Friday, 05 Jun 2026 | 12:50 PM

Trending :

Shubman has scored 455 runs more than the entire Afghan team; Siraj has taken more than 10 times as many wickets alone. ‘हम एक नया राजनीतिक आंदोलन शुरू करने जा रहे हैं’: बीजेपी से बाहर होने के बाद अन्नामलाई का बड़ा ऐलान | भारत समाचार वर्ल्ड बैंक में भारत के एग्जीक्यूटिव-डायरेक्टर बने इकोनॉमिस्ट नीलकंठ मिश्रा:उनका कार्यकाल 3 साल का होगा, परमेश्वरन अय्यर की जगह लेंगे ट्रम्प बोले- भारत ने दशकों तक अमेरिका का फायदा उठाया:अब हम टैरिफ से खूब कमा रहे, फिर भी डील करेंगे क्योंकि मुझे मोदी पसंद लॉर्ड्स टेस्ट के पहले दिन 16 विकेट गिरे:इंग्लैंड पहली पारी में 140 पर ऑलआउट; न्यूजीलैंड 61/6; रॉबिन्सन को 4 विकेट लॉर्ड्स टेस्ट के पहले दिन 16 विकेट गिरे:इंग्लैंड पहली पारी में 140 पर ऑलआउट; न्यूजीलैंड 61/6; रॉबिन्सन को 4 विकेट
EXCLUSIVE

मूवी रिव्यू – ‘है जवानी तो इश्क होना है’:वरुण धवन की कॉमिक टाइमिंग संभालती फिल्म, कमजोर कहानी और लंबाई बनी बड़ी चुनौती

मूवी रिव्यू – ‘है जवानी तो इश्क होना है’:वरुण धवन की कॉमिक टाइमिंग संभालती फिल्म, कमजोर कहानी और लंबाई बनी बड़ी चुनौती

