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IPL जितनी भाषाएं दुनिया की किसी लीग में नहीं- जियो-हॉटस्टार:अंपायर अनिल बोले- सूर्यवंशी बेस्ट प्लेयर; सरनदीप ने कहा- पंजाब क्रिकेटर्स का गढ़

IPL जितनी भाषाएं दुनिया की किसी लीग में नहीं- जियो-हॉटस्टार:अंपायर अनिल बोले- सूर्यवंशी बेस्ट प्लेयर; सरनदीप ने कहा- पंजाब क्रिकेटर्स का गढ़

क्रिकेट ब्रॉडकास्टर जियो हॉटस्टार ने दावा किया है कि दुनिया की किसी लीग में IPL जितनी इतनी भाषाएं नहीं हैं। दैनिक भास्कर मुंबई स्थित जियो-हॉटस्टार ऑफिस पहुंचा। यहां हेड कंटेंट सिद्धार्थ शर्मा, पूर्व अंपायर अनिल चौधरी, पूर्व क्रिकेटर और सिलेक्टर सरनदीप सिंह से बातचीत हुई। सिद्धार्थ ने बताया कि IPL अब 12 भाषाओं में देखा जा रहा है और भोजपुरी-हरियाणवी जैसी फीड्स तेजी से बढ़ रही हैं। वहीं पूर्व भारतीय अंपायर अनिल चौधरी ने युवा बल्लेबाज वैभव सूर्यवंशी को मौजूदा दौर का सबसे बेहतरीन टी-20 बैटर बताया। दूसरी तरफ पूर्व क्रिकेटर और चयनकर्ता सरनदीप सिंह ने कहा कि पंजाब आज भी भारतीय क्रिकेट का सबसे बड़ा गढ़ है, जहां से लगातार बड़े खिलाड़ी निकल रहे हैं। नीचे सवाल-जवाब में पूरा इंटरव्यू पढ़ें… सवाल: IPL में 12 भाषाओं में कमेंट्री शुरू करने का आइडिया कैसे आया? सिद्धार्थ ने बताया कि लंबे समय तक भारत में क्रिकेट सिर्फ अंग्रेजी में दिखाया जाता था। 2013 में स्टार स्पोर्ट्स के पास बड़े क्रिकेट राइट्स आने के बाद हिंदी फीड की शुरुआत हुई।उन्होंने कहा- मकसद था कि ज्यादा से ज्यादा लोग अपनी भाषा में क्रिकेट देख सकें और उससे जुड़ाव महसूस करें। 2017 में तमिल, तेलुगु और कन्नड़ फीड शुरू की गईं। इसके बाद डिजिटल प्लेटफॉर्म के विस्तार के साथ भोजपुरी, पंजाबी, हरियाणवी समेत कई नई भाषाएं जोड़ी गईं और अब IPL 12 भाषाओं में उपलब्ध है। सवाल: भोजपुरी कमेंट्री की शुरुआत में सबसे बड़ी चुनौती क्या थी? सिद्धार्थ के मुताबिक, सबसे बड़ी चुनौती सही कमेंटेटर ढूंढना थी। उन्होंने कहा कि हर भाषा में पूर्व क्रिकेटर उपलब्ध नहीं होते, इसलिए ऐसे लोगों को तलाशा गया जो क्रिकेट समझते हों और साथ ही अच्छे स्टोरीटेलर भी हों। उन्होंने बताया कि भोजपुरी कमेंट्री के लिए कई ऑडिशन लिए गए। 10-12 लोगों का पूल तैयार किया गया, फिर वर्कशॉप और ट्रेनिंग के बाद कुछ आवाजों को चुना गया। कमेंटेटर्स को यह भी सिखाया गया कि रोहित शर्मा की बैटिंग या विराट कोहली के कवर ड्राइव को किस अंदाज में पेश करना है। इसके लिए अलग ट्रेनिंग मॉड्यूल और फ्रेमवर्क बनाए गए। सवाल: भोजपुरी कमेंट्री इतनी वायरल क्यों हुई? सिद्धार्थ ने कहा कि भोजपुरी कमेंट्री की ताकत उसका देसी अंदाज और