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Trump Wants World Kneel; Dictatorship Pushing World Back: Israeli Historian

Trump Wants World Kneel; Dictatorship Pushing World Back: Israeli Historian

11 मिनट पहले

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चर्चित इतिहासकार युवाल नोआ हरारी ने न्यूयॉर्क टाइम्स को दिए एक इंटरव्यू में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प और इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू की आलोचना की है।

उन्होंने कहा कि इजराइल के इतिहास में नेतन्याहू से बड़ा इजराइली राष्ट्रवाद का दुश्मन कोई नहीं रहा। उन्होंने देश को अंदर से बांट दिया और लोगों को एक-दूसरे के खिलाफ खड़ा कर दिया है।

उन्होंने कहा कि ट्रम्प और उनके जैसे नेताओं की सोच यह है कि कमजोर हमेशा ताकतवर के सामने घुटने टेक दे, तभी शांति बनी रहेगी। यह अनैतिक और मूर्खतापूर्ण है क्योंकि इससे हर देश अपनी ऊर्जा सिर्फ हथियारों पर खर्च करेगा।

हरारी ने कहा कि दुनिया ट्रम्पवाद और दक्षिणपंथी राजनीति कि ओर तेजी से बढ़ रही है। इसकी राजनीति करने वालों का मानना है कि दुनिया एक दूसरी की मदद करने से नहीं बल्कि ताकत और दबदबे से चलती है। लेकिन यह सोच इंसानी सभ्यता और दुनिया को पीछे धकेल रही है।

युवाल नोआ हरारी इजराइल के इतिहासकार, सैन्य मामलों के जानकार, विचारक और विज्ञान लेखक हैं। वे यरुशलम की हिब्रू यूनिवर्सिटी में इतिहास के प्रोफेसर भी हैं।

युवाल नोआ हरारी इजराइल के इतिहासकार, सैन्य मामलों के जानकार, विचारक और विज्ञान लेखक हैं। वे यरुशलम की हिब्रू यूनिवर्सिटी में इतिहास के प्रोफेसर भी हैं।

हरारी बोले- सहयोग से ही दुनिया की तरक्की हुई

युवाल नोआ हरारी ने कहा कि उनकी सबसे चर्चित किताबें, जैसे सेपियंस और होमोडेयस को ध्यान से देखें तो एक बड़े विचार के इर्द-गिर्द घूमती हैं। सहयोग यानी कोऑपरेशन।

हरारी ने कहा कि इंसानों की असली ताकत यही है कि वे बड़े पैमाने पर और लंबे समय तक मिलकर काम कर सकते हैं। यही वह चीज है जिसने इंसानों को कमजोर जीव से दुनिया की सबसे प्रभावशाली प्रजाति बना दिया। अकेला इंसान न तो शेर से लड़ सकता है और न भालू से, लेकिन करोड़ों लोग मिलकर समाज, देश, कानून, बाजार और तकनीक बना सकते हैं।

युवाल नोआ हरारी की मशहूर किताबें- सेपियंस और होमोडेयस।

युवाल नोआ हरारी की मशहूर किताबें- सेपियंस और होमोडेयस।

हरारी बोले- ताकत ही सबकुछ होता तो हम आज भी शिकारी होते

हरारी का मानना है कि अगर केवल ताकत ही सब कुछ होती, तो इंसान आज भी छोटे-छोटे शिकारी समूहों में जी रहे होते। मानव इतिहास की सबसे बड़ी उपलब्धि यह नहीं कि इंसान लड़ सकता है, बल्कि यह है कि इंसान बड़ी संख्या में एक-दूसरे पर भरोसा कर सकता है।

हरारी के मुताबिक सिर्फ डर या हिंसा के दम पर बड़ी सभ्यताएं नहीं चल सकतीं। किसी भी बड़े समाज को चलाने के लिए साझा विश्वास और सहयोग जरूरी होता है।

लेकिन ट्रम्पवाद और राष्ट्रवादी सोच इस मामले में अलग राय रखती है। उनका मानना है कि देशों के बीच सहयोग तभी मजबूत हो सकता है, जब लोगों के पास अपनी मजबूत राष्ट्रीय, धार्मिक और सांस्कृतिक पहचान हो।

उनके मुताबिक किसी देश को मजबूत बनाने के लिए लोगों का एक जैसी सोच और पहचान से जुड़ा होना जरूरी है। कई बार इसके लिए सख्त सत्ता और मजबूत नेतृत्व की भी जरूरत पड़ती है।

हरारी के मुताबिक राष्ट्रपति ट्रम्प सहयोग में विश्वास नहीं रखते, वे सिर्फ सैन्य ताकत से कमजोर देशों पर दबादबा बनाना चाहते है।

