अब मजा आएगा, मैं ड्राइव करूंगा।” उनकी यही सिंप्लिसिटी सबसे बड़ी चीज है।

जैकी श्रॉफ का बेबाक अंदाज, विनम्र स्वभाव, और 'मस्त रहने' की लाइफ फिलोसोफी उन्हें सबसे अलग बनाती है।

जैकी श्रॉफ का बेबाक अंदाज, विनम्र स्वभाव, और ‘मस्त रहने’ की लाइफ फिलोसोफी उन्हें सबसे अलग बनाती है।

सवाल: दादा, इंडस्ट्री में इतने साल रहने के बाद भी आपकी मासूमियत कैसे बची रही?

जवाब/ जैकी श्रॉफ: जब मैं छोटा था, तभी मेरे बड़े भाई चले गए थे। उस उम्र में वो बड़ा झटका था। तभी समझ आ गया कि जिंदगी हमेशा के लिए नहीं है। उसके बाद मैंने सोचा कि जितना वक्त मिला है, उसे प्यार और खुशी से जीना चाहिए। पल को एंजॉय करो, लोगों के साथ रहो और जिंदगी को हल्का रखो।

सवाल: क्या यही सोच आपने अपने बच्चों को भी दी?

जवाब/ जैकी श्रॉफ: मैंने हमेशा कोशिश की कि बच्चे जमीन से जुड़े रहें। नाम और शोहरत बाद में है, पहले इंसान अच्छा होना जरूरी है। टाइगर और कृष्णा दोनों में वही सिंप्लिसिटी और डिसिप्लिन दिखता है, तो अच्छा लगता है। बस दुआ है कि वो हमेशा ऐसे ही रहें।

सवाल: मनीष जी, आज VFX और बड़े-बड़े सुपरहीरो का दौर है। आपने इतना इमोशनल सुपरहीरो कैसे बनाया?

जवाब/ मनीष सैनी: ये ऐसे इंसान की कहानी है जो बच्चों के बीच सुपरहीरो बनकर रहना चाहता है। वो चाहता है कि बच्चे उसे हमेशा खास समझें। लेकिन बच्चे सवाल पूछते हैं, पावर देखने की जिद करते हैं और वहीं से कहानी मजेदार और इमोशनल बन जाती है। मुझे लगा कि असली सुपरहीरो वही है जो प्यार दे सके।

सवाल: फिल्म का सबसे इमोशनल हिस्सा क्या है?

जवाब/ मनीष सैनी: फिल्म में एक डायलॉग है जहां जैकी सर कहते हैं, “मुझे शाबाशी बहुत अच्छी लगती है।” वो लाइन छोटी है, लेकिन बहुत गहरी है। सेट पर कई लोगों की आंखें भर गई थीं। क्योंकि हर इंसान चाहता है कि कोई उसकी तारीफ करे और उसे महसूस कराए कि वो जरूरी है।

फिल्म ‘द ग्रेट ग्रैंड सुपरहीरो - एलियंस का आगमन’ सिनेमाघरों में 29 मई, 2026 को रिलीज होगी।

फिल्म ‘द ग्रेट ग्रैंड सुपरहीरो – एलियंस का आगमन’ सिनेमाघरों में 29 मई, 2026 को रिलीज होगी।

सवाल: डार्क फिल्मों के दौर में ऐसी फिल्म बनाने की हिम्मत कहां से आई?

जवाब/ मनीष सैनी: कोविड के बाद बहुत नेगेटिविटी बढ़ गई थी। हर तरफ गुस्सा, अंधेरा और तनाव था। मुझे लगा कि ऐसी फिल्म बनानी चाहिए जो लोगों को मुस्कुराने का मौका दे। बच्चों और सीनियर सिटिजन को सुपरहीरो बनाना मुझे नया और दिल से जुड़ा लगा। यही इस फिल्म की सबसे बड़ी ताकत है।

सवाल: क्या आप ट्रेंड फॉलो नहीं करते?

जवाब/ मनीष सैनी: मैं कोशिश करता हूं कि ट्रेंड के पीछे ना भागूं। राइटर का काम सिर्फ वही बनाना नहीं है जो चल रहा हो, बल्कि कुछ नया सोचकर लोगों के सामने रखना है। फायदा हो या नुकसान, मैं हमेशा ऐसी कहानी बनाना चाहता हूं जिससे मुझे संतुष्टि मिले।

सवाल: दादा, आप अपने किरदार से कितना रिलेट करते हैं?