कहानी सुनाने की कला है। उन्होंने कहा कि भोजपुरी फीड में तकनीकी विश्लेषण से ज्यादा मनोरंजन, लोकल बोली, मुहावरे और भावनात्मक जुड़ाव पर फोकस किया गया। उनके मुताबिक, भोजपुरी कमेंटेटर क्रिकेट को ऐसे पेश करते हैं कि जो दर्शक खेल की बारीकियां नहीं भी समझते, वे भी उससे जुड़ जाते हैं। यही वजह है कि भोजपुरी कमेंट्री ने अपनी अलग पहचान बना ली। सवाल: IPL कमेंट्री में पूर्व खिलाड़ियों को इतनी अहमियत क्यों दी जाती है? सिद्धार्थ ने कहा कि कोशिश रहती है कि ऐसे लोगों को कमेंट्री में लाया जाए जो IPL इकोसिस्टम का हिस्सा रहे हों। सवाल: भारतीय ब्रॉडकास्ट की तुलना विदेशी लीग्स से कैसे होती है? सिद्धार्थ ने दावा किया कि IPL ब्रॉडकास्ट दुनिया की बड़ी स्पोर्ट्स लीग्स से आगे है। उन्होंने कहा कि कवरेज की चौड़ाई, भाषाओं की संख्या और दर्शकों तक पहुंच के मामले में IPL का मॉडल अनोखा है। सवाल: पंजाबी कमेंट्री का फ्लेवर बाकी भाषाओं से अलग कैसे है? पूर्व क्रिकेटर और कमेंटेटर सरनदीप सिंह ने कहा कि पंजाबी भाषा खुद में बहुत भावनात्मक और मजेदार है। उन्होंने बताया कि हिंदी और अंग्रेजी कमेंट्री में शब्द सीमित और औपचारिक होते हैं, जबकि पंजाबी में खुलकर बात होती है। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि पंजाबी में ऐसे लोकल शब्द और जुमले इस्तेमाल होते हैं जो गांवों और कस्बों की भाषा से आते हैं। सवाल: पंजाबी कमेंट्री में सबसे यादगार IPL पल कौन सा रहा? सरनदीप ने पंजाब किंग्स के बड़े रन चेज और आक्रामक खेल को सबसे यादगार बताया। उन्होंने कोलकाता में 262 रन चेज करने और मुंबई इंडियंस के खिलाफ अर्शदीप सिंह के प्रदर्शन का जिक्र किया। सवाल: पंजाब से इतने क्रिकेटर क्यों निकलते हैं? सरनदीप ने कहा कि पंजाब में खेलों की संस्कृति बहुत पुरानी है। उन्होंने युवराज सिंह, हरभजन सिंह, कपिल देव, नवजोत सिंह सिद्धू जैसे खिलाड़ियों का उदाहरण देते हुए कहा कि क्रिकेट वहां की संस्कृति का हिस्सा है। उन्होंने बताया कि पंजाब के अलग-अलग इलाकों- मालवा, दोआबा और माझा की अपनी अलग बोली और फ्लेवर है, जो खिलाड़ियों और कमेंट्री दोनों में दिखाई देता है। सवाल: आधुनिक क्रिकेट में फिटनेस कितनी जरूरी हो गई है? IPL में सबसे ज्यादा मैचों में अंपायरिंग करने वाले अनिल चौधरी ने कहा कि आज के क्रिकेट में फिटनेस सबसे बड़ी जरूरत बन चुकी है। उनके मुताबिक, अगर खिलाड़ी या अंपायर फिट नहीं है तो वह खेल की स्पीड के साथ तालमेल नहीं बैठा सकता। सवाल: अभी के समय का बेस्ट टी-20 बैटर कौन है? अनिल ने बताया कि अभी जितने यंगस्टर्स वो शानदार खेल दिखा रहे हैं। आयुष म्हात्रे, यश राज पुंजा, देवदत्त पडीक्कल सभी बेहतरीन फॉर्म में रहे, लेकिन उनका पसंदीदा प्लेयर वैभव सूर्यवंशी है। वैभव की हिटिंग एबिलिटी को अनिल ने शानदार बताया।