डेविड धवन की फिल्मों को देखने जाते वक्त दर्शक लॉजिक नहीं, हंसी ढूंढते हैं। गलतफहमियां, रिश्तों का गड़बड़झाला, भागदौड़ और ढेर सारी अफरा तफरी उनकी फिल्मों की पहचान रही है। है जवानी तो इश्क होना है भी उसी स्कूल की फिल्म है। यहां कहानी से ज्यादा जोर उन हालातों पर है जो धीरे धीरे इतने बेतुके हो जाते हैं कि दर्शक या तो हंसता है या फिर सिर पकड़कर बैठ जाता है। फिल्म में मनोरंजन के कुछ अच्छे पल जरूर हैं, लेकिन उन्हें पाने के लिए काफी लंबा इंतजार करना पड़ता है। फिल्म की कहानी जस एक खुशमिजाज लेकिन बेहद जोशीला इंसान है। उसकी पत्नी बानी उससे प्यार तो करती है, लेकिन उसकी जरूरतों और सोच के साथ तालमेल नहीं बैठा पाती। जस पिता बनना चाहता है, जबकि बानी उसकी इस जल्दबाजी और लगातार बढ़ते दबाव से परेशान हो चुकी है। बात इतनी बिगड़ जाती है कि वह जस से तलाक लेने का फैसला कर लेती है। टूटे हुए रिश्ते से बाहर निकलने की कोशिश में जस की जिंदगी में प्रीत की एंट्री होती है। दोनों करीब आते हैं और जस को लगता है कि जिंदगी फिर पटरी पर लौट रही है। लेकिन डेविड धवन की फिल्म में चीजें इतनी आसान कहां होती हैं। असली गड़बड़ तब शुरू होती है जब बानी और प्रीत दोनों गर्भवती हो जाती हैं और दोनों बच्चों का पिता जस निकलता है। इसके बाद फिल्म पूरी तरह गलतफहमियों, झूठ, छिपाने और एक के बाद एक पैदा होती हास्यास्पद परिस्थितियों के भरोसे आगे बढ़ती है। कहानी में दम से ज्यादा कन्फ्यूजन है और यही इसका सबसे बड़ा मनोरंजन भी है और सबसे बड़ी कमजोरी भी।
फिल्म में एक्टिंग वरुण धवन इस फिल्म की सबसे बड़ी ताकत हैं। उन्हें देखकर कई बार उनके पुराने कॉमिक अवतार की याद आती है। भागते, छिपते, झूठ बोलते और फिर उसी झूठ में बुरी तरह फंसते किरदार को उन्होंने पूरी ऊर्जा के साथ निभाया है। जब भी फिल्म की रफ्तार धीमी पड़ती है, वरुण अपनी मौजूदगी से उसे संभालने की कोशिश करते हैं। मृणाल ठाकुर के हिस्से ज्यादा कुछ नहीं आता, लेकिन वह अपने किरदार को गरिमा के साथ निभाती हैं। बानी के रूप में वह कई बार कहानी की सबसे समझदार इंसान लगती हैं। पूजा हेगड़े का किरदार कहानी में बड़ा मोड़ लेकर आता है। वह स्क्रीन पर आकर्षक लगती हैं और वरुण के साथ उनकी केमिस्ट्री भी ठीक बैठती है। हालांकि पटकथा उन्हें सिर्फ कहानी की उलझन बढ़ाने तक सीमित कर देती है। मनीष पॉल जहां भी नजर आते हैं, मुस्कुराने की वजह दे जाते हैं। अफसोस बस इतना है कि उन्हें ज्यादा स्क्रीन टाइम नहीं मिला। जिमी शेरगिल अपने गंभीर अंदाज में प्रभाव छोड़ते हैं और मौनी रॉय का छोटा सा रोल कुछ अच्छे कॉमिक पल पैदा करता है। फिल्म का डायरेक्शन और टेक्निकल पहलू डेविड धवन अपने पुराने रंग में नजर आते हैं। उन्हें पता है कि दर्शक यहां गंभीर सिनेमा देखने नहीं आए हैं। इसलिए वह शुरुआत से ही फिल्म को पूरी तरह मनोरंजन के मोड में रखते हैं। समस्या यह है कि फिल्म का पहला हिस्सा बेहद धीमा है। कई मजाक असर नहीं छोड़ते और कई दृश्य ऐसे लगते हैं जैसे उन्हें सिर्फ समय बढ़ाने के लिए रखा गया हो। इंटरवल के बाद कहानी थोड़ी रफ्तार पकड़ती है और कुछ स्थितियां सचमुच हंसाने में सफल रहती हैं। फरहाद सामजी के संवादों में कुछ वन लाइनर अच्छे हैं और कई जगह थिएटर में हंसी भी निकलती है। लेकिन टॉयलेट ह्यूमर, शरीर का मजाक उड़ाने वाले चुटकुले और कुछ पुराने जमाने के हास्य दृश्य आज के दौर में बासी महसूस होते हैं। तकनीकी तौर पर फिल्म रंगीन और भव्य दिखती है। लंदन की लोकेशन, चमकदार फ्रेम और बड़े सेट स्क्रीन पर अच्छे लगते हैं। लेकिन संपादन काफी ढीला है। ढाई घंटे से ज्यादा लंबी यह फिल्म कई जगह अपनी ही रफ्तार की दुश्मन बन जाती है। फिल्म में म्यूजिक म्यूजिक फिल्म की कमजोर कड़ियों में से एक है। कोई नया गाना ऐसा नहीं जो लंबे समय तक याद रहे। चुनरी चुनरी सबसे ज्यादा असर छोड़ता है, लेकिन उसकी वजह नया म्यूजिक नहीं बल्कि पुरानी यादें हैं। बैकग्राउंड स्कोर फिल्म की ऊर्जा बनाए रखने की कोशिश करता है, लेकिन चमत्कार नहीं कर पाता।
फिल्म को लेकर फाइनल वर्डिक्ट
है जवानी तो इश्क होना है एक ऐसी फिल्म है जो आपसे ज्यादा सोचने की उम्मीद नहीं करती। यह पूरी तरह अफरा तफरी, गलतफहमियों और वरुण धवन की कॉमिक टाइमिंग पर टिकी हुई है। पहला हिस्सा कमजोर है, फिल्म जरूरत से ज्यादा लंबी है और कई मजाक पुराने लगते हैं। लेकिन दूसरे हिस्से में कुछ अच्छे कॉमिक पल और वरुण की ऊर्जा फिल्म को पूरी तरह बिखरने नहीं देती। अगर आप डेविड धवन स्टाइल की हल्की फुल्की कॉमेडी के फैन हैं तो फिल्म आपको कुछ जगह हंसा सकती है। लेकिन अगर आप मजबूत कहानी या नई सोच की उम्मीद लेकर जाएंगे, तो शायद निराश लौटें।