हरारी के मुताबिक राष्ट्रपति ट्रम्प सहयोग में विश्वास नहीं रखते, वे सिर्फ सैन्य ताकत से कमजोर देशों पर दबादबा बनाना चाहते है।

हरारी बोले- राष्ट्रवाद को नफरत से बचाना जरूरी है

हरारी का कहना है कि राष्ट्रवाद मानव इतिहास की सबसे सफल और सकारात्मक कहानियों में से एक रहा है। उनके मुताबिक राष्ट्रवाद का असली मतलब दूसरे लोगों से नफरत करना नहीं, बल्कि उन लाखों अनजान लोगों के लिए अपनापन महसूस करना है जिन्हें आप व्यक्तिगत रूप से नहीं जानते, फिर भी उनके लिए त्याग करने को तैयार रहते हैं।

वे कहते हैं कि राष्ट्र कोई परिवार नहीं होता और न ही छोटा कबीला। छोटे कबीलों में लोग एक-दूसरे को व्यक्तिगत रूप से जानते हैं। लेकिन राष्ट्र अलग चीज है। भारत, चीन या इजराइल जैसे देशों में करोड़ों लोग रहते हैं और कोई भी व्यक्ति उनमें से ज्यादातर लोगों को नहीं जानता।

फिर भी राष्ट्रवाद लोगों को इस हद तक जोड़ देता है कि वे टैक्स देते हैं ताकि दूसरे नागरिकों को अच्छी शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाएं मिल सकें। जरूरत पड़ने पर लोग देश के लिए अपनी जान तक जोखिम में डाल देते हैं।

हरारी मानते हैं कि कई बार राष्ट्रवाद नफरत की तरफ भी मुड़ जाता है, लेकिन यह उसकी मूल पहचान नहीं है। उनके अनुसार राष्ट्रवाद बिना बाहरी लोगों से नफरत किए भी मौजूद रह सकता है, लेकिन अपने लोगों के लिए अपनापन और प्रेम के बिना नहीं।

हरारी कहते हैं कि आज जो लोग खुद को राष्ट्रवाद का सबसे बड़ा समर्थक बताते हैं, उनमें से कई राष्ट्र के भीतर ही नफरत फैला रहे हैं। वे बाहरी दुश्मनों से ज्यादा अपने ही समाज को बांट रहे हैं।

इजराइल का उदाहरण देते हुए हरारी कहते हैं कि देश के इतिहास में शायद ही किसी नेता ने समाज को उतना बांटा हो जितना बेंजामिन नेतन्याहू ने।

युवाल हरारी ने नेतन्याहू पर आरोप लगाया है कि उन्होंने इजराइल को अंदर से बांट दिया है। उनके मुताबिक, यह इजराइल के लिए बाहरी दुश्मनों से ज्यादा खतरनाक है।

युवाल हरारी ने नेतन्याहू पर आरोप लगाया है कि उन्होंने इजराइल को अंदर से बांट दिया है। उनके मुताबिक, यह इजराइल के लिए बाहरी दुश्मनों से ज्यादा खतरनाक है।

दुनिया ताकत के नियम पर चले तो बर्बाद हो जाएगी

हरारी ने ट्रम्पवादी सोच की आलोचना करते हुए कहा कि यह दुनिया को ताकत और दबदबे के नजरिए से देखती है। इस सोच के मुताबिक दुनिया में शांति तभी हो सकती है जब कमजोर देश मजबूत देशों की मांग मान लें।

वे उदाहरण देते हैं कि अगर अमेरिका, ग्रीनलैंड मांगता है, तो डेनमार्क को अमेरिकी ताकत से डरकर उसे सौंप देना चाहिए। अगर डेनमार्क इनकार करे और संघर्ष हो जाए, तो इस सोच के मुताबिक गलती डेनमार्क की मानी जाएगी, क्योंकि उसने ताकतवर देश की बात नहीं मानी।

हरारी कहते हैं कि यह सोच गंभीर समस्या पैदा करती है। अगर दुनिया केवल ताकत के नियम पर चलेगी, तो हर देश खुद को ज्यादा मजबूत बनाने की दौड़ में लग जाएगा। फिर सभी देशों को अपनी अर्थव्यवस्था और संसाधनों का बड़ा हिस्सा सेना और हथियारों पर खर्च करना पड़ेगा।

हरारी ने AI को सबसे बड़ा खतरा बताया

इसी बीच हरारी ने AI को आने वाले समय में सबसे बड़ा खतरा बताया है। उन्होंने कहा कि परमाणु बम सिर्फ एक हथियार है, लेकिन AI खुद फैसले लेने की क्षमता रखता है।