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क्रिकेट ब्रॉडकास्टर जियो हॉटस्टार ने दावा किया है कि दुनिया की किसी लीग में IPL जितनी इतनी भाषाएं नहीं हैं। दैनिक भास्कर मुंबई स्थित जियो-हॉटस्टार ऑफिस पहुंचा। यहां हेड कंटेंट सिद्धार्थ शर्मा, पूर्व अंपायर अनिल चौधरी, पूर्व क्रिकेटर और सिलेक्टर सरनदीप सिंह से बातचीत हुई। सिद्धार्थ ने बताया कि IPL अब 12 भाषाओं में देखा जा रहा है और भोजपुरी-हरियाणवी जैसी फीड्स तेजी से बढ़ रही हैं। वहीं पूर्व भारतीय अंपायर अनिल चौधरी ने युवा बल्लेबाज वैभव सूर्यवंशी को मौजूदा दौर का सबसे बेहतरीन टी-20 बैटर बताया। दूसरी तरफ पूर्व क्रिकेटर और चयनकर्ता सरनदीप सिंह ने कहा कि पंजाब आज भी भारतीय क्रिकेट का सबसे बड़ा गढ़ है, जहां से लगातार बड़े खिलाड़ी निकल रहे हैं। नीचे सवाल-जवाब में पूरा इंटरव्यू पढ़ें… सवाल: IPL में 12 भाषाओं में कमेंट्री शुरू करने का आइडिया कैसे आया? सिद्धार्थ ने बताया कि लंबे समय तक भारत में क्रिकेट सिर्फ अंग्रेजी में दिखाया जाता था। 2013 में स्टार स्पोर्ट्स के पास बड़े क्रिकेट राइट्स आने के बाद हिंदी फीड की शुरुआत हुई।उन्होंने कहा- मकसद था कि ज्यादा से ज्यादा लोग अपनी भाषा में क्रिकेट देख सकें और उससे जुड़ाव महसूस करें। 2017 में तमिल, तेलुगु और कन्नड़ फीड शुरू की गईं। इसके बाद डिजिटल प्लेटफॉर्म के विस्तार के साथ भोजपुरी, पंजाबी, हरियाणवी समेत कई नई भाषाएं जोड़ी गईं और अब IPL 12 भाषाओं में उपलब्ध है। सवाल: भोजपुरी कमेंट्री की शुरुआत में सबसे बड़ी चुनौती क्या थी? सिद्धार्थ के मुताबिक, सबसे बड़ी चुनौती सही कमेंटेटर ढूंढना थी। उन्होंने कहा कि हर भाषा में पूर्व क्रिकेटर उपलब्ध नहीं होते, इसलिए ऐसे लोगों को तलाशा गया जो क्रिकेट समझते हों और साथ ही अच्छे स्टोरीटेलर भी हों। उन्होंने बताया कि भोजपुरी कमेंट्री के लिए कई ऑडिशन लिए गए। 10-12 लोगों का पूल तैयार किया गया, फिर वर्कशॉप और ट्रेनिंग के बाद कुछ आवाजों को चुना गया। कमेंटेटर्स को यह भी सिखाया गया कि रोहित शर्मा की बैटिंग या विराट कोहली के कवर ड्राइव को किस अंदाज में पेश करना है। इसके लिए अलग ट्रेनिंग मॉड्यूल और फ्रेमवर्क बनाए गए। सवाल: भोजपुरी कमेंट्री इतनी वायरल क्यों हुई? सिद्धार्थ ने कहा कि भोजपुरी कमेंट्री की ताकत उसका देसी अंदाज और कहानी सुनाने की कला है। उन्होंने कहा कि भोजपुरी फीड में तकनीकी विश्लेषण से ज्यादा मनोरंजन, लोकल बोली, मुहावरे और भावनात्मक जुड़ाव पर फोकस किया गया। उनके मुताबिक, भोजपुरी