WhatsApp
Facebook
Twitter
LinkedIn

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

लेटेस्ट टॉप अपडेट

सच्चाई की दहाड़

ब्रेकिंग खबरें सीधे अपने ईमेल पर पाने के लिए रजिस्टर करें।

You have been successfully Subscribed! Ops! Something went wrong, please try again.

ग्लोबल करेंसी अपडेट

Provided by IFC Markets
कच्चे आम की चटनी: घर पर कच्चे कच्चे आम की खट्टी-मीठी चटनी, ही सब कहेंगे मूल्यवान; नोट करें सबसे आसान तरीका

April 7, 2026/
2:20 pm

7 अप्रैल 2026 को 14:20 IST पर अपडेट किया गया कच्चे आम की चटनी रेसिपी: कच्चे आम की चटनी बनाना...

डिंडौरी वार्ड-1 निवासियों ने मुख्य मार्ग किया जाम:स्थानीय समस्याओं पर कलेक्टर को बुलाने की मांग; पुलिस-प्रशासन मौके पर तैनात

April 21, 2026/
11:10 am

डिंडोरी में मंगलवार सुबह करीब 9 बजे वार्ड क्रमांक एक सुबखार के निवासियों ने जबलपुर-अमरकंटक मुख्य मार्ग पर जाम लगा...

वैभव सूर्यवंशी के फैन हुए अमिताभ बच्चन:बोले- इस उम्र में हम गुल्ली-डंडा भी नहीं खेल पाते थे; वैभव झारखंड स्वास्थ्य विभाग के ब्रांड एंबेसडर बनेंगे

May 30, 2026/
10:51 am

IPL 2026 से वैभव सूर्यवंशी की टीम राजस्थान रॉयल्स बाहर हो चुकी है। गुजरात टाइटंस ने क्वालिफायर-2 मुकाबले में राजस्थान...

सरसों का तेल बनाम जैतून का तेल, जानिए खाना पकाने के लिए सबसे अच्छा क्या है और तेल के हृदय स्वास्थ्य लाभ क्या हैं

March 13, 2026/
7:22 pm

सरसों का तेल बनाम जैतून का तेल | छवि: एआई हृदय स्वास्थ्य के लिए सर्वोत्तम खाना पकाने का तेल: इस...

रेमो डिसूजा पत्नी के साथ नलखेड़ा पहुंचे:फिल्म डायरेक्टर ने किए मां बगलामुखी के किए दर्शन; यज्ञशाला में सपत्नीक हवन किया

May 23, 2026/
7:17 pm

मशहूर कोरियोग्राफर और फिल्म निर्देशक रेमो डिसूजा शनिवार को अपनी पत्नी लिजेल डिसूजा के साथ आगर मालवा जिले के प्रसिद्ध...

सिंधिया को हराने वाले केपी यादव बनाए गए कार्पोरेशन अध्यक्ष:MP में लगातार तीसरे दिन निगम-मंडलों में नियुक्तियां, संजय नगायच को वेयर हाउसिंग की जिम्मेदारी

April 25, 2026/
11:10 pm

मध्य प्रदेश में सरकार लगातार अलग-अलग आयोगों, बोर्ड, निगम मंडलों में नियुक्तियां कर रही है। शनिवार को लगातार तीसरे दिन...