जवाब/ जैकी श्रॉफ: पूरी तरह रिलेट करता हूं। बच्चों के साथ खेलना, उनकी बातें सुनना और उनका मजाक खुशी से लेना… ये सब मैं असल जिंदगी में भी करता हूं। मैं खुद को खुला इंसान मानता हूं। बच्चा हो या बड़ा, किसी के साथ भी बैठकर बात कर सकता हूं। यही जिंदगी का मजा है।

सवाल: आपकी बातें अक्सर वायरल हो जाती हैं। इसका राज क्या है?

जवाब/ जैकी श्रॉफ: मैं बस दिल से बोलता हूं। मुंबई का हूं, खुला दिमाग है। मुझे लगता है कि इंसान आखिर इंसान है। कोई लेबर हो या स्टार, दर्द सबको बराबर लगता है। इसलिए मैं लोगों को ऊपर-नीचे करके नहीं देखता।

सवाल: अगर सुपरहीरो यूनिवर्स बने तो उसमें कौन-कौन होगा?

जवाब/ जैकी श्रॉफ: शाहरुख का रा.वन रहेगा, ऋतिक बाबा और टाइगर रहेंगे। डेनी डेंजोंगपा साहब भी जरूर होंगे।

सवाल: आपकी सबसे बड़ी सुपरपावर क्या है?

जवाब/ जैकी श्रॉफ: अगर बच्चे मेरी बात सुनते हैं और पेड़ लगाने लगते हैं, तो वही मेरी सुपरपावर है। मैं हमेशा लोगों से कहता हूं कि पेड़ लगाओ, प्रकृति बचाओ। बाकी सुपरपावर फिल्मों में होती है, असली ताकत वही है जो लोगों के काम आए।

सवाल: लाइफ में आपने काफी उतार-चढ़ाव देखे हैं और कई मुश्किलें भी आई हैं। वो कौन-कौन से ‘सुपर विलेन्स’ थे और उनसे आपने कैसे ओवरकम किया?

जवाब/ जैकी श्रॉफ: मैंने जिंदगी को हमेशा हल्के में लिया। जो आया उसे अपनाया, जो चला गया उसे जाने दिया। गलती हुई तो माफी मांग ली। अगर इंसान हर चीज दिल पर लेकर बैठेगा, तो जी नहीं पाएगा। बिंदास रहना जरूरी है।

जैकी अक्सर बेटे टाइगर को ज्यादा सुनने और कम बोलने की सलाह देते रहते हैं।

जैकी अक्सर बेटे टाइगर को ज्यादा सुनने और कम बोलने की सलाह देते रहते हैं।

सवाल: आपको कब लगा कि टाइगर में सुपरपावर है?

जवाब/ जैकी श्रॉफ: जब वो छोटा था, मैंने उसे स्केटबोर्ड दिया। वो गिरा, चोट लगी, लेकिन थोड़ी देर बाद फिर उठकर कोशिश करने लगा। शाम तक वो शानदार स्केटिंग कर रहा था। तब समझ गया था कि उसमें मेहनत और जुनून दोनों हैं।

सवाल: मनीष जी, दर्शकों को इस फिल्म में क्या मिलेगा?

जवाब/ मनीष सैनी: आज घरों में टीवी बड़े हो गए हैं, लेकिन लोग अलग-अलग कमरों में बैठकर देखते हैं। मुझे लगा कि ऐसी फिल्म बनानी चाहिए जिसे पूरा परिवार साथ बैठकर देख सके। ये फिल्म आपको हंसाएगी, मुस्कुराएगी और खूबसूरत यादें देकर जाएगी। यही इसकी सबसे बड़ी जीत होगी।

सवाल: दादा, आखिर में दर्शकों के लिए क्या कहना चाहेंगे?

जवाब/ जैकी श्रॉफ: इज्जत से जियो, बिंदास रहो, हेल्दी रहो और मजबूत बनो। शरीर को संभालकर रखो, क्योंकि यही असली मंदिर है। ग्रैंडफादर बनो, तब भी बच्चों के साथ खेलो, हंसो और जिंदगी को एंजॉय करो।

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3 मिनट पहलेलेखक: आशीष तिवारी

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जैकी श्रॉफ और तीन बार नेशनल अवॉर्ड जीत चुके डायरेक्टर मनीष सैनी ने फिल्म ‘द ग्रेट ग्रैंड सुपरहीरो – एलियंस का आगमन’ को लेकर दैनिक भास्कर से खास बातचीत की। इस दौरान जैकी श्रॉफ ने बच्चों से अपने खास कनेक्शन, जिंदगी के उतार-चढ़ाव, भाई की मौत के ट्रॉमा और बिंदास जिंदगी जीने के मंत्र पर बात की।