उन्होंने चेतावनी दी कि AI इंसानों की तरह प्यार और भावनाएं दिखाना सीख रहा है, जबकि वह असली भावनाओं को समझता नहीं। आने वाले समय में बच्चे इंसानों से ज्यादा AI साथियों के साथ वक्त बिता सकते हैं, जिससे असली रिश्ते कमजोर पड़ सकते हैं।

उन्होंने चेतावनी दी कि अगर AI को कंपनियों जैसी कानूनी ताकत मिल गई, तो इंसान उसका कंट्रोल खो सकता है।

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आसिफ ने कहा ‘हम उन लोगों के साथ कैसे बैठ सकते हैं जिनकी बात पर एक दिन के लिए भी भरोसा नहीं किया जा सकता। पाकिस्तान दुनिया का शायद इकलौता देश है, जिसके पासपोर्ट पर लिखा होता है कि यह इजराइल के लिए मान्य नहीं है। इससे पाकिस्तान का रुख पूरी तरह साफ है और इसमें कोई बदलाव नहीं होगा।’ पूरी खबर पढ़ें…

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उन्होंने कहा कि इजराइल के इतिहास में नेतन्याहू से बड़ा इजराइली राष्ट्रवाद का दुश्मन कोई नहीं रहा। उन्होंने देश को अंदर से बांट दिया और लोगों को एक-दूसरे के खिलाफ खड़ा कर दिया है।

उन्होंने कहा कि ट्रम्प और उनके जैसे नेताओं की सोच यह है कि कमजोर हमेशा ताकतवर के सामने घुटने टेक दे, तभी शांति बनी रहेगी। यह अनैतिक और मूर्खतापूर्ण है क्योंकि इससे हर देश अपनी ऊर्जा सिर्फ हथियारों पर खर्च करेगा।

हरारी ने कहा कि दुनिया ट्रम्पवाद और दक्षिणपंथी राजनीति कि ओर तेजी से बढ़ रही है। इसकी राजनीति करने वालों का मानना है कि दुनिया एक दूसरी की मदद करने से नहीं बल्कि ताकत और दबदबे से चलती है। लेकिन यह सोच इंसानी सभ्यता और दुनिया को पीछे धकेल रही है।

युवाल नोआ हरारी इजराइल के इतिहासकार, सैन्य मामलों के जानकार, विचारक और विज्ञान लेखक हैं। वे यरुशलम की हिब्रू यूनिवर्सिटी में इतिहास के प्रोफेसर भी हैं।

युवाल नोआ हरारी इजराइल के इतिहासकार, सैन्य मामलों के जानकार, विचारक और विज्ञान लेखक हैं। वे यरुशलम की हिब्रू यूनिवर्सिटी में इतिहास के प्रोफेसर भी हैं।

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युवाल नोआ हरारी ने कहा कि उनकी सबसे चर्चित किताबें, जैसे सेपियंस और होमोडेयस को ध्यान से देखें तो एक बड़े विचार के इर्द-गिर्द घूमती हैं। सहयोग यानी कोऑपरेशन।

हरारी ने कहा कि इंसानों की असली ताकत यही है कि वे बड़े पैमाने पर और लंबे समय तक मिलकर काम कर सकते हैं। यही वह चीज है जिसने इंसानों को कमजोर जीव से दुनिया की सबसे प्रभावशाली प्रजाति बना दिया। अकेला इंसान न तो शेर से लड़ सकता है और न भालू से, लेकिन करोड़ों लोग मिलकर समाज, देश, कानून, बाजार और तकनीक बना सकते हैं।

युवाल नोआ हरारी की मशहूर किताबें- सेपियंस और होमोडेयस।

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हरारी का मानना है कि अगर केवल ताकत ही सब कुछ होती, तो इंसान आज भी छोटे-छोटे शिकारी समूहों में जी रहे होते। मानव इतिहास की सबसे बड़ी उपलब्धि यह नहीं कि इंसान लड़ सकता है, बल्कि यह है कि इंसान बड़ी संख्या में एक-दूसरे पर भरोसा कर सकता है।

हरारी के मुताबिक सिर्फ डर या हिंसा के दम पर बड़ी सभ्यताएं नहीं चल सकतीं। किसी भी बड़े समाज को चलाने के लिए साझा विश्वास और सहयोग जरूरी होता है।

लेकिन ट्रम्पवाद और राष्ट्रवादी सोच इस मामले में अलग राय रखती है। उनका मानना है कि देशों के बीच सहयोग तभी मजबूत हो सकता है, जब लोगों के पास अपनी मजबूत राष्ट्रीय, धार्मिक और सांस्कृतिक पहचान हो।