राजनीति

मूवी रिव्यू – ‘है जवानी तो इश्क होना है’:वरुण धवन की कॉमिक टाइमिंग संभालती फिल्म, कमजोर कहानी और लंबाई बनी बड़ी चुनौती

मूवी रिव्यू – ‘है जवानी तो इश्क होना है’:वरुण धवन की कॉमिक टाइमिंग संभालती फिल्म, कमजोर कहानी और लंबाई बनी बड़ी चुनौती

डेविड धवन की फिल्मों को देखने जाते वक्त दर्शक लॉजिक नहीं, हंसी ढूंढते हैं। गलतफहमियां, रिश्तों का गड़बड़झाला, भागदौड़ और ढेर सारी अफरा तफरी उनकी फिल्मों की पहचान रही है। है जवानी तो इश्क होना है भी उसी स्कूल की फिल्म है। यहां कहानी से ज्यादा जोर उन हालातों पर है जो धीरे धीरे इतने बेतुके हो जाते हैं कि दर्शक या तो हंसता है या फिर सिर पकड़कर बैठ जाता है। फिल्म में मनोरंजन के कुछ अच्छे पल जरूर हैं, लेकिन उन्हें पाने के लिए काफी लंबा इंतजार करना पड़ता है। फिल्म की कहानी जस एक खुशमिजाज लेकिन बेहद जोशीला इंसान है। उसकी पत्नी बानी उससे प्यार तो करती है, लेकिन उसकी जरूरतों और सोच के साथ तालमेल नहीं बैठा पाती। जस पिता बनना चाहता है, जबकि बानी उसकी इस जल्दबाजी और लगातार बढ़ते दबाव से परेशान हो चुकी है। बात इतनी बिगड़ जाती है कि वह जस से तलाक लेने का फैसला कर लेती है। टूटे हुए रिश्ते से बाहर निकलने की कोशिश में जस की जिंदगी में प्रीत की एंट्री होती है। दोनों करीब आते हैं और जस को लगता है कि जिंदगी फिर पटरी पर लौट रही है। लेकिन डेविड धवन की फिल्म में चीजें इतनी आसान कहां होती हैं। असली गड़बड़ तब शुरू होती है जब बानी और प्रीत दोनों गर्भवती हो जाती हैं और दोनों बच्चों का पिता जस निकलता है। इसके बाद फिल्म पूरी तरह गलतफहमियों, झूठ, छिपाने और एक के बाद एक पैदा होती हास्यास्पद परिस्थितियों के भरोसे आगे बढ़ती है। कहानी में दम से ज्यादा कन्फ्यूजन है और यही इसका सबसे बड़ा मनोरंजन भी है और सबसे बड़ी कमजोरी भी।
फिल्म में एक्टिंग वरुण धवन इस फिल्म की सबसे बड़ी ताकत हैं। उन्हें देखकर कई बार उनके पुराने कॉमिक अवतार की याद आती है। भागते, छिपते, झूठ बोलते और फिर उसी झूठ में बुरी तरह फंसते किरदार को उन्होंने पूरी ऊर्जा के साथ निभाया है। जब भी फिल्म की रफ्तार धीमी पड़ती है, वरुण अपनी मौजूदगी से उसे संभालने की कोशिश करते हैं। मृणाल ठाकुर के हिस्से ज्यादा कुछ नहीं आता, लेकिन वह अपने किरदार को गरिमा के साथ निभाती हैं। बानी के रूप में वह कई बार कहानी की सबसे समझदार इंसान लगती हैं। पूजा हेगड़े का किरदार कहानी में बड़ा मोड़ लेकर आता है। वह स्क्रीन पर आकर्षक लगती हैं और वरुण के साथ उनकी केमिस्ट्री भी ठीक बैठती है। हालांकि पटकथा उन्हें सिर्फ कहानी की उलझन बढ़ाने तक सीमित कर देती है। मनीष पॉल जहां भी नजर आते हैं, मुस्कुराने