वहीं मनीष सैनी ने बताया कि डार्क और VFX फिल्मों के दौर में उन्होंने ऐसा सुपरहीरो बनाने की कोशिश की है, जो लोगों को डराए नहीं, बल्कि मुस्कुराए और परिवार को साथ बैठकर फिल्म देखने का मौका दे।

जैकी श्रॉफ और डायरेक्टर मनीष सैनी ने फिल्म ‘द ग्रेट ग्रैंड सुपरहीरो – एलियंस का आगमन’ से जुड़े अपने अनुभव शेयर किए।

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सवाल: दादा, आपसे हर जनरेशन जुड़ जाती है। बच्चे भी और बड़े भी। इस कनेक्शन का राज क्या है?

जवाब/ जैकी श्रॉफ: मुझे खुद नहीं पता यार। बस दिल से जीने, प्यार बांटने और लोगों के साथ घुलने-मिलने का। मैं हमेशा यही सोचता हूं कि किसी को नीचे गिराकर बड़ा नहीं बनना चाहिए। बच्चों के साथ बच्चा बन जाओ, बड़ों के साथ दोस्त बन जाओ। जब आप किसी से दिल से मिलते हो, तो एक एनर्जी एक्सचेंज होती है।

हाथ मिलाओ, गले लगो, प्यार से बात करो, वही कनेक्शन बना देता है। ग्रैंडफादर और ग्रैंडचाइल्ड का रिश्ता भी ऐसा ही होता है।

सवाल: क्या आज जॉइंट फैमिली की कमी महसूस होती है?

जवाब/ जैकी श्रॉफ: आजकल परिवार छोटे हो गए हैं। पहले छोटे घर में भी 6-7 लोग साथ रहते थे, लेकिन प्यार बहुत होता था। हम लोग छोटे से घर में रहते थे, मगर मजा बहुत आता था। दादा-दादी के साथ रहने से बच्चे जिंदगी सीखते हैं। उनके अनुभव, बातें और प्यार जैसी चीजें आज कहीं ना कहीं कम हो गई हैं।

सवाल: आजकल लोगों में प्यार और रिस्पेक्ट कम होता जा रहा है?

जवाब/ जैकी श्रॉफ: मैं हमेशा अच्छाई देखने की कोशिश करता हूं। चांद को देखता हूं, उसके दाग नहीं। अगर इंसान हर वक्त सिर्फ कमी देखेगा, तो जिंदगी भारी हो जाएगी। कई बार मैं खुद की गलतियां देख लेता हूं, फिर दूसरों की बुराई करने का मन नहीं करता। हर इंसान में कुछ अच्छा जरूर होता है।

मनीष सैनी को गुजराती फिल्म ‘ढह’, चिल्ड्रन फीचर फिल्म ‘गांधी एंड कंपनी’ और शॉर्ट फिल्म ‘गिद्ध- द स्केवेंजर’ के लिए राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार (नेशनल अवॉर्ड) मिल चुका है।

मनीष सैनी को गुजराती फिल्म ‘ढह’, चिल्ड्रन फीचर फिल्म ‘गांधी एंड कंपनी’ और शॉर्ट फिल्म ‘गिद्ध- द स्केवेंजर’ के लिए राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार (नेशनल अवॉर्ड) मिल चुका है।

सवाल: मनीष जी, आपने जैकी दादा में कौन-सी सुपरपावर देखी?

जवाब/ मनीष सैनी: जैकी सर का पॉजिटिव ऑरा बहुत अलग है। वो फिटनेस, हेल्थ और एनवायरमेंट की जो बातें करते हैं, वैसे ही असल जिंदगी में भी हैं। मुझे लगा कि अगर वो यह किरदार निभाएंगे, तो लोग उस कहानी पर यकीन करेंगे। क्योंकि उनका व्यक्तित्व ऐसा है कि लोग उनसे तुरंत जुड़ जाते हैं।

सवाल: सेट पर जैकी दादा कैसे थे?

जवाब/ मनीष सैनी: सेट पर वो बिल्कुल बच्चों जैसे हो जाते थे। बच्चे उनके आसपास आराम से घूमते, चॉकलेट पर झगड़ते और बातें करते थे। कोई बच्चा उनसे डरता नहीं था। मैं देखता था कि बच्चे उनकी उंगली पकड़कर ले जा रहे हैं और वीडियो कॉल पर टाइगर से बात कर रहे हैं। तब लगा कि हमने सही इंसान को चुना है।

सवाल: उनकी सबसे बड़ी खासियत क्या लगी?