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हरारी का कहना है कि राष्ट्रवाद मानव इतिहास की सबसे सफल और सकारात्मक कहानियों में से एक रहा है। उनके मुताबिक राष्ट्रवाद का असली मतलब दूसरे लोगों से नफरत करना नहीं, बल्कि उन लाखों अनजान लोगों के लिए अपनापन महसूस करना है जिन्हें आप व्यक्तिगत रूप से नहीं जानते, फिर भी उनके लिए त्याग करने को तैयार रहते हैं।

वे कहते हैं कि राष्ट्र कोई परिवार नहीं होता और न ही छोटा कबीला। छोटे कबीलों में लोग एक-दूसरे को व्यक्तिगत रूप से जानते हैं। लेकिन राष्ट्र अलग चीज है। भारत, चीन या इजराइल जैसे देशों में करोड़ों लोग रहते हैं और कोई भी व्यक्ति उनमें से ज्यादातर लोगों को नहीं जानता।

फिर भी राष्ट्रवाद लोगों को इस हद तक जोड़ देता है कि वे टैक्स देते हैं ताकि दूसरे नागरिकों को अच्छी शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाएं मिल सकें। जरूरत पड़ने पर लोग देश के लिए अपनी जान तक जोखिम में डाल देते हैं।

हरारी मानते हैं कि कई बार राष्ट्रवाद नफरत की तरफ भी मुड़ जाता है, लेकिन यह उसकी मूल पहचान नहीं है। उनके अनुसार राष्ट्रवाद बिना बाहरी लोगों से नफरत किए भी मौजूद रह सकता है, लेकिन अपने लोगों के लिए अपनापन और प्रेम के बिना नहीं।

हरारी कहते हैं कि आज जो लोग खुद को राष्ट्रवाद का सबसे बड़ा समर्थक बताते हैं, उनमें से कई राष्ट्र के भीतर ही नफरत फैला रहे हैं। वे बाहरी दुश्मनों से ज्यादा अपने ही समाज को बांट रहे हैं।

इजराइल का उदाहरण देते हुए हरारी कहते हैं कि देश के इतिहास में शायद ही किसी नेता ने समाज को उतना बांटा हो जितना बेंजामिन नेतन्याहू ने।

युवाल हरारी ने नेतन्याहू पर आरोप लगाया है कि उन्होंने इजराइल को अंदर से बांट दिया है। उनके मुताबिक, यह इजराइल के लिए बाहरी दुश्मनों से ज्यादा खतरनाक है।

युवाल हरारी ने नेतन्याहू पर आरोप लगाया है कि उन्होंने इजराइल को अंदर से बांट दिया है। उनके मुताबिक, यह इजराइल के लिए बाहरी दुश्मनों से ज्यादा खतरनाक है।

दुनिया ताकत के नियम पर चले तो बर्बाद हो जाएगी

हरारी ने ट्रम्पवादी सोच की आलोचना करते हुए कहा कि यह दुनिया को ताकत और दबदबे के नजरिए से देखती है। इस सोच के मुताबिक दुनिया में शांति तभी हो सकती है जब कमजोर देश मजबूत देशों की मांग मान लें।

वे उदाहरण देते हैं कि अगर अमेरिका, ग्रीनलैंड मांगता है, तो डेनमार्क को अमेरिकी ताकत से डरकर उसे सौंप देना चाहिए। अगर डेनमार्क इनकार करे और संघर्ष हो जाए, तो इस सोच के मुताबिक गलती डेनमार्क की मानी जाएगी, क्योंकि उसने ताकतवर देश की बात नहीं मानी।

हरारी कहते हैं कि यह सोच गंभीर समस्या पैदा करती है। अगर दुनिया केवल ताकत के नियम पर चलेगी, तो हर देश खुद को ज्यादा मजबूत बनाने की दौड़ में लग जाएगा। फिर सभी देशों को अपनी अर्थव्यवस्था और संसाधनों का बड़ा हिस्सा सेना और हथियारों पर खर्च करना पड़ेगा।

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उन्होंने चेतावनी दी कि AI इंसानों की तरह प्यार और भावनाएं दिखाना सीख रहा है, जबकि वह असली भावनाओं को समझता नहीं। आने वाले समय में बच्चे इंसानों से ज्यादा AI साथियों के साथ वक्त बिता सकते हैं, जिससे असली रिश्ते कमजोर पड़ सकते हैं।

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आसिफ ने कहा ‘हम उन लोगों के साथ कैसे बैठ सकते हैं जिनकी बात पर एक दिन के लिए भी भरोसा नहीं किया जा सकता। पाकिस्तान दुनिया का शायद इकलौता देश है, जिसके पासपोर्ट पर लिखा होता है कि यह इजराइल के लिए मान्य नहीं है। इससे पाकिस्तान का रुख पूरी तरह साफ है और इसमें कोई बदलाव नहीं होगा।’ पूरी खबर पढ़ें…

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