की वजह दे जाते हैं। अफसोस बस इतना है कि उन्हें ज्यादा स्क्रीन टाइम नहीं मिला। जिमी शेरगिल अपने गंभीर अंदाज में प्रभाव छोड़ते हैं और मौनी रॉय का छोटा सा रोल कुछ अच्छे कॉमिक पल पैदा करता है। फिल्म का डायरेक्शन और टेक्निकल पहलू डेविड धवन अपने पुराने रंग में नजर आते हैं। उन्हें पता है कि दर्शक यहां गंभीर सिनेमा देखने नहीं आए हैं। इसलिए वह शुरुआत से ही फिल्म को पूरी तरह मनोरंजन के मोड में रखते हैं। समस्या यह है कि फिल्म का पहला हिस्सा बेहद धीमा है। कई मजाक असर नहीं छोड़ते और कई दृश्य ऐसे लगते हैं जैसे उन्हें सिर्फ समय बढ़ाने के लिए रखा गया हो। इंटरवल के बाद कहानी थोड़ी रफ्तार पकड़ती है और कुछ स्थितियां सचमुच हंसाने में सफल रहती हैं। फरहाद सामजी के संवादों में कुछ वन लाइनर अच्छे हैं और कई जगह थिएटर में हंसी भी निकलती है। लेकिन टॉयलेट ह्यूमर, शरीर का मजाक उड़ाने वाले चुटकुले और कुछ पुराने जमाने के हास्य दृश्य आज के दौर में बासी महसूस होते हैं। तकनीकी तौर पर फिल्म रंगीन और भव्य दिखती है। लंदन की लोकेशन, चमकदार फ्रेम और बड़े सेट स्क्रीन पर अच्छे लगते हैं। लेकिन संपादन काफी ढीला है। ढाई घंटे से ज्यादा लंबी यह फिल्म कई जगह अपनी ही रफ्तार की दुश्मन बन जाती है। फिल्म में म्यूजिक म्यूजिक फिल्म की कमजोर कड़ियों में से एक है। कोई नया गाना ऐसा नहीं जो लंबे समय तक याद रहे। चुनरी चुनरी सबसे ज्यादा असर छोड़ता है, लेकिन उसकी वजह नया म्यूजिक नहीं बल्कि पुरानी यादें हैं। बैकग्राउंड स्कोर फिल्म की ऊर्जा बनाए रखने की कोशिश करता है, लेकिन चमत्कार नहीं कर पाता।
फिल्म को लेकर फाइनल वर्डिक्ट
है जवानी तो इश्क होना है एक ऐसी फिल्म है जो आपसे ज्यादा सोचने की उम्मीद नहीं करती। यह पूरी तरह अफरा तफरी, गलतफहमियों और वरुण धवन की कॉमिक टाइमिंग पर टिकी हुई है। पहला हिस्सा कमजोर है, फिल्म जरूरत से ज्यादा लंबी है और कई मजाक पुराने लगते हैं। लेकिन दूसरे हिस्से में कुछ अच्छे कॉमिक पल और वरुण की ऊर्जा फिल्म को पूरी तरह बिखरने नहीं देती। अगर आप डेविड धवन स्टाइल की हल्की फुल्की कॉमेडी के फैन हैं तो फिल्म आपको कुछ जगह हंसा सकती है। लेकिन अगर आप मजबूत कहानी या नई सोच की उम्मीद लेकर जाएंगे, तो शायद निराश लौटें।

WhatsApp
Facebook
Twitter
LinkedIn

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

हेल्थ & फिटनेस

विज्ञापन

राजनीति

लेटेस्ट टॉप अपडेट

ग्लोबल करेंसी अपडेट

Provided by IFC Markets

Live Cricket

सच्चाई की दहाड़

ब्रेकिंग खबरें सीधे अपने ईमेल पर पाने के लिए रजिस्टर करें।

You have been successfully Subscribed! Ops! Something went wrong, please try again.