जवाब/ मनीष सैनी: इतने बड़े स्टार होने के बाद भी उनमें कोई स्टार वाला एटीट्यूड नहीं था। रात 1 बजे शूट खत्म हुआ, फिर भी खुद गाड़ी चलाकर फार्महाउस गए। मैंने पूछा, “सर, आप क्यों ड्राइव कर रहे हो?” तो बोले, “अब मजा आएगा, मैं ड्राइव करूंगा।” उनकी यही सिंप्लिसिटी सबसे बड़ी चीज है।

जैकी श्रॉफ का बेबाक अंदाज, विनम्र स्वभाव, और 'मस्त रहने' की लाइफ फिलोसोफी उन्हें सबसे अलग बनाती है।

जैकी श्रॉफ का बेबाक अंदाज, विनम्र स्वभाव, और ‘मस्त रहने’ की लाइफ फिलोसोफी उन्हें सबसे अलग बनाती है।

सवाल: दादा, इंडस्ट्री में इतने साल रहने के बाद भी आपकी मासूमियत कैसे बची रही?

जवाब/ जैकी श्रॉफ: जब मैं छोटा था, तभी मेरे बड़े भाई चले गए थे। उस उम्र में वो बड़ा झटका था। तभी समझ आ गया कि जिंदगी हमेशा के लिए नहीं है। उसके बाद मैंने सोचा कि जितना वक्त मिला है, उसे प्यार और खुशी से जीना चाहिए। पल को एंजॉय करो, लोगों के साथ रहो और जिंदगी को हल्का रखो।

सवाल: क्या यही सोच आपने अपने बच्चों को भी दी?

जवाब/ जैकी श्रॉफ: मैंने हमेशा कोशिश की कि बच्चे जमीन से जुड़े रहें। नाम और शोहरत बाद में है, पहले इंसान अच्छा होना जरूरी है। टाइगर और कृष्णा दोनों में वही सिंप्लिसिटी और डिसिप्लिन दिखता है, तो अच्छा लगता है। बस दुआ है कि वो हमेशा ऐसे ही रहें।

सवाल: मनीष जी, आज VFX और बड़े-बड़े सुपरहीरो का दौर है। आपने इतना इमोशनल सुपरहीरो कैसे बनाया?

जवाब/ मनीष सैनी: ये ऐसे इंसान की कहानी है जो बच्चों के बीच सुपरहीरो बनकर रहना चाहता है। वो चाहता है कि बच्चे उसे हमेशा खास समझें। लेकिन बच्चे सवाल पूछते हैं, पावर देखने की जिद करते हैं और वहीं से कहानी मजेदार और इमोशनल बन जाती है। मुझे लगा कि असली सुपरहीरो वही है जो प्यार दे सके।

सवाल: फिल्म का सबसे इमोशनल हिस्सा क्या है?

जवाब/ मनीष सैनी: फिल्म में एक डायलॉग है जहां जैकी सर कहते हैं, “मुझे शाबाशी बहुत अच्छी लगती है।” वो लाइन छोटी है, लेकिन बहुत गहरी है। सेट पर कई लोगों की आंखें भर गई थीं। क्योंकि हर इंसान चाहता है कि कोई उसकी तारीफ करे और उसे महसूस कराए कि वो जरूरी है।

फिल्म ‘द ग्रेट ग्रैंड सुपरहीरो - एलियंस का आगमन’ सिनेमाघरों में 29 मई, 2026 को रिलीज होगी।

फिल्म ‘द ग्रेट ग्रैंड सुपरहीरो – एलियंस का आगमन’ सिनेमाघरों में 29 मई, 2026 को रिलीज होगी।

सवाल: डार्क फिल्मों के दौर में ऐसी फिल्म बनाने की हिम्मत कहां से आई?

जवाब/ मनीष सैनी: कोविड के बाद बहुत नेगेटिविटी बढ़ गई थी। हर तरफ गुस्सा, अंधेरा और तनाव था। मुझे लगा कि ऐसी फिल्म बनानी चाहिए जो लोगों को मुस्कुराने का मौका दे। बच्चों और सीनियर सिटिजन को सुपरहीरो बनाना मुझे नया और दिल से जुड़ा लगा। यही इस फिल्म की सबसे बड़ी ताकत है।

सवाल: क्या आप ट्रेंड फॉलो नहीं करते?