कमेंटेटर क्रिकेट को ऐसे पेश करते हैं कि जो दर्शक खेल की बारीकियां नहीं भी समझते, वे भी उससे जुड़ जाते हैं। यही वजह है कि भोजपुरी कमेंट्री ने अपनी अलग पहचान बना ली। सवाल: IPL कमेंट्री में पूर्व खिलाड़ियों को इतनी अहमियत क्यों दी जाती है? सिद्धार्थ ने कहा कि कोशिश रहती है कि ऐसे लोगों को कमेंट्री में लाया जाए जो IPL इकोसिस्टम का हिस्सा रहे हों। सवाल: भारतीय ब्रॉडकास्ट की तुलना विदेशी लीग्स से कैसे होती है? सिद्धार्थ ने दावा किया कि IPL ब्रॉडकास्ट दुनिया की बड़ी स्पोर्ट्स लीग्स से आगे है। उन्होंने कहा कि कवरेज की चौड़ाई, भाषाओं की संख्या और दर्शकों तक पहुंच के मामले में IPL का मॉडल अनोखा है। सवाल: पंजाबी कमेंट्री का फ्लेवर बाकी भाषाओं से अलग कैसे है? पूर्व क्रिकेटर और कमेंटेटर सरनदीप सिंह ने कहा कि पंजाबी भाषा खुद में बहुत भावनात्मक और मजेदार है। उन्होंने बताया कि हिंदी और अंग्रेजी कमेंट्री में शब्द सीमित और औपचारिक होते हैं, जबकि पंजाबी में खुलकर बात होती है। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि पंजाबी में ऐसे लोकल शब्द और जुमले इस्तेमाल होते हैं जो गांवों और कस्बों की भाषा से आते हैं। सवाल: पंजाबी कमेंट्री में सबसे यादगार IPL पल कौन सा रहा? सरनदीप ने पंजाब किंग्स के बड़े रन चेज और आक्रामक खेल को सबसे यादगार बताया। उन्होंने कोलकाता में 262 रन चेज करने और मुंबई इंडियंस के खिलाफ अर्शदीप सिंह के प्रदर्शन का जिक्र किया। सवाल: पंजाब से इतने क्रिकेटर क्यों निकलते हैं? सरनदीप ने कहा कि पंजाब में खेलों की संस्कृति बहुत पुरानी है। उन्होंने युवराज सिंह, हरभजन सिंह, कपिल देव, नवजोत सिंह सिद्धू जैसे खिलाड़ियों का उदाहरण देते हुए कहा कि क्रिकेट वहां की संस्कृति का हिस्सा है। उन्होंने बताया कि पंजाब के अलग-अलग इलाकों- मालवा, दोआबा और माझा की अपनी अलग बोली और फ्लेवर है, जो खिलाड़ियों और कमेंट्री दोनों में दिखाई देता है। सवाल: आधुनिक क्रिकेट में फिटनेस कितनी जरूरी हो गई है? IPL में सबसे ज्यादा मैचों में अंपायरिंग करने वाले अनिल चौधरी ने कहा कि आज के क्रिकेट में फिटनेस सबसे बड़ी जरूरत बन चुकी है। उनके मुताबिक, अगर खिलाड़ी या अंपायर फिट नहीं है तो वह खेल की स्पीड के साथ तालमेल नहीं बैठा सकता। सवाल: अभी के समय का बेस्ट टी-20 बैटर कौन है? अनिल ने बताया कि अभी जितने यंगस्टर्स वो शानदार खेल दिखा रहे हैं। आयुष म्हात्रे, यश राज पुंजा, देवदत्त पडीक्कल सभी बेहतरीन फॉर्म में रहे, लेकिन उनका पसंदीदा प्लेयर वैभव सूर्यवंशी है। वैभव की हिटिंग एबिलिटी को अनिल ने शानदार बताया।

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