जवाब/ मनीष सैनी: मैं कोशिश करता हूं कि ट्रेंड के पीछे ना भागूं। राइटर का काम सिर्फ वही बनाना नहीं है जो चल रहा हो, बल्कि कुछ नया सोचकर लोगों के सामने रखना है। फायदा हो या नुकसान, मैं हमेशा ऐसी कहानी बनाना चाहता हूं जिससे मुझे संतुष्टि मिले।

सवाल: दादा, आप अपने किरदार से कितना रिलेट करते हैं?

जवाब/ जैकी श्रॉफ: पूरी तरह रिलेट करता हूं। बच्चों के साथ खेलना, उनकी बातें सुनना और उनका मजाक खुशी से लेना… ये सब मैं असल जिंदगी में भी करता हूं। मैं खुद को खुला इंसान मानता हूं। बच्चा हो या बड़ा, किसी के साथ भी बैठकर बात कर सकता हूं। यही जिंदगी का मजा है।

सवाल: आपकी बातें अक्सर वायरल हो जाती हैं। इसका राज क्या है?

जवाब/ जैकी श्रॉफ: मैं बस दिल से बोलता हूं। मुंबई का हूं, खुला दिमाग है। मुझे लगता है कि इंसान आखिर इंसान है। कोई लेबर हो या स्टार, दर्द सबको बराबर लगता है। इसलिए मैं लोगों को ऊपर-नीचे करके नहीं देखता।

सवाल: अगर सुपरहीरो यूनिवर्स बने तो उसमें कौन-कौन होगा?

जवाब/ जैकी श्रॉफ: शाहरुख का रा.वन रहेगा, ऋतिक बाबा और टाइगर रहेंगे। डेनी डेंजोंगपा साहब भी जरूर होंगे।

सवाल: आपकी सबसे बड़ी सुपरपावर क्या है?

जवाब/ जैकी श्रॉफ: अगर बच्चे मेरी बात सुनते हैं और पेड़ लगाने लगते हैं, तो वही मेरी सुपरपावर है। मैं हमेशा लोगों से कहता हूं कि पेड़ लगाओ, प्रकृति बचाओ। बाकी सुपरपावर फिल्मों में होती है, असली ताकत वही है जो लोगों के काम आए।

सवाल: लाइफ में आपने काफी उतार-चढ़ाव देखे हैं और कई मुश्किलें भी आई हैं। वो कौन-कौन से ‘सुपर विलेन्स’ थे और उनसे आपने कैसे ओवरकम किया?

जवाब/ जैकी श्रॉफ: मैंने जिंदगी को हमेशा हल्के में लिया। जो आया उसे अपनाया, जो चला गया उसे जाने दिया। गलती हुई तो माफी मांग ली। अगर इंसान हर चीज दिल पर लेकर बैठेगा, तो जी नहीं पाएगा। बिंदास रहना जरूरी है।

जैकी अक्सर बेटे टाइगर को ज्यादा सुनने और कम बोलने की सलाह देते रहते हैं।

जैकी अक्सर बेटे टाइगर को ज्यादा सुनने और कम बोलने की सलाह देते रहते हैं।

सवाल: आपको कब लगा कि टाइगर में सुपरपावर है?

जवाब/ जैकी श्रॉफ: जब वो छोटा था, मैंने उसे स्केटबोर्ड दिया। वो गिरा, चोट लगी, लेकिन थोड़ी देर बाद फिर उठकर कोशिश करने लगा। शाम तक वो शानदार स्केटिंग कर रहा था। तब समझ गया था कि उसमें मेहनत और जुनून दोनों हैं।

सवाल: मनीष जी, दर्शकों को इस फिल्म में क्या मिलेगा?

जवाब/ मनीष सैनी: आज घरों में टीवी बड़े हो गए हैं, लेकिन लोग अलग-अलग कमरों में बैठकर देखते हैं। मुझे लगा कि ऐसी फिल्म बनानी चाहिए जिसे पूरा परिवार साथ बैठकर देख सके। ये फिल्म आपको हंसाएगी, मुस्कुराएगी और खूबसूरत यादें देकर जाएगी। यही इसकी सबसे बड़ी जीत होगी।

सवाल: दादा, आखिर में दर्शकों के लिए क्या कहना चाहेंगे?

जवाब/ जैकी श्रॉफ: इज्जत से जियो, बिंदास रहो, हेल्दी रहो और मजबूत बनो। शरीर को संभालकर रखो, क्योंकि यही असली मंदिर है। ग्रैंडफादर बनो, तब भी बच्चों के साथ खेलो, हंसो और जिंदगी को एंजॉय करो।

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